SCENE 1: 'कॉफी बीन्स' कैफ़े - दोपहर)
SFX: (कैफ़े का शोर, कॉफी मशीन की आवाज़ - Grrr-Hiss, काव्या बार-बार अपनी घड़ी पर उंगली मार रही है - Tap-Tap-Tap)
सूत्रधार: दोपहर के 1 बज रहे थे। काव्या खन्ना कैफ़े की एक कोने वाली टेबल पर बैठी थी। उसके सामने एक फाइल रखी थी (कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स) और चेहरे पर 12 बजे हुए थे। काव्या को आए हुए 15 मिनट हो चुके थे... मतलब, उसे 15 मिनट पहले आना चाहिए था।
काव्या (गुस्से में बड़बड़ाते हुए): Unprofessional! हद दर्जे का अनप्रोफेशनल है यह लड़का। प्रोफाइल में लिखा था "पंक्चुअल" (Punctual)। धोखेबाज़! बस 2 मिनट और, फिर मैं जा रही हूँ। इससे अच्छा तो मैं विकास से शादी कर लूँ, कम से कम वो वक्त का पाबंद तो होगा।
(अचानक कैफ़े का दरवाज़ा ज़ोर से खुलता है )
SFX: (तेज़ कदमों की आवाज़ और किसी के ज़ोर-ज़ोर से फ़ोन पर बात करने की आवाज़)
रोहन (फ़ोन पर, ड्रामेटिक अंदाज़ में): अरे डायरेक्टर सर! मैंने कहा ना, मैं इमोशन ला सकता हूँ! (रोने का नाटक करते हुए) "माँ! मेरी माँ! तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकतीं!" देखिये, आ गए ना आंसू? जी... जी... पेमेंट कैश में लूंगा। ठीक है, बाय!
(रोहन फ़ोन रखता है और काव्या की टेबल की तरफ मुड़ता है। उसने एक चमकीली पीली शर्ट और आँखों पर धूप का चश्मा (अंदर भी) पहना है।)
रोहन: (मुस्कुराते हुए) हाय! तुम काव्या हो ना? 'रेंट-ए-बे' वाली? सॉरी यार, थोड़ा ट्रैफिक था। ऑटोग्राफ साइन कर रहा था... मतलब ऑटो वाले से झगड़ रहा था।
काव्या: (घूरते हुए) मिस्टर रोहन? तुम 17 मिनट लेट हो। और यह... (इशारा करते हुए) ...यह क्या पहना है तुमने? हम इंटरव्यू के लिए मिल रहे हैं, सर्कस में नहीं।
रोहन: (कुर्सी खींचकर बैठते हुए) ओहो, 'चिल' करो बॉस लेडी! यह मेरा 'ऑडिशन लुक' है। वैसे, तुम प्रोफाइल फोटो से ज्यादा... सख्त लगती हो। स्माइल विमाइल नहीं करती क्या? टैक्स लगता है?
(SCENE 2: इंटरव्यू शुरू)
काव्या: (गहरी सांस लेते हुए) देखो मिस्टर रोहन, मेरे पास वक्त कम है। सीधे पॉइंट पर आते हैं। मुझे एक बॉयफ्रेंड चाहिए।
रोहन: (आँख मारते हुए) पता है डार्लिंग। इसीलिए तो यहाँ हूँ। बताइये, किस टाइप का रोल चाहिए? "पजेसिव लवर"? "रोमांटिक शायर"? या "कबीर सिंह" टाइप एंग्री यंग मैन? मेरी रेंज बहुत बड़ी है।
काव्या: मुझे मेरे मम्मी पापा के लिए एक "संस्कारी जमाई" चाहिए।
रोहन: (हैरान होकर) हैं?
काव्या: सुनो। मेरे पिता एक रिटायर्ड कर्नल हैं। मेरी माँ ड्रामा क्वीन हैं। मुझे एक ऐसा लड़का चाहिए जो संडे को डिनर पर आए, पापा के फालतू जोक्स पर हंसे, माँ के पैर छुए, और यह दिखाए कि वो मुझसे पागलों की तरह प्यार करता है। (धमकी देते हुए) लेकिन याद रखना, यह सिर्फ़ एक्टिंग होगी। नो टचिंग, नो फ्लर्टिंग।
रोहन: (हंसते हुए) अरे बाप रे! यह तो 'हम साथ-साथ हैं' वाली वाइब है। बोरिंग है, पर चैलेंजिंग है। फीस क्या दोगी?
काव्या: 30 हज़ार। एक महीने का कॉन्ट्रैक्ट।
रोहन: (चौंककर) 30 हज़ार? मैडम, मेरी एक्टिंग की फीस इससे ज्यादा है। कम से कम 50 हज़ार। ऊपर से ओवरटाइम का अलग। और अगर तुम्हारे डैड ने मुझे आर्मी वाली बंदूक दिखाई, तो 'रिस्क अलाउंस' भी लगेगा।
काव्या: (खड़ी होते हुए) 30 हज़ार। लेना है तो लो, वरना मैं जा रही हूँ। मुझे लगा था तुम प्रोफेशनल होगे, लेकिन तुम तो एक जोकर हो।
(काव्या अपना बैग उठाती है और जाने लगती है।)
(SCENE 3: रोहन का जलवा (The Act))
रोहन: (बैठे-बैठे) रुको काव्या!
काव्या: (मुड़कर) क्या है?
रोहन: (अचानक अपना चश्मा उतारता है, उसकी बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह बदल जाती है। वो एकदम गंभीर और शालीन हो जाता है।)
रोहन (गंभीर, भारी और सुलझी हुई आवाज़ में): "काव्या जी, बैठिये। गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। माफ़ कीजियेगा मैं लेट हो गया। दरअसल, रास्ते में एक बुजुर्ग महिला सड़क पार कर रही थीं, उन्हें मदद की ज़रूरत थी। बड़ों का सम्मान ही तो हमारा धर्म है, है ना?"
SFX: (हल्का सॉफ्ट संगीत)
काव्या: (हैरान होकर) यह... यह क्या था?
रोहन: (वापस अपने चुलबुले अंदाज़ में) यह था "संस्कारी रोहन"। कैसा लगा? अभी तो मैंने पैर नहीं छुए, वरना तुम तो यहीं पिघल जातीं।
काव्या: (इम्प्रेस होकर, लेकिन छिपाते हुए) हम्म्। ठीक था।
रोहन: देखो बॉस, मैं एक्टर हूँ। तुम जैसा चाहोगी, मैं वैसा बन जाऊंगा। तुम्हारे कर्नल डैड को लगेगा कि मैं सीधा बॉर्डर फिल्म से निकलकर आया हूँ। लेकिन 30 हज़ार बहुत कम है यार। 40 कर दो? डन?
काव्या: (सोचते हुए) ठीक है। 40 हज़ार। लेकिन एक शर्त पर। यह पीली शर्ट दोबारा मत पहनना। और यह चश्मा... इसे जला दो।
रोहन: (हंसते हुए) जो हुकुम, मेरे आका! तो कब मिलना है ससुर जी से?
काव्या: इस संडे। शाम 7 बजे। मेरे घर। और खबरदार जो लेट हुए। एक मिनट भी लेट हुए तो कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल और पैसे ज़ब्त।
रोहन: (सैल्यूट करते हुए) यस मैम! संडे को रोहन की एंट्री होगी, और ऐसी होगी कि तुम्हारे डैड खड़े होकर तालियां बजाएंगे।
(SCENE 4: कैफ़े के बाहर - विदाई)
SFX: (सड़क का शोर)
काव्या: यह लो एड्रेस। और याद रखना, मेरा नाम काव्या है, "डार्लिंग" या "बेबी" नहीं।
रोहन: ओके काव्या जी। वैसे, एक टिप दूँ?
काव्या: क्या?
रोहन: (मुस्कुराते हुए) कभी-कभी शीशे में देख लिया करो। गुस्से के बिना तुम शायद अच्छी लगोगी।
(काव्या कुछ बोलने ही वाली होती है कि रोहन वहां से एक ऑटो रोकता है।)
रोहन: (चिल्लाते हुए) ए ऑटो! अँधेरी चलेगा क्या? मीटर से? (काव्या की तरफ मुड़कर) बाय बॉस! संडे को मिलते हैं!
(रोहन ऑटो में बैठकर चला जाता है।)
काव्या: (सिर हिलाते हुए) पागल है पूरा। पता नहीं मैंने क्या मुसीबत मोल ले ली। लेकिन... (हल्का मुस्कुराते हुए) एक्टिंग तो अच्छी करता है। शायद पापा को बेवकूफ बना ले।
सूत्रधार: काव्या ने सौदा तो पक्का कर लिया, लेकिन उसे नहीं पता था कि जिस लड़के को उसने सिर्फ़ एक 'एक्टर' समझा है, वो उसकी स्क्रिप्ट में ऐसे डायलॉग जोड़ने वाला है जो उसने कभी लिखे ही नहीं थे।
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