(SCENE 1: एक पुराना, अँधेरा गोदाम - रात)
SFX: (पानी की बूंदें टपकने की आवाज़ - Tip-Tip, भारी बूटों के चलने की गूंज, माचिस जलने की आवाज़ - Chhhk)
सूत्रधार: शहर की चकाचौंध से दूर, एक वीरान गोदाम में मौत का सौदा हो रहा था। अँधेरे में एक कुर्सी पर बैठा था शहर का सबसे बड़ा डॉन, मलिक। और उसके सामने खड़ा था... विक्रम। एक ऐसा इंसान जिसकी आँखों में न रहम था, न डर। उसे लोग 'द घोस्ट' (The Ghost) कहते थे।
मलिक (सिगार पीते हुए): सुना है तूने काम छोड़ने का फैसला किया है विक्रम? सन्यास ले रहा है?
विक्रम (सख्त और ठंडी आवाज़ में): मेरे हाथ कांपने लगे हैं मलिक। और कांपते हाथ निशाना चूंक जाते हैं। मुझे आज़ादी चाहिए।
मलिक: आज़ादी मिलेगी। लेकिन एक आखिरी काम के बाद। यह मेरा 'विदाई तोहफा' (Parting Gift) समझ ले। इस काम के बाद तू आज़ाद, और तेरे खाते में 50 करोड़।
विक्रम: (बिना दिलचस्पी के) कौन है टारगेट?
मलिक: (टेबल पर एक फोटो फेंकता है - Slap) यह।
विक्रम: (फोटो देखता है) एक लड़की?
मलिक: मामूली लड़की नहीं है। सारा सिंह। देश के रक्षा मंत्री दिग्विजय सिंह की इकलौती बेटी।
SFX: (चौंकाने वाला संगीत - DHU-DHU)
विक्रम: मंत्री की बेटी? सिक्योरिटी टाइट होगी। स्नाइपर से काम नहीं बनेगा।
मलिक: बिलकुल। इसीलिए तुझे चुना है। तुझे उसे दूर से नहीं... पास से मारना है। बहुत पास से।
विक्रम: मतलब?
मलिक: मतलब यह... कि मंत्री अपनी बेटी के लिए एक नया बॉडीगार्ड ढूंढ रहा है। तुझे वो नौकरी हासिल करनी है। उसके घर में घुसना है। उसका भरोसा जीतना है। और जब वो पूरी तरह बेफिक्र हो जाए... (हाथ से गला काटने का इशारा करता है) ...तब उसे ख़त्म करना है। एक्सीडेंट लगना चाहिए।
विक्रम: (फोटो को घूरते हुए) भरोसा जीतकर धोखा? यह मेरा स्टाइल नहीं है मलिक। मैं सामने से मारता हूँ।
मलिक: स्टाइल बदल ले। क्योंकि अगर तूने यह नहीं किया... तो तेरी वो 'अनाथालय' वाली फाइल मेरे पास है। मैं उन बच्चों को...
विक्रम: (मलिक की टेबल पर मुक्का मारते हुए - BANG!) उन्हें बीच में मत लाना!
मलिक: (मुस्कुराते हुए) तो डील पक्की?
विक्रम: (फोटो उठाता है) पक्की। यह लड़की... कल का सूरज नहीं देख पाएगी।
(SCENE 2: रक्षा मंत्री का आवास - सुबह)
SFX: (फ़ोन की घंटियां, न्यूज़ चैनल का शोर, भागदौड़)
सूत्रधार: रक्षा मंत्री का घर किसी किले से कम नहीं था। हर तरफ कमांडो तैनात थे। लेकिन घर के अंदर एक अलग ही जंग छिड़ी हुई थी।
सारा (गुस्से में): नहीं पापा! मुझे यह कैद मंज़ूर नहीं है! मैं कॉलेज कैसे जाउंगी? दोस्तों से कैसे मिलूँगी? हर जगह यह बंदूक वाले मेरे पीछे चलते हैं!
मंत्री जी (दिग्विजय): सारा, समझने की कोशिश करो। धमकियां मिल रही हैं। मुझे तुम्हारी चिंता है।
सारा: चिंता या नज़रबंदी? आपने मेरी ज़िंदगी नर्क बना दी है। मुझे कोई बॉडीगार्ड नहीं चाहिए!
मंत्री जी: तुम्हें चाहिए! और आज इंटरव्यू है। मैं देश का सबसे बेस्ट आदमी चुनूंगा तुम्हारे लिए।
सारा: (पैर पटकते हुए) आप जिसे भी चुनेंगे, मैं उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल बाहर करूँगी। देख लेना!
(सारा गुस्से में अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर लेती है - SLAM!)
(SCENE 3: इंटरव्यू - विक्रम की एंट्री)
SFX: (बाहर लॉन में सन्नाटा। कई पहलवान टाइप बॉडीगार्ड्स खड़े हैं।)
सूत्रधार: इंटरव्यू चल रहा था। कई हट्टे-कट्टे लोग आये और रिजेक्ट हो गए। तभी गेट पर एक काली बाइक आकर रुकी।
SFX: (बाइक का इंजन - Vroom... Screech!)
सूत्रधार: विक्रम उतरा। उसने काले कपड़े पहने थे। चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वो सीधा गेट की तरफ बढ़ा।
गार्ड: ए! रुक! नाम क्या है? अपॉइंटमेंट है?
विक्रम: (काला चश्मा उतारते हुए) नाम विक्रम है। और मुझे अपॉइंटमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
गार्ड: (हंसते हुए) अच्छा? हीरो है क्या? चल पीछे हट!
(गार्ड ने विक्रम को धक्का देने के लिए हाथ बढ़ाया। पलक झपकते ही विक्रम ने उसका हाथ मरोड़ा और उसे ज़मीन पर पटक दिया।)
SFX: (हड्डी चटकने और गिरने की आवाज़ - Crack... Thud!)
सूत्रधार: बाकी 4 गार्ड्स विक्रम पर टूट पड़े। लेकिन विक्रम... वो इंसान नहीं, मशीन था।
SFX: (एक्शन साउंड्स - Dishoom! Pow! Clash!)
सूत्रधार: महज 30 सेकंड में, मंत्री जी के 5 बेस्ट कमांडो ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे। विक्रम ने अपने कपड़े झाड़े और सामने खड़े मंत्री जी की तरफ देखा।
मंत्री जी: (हैरान और प्रभावित होकर) कौन हो तुम नौजवान?
विक्रम: (शांत आवाज़ में) वो... जो आपकी बेटी को यमराज से भी बचा लाएगा। मुझे नौकरी चाहिए।
मंत्री जी: (मुस्कुराते हुए) तुम सेलेक्ट हो। कल से जॉइन करो।
(SCENE 4: निशाना और नज़दीकी)
SFX: (रात का समय। विक्रम को आउटहाउस (सर्वेंट क्वार्टर) दिया गया है।)
सूत्रधार: विक्रम को नौकरी मिल गई थी। वो अपने कमरे में था। उसने अपनी बैग से एक खास 'साइलेंसर वाली गन' निकाली और उसे साफ़ करने लगा। खिड़की से उसे सारा का कमरा दिख रहा था। सारा अपनी बालकनी में खड़ी थी, उदास।
विक्रम (गन को सारा की तरफ पॉइंट करते हुए - निशाना साधते हुए): (मन में) माफ़ करना मिस सारा। तुम्हारी सुरक्षा ही... तुम्हारी मौत है। गिनती शुरू...
SFX: (गन लोड करने की आवाज़ - Click-Clack)
सूत्रधार: शिकारी घर में घुस चुका था। रक्षक ही भक्षक था। लेकिन विक्रम को नहीं पता था कि जिस लड़की पर वो निशाना साध रहा है, वो जल्द ही उसके दिल पर निशाना साधने वाली है।
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