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सर्च!!

M
Mrinalika Dubey
22 Mar 2026

सर्च!!पार्ट1


"सर्च(खोज)" पार्ट 1

वान्या अपने ऑफिस के केबिन में बैठी लैपटॉप ऑन किये गम्भीरता से कुछ सर्च कर रही थी,कि तभी उसके पास ही रखा इंटरकॉम बज उठा।इंटरकॉम की आवाज़ से वान्या की तन्मयता टूट गयी,उसने झल्लाते हुए इंटरकॉम का रिसीवर उठाया और बोली..."हैलो!वान्या हियर!"
दूसरी ओर से फिलिप की आवाज सुन,वान्या हड़बड़ा गयी।

फिलिप उसका बॉस था,और बहुत ही कम वो उसे इंटरकॉम पर कॉल करता था।अक्सर तो फिलिप की सेक्रेटरी जूलिया ही इंटरकॉम पर फिलिप का मैसेज दे देती थी,फिर आज यूँ अचानक फिलिप ने कैसे कॉल किया...'वान्या सोच में पड़ गयी।

तभी फिलिप ने फिर कहा..."कम सून वान्या,कम इमिजियेटली!" और फिर फिलिप ने कॉल कट कर दी।

वान्या ने फ़ौरन अपना लैपटॉप बंद किया और सोच में डूबी हुई तेज़ी से फिलिप के केबिन की ओर चल पड़ी।जैसे ही उसने केबिन के दरवाजे पर नॉक किया,अंदर से फिलिप की आवाज़ आयी..."कम इन वान्या!"
वान्या ने दरवाजा खोला और केबिन के अंदर पहुँच कर धीमे स्वर में बोली..."गुडमॉर्निंग सर!व्हाट हैप्पण्ड सर?एनी प्रॉब्लम!"
फिलिप ने खामोश रह कर,वान्या को सामने पड़ी चेयर पर बैठने का इशारा किया,फिर गम्भीर स्वर में बोला..."मॉर्निंग वान्या!आई हैव कॉल्ड यू फ़ॉर स्पेशल टॉस्क!"
वान्या एकदम चौंक सी गयी,और उसका चौंकना सही भी था।वान्या को इस कम्पनी में काम करते हुए एक साल पूरा होने वाला था,वान्या के हस्बैंड वरुण ने ही उसे इस कम्पनी में जॉब दिलाई थी।वरुण यहाँ सीनियर एसोसिएट था,और पिछले चार साल से इस कम्पनी में जॉब कर रहा था।शादी के बाद जब वान्या बंगलुरू से अपना पुराना जॉब छोड़कर यहाँ पुणे आयी,तो वरुण ने ही उसे समझाया कि,वान्या भी वरुण की ही कम्पनी जॉइन कर ले।

वान्या ने भी वरुण की बात मान ली,अब दोनों एक साथ ही कम्पनी जाते और एक साथ ही वापिस घर लौटते थे।हाँ,कभी कभी वरुण को अचानक ही कोई काम आ पड़ता तो,वो वान्या को अकेले ही घर भेज देता था।वरुण से शादी करने का अपना डिसीज़न वान्या को हर तरह से सही लगता।क्योंकि वान्या ने बिल्कुल वरुण जैसे लाईफ पार्टनर की ही कल्पना की थी शादी से पहले।अच्छी जॉब,बड़ा सा बंगला,
गाड़ी,शानदार लाईफ स्टाइल.....सबकुछ तो मिला था वान्या को शादी के बाद।

ये कम्पनी जॉइन करने के बाद तो वान्या को और भी कूल लगने लगा था।यहाँ अपनी जॉब प्रोफ़ाइल समझने के बाद जल्दी ही वान्या अपने काम मे पूरी गम्भीरता से जुट गई।इतने कम समय मे ही वान्या की कार्यकुशलता और व्यवहार की कंपनी में तारीफ़ होने लगी।यहाँ सबसे अच्छी बात वान्या को ये लगती थी,कि उसके बॉस फिलिप एकदम काम से काम रखने वाले सीरियस पर्सन थे।वो कभी भी अपने एम्प्लाइज को बिना बात परेशान नहीं करते थे,यहाँ तक कि वो डायरेक्ट  टॉकिंग भी बहुत ही कम करते।जिससे जो भी काम रहता,वो या तो अपनी सेक्रेटरी या फिर एक्जीक्यूटिव के थ्रू उसे मैसेज करवा देते।

इसलिए जब आज फिलिप ने ख़ुद वान्या को कॉल करके अपने केबिन में बुलाया तो उसका हैरान होना नेचुरल ही था।

वान्या बड़ी ख़ामोशी से फिलिप की ओर देख रही थी,फिलिप के चेहरे पर छाई गम्भीरता उसे और आवाज़ में झलकती चिंता ने वान्या को बैचेन सा कर दिया।

कुछ पलों की ख़ामोशी के बाद,फिलिप ने सर्द लहज़े में कहा..."वान्या,मैंने तुम्हें यहाँ बहुत ही ख़ास मक़सद से बुलाया  है।तुम्हें याद है न,कि पिछले हफ्ते हमारी कम्पनी की कॉन्फ्रेंस   सिंगापुर में हुई थी।"
वान्या ने सिर हिलाया...."यस सर!पिछले हफ्ते ही तो हुई थी कांफ्रेंस सिंगापुर में,उस कांफ्रेंस में वरुण भी तो गया है सर।अब तक वो सिंगापुर में ही है।"
फिलिप ने अब एक फ़ोटो अपनी ड्रावर से निकाला और उस फ़ोटो को वान्या के सामने रखते हुए कहा..."ये फ़ोटो उसी सिंगापुर में हुई कांफ्रेंस की है।"
वान्या ने थोड़ी हैरत से फ़ोटो उठाई और उसे ध्यान से देखते हुए बोली...."बट सर,मुझे समझ मे नहीं आ रहा है कि इस फ़ोटो में ऐसा क्या है जो आप इतने गम्भीर नज़र आ रहे हैं!"
फिलिप अब अपनी चेयर से उठ खड़ा हो गया,और कुछ सोचते हुए चहलकदमी करने लगा।फिर अचानक वान्या की तरफ पलटते हुए बोला...."इस फ़ोटो में जो शख्स तुम्हारे हस्बैंड वरुण के पास खड़ा नज़र आ रहा है,जानती हो वो कौन है?"
वान्या हैरानी में डूबी सिर हिलाती हुई बोली..."नो सर!मैं तो इस व्यक्ति के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानती।पर आप इसके बारे में मुझसे क्यों पूछ रहे हैं?है कौन ये व्यक्ति?"
फिलिप ने अब वान्या को एकदम सीधी नजरों से देखते हुए कहा...."ये व्यक्ति कोई और नहीं,बल्कि हमारी सिंगापुर ब्रांच का हेड मैथ्यू है।और वान्या ये कल दोपहर से ही लापता है।"
वान्या हतप्रभ सी बोल उठी..."लापता है!कहाँ लापता हो गया वो सर?और....और आप मुझे क्यों बता रहे हैं ये सब?"
फिलिप ने ठंडे स्वर में कहा...."तुम्हें इसलिए बता रहा हूँ,कि मैथ्यू को कल दोपहर आख़िरी बार तुम्हारे हस्बैंड वरुण के ही साथ देखा गया था।दोनों सिंगापुर के एक रेस्टोरेंट'चिनमिन' में  साथ साथ लन्च कर रहे थे,लंच के बाद मैथ्यू और वरुण दोनो ही एक साथ रेस्टोरेंट से निकले और कंपनी की कैब में बैठकर वहाँ से साथ साथ चल दिये।जब देर रात तक मैथ्यू अपने घर नहीं पहुँचा,तो उसकी वाईफ मारिया ने उसकी खोजबीन शुरू की।मारिया ने मैथ्यू के मोबाईल पर भी कई बार कॉल किया,पर मैथ्यू का मोबाईल स्विच ऑफ आ रहा था।कंपनी के स्टॉफ से पूछताछ करने पर भी जब मैथ्यू का कोई सुराग हाथ नहीं लगा,तो हार कर मारिया ने पुलिस के पास मैथ्यू की मिसिंग कम्प्लेन फ़ाइल की।बट पुलिस को भी अब तक इतना ही पता लग सका कि,मैथ्यू दोपहर को वरुण के साथ रेस्टोरेंट'चिनमिन'में लंच कर रहा था।और रेस्टोरेंट से दोनों ही साथ साथ एक कैब में निकले हैं।"
वान्या के चेहरे पर उलझन झलक उठी,वो असमंजस भरे स्वर में किसी तरह बोली...."बट सर!रियली मैं अभी तक नहीं समझ पा रही हूँ कि,आपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया है?मैथ्यू की वाईफ ने तो मिसिंग कम्प्लेन फ़ाइल कर ही दी है।अब पुलिस उसे तलाश कर ही लेगी,फिर इसमें प्रॉब्लम क्या है?"
फिलिप ने अब एकदम सपाट लहज़े में कहा..."ओह वान्या, तुम शायद मामले की गम्भीरता को समझ नहीं रही हो।या फिर समझ कर भी जानबूझकर अनजान बन रही हो।मैंने बताया न कि,मैथ्यू को लॉस्ट टाईम कल दोपहर को ही देखा गया था वरुण के साथ।अब मैथ्यू मिसिंग है,तो सोचो कि मामला कितना गम्भीर है।"
वान्या ने गर्दन हिलाई...."नहीं सर,इसमे मुझे तो कोई गम्भीर बात नजर नहीं आ रही है।अगर मैथ्यू मिसिंग है,और वो आख़िरी बार वरुण के साथ देखा गया था,तो वरुण से क्यों पूछताछ नहीं की पुलिस ने?वरुण को तो पता ही होगा कि मैथ्यू कहाँ है?"
फिलिप की आँखें सिकुड़ गयीं,वो अज़ीब से लहज़े में एक एक शब्द चबाता हुआ बोला..."वरुण से तो पूछताछ तब हो पाती,जब वो पुलिस को मिल पाता।वरुण का भी कोई सुराग अब तक पुलिस को नहीं मिल पाया है,और तो और वरुण का भी मोबाईल बंद आ रहा है।"
अब वान्या हड़बड़ा उठी,उसके चेहरे पर घबराहट दिखने लगी।वो घबराये स्वर में किसी तरह अटकती हुई बोली..."ये  ये आप क्या कह रहे हैं सर?वरुण का कोई सुराग नहीं मिल रहा है?ऐसा कैसे पॉसिबल हो सकता है भला?अभी कल रात ही तो मेरी बात हुई थी वरुण से!वो तो हमेशा की ही तरह एकदम नॉर्मली बातें कर रहा था,मैंने उससे पूछा भी कि वो वापिस इंडिया कब आ रहा है।तो उसने बताया था कि,वहाँ कंपनी का थोड़ा काम बाक़ी है और दो एक दिन बाद वो वापिस यहाँ आने के लिए फ़्लाइट पकड़ेगा।मैंने वरुण से कहा भी,कि वो जल्दी से जल्दी लौटने की कोशिश करे और फ़्लाइट की टिकिट कन्फर्म होते ही मुझे जरूर इन्फॉर्म करे।

और आप ये कह रहे हैं,कि वरुण भी गायब है!!मैं...मैं कैसे इस बात पर यकीन करूँ सर!"
वान्या की आवाज़ रुँधने लगी,उसकी आँखों मे आँसू छलक उठे।वो हैरान परेशान सी फिलिप की ओर एक टक देखने लगी।कुछ देर की चुप्पी के बाद फिलिप ने सोचते हुए वान्या से पूछा...."एक बात ज़रा याद करके बताओ मुझे, कल रात जब तुमने वरुण से बात की थी कॉल पर तो क्या उसका मोबाईल नम्बर एक्टिव था?मीन्स,क्या तुमने वरुण के ही मोबाईल पर बातें की थी?'
अब वान्या के चेहरे पर थोड़ी सी हैरत झलकी,वो कुछ हिचकते हुए धीमे से बोली..."सर!कल रात जब मैंने वरुण से कॉल पर बात की थी,तो वो नम्बर उसका नहीं था।मैं उसे यूँ तो रोज़ रात 11 बजे कॉल लगाती थी,पर कल रात दस बजे ही मेरे मोबाईल पर किसी अननोन नम्बर से कॉल आया।पहले तो मैं सोच में पड़ गयी,फिर जैसे ही मैंने कॉल रिसीव करते हुए हैलो' कहा....तो दूसरी ओर से वरुण की आवाज सुन मैं एकदम चौंक उठी।पूछने पर वरुण ने बताया कि,वो एक पब्लिक बूथ से कॉल कर रहा है क्योंकि उसका मोबाईल कहीं खो गया है।' तब मुझे ये बात उतनी अज़ीब नहीं लगी, क्योंकि मोबाईल तो किसी का भी कभी भी खो सकता है।पर अब आपकी बातें सुनकर,मुझे वरुण के बारे में बहुत चिंता हो रही है।वो....वो ठीक तो होगा न सर!कहीं वरुण किसी मुश्किल या मुसीबत में तो नहीं फँस गया है?"
फिलिप के चेहरे पर एक के बाद एक कई भाव उभरे,वो कुछ पलों तक ख़ामोशी से कुछ सोचता रहा फिर बोला..."वान्या, एक प्रॉमिस करो कि अब जब कभी भी वरुण का कॉल तुम्हें आयेगा....तो तुम फौरन मुझे इन्फॉर्म करोगी।"
वान्या ने हिचकिचाहट से पूछा...."सर,क्या आपको सिंगापुर से किसी ने कुछ बताया है वरुण के बारे में?प्लीज़ सर,मुझे प्लीज़ क्लियर बताइये कि क्या सिंगापुर पुलिस वरुण की तलाश कर रही है?आपको ये सब पता कैसे चला?किसने बताया सर आपको?"
फिलिप एक पल के लिए ठिठका,फिर थोड़ा नरमी से बोला...."वान्या,तुम्हारे यूँ घबराने से तो मामला और भी बिगड़ सकता है।तुम प्लीज़ अपने को सम्भालो,क्योंकि इस सिचुएशन में अगर तुमने हिम्मत से काम नहीं लिया तो फिर हो सकता है ये सिचुएशन और भी ज़्यादा क्रिटिकल हो जाये।"
वान्या भावुक स्वर में बोली...."सर,मैं हिम्मत से कैसे काम लूँ?आपकी बातों से तो मुझे सच में बहुत ज़्यादा घबराहट हो रही है।मेरा वरुण वहाँ सिंगापुर में पता नहीं किन मुश्किलों के बीच में फँसा हुआ है,और मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं  उसकी हेल्प कैसे करूँ?यहाँ रहकर मैं वहाँ मीलों दूर सिंगापुर में मुसीबत में घिरे वरुण की मदद कैसे करूँ?सर,आप कुछ नहीं कर सकते इस बारे में?प्लीज़ आप सिंगापुर में किसी के थ्रू वरुण के बारे में कुछ खोज खबर करवाइये न!आपकी पहचान के तो वहाँ जरूर कोई न कोई विश्वस्त आदमी मिल ही जायेंगे।"
फिलिप ने सीधे सपाट लहज़े में फ़ौरन जवाब दिया..."वान्या,
मैं तुम्हें कैसे समझाऊँ कि वरुण इस समय गहरी मुसीबत में है।ऐसी मुसीबत,जिसमें यदि उसे तत्काल हेल्प न मिली तो वो शायद कभी इंडिया न लौट पायेगा।मैथ्यू की वाइफ ने पुलिस को मैथ्यू की जो मिसिंग कम्प्लेन फ़ाइल की है,उसमें उसने वरुण के ऊपर सीधा शक जताया है।उसके बाद से ही पुलिस वरुण की तलाश में पूरी ताकत से जुट गई है।मुसीबत ये है कि,जिस कैब से मैथ्यू और वरूण रेस्टोरेंट से निकल कर रवाना हुए थे....वो कैब पुलिस को एक सूनसान सी बीच पर पड़ी मिली।और जानती हो,उस कैब के अंदर कैब ड्राइवर की गर्दन कटी लाश पड़ी थी।''
"लाश!!क्या....क्या कह रहे हैं ये सर,ड्राइवर की गर्दन कटी लाश!.....ओह गॉड!मीन्स मेरा वरुण बहुत बड़े खतरे में है सर!"....वान्या एकदम से सिसक उठी।

फिलिप ने वान्या को सांत्वना बंधाई...."प्लीज़!प्लीज़ वान्या!

ये समय रोने का नहीं,हमें वरुण को ढूंढना है और वो भी सही सलामत!"
वान्या ने अपनी आँखें पोंछते हुए भीगे स्वर में पूछा..."बट सर मैं कैसे मदद करूँ वरुण की?मैं तो सिंगापुर में किसी को जानती तक नहीं।और न ही मेरे या वरुण की फैमिली में कोई ऐसा है,जो सिंगापुर जा कर मेरी और वरूण की हेल्प कर सके।"
अब फिलिप ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा..."ओफ्फ वान्या,ये क्या?क्या तुम मुझे पराया समझती हो?क्या मैं कुछ नहीं लगता तुम्हारा और वरुण का?मैं तुम दोनों का बॉस ही नहीं,वेल विशर भी हूँ।मैं कुछ भी करके वरुण को सिंगापुर से सही सलामत वापिस ले कर आऊँगा।वान्या,तुम इसी वक़्त अपने घर जाओ और तैयारी करो,हम आज रात 12 बजे वाली फ़्लाइट से सिंगापुर जा रहे हैं।"
वान्या ने फिलिप की बात सुनी,तो उसे यूँ आँखें फाड़े देखने लगी जैसे उसे यकीन नहीं हो रहा है फिलिप की बात पर।उसे  अपनी ओर यूँ घूरते देख,फिलिप ने फिर जोर देते हुए कहा..."डोंट वेस्ट युवर टाईम!गो होम एंड प्रिपेयर युवर सेल्फ!"
वान्या किसी तरह अपने को संभालती हुई फिलिप की केबिन से बाहर निकली और अपने केबिन के अंदर जा कर चेयर पर बैठ फ़ूट फ़ूट कर रो पड़ी।उसकी सोचने समझने की शक्ति बिल्कुल गायब ही हो चुकी थी।वान्या के दिल मे बस बार बार वरुण का चेहरा उभर रहा था,कल रात जब उसने वरुण से कॉल पर बात की थी तो उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि  वरुण किसी जानलेवा मुसीबत में फँस सकता है।वो तो एकदम नॉर्मल लहज़े में ही बातें कर रहा था और जल्दी ही इंडिया लौटने के बारे में बता रहा था।

अचानक वान्या को ध्यान आया कबीर का,वरुण का कलीग कबीर भी तो वरुण के ही साथ सिंगापुर गया था।अगले ही पल वान्या ने अपना मोबाईल निकाला और कबीर का नम्बर लगाने लगी।कबीर की आवाज़ सुनते ही,वान्या लगभग चीखती हुई बोली..."हैलो!हैलो कबीर!कहाँ हो तुम?वरूण कहाँ है?"
उधर से कबीर की असमंजस भरी आवाज़ आई...."वान्या तुम?क्या हुआ?इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो?सब ठीक तो है न!"
अब वान्या जोर से चिल्लाई...."ओफ्फोह!मेरी फिक्र छोड़ो,
और ये बताओ कि तुम इस वक़्त कहाँ हो?वरुण क्या तुम्हारे ही साथ है?"
कबीर कुछ पल खामोश रहा,फिर गम्भीर लहज़े में बोला..."मैं  तो अपने ही घर मे हूँ,अभी दो घँटे पहले ही तो लौटा हूँ सिंगापुर से।पर हुआ क्या?"
वान्या का सब्र टूट गया,वो जोर से बोली...."कबीर तुम इंडिया  वापिस आ गए?तो फिर वरुण?वो कहाँ है?वो तुम्हारे साथ क्यों नहीं आया?"
कबीर की उलझन बढ़ गयी,वो सोच में डूबा हुआ बोला..."ओह वान्या,तुम्हारी परेशानी और घबराहट से तो अब  मुझे भी घबराहट सी होने लगी है।मैं तो परसों रात कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद से ही वरुण से नहीं मिला,क्योंकि वरुण वहाँ कंपनी के हेड मैथ्यू के साथ एक मीटिंग के सिलसिले में किसी क्लाइंट से मिलने जानेवाला था।और फिर जब मैंने कल सुबह वरुण से बात करने के लिए उसका मोबाईल नम्बर  ट्राय किया तो वो स्विच ऑफ आ रहा था।मैं फिर उसके होटेल के रूम में भी पहुँचा,लेकिन पता चला कि वरुण तो कल रात अपने रूम में लौटा ही नहीं।"
वान्या फ़ूट पड़ी...."कबीर....कबीर!तुमने वरुण का पता लगाने की कोशिश नहीं की?तुम तो उसके साथ गये थे न,तो फिर उसे ले कर क्यों वापिस नहीं आये?तुम तो वरूण के फ्रेंड हो न कबीर,फिर क्या तुम्हें एक पल के लिए भी उसे वहाँ अकेले छोड़कर यहाँ वापिस आने में कुछ गलत फील नहीं हुआ?"
कबीर खामोश हो गया!फिर कुछ देर बाद धीमे से बोला.."वान्या!वान्या क्या तुम इस वक़्त मेरे घर आ सकती हो?"
वान्या ने सोचते हुए जवाब दिया...."ओके कबीर!मैं बस एक घँटे में ही तुम्हारे घर पहुँच रही हूँ।"
वान्या ने अपना लैपटॉप बंद करके बैग में रखा और टेबल पर एक ओर पड़ा पर्स उठा कर केबिन से बाहर निकल पड़ी।अभी ऑफिस के गेट की तरफ बढ़ी ही थी,कि पीछे से रोहन ने टोका..."वान्या!बैग लिए कहाँ जा रही हो?कुछ काम आ गया क्या?"
वान्या ने पीछे पलट कर जल्दी से कहा..."ओह रोहन,वो बस मैं जरा घर जा रही हूँ।"
"घर!अभी?पर क्यों वान्या?तबियत ठीक नहीं क्या तुम्हारी?मैं   छोड़ आऊं तुम्हें घर?"....रोहन ने करीब आते हुए चिंतित हो पूछा।

वान्या थोड़ी झल्ला उठी....."ओफ्फ रोहन!इतनी फ़िक्र की जरूरत नहीं,मेरी तबियत एकदम ठीक है।"
रोहन से अभी पीछा छुड़ा ही रही थी,कि इतने में ईशा वहाँ आती हुई बोली..."अरे!ये तुम दोनों यूँ गेट पर खड़े हो कर क्यों बातें कर रहे हो?कहीं बाहर जा रहे हो?"
वान्या मन ही मन बुरी तरह से चिढ़ गयी,उसने बड़ी मुश्किल से अपने को संभालते हुए कहा...."ईशा,मैं एक पर्सनल काम से बाहर जा रही हूँ।ये रोहन तो बस यूं ही मुझे जाते देख वजह पूछने चले आया।"
रोहन थोड़ी नाराजगी से बोला...."मुझे क्या पड़ी है जो मैं वजह पूछने आऊँगा?वो तो बस तुम्हें जाते देखा तो मुझे लगा कि शायद तुम्हारी तबियत ठीक नहीं।मैं तो बस इंसानियत के नाते चला आया था,पर .....!"  रोहन ने अपनी बात अधूरी ही छोड़ दी और मुँह बना कर वान्या को देखने लगा।

ईशा फौरन बोल उठी..."क्यों बेकार में ऐसे लोगों के पचड़े में पड़ना जो इंसानियत का मतलब तक नहीं समझते।हुँह!"
वान्या से अब न रहा गया,वो तमक कर बोली...."मुझे कोई जरूरत नहीं फ़ालतू सिंपेथी की,गो एंड डू योर वर्क!"
ईशा और रोहन दोनों को ही फटकार लगा कर,वान्या वहाँ पल भर भी नहीं रुकी और तेज़ तेज़ चलती हुई ऑफिस के गेट से बाहर निकल गयी।

गेट पर खड़े ईशा और रोहन ने एक दूसरे को देखा,रोहन हैरत से बुदबुदाया..."ये वान्या को हो क्या गया है?इतना रुडली बिहेव क्यों कर रही थी वो?"
ईशा ने धीमे से कहा..."पँख लग गए हैं वन्या के तो!हस्बैंड बड़ी पोस्ट पर है और ऊपर से फॉरेन टूर करके वापिस आ रहा है।प्रमोशन तो पक्की ही है अब वरुण की,बस इसीलिए भाव खा रही है मैडम जी!"
रोहन ने गर्दन झटकी और गम्भीरता से बोला..."नहीं,वान्या का नेचर ऐसा नहीं है।वो तो हमेशा ही अच्छे से ही बिहेव करती थी,जरूर कोई तो ऐसी वज़ह है जिसने वान्या को इतना परेशान कर दिया कि वो अपना आपा ही खो बैठी।"
ईशा ने मुँह बनाया..."तुम यहाँ खड़े रह कर सोचते रहो वज़ह,
मैं तो चली अपनी टेबल पर।"
ईशा पैर पटकती हुई वहाँ से चल दी,रोहन कुछ देर तक वहीं खड़े रहकर कुछ सोच विचार करता रहा फिर तेज़ी से ऑफिस के अंदर चल दिया।पर रोहन अपनी सीट पर न जा कर सीधे फिलिप की सेक्रेटरी जूलिया के पास जा पहुँचा।जूलिया हमेशा की तरह अपनी टेबल पर सिर झुकाए नोट पैड पर कुछ नोट कर रही थी।रोहन को वहाँ देखते ही जूलिया ने हैरानी से पूछा...."रोहन!यहाँ कैसे?कुछ काम था?

बट अभी सर बहुत बिज़ी हैं,किसी से नहीं मिल सकते।"
रोहन ने मुस्कुरा कर धीरे से कहा...."मुझे सर से कोई काम नहीं है।मैं तो बस यहाँ ये पूछने चला आया था कि, क्या वान्या अभी कुछ देर पहले सर से मिलने आई थी?"
जूलिया ने रोहन को घूरते हुए देखा,फिर बोली..."देखो रोहन,
सर को ये बात बिल्कुल भी पसन्द नहीं कि ऑफिस का कोई एम्प्लाइ अपना काम छोड़कर दूसरे के पीछे अपना वक़्त बर्बाद करे।इसलिए बेटर होगा कि तुम अपनी टेबल पर जाओ और अपने काम पर ध्यान दो।"
अपने सवाल के जवाब में जूलिया का लंबा चौड़ा लेक्चर सुन कर रोहन एकदम उखड़ गया...."बस बस!ज्यादा लेक्चर देने की जरूरत नहीं।भूलो मत कि तुम बॉस की सेक्रेटरी हो,खुद बॉस नहीं।इसलिए बेवजह मुझे उपदेश देने की गलती अब कभी मत करना।"
रोहन वहाँ से अपने केबिन में आ गया,पर उसका दिमाग अब भी वान्या में ही उलझा था।

और इधर वान्या कैब में बैठी तेज़ी से कबीर के घर की ओर चली जा रही थी।उसके दिल की धड़कनें,गाड़ी की रफ़्तार से भी तेज़ चल रही थी।वो मन ही मन प्रार्थना कर रही थी कि,
कबीर के पास पहुँच कर उसे वरुण के बारे में कुछ ठोस खबर मिल सके।

क्या वान्या की ये प्रार्थना पूरी होगी?कबीर क्या बतायेगा वरुण के बारे में?और रोहन?क्या रोहन को वान्या के परेशानी की वजह मालूम हो सकेगी?और वरुण कहाँ है?क्या वो सच में किसी मुसीबत में है?

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