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छोरी

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Funtel
21 Mar 2026

आधी रात का समय था। जंगल से आती जंगली सियारों के रोने की आवाज अचानक बहुत डरावनी महसूस होने लगी थी शायद उनके स्वर में कोई अनजान स्वर आकर मिल गया था। एक ऐसा डरावना स्वर जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप उठे।

 

वो डरावनी आवाज सुनकर अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही रोशनी अचानक चौंक कर उठ जाती है। आंख खुलते ही उसे अपने कमरे में अंधकार और दमघोंटू धुआं फैला नजर आता है। रोशनी समझ नहीं पा रही थी कि ये धुआं अचानक कहां से आ गया है। तभी वहां पर कमरे में लगी लालटेन जल उठती है और धुंधली सी रोशनी के पार उसे एक आकृति नजर आती है। जिसका आकार छत के लगभग बराबर था। भयानक चेहरा सर पर सींग और शरीर से टपकता काला चिपचिपा घिनौना पदार्थ जिसके कारण एक पल भी उसकी ओर देख पाना संभव नहीं लग रहा था। उस आकृति को अपने कमरे में खड़ा देख एक पल को रोशनी की भय से धड़कने रुकने लगती है। तभी उस डरावने जीव की आवाज कमरे में गूंज उठती है।

 

जिन्न (भयानक हंसी) : हा हा हा हा हा हा। बहुत खूबसूरत हो तुम। आ जाओ, मेरे पास आ जाओ। 

 

रोशनी (डरी हुई, रोती हुई) : नहीं मुझे छूना मत…; छी..! कौन हो तुम..? बापू, बापू। बचाओ मुझे, बचाओ बापू। 

 

नैरेटर : वो भयानक जीव रोशनी की तरफ बढ़ता है लेकिन तभी रोशनी के चारों तरफ आग का गोल घेरा बन जाता है और जिन्न उसके अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है। 

 

जिन्न (गुस्से में) : हम्ममम, कब तक तू ऐसे मुझ से बचती रहेगी। बहुत जल्दी तुझे अपने साथ ले जाऊंगा मैं। हुह्ह्ह। कोई नहीं बचा पाएगा तुझे मुझसे। कोई नहीं। हा हा हा हा हा हा। 

 

नैरेटर : उस भयानक दिखने वाले जिन्न का रूप और ज्यादा भयंकर हो गया था। मोम की तरह पिघलते हुए उसने खुद को आग के घेरे के चारों तरफ फैला लिया, बीच में रोशनी घबराई हुई अकेली अपने बिस्तर पर बैठी थी। डर के मारे उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। धीरे-धीरे उसके चारों तरफ जल रही वह आग जो उसकी रक्षा कर रही थी, वो धीरे-धीरे कर बुझने लगी और वह जिन्न रोशनी के बहुत पास आने लगा लेकिन जैसे ही उसने रोशनी को छूने की कोशिश की, वहां आग का एक भयंकर विस्फोट हुआ और रोशनी की नींद टूट गई। 

 

रोशनी (डरी हुई हांफकर) : ये, ये सपना था। लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे वो जो भी कुछ था बिल्कुल सच था।

 

नैरेटर : डर के मारे उसका पूरा शरीर पसीने से भीग गया था और सांसे तेज हो गई थी तभी उसने देखा कि उसके कमरे की लालटेन सच में जली हुई है और एक धुआं धीरे धीरे कर उसके कमरे से गायब हो रहा है। 

 

रोशनी (डरी हुई) : मुझे नहीं लगता कि ये बस एक सपना था। पता नहीं क्यों लेकिन बहुत घबराहट हो रही है आज मुझे। बापू भी कमरे में नहीं है। बापू, बापू कहां हो आप।  

 

 नैरेटर: घर में रोशनी के बापू का एक कमरा था जहां पर वह अपनी पूजा पाठ किया करते थे। 

 

रोशनी: जरूर अपने कमरे में पूजा पाठ कर रहे होंगे। मैं वही जाकर देखती हूं।

 

रोशनी उठकर उनके कमरे की तरफ जाती है, लेकिन दरवाजा हल्का बंद था तो उसे कमरे के बाहर से बापू दिखाई नहीं देते तो वो सीधी कमरे के अंदर चली जाती है।

 

रोशनी (डरी हुई) : बापू तो यहां पर भी नहीं हैं। इतनी रात को अचानक मुझे बताए बिना कहां चले गए..?

 

खाली कमरे में अपने पिता को न पाकर रोशनी अब और भी ज्यादा परेशान नजर आ रही थी तभी रोशनी के पिता का शिष्य जो हमेशा उसके पिता के साथ उनके घर में ही रहता था, कमरे के अंदर आ गया । 

 

शिष्य (घबराया) : अरे, तुम। त त तुम यहां क्या कर रही हो। गुरु जी ने मना किया था ना तुम्हे इस कमरे में आने को। मैं थोड़ी देर के लिए पानी पीने क्या गया, तुम अंदर आ गई। 

 

रोशनी (डरी हुई) : हां मैं जानती हूं कि बापू ने मुझे इस कमरे में आने के लिए मना किया है लेकिन मैंने बहुत बुरा सपना देखा, ऐसा लग रहा है कि कुछ बहुत बुरा होने वाला है। मुझे बताओ बापू कहां पर हैं। 

 

शिष्य (घबराया) : अभी वो घर पर नहीं हैं, तुम जाओ और जाकर सो जाओ। जाओ। 

 

रोशनी (डरी हुई) : नहीं, तुम मुझे बताओ, बापू कहां हैं। वो किसी मुसीबत में हैं ना। देखो अगर तुमने मुझे नहीं बताया ना तो मैं खुद उन्हें ढूंढने के लिए घर से बाहर चली जाऊंगी। 

 

शिष्य (घबराया) : नहीं, वो बाहर नहीं हैं। 

 

रोशनी (डरी हुई गुस्से में) : तो फिर कहां हैं। ठीक है मत बताओ, मैं जा रही हूं। बाहर जाकर खुद ढूंढ लूंगी उन्हें। 

 

शिष्य (हड़बड़ाकर) : रुको, वो, वो अपनी साधना के लिए गए हैं। आज अमावस्या का दिन है और आज तो वो शमशान … 

 

रोशनी (शॉक्ड) : शमशान? क्या? इतनी रात को पिताजी शमशान में क्या कर रहे हैं। श्मशान में कौन सी साधना होती है..? अब तो मैं जानकर ही रहूंगी ये सब क्या चल रहा है..?

 

शिष्य (हड़बड़ाकर) : अरे, आज अमावस्या है ना तो खास पूजा होती है शमशान में। तुम्हें बोला ना अंदर जाकर सो जाओ। 

 

रोशनी (मन में घबराई) : अभी इसकी बात नहीं मानी तो ये मुझे बाहर जाने नहीं देगा। 

 

रोशनी : ठीक है मैं अपने कमरे में जाकर सो रही हूं। बापू आ जाएंगे तो मेरे कमरे में भेज देना। तुम दरवाज़ा बंद कर लो। 

 

रोशनी कमरे से बाहर निकल गई और उसके बापू के शिष्य ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया, रोशनी ने बिना आवाज के बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी। वो इस तरह दबे पांव घर से निकली कि किसी को भनक भी नहीं हुई। आधी रात के पहर वो सीधी शमशान में पहुंची जहां उसे दूर से ही आग की लपटों दिखाई पड़ रही थीं और पास में ही उसके पिता बैठे मंत्रों का जाप करते दिखाई दे रहे थे।

 

उनके पास एक लड़की का मृत शरीर पड़ा हुआ था। हर तरफ खून ही खून फैला दिखाई दे रहा था और उसके पिता एक मानव खोपड़ी को रक्त से नहलाते हुए शैतानी हंसी हंस रहे थे।  जमीन पर तंत्र मंत्र का सामान रखा देख और पिता को इस तरह हंसते देख रोशनी की समझते देर न लगी कि वह कोई  तांत्रिक क्रिया कर रहे है। 

तांत्रिक (क्रिपी स्माइल) : हा हा हा, बस कुछ दिन और। बस कुछ दिन और ये खूनी खेल चलेगा उसके बाद मैं मुक्त हो जाऊंगा, मुक्त हो जाऊंगा हमेशा हमेशा के लिए। हा हा हा हा हा। 

 

 ये सब देखकर और अपने पिता की बातें सुनकर रोशनी के होश उड़ गए। 

 

रोशनी: ये सब क्या हो रहा है..? बापू ये क्या कर रहे हैं…! मेरे बापू इस तरह किसी की जान नहीं ले सकते जो कुछ मैने देखा जरूर ये कोई भयानक सपना है।

 

वो भागती हुई अपने बापू के पास जाती है और अपने बापू को आवाज लगाती है, अपनी बेटी को वहां देखकर तांत्रिक हैरान रह जाता है 

 

तांत्रिक (हड़बड़ाकर) : त त तू, तू यहां क्या कर रही है और तुझे कैसे पता चला कि मैं यहां पर हूं। यह सब भूल जा और जा घर चली जा तुझे यहां नहीं आना चाहिए था

 

रोशनी (शॉक्ड) : वह सब छोड़िए बापू लेकिन आप इतनी रात को शमशान के भीतर क्या कर रहे हैं, और यह किसका मृत शरीर पड़ा है यहां पर। कह दीजिए कि जो कुछ भी मैंने अभी अपनी आंखों से देखा वह सब झूठ है कोई बुरा सपना है बापू..! क्या वाकई आपने इस लड़की की जान ली है..? 

तांत्रिक (हड़बड़ाकर) : न न नहीं, मैंने किसी को नहीं मारा। इसकी  बलि तो इसके घर वालों ने खुद दी है। तुझे तो पता ही है ना इस गांव के जंगली लोग उनके लिए छोरियों की कोई कीमत नहीं उनके छोरे ही उनके लिए सब कुछ है।

 अपने छोरे की जान बचाने के लिए खुद अपनी लड़की को यहां लेकर आए थे वह लोग मेरा कोई दोष न है।

 

रोशनी (आंखों में आंसू ) : नहीं बापू, कोई अपनी बेटी की बलि थोड़ी ना दे सकता। अपना पाप छुपाने के लिए एक बार फिर से कहानी सुना रहे हो आप मुझे आपकी रोशनी अब उतनी छोटी बच्ची नहीं रही कि आप उसे परियों की कहानी सुना कर बहला देंगे। जो आपने कहा वो सच नहीं है, वो सच नहीं है बापू। आप तो बस पूजा पाठ करके लोगों का भला करते थे। अगर इस गांव के लोग जंगली हैं और उनके लिए उनकी बेटियों की कोई कीमत नहीं ,आप तो उन्हें गलत काम करने से रोक सकते थे ना बापू ।आप भी तो एक बेटी के पिता हैं।  अपने क्यों किसी को अपनी बेटी की बलि देने दी, और आप यहां आधी रात को क्या कर रहे हैं..? आपने उन लोगों को रोका क्यों नहीं। ये सच नहीं है बापू। आप मुझे सच-सच बताइए यह सब क्या हो रहा है, मुझे मेरे सवालों का जवाब चाहिए अपने सवालों का जवाब लिए बिना मैं यहां से लौट कर नहीं जाऊंगी..? आपको मेरी कसम है बापू सच बोलिए।

 

तांत्रिक (आंखों में आंसू, ) : ये तूने क्या किया, अपनी कसम क्यों दी तूने मुझे। देख बेटा, मैं ये जो भी कर रहा हूं ना, तेरे अच्छे के लिए ही कर रहा हूं। जा चली जा यहां से। मैंने कहा ना भूल जा तूने यहां जो कुछ भी देखा उसे एक बुरा सपना समझ कर भूल जा।

 

रोशनी (आंखों में आंसू, ) : क्या, आप ये सब मेरे लिए कर रहे हो लेकिन आपको मेरे लिए किसी की बलि देने की क्या जरूरत पड़ गई। मैं किसी की मौत का बोझ अपने ऊपर नहीं लेना चाहती। सच सच बताइए आखिर यह सब क्या हो रहा है, क्यों किया आपने ऐसा। बोलिए, जवाब दीजिए मुझे। 

 

तांत्रिक (आंखों में आंसु) : बेटी, इस सब का जिम्मेदार मैं हूं।

मैं तो पूजा पाठ करके ही अपना जीवन जी रहा था। एक रोज प्सुबह के चार बजे मैं जंगल में पूजा के लिए फूल फल वगैरा लेने के लिए गया दिन अभी निकला नहीं था हर तरफ अंधेरा ही दिखाई दे रहा था तभी मुझे एक साधु जैसा दिखने वाला आदमी एक पेड़ के नीचे बैठा दिखाई दिया। जो अकेले में अपने आप से कुछ बड़बड़ा रहा था। मुझे लगा कि शायद नहीं मेरी मदद की जरूरत होगी इसीलिए मैं उनकी तरफ बढ़ गया।

 

रोशनी का पिता : बाबा कौन है आप आज से पहले तो आपको कभी इस जंगल में नहीं देखा रास्ता भटक गए हैं क्या..?

साधु: हंसते हुए भटका नहीं अब तो मार्ग मिला है मेरे पास वह शक्तियां हैं कि मैं आंख बंद करके वो काम कर सकता हूं जो तुम खुली आंखों से नहीं कर सकते। आंखें बंद करके यहां बैठे-बैठे तुम्हारा भूत भविष्य वर्तमान सब बता सकता हूं भूत पिशाच ईश्वर मुझे किसी का भय नहीं। 

 

रोशनी का पिता: क्या बात कर रहे हैं। जरूर आपका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। इस संसार में सबसे शक्तिशाली ईश्वर है उसकी शक्ति से आगे कुछ भी नहीं..!

 

बूढ़ा साधु ( हंसते हुए): ईशवर हा ह ह..! पुजारी होना तुम मंदिर में ..? बरसों से पूजा पाठ कर रहे हो क्या दिया तेरे ईश्वर ने तुझे..? तेरे दो वक्त के भोजन का भी ठिकाना नहीं है  ।एक बेटी है तेरी उसके अलावा संसार में तेरा कोई नहीं उस बेटी को भी तेरे भगवान ने जानलेवा बीमारी दी है।तेरा ईश्वर बचा नहीं पाएगा उसे। अगले 2 साल के भीतर हमेशा हमेशा के लिए तुझे छोड़कर चली जाएगी वह। और तू ऐसे ही उसके आगे घंटी बजाता खड़ा रह जाएगा। 

 

रोशनी का पिता: मैंने तो आपको अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया आप मेरे विषय में इतना सब कुछ कैसे जानते हैं..? कोई जादूगर है क्या..?

 

बूढ़ा: हा हा हा..! लगता है तुमने मेरी बातों को ध्यान से सुना नहीं मैं कोई जादूगर नहीं। बल्कि तंत्र का महा ज्ञान रखने वाला तांत्रिक हूं। भगवान को छोड़ो और मेरे साथ तंत्र की साधना करो तुम्हें वह सब हासिल होगा जिसकी तुमने कामना की है। अपनी बेटी की जान बचाना चाहते हो ना..?

 

तुम्हारी बीमारी का  किसी भी वैद्य के पास कोई तोड़ नहीं मिल रहा था इसलिए जब उसने तुम्हारी बीमारी को ठीक करने के बारे में कहा तो मैं उसकी बातों में आ गया और तंत्र साधना करने के लिए तैयार हो गया।

उस साधु ने मुझे बताया कि उसने अपनी तंत्र विद्या से एक जिन को साथ रखा है और वहीं जिन अदृश्य रूप में 24 घंटे उसके साथ रहता है। उसे दिन की मदद से ही वह किसी का भी भूत भविष्य वर्तमान छुट्टियों में पता लगा सकता है और कुछ भी पा सकता है जिनके पास ऐसी असीम शक्तियां हैं जिसकी मदद से कुछ भी संभव नहीं यहां तक की उन्होंने मुझे आश्वासन दिलाया कि तुम्हारी बीमारी भी चुटकी बजाते ही सही हो सकती है बस मैं सोच लिया था कि अब मुझे भी भगवान की नहीं शैतान की पूजा करनी है ।

बाबा के सानिध्य में मैंने तंत्र साधना करना शुरू कर दिया । देर रात जब पूरा गांव सो जाता रात के 2:00 बजे मैं जंगल में जाकर उस बूढ़े से तंत्र की विद्या सीखता। उसने मुझे तंत्र के गहरी से गहरी विधियां समझाई और डरावनी काली शक्तियों को अपने बस में करने के तरीके भी बताएं। बाबा को ही में अपना गुरु अपना भगवान समझने लगा था एक दिन बाबा अचानक से गायब हो गए और उसे दिन के बाद उन्होंने जंगल में मुझसे मिलना बंद कर दिया मुझे यही समझ में आया कि शायद मेरी शिक्षा पूरी हो गई है इसलिए अब बाबा वहां नहीं आते। 

 

रोशनी के पिता को जंगल में मिला वह बूढ़ा आदमी कौन था आखिर किस चक्र में फंसा है वह..? क्या तंत्र विद्या सिखा रहा वह बूढ़ा वाकई में रोशनी के पिता की मदद करना चाहता है या उसकी मंशा कुछ और है..? बिना कुछ कहे बिना कुछ बताए अचानक से उसका गायब हो जाना क्या इन सब के पीछे भी कोई गहरा राज है ??ऐसे ही अनेक सवालों के जवाब जानने के लिए आपको कहानी का अगला भाग देखना होगा इसलिए जुड़े रहिए हमारे साथ कहानी के अगले भाग में।

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