(SCENE 1: रायचंद मेंशन - आहान का कमरा - रात)
SFX: (कांच टूटने की ज़ोरदार आवाज़ - CRASH!, भारी चीज़ें पटकने की आवाज़, आहान की तेज़ और गुस्से भरी सांसें)
सूत्रधार: रायचंद मेंशन का सबसे आलीशान कमरा। लेकिन यहाँ रोशनी की मनाही थी। कमरे में घुप्प अँधेरा था, और उस अँधेरे में एक घायल शेर की तरह टहल रहा था... आहान रायचंद। वो देख नहीं सकता था, लेकिन उसकी लाचारी उसका सबसे बड़ा गुस्सा बन गई थी।
आहान (चिल्लाते हुए): पानी! कोई है यहाँ? मेरा गला सूख रहा है! रामू काका!
SFX: (दरवाज़ा खुलने की आवाज़, डरे हुए कदमों की आहट)
रामू काका (कांपते हुए): जी... जी छोटे सरकार। पानी लाया हूँ।
आहान: (हवा में हाथ मारते हुए) कहाँ हो तुम? आवाज़ क्यों नहीं देते? मुझे दिखाई नहीं देता, यह भूल गए क्या?
रामू काका: (पास आकर) ये लीजिये सरकार। गिलास आपके हाथ के पास है।
(आहान अंदाज़े से हाथ बढ़ाता है, लेकिन उसका हाथ गिलास से टकराता है और गिलास ज़मीन पर गिर जाता है।)
SFX: (गिलास गिरने और टूटने की आवाज़ - Clatter-Crash)
आहान: (गुस्से में अपनी छड़ी (Stick) उठाता है और पास रखे लैंप को मारता है) लानत है! लानत है इस ज़िंदगी पर! एक गिलास पानी नहीं पी सकता मैं?
रामू काका: (पीछे हटते हुए) सरकार... शांत हो जाइये। मैं दूसरा लाता हूँ।
आहान: (बड़बड़ाते हुए, फर्श पर बैठ जाता है) नहीं चाहिए। सब चले जाओ। मुझे इस अँधेरे में अकेला छोड़ दो। रोशनी तो मेरी किस्मत में लिखी ही नहीं है।
सूत्रधार: आहान रायचंद, जिसके एक इशारे पर कल तक शेयर बाज़ार हिल जाता था, आज अपने ही कमरे में ठोकरें खा रहा था। लेकिन उसे नहीं पता था कि उसका यह गुस्सा... किसी और के लिए 'हथियार' बन रहा था।
(SCENE 2: मोहिनी देवी का कमरा - साज़िश)
SFX: (चाय की चुस्कियां, एसी की धीमी आवाज़, आरामदेह माहौल)
मोहिनी देवी: (हंसते हुए) सुन रहे हो आर्यन? ऊपर से कैसी आवाज़ें आ रही हैं? आज फिर उसने अपना कमरा तोड़ दिया होगा।
आर्यन: (लापरवाही से) मॉम, यह रोज़ का ड्रामा है। मुझे समझ नहीं आता हम उसे पागलखाने क्यों नहीं भेज देते? मैं तो तंग आ गया हूँ उसके चिल्लाने से।
मोहिनी देवी: सब्र कर मेरे बच्चे। इतनी जल्दी नहीं। अभी तो हमें दुनिया को यह दिखाना है कि आहान एक्सीडेंट के बाद 'मानसिक रूप से' अस्थिर (Unstable) हो गया है। उसका यह गुस्सा... यह तोड़-फोड़... यही तो हमारा सबूत बनेगा।
आर्यन: लेकिन मॉम, वो केयरटेकर? वो नर्स कल भाग गई। आहान ने उसे फूलदान फेंककर मारा था। अब उसकी देखभाल कौन करेगा?
मोहिनी देवी: (गहरी सोच में) हम्म। हमें कोई ऐसी लड़की चाहिए जो मज़बूर हो। जिसे पैसों की इतनी भूख हो कि वो आहान की गालियां भी खाए और जुबान न खोले। एक सीधी-सादी 'बलि का बकरा'।
आर्यन: ऐसी लड़की कहाँ मिलेगी?
मोहिनी देवी: ढूंढने से तो भगवान भी मिल जाते हैं आर्यन। अखबार में इश्तहार (Advertisement) दो। सैलरी... डबल कर दो। कोई न कोई तो जाल में फंसेगी।
(SCENE 3: सिटी हॉस्पिटल - इशानी की मुसीबत)
SFX: (हॉस्पिटल का शोर, मशीनों की बीप - Beep-Beep, रिसेप्शन पर भीड़)
सूत्रधार: शहर के सरकारी अस्पताल में इशानी खड़ी थी। उसके कपड़े साधारण थे, चेहरा थका हुआ, लेकिन आँखों में एक उम्मीद थी। वो डॉक्टर के पीछे-पीछे भाग रही थी।
इशानी: डॉक्टर साहब! प्लीज एक बार मेरे पापा को देख लीजिये। उनकी सांसें उखड़ रही हैं।
डॉक्टर: (फाइल देखते हुए) देखिये मिस इशानी, मैंने कहा ना? उन्हें इमीडियेट हार्ट सर्जरी की ज़रूरत है। और उसका खर्चा 5 लाख रुपये है। जब तक आप पैसे जमा नहीं करतीं, हम ऑपरेशन शुरू नहीं कर सकते।
इशानी: (आँसू भरी आँखों से) 5 लाख? सर, मैं एक प्राइवेट टीचर हूँ। इतनी बड़ी रकम मैं कहाँ से लाऊँगी? प्लीज, इलाज शुरू कीजिये, मैं किश्तों में दे दूँगी।
डॉक्टर: सॉरी। यह हॉस्पिटल के रूल्स के खिलाफ है। आपके पास 2 दिन हैं। पैसों का इंतज़ाम कीजिये वरना अपने पिता को घर ले जाइये।
(डॉक्टर चला जाता है। इशानी वहीँ बेंच पर बैठ जाती है, हताश होकर।)
इशानी (खुद से): 2 दिन... 5 लाख रुपये। मैं कहाँ जाऊँ? किससे मांगूं?
(तभी उसकी नज़र पास पड़े एक अखबार पर पड़ती है। एक बड़े बॉक्स में इश्तहार छपा है।)
इशानी (पढ़ते हुए): "रायचंद मेंशन को एक केयरटेकर की ज़रूरत है। एक नेत्रहीन (Blind) मरीज़ की देखभाल के लिए। 24 घंटे की नौकरी। सैलरी... 1 लाख रुपये महीना। और ज़रूरत पड़ने पर एडवांस भी मिलेगा।"
SFX: (उम्मीद भरा संगीत)
इशानी: 1 लाख महीना? और एडवांस? (आंसू पोंछते हुए) मुझे यह नौकरी करनी होगी। चाहे वो मरीज़ कैसा भी हो, मुझे पापा की जान बचाने के लिए यह शर्त माननी होगी।
(SCENE 4: रायचंद मेंशन - इंटरव्यू)
SFX: (बड़ा लोहे का गेट खुलने की आवाज़ - Creaaak, बारिश शुरू हो जाती है)
सूत्रधार: इशानी भीगते हुए रायचंद मेंशन पहुंची। वो महल जैसा घर देखकर डर गई थी, लेकिन उसकी मज़बूरी उसे अंदर ले गई। मोहिनी देवी ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
मोहिनी देवी: तो... तुम हो इशानी? तुम जानती हो तुम्हें किसकी देखभाल करनी है? आहान रायचंद की। वो अँधे हैं। और... उनका मिज़ाज़ बहुत खराब है।
इशानी: जी मैडम। मुझे पता है।
मोहिनी देवी: पिछली नर्स 2 दिन में भाग गई थी। तुम टिक पाओगी?
इशानी: (हिम्मत से) मुझे पैसों की सख्त ज़रूरत है मैडम। मैं कहीं नहीं भागूंगी। मुझे एडवांस चाहिए... मेरे पिता के इलाज के लिए।
मोहिनी देवी: (शैतानी मुस्कान के साथ) एडवांस मिलेगा। लेकिन एक शर्त पर। आहान चाहे चिल्लाए, चाहे चीज़ें तोड़े... तुम उफ़ नहीं करोगी। तुम उसकी परछाई बनोगी, लेकिन मूक (Silent) परछाई। मंज़ूर?
इशानी: मंज़ूर है।
मोहिनी देवी: गुड। जाओ, ऊपर वाला कमरा। और याद रखना... उस कमरे में रौशनी मना है।
(SCENE 5: पहली मुलाक़ात - तूफ़ान)
SFX: (बादलों की गड़गड़ाहट, इशानी के कदमों की आहट, दरवाज़ा खुलने की आवाज़)
सूत्रधार: इशानी कांपते हाथों से आहान के कमरे का दरवाज़ा खोलती है। अंदर गहरा अँधेरा है। उसे सिर्फ़ एक कुर्सी पर बैठी हुई परछाई दिखाई देती है।
इशानी: (धीरे से) जी... नमस्ते। मैं... मैं नई केयरटेकर हूँ।
(आहान कुर्सी से खड़ा हो जाता है।)
आहान: (सख्त आवाज़ में) केयरटेकर? या जासूस?
इशानी: जी?
आहान: (धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, हाथ में छड़ी है) मेरी सौतेली माँ ने भेजा है ना? मुझे पागल साबित करने के लिए? कितनी कीमत लगी तुम्हारी?
इशानी: (डरते हुए) सर, मैं सिर्फ़ काम करने आई हूँ। मुझे...
आहान: (चिल्लाते हुए) झूठ! सब बिकाऊ हैं यहाँ! निकल जाओ यहाँ से!
(आहान पास रखा एक काँच का वास (Vase) उठाकर इशानी की दिशा में फेंकता है।)
SFX: (वास दीवार से टकराकर टूटता है - SMASH! इशानी चीखती है - AAH!)
इशानी: (बाल-बाल बचते हुए) सर! आप यह क्या कर रहे हैं?
आहान: मैंने कहा निकल जाओ! मुझे किसी की दया नहीं चाहिए!
इशानी: (अचानक उसका डर गायब हो जाता है, उसे गुस्सा आ जाता है) दया? आपको लगता है मैं दया करने आई हूँ? (सख्त आवाज़ में) मिस्टर रायचंद! आप अंधे हैं, बहरे नहीं। मैं नौकरी करने आई हूँ। और अगर आपको चीज़ें तोड़ने का शौक है, तो तोड़िये। लेकिन याद रखिये... काँच चुभता है, तो दर्द आपको भी होगा, सिर्फ़ मुझे नहीं।
SFX: (सन्नाटा। आहान हैरान होकर रुक जाता है।)
आहान: (हैरानी से) तुम्हारी हिम्मत... आज तक किसी ने मुझसे ऐसे बात नहीं की।
इशानी: क्योंकि शायद आज तक किसी ने आपको सच नहीं दिखाया। अब चुपचाप बैठ जाइये। मैं काँच साफ़ कर रही हूँ।
SFX: (झाड़ू लगाने की आवाज़, सस्पेंस भरा संगीत)
सूत्रधार: उस अँधेरे कमरे में पहली बार किसी ने आहान की आँखों में (भले ही वो देख न सके) आँखें डालकर बात की थी। नफरत की चिंगारी भड़क चुकी थी। लेकिन क्या यह नफरत प्यार में बदलेगी, या इशानी भी इस घर की साज़िश का शिकार हो जाएगी?
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