(SCENE 1: खन्ना निवास - लिविंग रूम - रविवार शाम 6:55 बजे)
SFX: (दीवार घड़ी की ज़ोरदार टिक-टिक - TICK-TOCK-TICK-TOCK, काव्या के तेज़ कदमों की आहट - इधर से उधर टहलना)
सूत्रधार: रविवार की शाम। खन्ना हाउस का लिविंग रूम किसी 'वॉर रूम' (War Room) से कम नहीं लग रहा था। कर्नल खन्ना अपनी आर्मचेयर पर बैठे थे, नज़रें घड़ी पर थीं। मिसेज खन्ना के हाथों में पूजा की थाली थी (नज़र उतारने के लिए), और काव्या... काव्या को लग रहा था कि उसे हार्ट अटैक आने वाला है।
कर्नल खन्ना (गंभीर आवाज़ में): 6 बजकर 58 मिनट। काव्या, तुम्हारा वो 'मिस्टर परफेक्ट' अभी तक नहीं आया।
काव्या (घबराते हुए): डैड, अभी 2 मिनट बचे हैं। वो आता ही होगा।
कर्नल खन्ना: फ़ौज में 1 मिनट की देरी का मतलब होता है मौत। अगर वो 7 बजे की घंटी बजने तक नहीं आया, तो दरवाज़ा नहीं खुलेगा।
मिसेज खन्ना: ओहो कर्नल साहब! लड़का देखने आए हैं या बॉर्डर पर जंग लड़ने? थोड़ा तो रिलैक्स रहिये। काव्या बेटा, तूने बताया था ना कि उसे 'लड्डू' पसंद हैं? मैंने काजू-कतली भी मंगवाई है।
काव्या (मन में): माँ, उसे लड्डू नहीं, शायद लाइम-सोडा पसंद होगा। हे भगवान! बस वो पीली शर्ट पहनकर न आए। और प्लीज... प्लीज कोई ओवर-एक्टिंग न करे।
SFX: (घड़ी की घंटी - DONG! DONG! - ठीक 7 बजे)
(ठीक 7वीं घंटी के साथ दरवाज़े की घंटी बजती है - DING DONG)
काव्या (राहत की सांस लेते हुए): आ गया!
कर्नल खन्ना: (घड़ी देखते हुए) हम्म्। On time. दरवाज़ा खोलो।
(SCENE 2: दरवाज़े पर - रोहन का अवतार)
SFX: (दरवाज़ा खुलने की आवाज़ - Creeeaaak)
सूत्रधार: काव्या ने डरते-डरते दरवाज़ा खोला। सामने रोहन खड़ा था। लेकिन यह वो 'टपोरी' रोहन नहीं था। उसने एक बेहतरीन नेवी ब्लू ब्लेज़र, सफ़ेद शर्ट और फॉर्मल पैन्ट्स पहनी थी। बाल करीने से जमे हुए, हाथ में एक फूलों का गुलदस्ता और मिठाई का डिब्बा। वो किसी फिल्मी हीरो जैसा लग रहा था।
काव्या (फुसफुसाते हुए): (हैरान होकर) रोहन?
रोहन (धीमी, सभ्य आवाज़ में): गुड इवनिंग काव्या जी। माफ़ कीजियेगा, कहीं मैं जल्दी तो नहीं आ गया?
काव्या: (हड़बड़ाते हुए) न-नहीं। अंदर आओ।
(रोहन अंदर आता है। कर्नल और मिसेज खन्ना खड़े हो जाते हैं।)
रोहन: (आगे बढ़कर, झुकते हुए) प्रणाम आंटी जी। नमस्ते अंकल।
(रोहन मिसेज खन्ना के पैर छूता है।)
मिसेज खन्ना (गदगद होकर): जीते रहो बेटा! जीते रहो! हाय, कितना सुंदर बच्चा है। काव्या, तूने बताया नहीं कि यह इतना स्मार्ट है? बिलकुल 'ऋतिक रोशन' लगता है।
रोहन (मुस्कुराते हुए): शुक्रिया आंटी जी। लेकिन आपकी सुंदरता के सामने तो बॉलीवुड की हीरोइनें भी फीकी हैं। अब पता चला काव्या जी इतनी खूबसूरत क्यों हैं।
मिसेज खन्ना: (शर्माते हुए) हाय! बड़ा नटखट है। जी सुनिए! खड़े क्यों हैं? कुछ बोलिये।
कर्नल खन्ना: (रोहन को ऊपर से नीचे तक स्कैन करते हुए) हम्म्। खड़े रहने का पोस्चर (Posture) अच्छा है। रीढ़ की हड्डी सीधी है। गुड। मैं हूँ कर्नल विक्रम खन्ना। रिटायर्ड।
रोहन: (सावधान मुद्रा में, हल्का सिर झुकाकर) जी सर। आपके बारे में बहुत सुना है काव्या से। 'शौर्य चक्र' विजेता से मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है सर।
कर्नल खन्ना: (चौंककर) तुम्हें पता है मुझे शौर्य चक्र मिला था?
रोहन: जी सर। 1999 के कारगिल ऑपरेशन में आपकी बटालियन ने जो 'टाइगर हिल' के पास किया था, वो हर हिन्दुस्तानी जानता है। मैंने आपके बारे में पढ़ा है सर।
काव्या (मन में): (हैरान होकर) क्या बात है! इसने तो पापा की पूरी विकिपीडिया रट ली है? 40 हज़ार वसूल हो रहे हैं!
(SCENE 3: सोफे पर - पूछताछ (Interrogation))
SFX: (सब सोफे पर बैठते हैं। चाय के कप रखने की आवाज़।)
कर्नल खन्ना: तो रोहन... काव्या बता रही थी कि तुम 'आर्किटेक्ट' (Architect) हो?
रोहन: जी सर।
कर्नल खन्ना: कौन सी फर्म?
रोहन: सर, मैं फिलहाल 'मेहता एंड एसोसिएट्स' के साथ एक फ्रीलांस प्रोजेक्ट पर हूँ। हम नवी मुंबई में एक इको-फ्रेंडली टाउनशिप डिज़ाइन कर रहे हैं।
कर्नल खन्ना: हम्म्। इको-फ्रेंडली? सस्टेनेबल मटीरियल क्या यूज़ कर रहे हो? बैम्बू या रीसाइकिल प्लास्टिक?
काव्या (मन में): मर गए! अब यह फसेगा। पापा को कंस्ट्रक्शन का बहुत शौक है।
रोहन: (बिल्कुल बिना हिचकिचाए) सर, हम 'हेम्पक्रीट' (Hempcrete) का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कंक्रीट से हल्का होता है और कार्बन नेगेटिव है। साथ ही, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए हम जापानी तकनीक 'मियावाकी' का प्रयोग कर रहे हैं लैंडस्केप में।
कर्नल खन्ना: (इम्प्रेस होकर) मियावाकी? अरे वाह! बहुत कम लोग जानते हैं इसके बारे में। Impressive.
काव्या: (धीरे से रोहन को कोहनी मारते हुए) तुम्हें यह सब कब से पता है?
रोहन: (मुस्कुराते हुए, बहुत धीरे) पिछले हफ्ते एक आर्किटेक्ट का रोल किया था सीरियल में। डायलॉग याद रह गए।
(SCENE 4: माँ का दिल जीतना)
मिसेज खन्ना: अरे यह सीमेंट-ईंट की बातें छोड़िये। रोहन बेटा, काजू-कतली खाओ।
रोहन: शुक्रिया आंटी। (मिठाई खाते हुए) वाह! यह तो बहुत ताज़ी है। लेकिन आंटी, मुझे आपसे एक शिकायत है।
मिसेज खन्ना: (डरते हुए) क्या बेटा?
रोहन: काव्या ने मुझे बताया था कि आप दुनिया का सबसे अच्छा 'गाजर का हलवा' बनाती हैं। आज मुझे वो नहीं मिलेगा क्या?
मिसेज खन्ना: (खिलखिलाते हुए) हाय! काव्या ने बताया? अरे मैं अभी बनाती हूँ! बस 10 मिनट रुको। (कर्नल से) आप बातें कीजिये, मैं हलवा लाती हूँ।
(मिसेज खन्ना किचन में भाग जाती हैं।)
काव्या (मन में): हे भगवान! यह लड़का तो जादूगर है। माँ को सेट कर दिया, पापा को चुप कर दिया। मै भी ना इम्प्रेस हो जाऊ इससे? नहीं-नहीं काव्या, फोकस! यह एक्टिंग है।
(SCENE 5: द ट्विस्ट - कर्नल का 'असली' टेस्ट)
SFX: (मिसेज खन्ना के जाने के बाद सन्नाटा छा जाता है।)
कर्नल खन्ना: (आवाज़ धीमी और सख्त करते हुए) रोहन, औरतों वाली बातें खत्म हो गई हों... तो अब मर्दों वाली बात करें?
रोहन: जी सर?
कर्नल खन्ना: मुझे मीठी बातें समझ नहीं आतीं। मुझे साफ़ बताओ... मेरी बेटी ही क्यों? काव्या जिद्दी है, गुस्सैल है, और काम के आगे किसी को नहीं समझती। तुम जैसा सुलझा हुआ लड़का (जो इतना अच्छा आर्किटेक्ट है) इसे क्यों झेल रहा है?
(काव्या अपमानित महसूस करती है, कुछ बोलने ही वाली होती है।)
रोहन: (कर्नल की आँखों में आँखें डालकर, गंभीर आवाज़ में) सर... माफ़ कीजियेगा, लेकिन आप गलत हैं।
कर्नल खन्ना: क्या?
रोहन: काव्या जिद्दी नहीं, 'जुनूनी' (Passionate) है। वो गुस्सैल नहीं, 'ईमानदार' है—जो दिल में है वही जुबान पर है। और सर... दुनिया के लिए वो 'हिटलर दीदी' हो सकती है, लेकिन मेरे लिए... वो वो एंकर (Anchor) है जो मेरे उड़ते हुए गुब्बारे को ज़मीन से जोड़कर रखती है। वो मुझे पूरा करती है सर।
SFX: (रोमांटिक और इमोशनल संगीत)
काव्या: (रोहन को देखती रह जाती है) (मन में) यह... यह डायलॉग था? या... सच?
कर्नल खन्ना: (कुछ पल चुप रहकर) हम्म्। जवाब अच्छा था। (अचानक मुस्कुराते हुए) चलो, इसी बात पर एक ड्रिंक हो जाए? मेरे पास एक बहुत पुरानी 'स्कॉच' है। आज तक मैंने वो किसी के साथ नहीं पी।
रोहन: (हंसते हुए) सर, फौजी की स्कॉच के लिए मना करना तो गुनाह होगा।
काव्या: (घबराकर) डैड! लेकिन...
कर्नल खन्ना: तुम चुप रहो काव्या। जाओ माँ की मदद करो। मैं और मेरा होने वाला दामाद ज़रा 'चियर्स' करेंगे। आओ रोहन, मेरे 'डेन' (Den) में।
सूत्रधार: रोहन ने पहला राउंड जीत लिया था। माँ खुश थीं, पापा इम्प्रेस थे। लेकिन काव्या जानती थी कि असली खतरा अब शुरू हुआ है। क्योंकि शराब के नशे में अक्सर लोगों के 'मास्क' उतर जाते हैं। क्या रोहन स्कॉच पीकर भी अपनी एक्टिंग याद रख पाएगा?
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