करार की दुल्हन — अनुबंध से प्यार तक
मुंबई की एक तूफ़ानी रात — टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के बाहर बैठी एक लड़की अपनी माँ के इलाज के पचास लाख रुपयों के बिल को थामे आँसू बहा रही थी। वहीं मल्होत्रा टॉवर्स की बयालीसवीं मंज़िल पर एशिया का चौथा सबसे बड़ा CEO अपनी दादी की वसीयत के सामने हारता जा रहा था — तीन हफ़्तों में अगर शादी नहीं हुई, तो उसकी पूरी कंपनी हाथ से निकल जाएगी। आन्या शर्मा को पैसे चाहिए थे माँ की ज़िंदगी के लिए। आरव मल्होत्रा को एक पत्नी चाहिए थी कंपनी के लिए। एक भरोसेमंद matchmaker, छह महीने का contract, और एक काग़ज़ी शादी जो सिर्फ़ business deal थी। पर contract इंसानी जज़्बातों को नहीं बाँध सकता। एक हवेली, एक अजनबी, और एक रिश्ता जो धीरे-धीरे शर्तों से बाहर बढ़ने लगा। मुंबई के समुंदर के किनारे — दो टूटे हुए लोगों की एक प्रेम-कथा, जो शुरू तो मजबूरी से हुई थी, पर ख़त्म होने को तैयार नहीं थी। ३० अध्यायों में बँधी एक आधुनिक हिंदी रोमांस।
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