वो थोड़ी जल्दबाजी में ही लिफ्ट के अंदर घुसी और नीचे जाने का बटन दबाया। लिफ्ट में पहले से ही मौजूद पड़ोस वाली दादी ने कहां। " अरे अवंतिका, लगता है आज थोड़ी लेट हो गई हो।" " जी दादी, ऑफिस का प्रोजेक्ट पूरा करते-करते कब रात के 2:00 बज गए पता ही नहीं चला, इसलिए देर से उठी.." उनका फ्लैट १० वी मंजिल पर होने की वजह से लिफ्ट का ही उपयोग किया करती थी। लिफ्ट शुरू हो गई और नीचे की ओर जाने लगी, पर आम दिनों की तुलना में आज लिफ्ट से कुछ ज्यादा ही आवाज आ रही थी। " दादी, जाते वक्त वॉचमैन को बताती हूं लिफ्ट रिपेयर करने वाले को बुलाकर ठीक करें। कुछ ज्यादा ही आवाज आ रही हैं।" लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर पर पहुंची। दोनों ही चलते हुए सामने कुर्सी पर बैठे वॉचमैन के पास पहुंची। अवंतिका को देखते ही वॉचमैन उठ कर खड़ा हो गया और बोला। " देखिए मॅडम, अपने पानी की टंकी के बारे में शिकायत की थी। पानी की टंकी साफ करवा ली है. आपने इलेक्ट्रीसिटी की शिकायत की हमने करवा ली," " अरे, ये तो तुम लोगों की ड्यूटी है। और वैसे भी पिछले हफ्ते में दो बार मैंने लिफ्ट के बारे में शिकायत की है, और अब तो आवाज काफी तेज हो गई है, आज के आज लिफ्ट मेंटनेंस वालों को बुलाओ। " अवंतिका की बातें सुनकर वॉचमैन ने हाथ जोड़कर कहा। "मॅडम जी, मैंने दो दिन पहले यहां ड्यूटी जॉइन की है। फिर भी मैं देखता हूं। " " अच्छे से काम करो वरना मैनेजमेंट से बोलकर किसी भुतिया जगह ड्यूटी लगवाऊंगी।" चुपचाप हैरान होकर खड़ा रहा। दादी और अवंतिका गेट से बाहर चली गई। अवंतिका अपना ऑफिस का काम करने में मशगूल थी। पूरा दिन ऑफिस का काम कर के अवंतिका काफी थक चुकी थी। रात के करीब 10 बजते बजते उसका काम खत्म हो गया । वह अपने ऑफिस से बाहर निकल कर सड़क पर आ गई। सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही काफी कम हो चुकी थी । सड़क पर ना कोई ऑटो खड़ा दिखाई दे रहा था ना कोई बस आती नजर आ रही थी। आधा घंटा बीत गया होगा कि तभी उसे सामने से एक बस आती नजर आई। और बस का सफर शुरू हो गया। कल रात को नींद पूरी ना होने के कारण उसे बस की सीट पर बैठे बैठे नींद आने लगी। कुछ ही देर में बस उसकी अपार्टमेंट के पास पहुंची। व नीचे उतरी और गेट से अंदर चली गई। वॉचमैन की कुर्सी की तरफ देखा पर हर रोज की तरह कुर्सी खाली नजर आई। " अब गया होगा शराब पीने। इसकी शिकायत करनी ही पड़ेगी।" अपने आप से बुदबुदाते हुए वो लिफ्ट के पास पहुंची। लिफ्ट के अंदर जाते हुए वो दरवाजा करने ही वाली थी के तभी झट से वॉचमैन लिफ्ट के अंदर आया। उसकी इस हरकत से अवंतिका एक पल के लिए सहम गई और एकदम से पीछे हट गई पर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया। वॉचमैन ने लिफ्ट का दरवाजा बंद कर लिया और थोड़ा गुस्सैल नजर से अवंतिका की और देखने लगा। उसकी हरकत देख अवंतिका बोली। " ये क्या बदतमीजी है ?" " जी नहीं, आप ने सुबह कहा था लिफ्ट ठीक करने को, ठीक करवा ली है। देख लिजिए। वरना मेरी शिकायत करने आप उपर तक जायेंगी।" " तुम तो ऐसे बोल रहे हो की ये काम कर के मुझपर अहसान कर रहे हो ? बिल्डिंग मैनेजमेंट ने ये जिम्मेदारी तुम्हें दी है।" " जी नही। मेरा काम निगरानी करना है, फिर भी लोगों को परेशानी ना हो इसलिए अपनी जिम्मेदारी समझ कर काम करवा लिया है। बताईये काम ठीक हुआ है क्या ? कोई आवाज तो नहीं आ रही है ना ? " लिफ्ट के अंदर एक जानलेवा सन्नाटा फैल गया था। वॉचमैन की इस हरकत से उसे गुस्सा तो काफी आ गया था पर दिल ही दिल में वह बुरी तरह डर चुकी थी। उसका यह डर लाजमी था क्योंकि रात के 11:00 बज चुके थे और वहां पर उन दोनों के अलावा कोई नहीं इसलिए उसका यह डर भी लाजमी था । " क्या हुआ मैडम ? आप चुप क्यों हो गई ? बोलिए लिफ्ट की वह आवाज आ रही है क्या ?" लिफ्ट एक एक माला उपर जा रही थी और अवंतिका की नजरें उसी पर टिकी हुई थी। अवंतिका की और कुछ गुस्से से देखते हुए वॉचमैन लिफ्ट के भीतर एकदम से उछला जिसकी वजह से लिफ्ट एकदम से हिचकोले खाने लगी। वॉचमैन की इस हरकत से वो डरी सहमी लिफ्ट के एक कोने में चिपककर खड़ी होकर कांपती हुई आवाज में बोली। " ये.... ये क्या मजाक लगा रखा है। अगर लिफ्ट टूट गई तो..?" " ऐसे कैसे टुट जायेगी। और टूट गई तो रिपेयर करवा लूंगा। " इतना कहकर दोबारा वो कुदने लगा। " यह देखो.... यह देखो..... नहीं टूटी ना..? देखा नहीं टूट रही लिफ्ट.." जैसे तैसे १० वी मंजिल तक पहुंची। लिफ्ट रूकते ही अवंतिका ने झट से दरवाजा खोला और खाली वॉर्ड में तेज कदमों से चलने लगी। लिफ्ट के अंदर खड़ा वॉचमैन उसी को देख रहा था। तेज कदमों से अवंतिका अपने कमरे तक पहुंची और चाबी निकालकर दरवाजा खोलने लगी। पर चाबी लग नहीं रही थी। उसने तीरछी नजर से बांई ओर उस लिफ्ट की तरफ देखा तो लिफ्ट के खुले दरवाजे से वॉचमैन अभी भी अवंतिका को ही घूरे जा रहा था। अवंतिका ने झट से अपनी नजरें हटाई और दरवाजा खोलकर कमरे के भीतर चली गई । दरवाजा बंद कर के दरवाजे के पास ही खड़ी रही। पर लिफ्ट का दरवाजा बंद होने की या लिफ्ट नीचे जाने की आवाज नहीं आई। डर और गुस्से से आग-बबूला हुई अवंतिका अपने आप से बुदबुदाई। " इसकी नौकरी खत्म समझो। मुझे डराने की कोशिश कर रहा है। तु कल इस अपार्टमेंट से बाहर होगा।" इतना कहकर वो फ्रेश होने के लिए चली गई। शॉवर का ठंडा पानी शरीर पर गिरते ही उसकी सारी थकावट दूर होने लगी। बदन से टॉवेल लपेट कर वो बाथरूम से बाहर आ गई और उसे कुछ याद आ गया। वो अपनी खिड़की के पास गई और धीरे से नीचे झांककर देखा वॉचमैन अपनी केबिन के पास खड़ा अवंतिका के फ्लैट की तरफ ही देख रहा था। वो झट से पीछे हट गई। " बहुत हो गया। अब तुम्हारी नौकरी कोई नहीं बचा सकता।" इतना कहकर उसने अपनी खिड़की का पर्दा बंद कर लिया। ****** सुबह हो चुकी थी। अपने बेड से उठकर वो खिड़की के पास गई और धीरे से पर्दा हटाकर देखा पर नीचे लोगों की आवाजाही शुरू थी पर वॉचमैन नहीं था। उसने पर्दा पुरी तरह से हटा दिया और अपने बाल उपर बांधकर ऑफिस के लिए तैयार होने गई। फ्लैट का दरवाज लॉक कर वो लिफ्ट के पास पहुंच गई। उसने बटन दबाया के तभी दादी ने आवाज दी। " अरे अवंतिका ! आज सीढ़ियों का इस्तेमाल करना होगा। लिफ्ट बंद पड चुकी है।" दादी सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आ गई वह काफी थक चुकी थी। दादी की हालत देखकर अवंतिका गुस्से से आगबबूला हो गई और मन ही मन में बोली। " कल रात बड़ा उछल कूद करके बोल रहा था कि लिफ्ट ठीक की है। लिफ्ट ठीक की है। क्या खाक ठीक की है।" अवंतिका की तरफ देखकर दादी बोली। " क्या हुआ ? क्या सोच रही हो ?" " दादी, मॅनेजमेंट को भी ऐसे ही निकम्मे लोग पसन्द है। पर अब बहुत हो गया। मैनेजमेंट के पास उसकी शिकायत करनी ही पड़ेगी। " इतना कहकर वो सीढ़ियों की तरफ जाने लगी के दोबारा दादी ने उसे रोका। " अवंतिका। चलो मेरे साथ।" दादी हाथ पकड़कर उसे अपने कमरे में लेकर आई। " दादी, आज मैं आपकी कोई बात नहीं सुनने वाली। उस कामचोर चौकिदार को सबक सिखाकर ही दम लुंगी। " " ठीक है। मत सुसना। " इतना कहकर दादी ने उसके हाथ में न्युज पेपर दे दिया और उसमें छपी एक खबर की तरफ इशारा किया। अवंतिका ने खबर देखी और हैरान हो गई। ' गायत्री अपार्टमेंट में लिफ्ट टुटने से चौकिदार और एक कर्मचारी दोनों की मौत।' " दादी ये खबर तो हमारी अपार्टमेंट की है।" " हां। कल दोपहर लिफ्ट की मरम्मत का काम शुरू था , उसी समय यह हादसा हो गया।" " कल दोपहर....?" हैरान परेशान अवंतिका सोच में पड़ गई ' ये कैसे हो सकता है। हादसा कल दोपहर को हुआ है। और मैं तो कल रात लिफ्ट से ही आई हूं। और लिफ्ट में उस वॉचमैन ने मेरे साथ बदतमीजी भी की थी। तो ये कैसे हो सकता है। ' दादी उसके हैरान चेहरे की तरफ देखकर बोली। " अब होनी को कौन टाल सकता है। " पर बीना कुछ बोले वो घर से निकली और सीढ़ियां उतरकर नीचे की ओर जाने लगी। पर वह एक ख्याल उसके दिमाग को कुरेद रहा था। ' क्या वह मेरा वहम था ? पर कल रात तो मैं लिफ्ट से ही उपर गई थी। मतलब चौकीदार की आत्मा उस लिफ्ट के अंदर है ? क्या वो मुझे चेतावनी देने आया था ?' सोच सोचकर उसका दिमाग फट रहा था। तभी उसे एंबुलेंस का सायरन सुनाई दीया। दिमाग में उठने वाले सवाल और लगातार कानों पर पड़ने वाली सायरन की आवाज ने उसका सिर चकरा रहा था। वो सीढ़ियां उतरकर ग्राउंड फ्लोर पर आ गई तभी उसे एंबुलेंस गेट से बाहर जाती नजर आई। उसे कुछ भी होश नहीं था।के तभी उसके कानों पर एक आवाज पड़ । उसने आवाज की ओर देखा तो लिफ्ट के मेंटेनेंस का काम चल रहा था। वहां पर एक पुलिस वाला भी खड़ा था। और लिफ्ट के पास एक बोर्ड पर लिखा था। ' लिफ्ट मेंटेनेंस के लिए बंद है। कृपया सीढ़ियों का इस्तेमाल करें' वो अपनी ड्यूटी पर पहुंची। पर काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था। वो चुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठी थी। तभी टेबल पर रखे टेलीफोन की रिंग हुई। वो झट से अपने ख्यालों से बाहर निकली। उसने फोन उठाया। " हैलो ," " मैडम । बताईये, लिफ्ट का काम ठीक हुआ है क्या ? कोई आवाज तो नहीं आ रही है ना ? " रिसिवर से कान में गुंजने वाली वह आवाज अवंतिका झट से पहचान गई। डर से सिर्फ एक ही सेकेंड में उसका गला सूख गया था। रात हो चुकी थी। ऑटो से वो अपनी अपार्टमेंट पहुंच गई। आज अपनी ही अपार्टमेंट की तरफ देखकर डर लग रहा था। ऑटो वाला पैसे लेकर चला गया पर आज उसके कदम जैसे जमीन में धंस गए थे। हिम्मत कर के वो गेट से अंदर आई और चौकीदार कुर्सी की तरफ देखा । कुर्सी खाली थी। उसने अपनी नजरें हटाई सीढ़ियों की और चलने लगी। मगर चलते वक्त अपनी नजरें लिफ्ट की तरफ ना जाए इसका ध्यान रख रही थी। उसने सीढ़ी पर पहला कदम रखा ही था कि तभी उसके कानों पर एक आवाज आई। " अरे अवंतिका, लिफ्ट ठीक कर दी गई है। आओ लिफ्ट सेे चलते हैं।" अवंतिका ने आवाज की तरह देखा तो लिफ्ट के पास पांचवे माले पर रहने वाली श्वेता खड़ी थी। " न.... नहीं। मैं चली जाऊंगी।" " अरे तुम 10th फ्लोर पर रहती हो। इतनी सीढ़ियां चढ़कर जाओगी तो पैरों का कचूमर निकल जायेगा। चलो साथ चलते हैं।" " क.. कोई बात नहीं। आदत है।" "आदत ! मजाक मत करो। चलो लिफ्ट भी नीचे आ गई है।" अब अवंतिका के पास कोई भी चारा नहीं था। दोनों लिफ्ट के अंदर गई । अवंतिका लिफ्ट की दीवार के पास खड़ी थी और श्वेता ने बटन दबाया। लिफ्ट ऊपर की ओर जाने लगी। श्वेता अवंतिका की और मुड़ी और कहा। " मैडम । बताईये, लिफ्ट का काम ठीक हुआ है क्या ? कोई आवाज तो नहीं आ रही है ना ? " अवंतिका डर से कांप गई। क्यों की जिस्म श्वेता का का था पर चेहरा उस चौकीदार का जो पुरी तरह से लहूलुहान हो गया था। " अवंतिका, क्या सोच रही हो। अंदर आओ।" श्वेता की आवाज सुनकर अवंतिका होश में आ गई। वो अभी भी लिफ्ट के बाहर खड़ी थी। वो लिफ्ट के अंदर चली गई। और श्वेता ने लिफ्ट का दरवाजा बंद कर के बटन दबाया। अवंतिका उसी की तरह देख रही थी। लिफ्ट धीरे धीरे उपर जाने लगी। श्वेता ने पीछे मुड़कर अवंतिका की तरफ देखकर थोड़ी उदासी भरी आवाज में कहां। " पता नहीं यार , इस जगह को क्या हो गया। 2 दिन पहले चौकीदार और मेंटेनेंस कर्मचारी लिफ्ट एक्सीडेंट में मारे गए और आज सुबह।" " आज सुबह....? आज सुबह क्या हुआ ?" " मतलब तुम्हें कुछ नहीं पता ?" " नहीं, इसलिए तो पुछ रही हूं।" " आज सुबह हमारे अपार्टमेंट में एंबुलेंस आई थी ये तो पता है ना ?" " हां, पता है। मैं किसी और टेंशन में थी इसलिए ध्यान नहीं दिया।" " अरे तुम्हारे फ्लैट के सामने रहने वाली दादी सीढ़ियां चढ़कर पांचवें फ्लोर तक आ गई और हार्ट ॲटॅक से सीढ़ियों पर ही गिर पड़ी। हम सब दादी को संभालने की कोशिश कर रहे थे पर उनकी निगाहें कहीं ओर टिकी हुई थी। शायद उन्होंने कुछ ऐसा देखा था जिससे उन्हें हार्टॲटॅक आया होगा। हमने तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया। पर वो पहले ही दम तोड चुकी थी।" उसकी बात सुनकर अवंतिका जैसे सन्न रह गई। वह कुछ बोलती कि तभी श्वेता ने कहा। " चलो, मेरा फ्लैट आ गया। " लिफ्ट रूक गई और श्वेता बाहर निकली। अवंतिका हैरान होकर सोच में पड़ गई। ' दादी और मैं तो दादी के कमरे में थे। और वही पर दादी ने मुझे चौकीदार की मौत के बारे में बताया। तो ये कैसे हो सकता है। ' तभी जातें जाते श्वेता ने पीछे मुड़कर अवंतिका से कहां। " बेटी, संभलकर वो तुम्हे नहीं छोड़ेगा।" अवंतिका डर से कांप गई। क्यों की वह आवाज श्वेता की नहीं बल्कि दादी की थी। वह अजीब सी आवाज सुनकर अवंतिका लिफ्ट से बाहर निकलती के तभी लिफ्ट का दरवाजा बंद हो गया और लिफ्ट अब धीरे धीरे उपर बढ़ने लगी। अब वो पुरी तरह से बेबस थी । अवंतिका को सामने लिफ्ट के चिकने मेटल में अपना धुंधला अक्स नज़र आने लगा। वो अपने अक्स को देख ही रही थी के तभी किसी ने उसके पीछे से अपना चेहरा बाहर निकला। वो बुरी तरह सहम गई। झट से मुड़कर देखा पर कोई नहीं था। वो इतना डर चुकी थी की वो बटन दबाकर लिफ्ट को छठे फ्लोर पर रोकने लगी पर लिफ्ट रूक नहीं रही थी। वो लगातार बटन दबाये जा रही के तभी उसे अपने पीछे किसी की आहट महसूस हुई। अवंतिका ने लिफ्ट के बटन दबाना बंद किया। उसने सामने वाली लिफ्ट की मेटल से बनी दीवार में गौर से देखा , उसे केवल अपना ही धुंधला सा अक्स नज़र आ रहा था। तो वो आहट ? वो मौजूदगी का एहसास, वो अजीब सी हलचल। अवंतिका बुरी तरह डर चुकी थी। अब वो आठवें फ्लोर तक पहुंच गई थी पर अब भी दो फ्लोर बाकी थे। वो दरवाजे की तरफ देख रही थी और उसके पीछे वो धुंधली परछाईं धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ती महसूस हो रही थी। डर के कारण अवंतिका के जीस्म से पसीना और आंखों से आंसू आने लगे। नौवां फ्लोर गुजरकर अब दसवा फ्लोर आने वाला थी और इधर वो अजीब आहट अवंतिका के कानों तक पहुंच चुकी थी। उसके पीछे कोई तो था जिसकी सासो कि ठंडक उसकी गर्दन पर जमा पसीने पर महसूस हो रही थी। और अब वही ठंडक उसकी कानों पर महसूस होने लगी । शायद उसके पीछे जो कोई खड़ा था वो बोलने के लिए अपना मुंह खोलता के तभी दसवां फ्लोर आ गया। एक सेकेंड भी बीना गंवाएं अवंतिका ने दरवाजा खोलने के लिए बटन दबाया और दरवाजा खुलते ही चौकीदार को दरवाजे के बाहर देख वो लिफ्ट के अंदर ही गीर पड़ी। " अरे मॅडम क्या हुआ। उठीये। हैलो कोई है। क्या मुसीबत है। आज ही ड्यूटी का पहला दिन था। साला पनौती लग गई।" उसे देखते हुए अवंतिका ने गहरी सांस ली और ..... समाप्त. Story by Sanjay Kamble.
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