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आचार्य चाणक्य — मौर्य साम्राज्य के निर्माता
चौथी शताब्दी ईसा-पूर्व — एक दुबला-पतला ब्राह्मण बालक तक्षशिला विश्वविद्यालय की सीढ़ियाँ चढ़ रहा है। उसके मन में एक दृष्टि — एक अखंड भारत। चाणक्य — जिनका नाम विष्णुगुप्त भी था, और कौटिल्य भी। मगध दरबार में एक भयानक अपमान, धनानंद से एक प्रतिज्ञा, और एक अनजान बालक चन्द्रगुप्त की पहचान। तक्षशिला के पाठों से लेकर पाटलिपुत्र के सिंहासन तक की लंबी यात्रा। सिकंदर का आक्रमण, सेलुकस से संधि, मौर्य साम्राज्य की स्थापना, और अर्थशास्त्र — एक ऐसा ग्रंथ जो आज भी राजनीति का मूल पाठ है। यह कथा है एक आचार्य की — जिन्होंने तलवार नहीं, अपनी बुद्धि से एक साम्राज्य खड़ा किया। 30 अध्यायों में, सरल हिंदी में, मूल इतिहास की पूरी मर्यादा के साथ।
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