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छोरी

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Funtel
21 Mar 2026

रोशनी का पिता: बाबा के अचानक से गायब हो जाने के बाद मैंने बाबा की दिखाई भी तंत्र विद्या होगा अभ्यास करना शुरू किया उनकी सिखाई तंत्र विद्या बाकी सरदार थे मेरा किया हुआ कोई भी तंत्र खाली नहीं जा रहा था अपने ऊपर अटूट विश्वास हो चला था मुझे कि मैं अपनी तंत्र शक्ति से किसी का भी भूत और वर्तमान बदल सकता हूं बस उसे इच्छा में से गलती हुई और अपनी शक्ति के आवेश में मैंने अपनी सारी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए जिन को बुलाने का साधना शुरू करने का मन बनाया। हफ्तों तक लंबी चली कठोर साधना के बाद एक रात जिन्न  प्रकट हुआ ।उसके चारों तरफ अग्नि का एक घेरा बना हुआ था। जिन्न को अपने समक्ष देख कर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, मुझे लगा कि मैंने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा खजाना पा लिया है। मेरी शक्तियां अब असीम हो जाएंगी। खुशी के मारे मै ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। 

 

तांत्रिक (सनकी खुश) : मेरी साधना, मेरी साधना सफल हो ही गई। अब तुम हमेशा मेरे गुलाम बन कर रहोगे, जो मैं चाहूंगा वह सब तुम्हें मुझे देना पड़ेगा। मेरी शक्तियां असीम हो जाएंगी, हा हा हा। 

 

जिन्न (भयानक आवाज़) : मूर्ख तांत्रिक, तेरा खिलौना नहीं हूं मैं। मैं कोई भूत प्रेत नहीं हूं जो तेरा गुलाम बन कर रहूंगा। जिन्न हूं मैं, तूने मेरी साधना की और तू यह भी नहीं जानता कि जिन्न को साधने के बाद उसे खुश कैसे किया जाता है। जिस बूढ़े तांत्रिक ने तुझे तंत्र की विद्या दी है। उसने कोई एहसान नहीं किया तुझपर। अपने स्वार्थ के अधीन होकर उसने मुझे मेरे लोक से बुला तो लिया किंतु अब मुझे प्रसन्न रख पाने का साहस नहीं बचा था उसके अंदर। वह जानता था कि अब भी अगर मेरी मांग पूरी न हुई तो मैं उसकी जान लेकर उसे समाप्त कर दूंगा ।इसलिए उसने अब मुझे तुम्हें सौंपने का मन बनाया और फिर वो रोज जंगल में आकर तुम्हे तंत्र विद्या सिखाने लगा ताकि तू भी अपनी समस्या के समाधान के लिए मुझे आने का न्यौता दे और उसकी जान बच सके।अब मुझे खुश करने की जिम्मेदारी तेरी है । तुझे पता है ना  जिन्न को कुंवारी लड़कियों से कितना मोह होता है,।अपनी बेटी की जान बचाना चाहता है ना तु तो ठीक है इक्कीस कुंवारी लड़कियों की बलि चाहिए मुझे । हर अमावस्या को एक नई लड़की।

 

तांत्रिक: नहीं मैं कोई बली नहीं देने वाला मैं तुम्हें यहां सिर्फ इसलिए बुलाया क्योंकि मैं अपनी बेटी की बीमारी से उसे मुक्त करना चाहता था।

 

जिन्न : तेरी बेटी की बीमारी तो ठीक नहीं होगी हां लेकिन अगर तूने मुझे एक एक करके लड़कियां लाकर नहीं दी तो मैं हमेशा हमेशा के लिए तेरी बेटी के शरीर पर कब्जा कर लूंगा और फिर तेरी बेटी के साथ वह होगा जो एक पिता कभी भी अपनी आंखों से नहीं देख सकता।

 

तांत्रिक (हकलाकर) : क क, क्या, क्या मतलब है तुम्हारा। 

 

जिन्न: तेरे पास सोचने का समय नहीं है। जितनी लड़कियों की बली तू देगा उनकी आत्मा पर मेरा कब्जा हो जाएगा। और फिर वो मरकर भी हमेशा के लिए मेरी ही रहेंगी।और हां अगर तू मुझे कुंवारी लड़कियों की बाली देगा तो मैं वादा करता हूं तेरी बेटी बिल्कुल स्वस्थ हो जाएगी और हमेशा तेरे साथ रहेगी। सोच ले तुझे अपनी बेटी की रक्षा करनी है या गांव की बाकी लड़कियों की। 

 

तांत्रिक (डरा हुआ ) : क्या, न न नहीं। तुम्हें कुंवारी लड़की की बलि चाहिए ना तो मैं तुम्हें लाकर दूंगा लेकिन मेरी बेटी नहीं। मैं तुमसे वादा करता हूं, तुम्हें इक्कीस कुंवारी लड़कियों की बलि मैं दूंगा, तुम्हें हर अमावस को एक लड़की मिलेगी लेकिन मुझसे वादा करो कि तुम मेरी बेटी को कुछ नहीं करोगे। 

 

जिन्न (भयानक आवाज़) : मुझे तो बस कुंवारी लड़की चाहिए। अब चाहे वह तुम्हारी बेटी हो या किसी और की। लेकिन हां अगर अपने वादे से मुकरे तो वह तुम्हारी बेटी की आखिरी रात होगी और मैं जानता हूं तुम ऐसा नहीं चाहोगे इसलिए जो वादा किया है, वो हर हाल में पूरा करना। 

 

तांत्रिक को चेतावनी देकर जिन्न वहां से ओझल हो गया लेकिन तांत्रिक अब डर चुका था क्योंकि वह जानता था कि अगर उसने जिन्न को कुंवारी लड़कियों की बलि नहीं चढ़ाई तो वो उसकी बेटी को ही अपना शिकार बना लेगा। 

 

तांत्रिक (घबराया हुआ) : कुंवारी लड़कियों की बलि देने के लिए कुछ करना होगा। कहां से लेकर आऊंगा मैं इतनी सारी कुंवारी लड़कियां। गांव के लोगों के मन में डर फैलाना होगा। और उसी डर का फायदा उठाना होगा मुझे। 

रोशनी (आंखों में आंसू) : अगर यह सब सच है तो गांव में डायन की कहानी और उन बच्चों की मौत, वो सब क्या था बापू। 

 

तांत्रिक (अटकते हुए) : वो, वो सब मैंने ही किया था बेटी। मैंने ही अपने काले जादू से जान ली थी उन सबकी और गांववालों को मुझ पर यकीन हो इसलिए डायन की झूठी कहानी बनाई ताकि अपने बेटों को बचाने के लिए वो अपने बेटियों की बलि चढ़ाने के लिए अपनी इच्छा से तैयार हो जाए।

 

रोशनी (आंखों में आंसू) : मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था बापू कि आप ऐसा करोगे। जन्म और मृत्यु पर किसी का जोर चलता है क्या मैं ईश्वर से जितनी जिंदगी लिखवा कर लाई थी उतना ही तो जीवन मिलेगा ना मुझे अपने विधि के विधान को बदलने की कोशिश की और उसके लिए इतनी मासूम बच्चियों को बलि पर चढ़ा दिया, जिस तरह आपने अपनी बेटी के बारे में सोचा, उस तरह कभी उन सब बेटियों के बारे में भी सोचा होता। नहीं, आप मेरे बापू हो ही नहीं सकते। नहीं हो सकते। उन बच्चियों की मौत के जिम्मेदार जितने उनके खुद के मां-बाप हैं उससे कई गुना ज्यादा आप भी हैं यह गांव यह समाज बेटियों के जीने लायक है ही नहीं। अरे कैसे मां-बाप है वह जो अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी बेटियों को कुर्बान करने को तैयार हो गए ??क्या एक बेटी के अंदर जीवन नहीं होता क्या वह माता-पिता का अंश नहीं होती?? क्या एक बेटा ही सब कुछ है ??शर्म आती है मुझे आप सबके ऊपर ऐसे समझ में जीने से तो अच्छा मैं मर ही जाऊं।

 

तांत्रिक (रोते हुए) : मुझे माफ कर दे बेटी लेकिन मैंने जो भी किया तेरी खातिर किया वरना मैं कभी किसी की बलि नहीं चढ़ाता, एक बार मुझे माफ कर दे, बस तीन अमावस की रात और हैं, बस तीन बलि और देनी हैं मुझे, उसके बाद सब ठीक हो जाएगा, उसके बाद ना तुझे कोई खतरा होगा और ना मुझे किसी और की बलि देनी पड़ेगी। 

 

रोशनी (आंखों में आंसू) : छी बापू, अभी भी आप यही सोच रहे हैं। अभी भी उन तीन मासूमों की जान लेना चाहते हैं आप। नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। मेरी वजह से पहले ही इतनी छोरियां अपनी जान खो चुकी हैं लेकिन सब कुछ जानने के बाद मैं और तीन मासूमों के खून का पाप अपने ऊपर नहीं लेना चाहती। उनकी मौत की जिम्मेदार नहीं बनना चाहती मैं। मेरी वजह से उनकी जान जाए, इससे अच्छा तो मैं खुद ही अपनी जान ले लेती हूं। 

 

तांत्रिक (आंखों में आंसू, घबराया) : ये, ये क्या बोल रही है बेटी तू। नहीं, तू ऐसा कुछ नहीं करेगी। कुछ नहीं करेगी तू ऐसा। 

 

नैरेटर : रोशनी ने यज्ञ कुंड के पास पड़ा धारदार चाकू उठाया जिससे उसके बापू ने गांव की लड़की की बलि दी थी। अभी भी उस पर उसका खून लगा हुआ था। 

 

तांत्रिक (आंखों में आंसू, घबराया) : चाकू छोड़ दे बेटी, चाकू छोड़ दे। 

 

रोशनी (आंखों में आंसू) : मैं जा रही हूं बापू लेकिन अगर आप मुझसे प्यार करते हो ना तो वचन दो मुझे कि इसके बाद किसी की जान नहीं जाएगी। अगर मेरे जाने के बाद एक और जान चली गई ना तो मेरी यह आत्मा कभी मुक्त नहीं हो पाएगी। 

 

तांत्रिक (आंखों में आंसु) : नहीं, नहीं बेटी नहीं। 

 

नैरेटर : रोशनी ने रोते हुए अपनी गर्दन पर चाकू रखा और खुद को खत्म कर लिया। तांत्रिक के सामने उसकी बेटी ने अपने हाथों से खुद की जान ली लेकिन वह कुछ नहीं कर पाया। वो बौखलाया, अपनी बेटी के जाने के बाद उसे एहसास हुआ कि उसने कितनी मासूम बच्चियों को अपने कारण मौत के घाट उतार दिया। 

 

तांत्रिक (ज़ोर से रोते हुए) : ये तूने क्या किया मेरी बच्ची। तेरे लिए मैंने यह सब किया। इतनी बलियां तेरे लिए दी और तू ही मुझे छोड़ कर चली गई। लेकिन तूने जो कहा है अब तेरा बापू वही करेगा। तू चाहती है ना कि तेरा बापू उन लड़कियों की जान बचाए तो अब मैं  किसी की जान नहीं जाने दूंगा मैं तुझसे ये वादा करता हूं।

तांत्रिक की आंखों के सामने उसकी बेटी का मृत शरीर पड़ा था। वो उसे हाथों में भरकर बिलख बिलख कर रो रहा था, इस आस में कि शायद वह वापस आ जाए लेकिन वह अब बहुत दूर जा चुकी थी मगर जो काम वो अपने बापू को सौंप कर गई थी, अब वो उसे करना था। अपनी बेटी के जाने के दुख में वो पूरी रात शमशान में ही बैठा रहा, सुबह हुई तो उसने अपनी बेटी की चिता को अग्नि दी। पास की नदी पर स्नान करके वो सीधा गांव पहुंचा। गांव वाले भी उसे इतनी सुबह गांव में देखकर हैरान हो गए। 

 

बिरजू (कंफ्यूज़) : बाबा, आप इतनी सुबह-सुबह गांव में। क्या हुआ। सब ठीक तो है ना। कल रात की बलि स्वीकार तो हुई ना। कुछ गलती तो नहीं हो गई। मेरे छोरे को तो कुछ ना होगा

 

तांत्रिक (दुख में) : गलती तो बहुत बड़ी हो गई है। तुम सब मुझे माफ कर दो। ये सब, ये सब मेरी वजह से हुआ। 

 

मोहन : आप क्या बोल रहे हैं बाबा, हमें आपकी कोई भी बात समझ नहीं आ रही। जो भी बात है साफ-साफ कहिए ना। 

 

तांत्रिक (दुख में हकलाते हुए) : तुम्हारे गांव में कभी  किसी डायन का श्राप था ही नहीं वह डायन वह बलिया वह सब झूठ था । मैने तुम्हें जो कहानी सुनाई वो सब मेरा मनगढ़ंत झूठ था मैंने ही तुम्हारे गांव के छोरो पर मृत्यु तंत्र छोड़ा ताकि वो मौत के घाट उतर जाएं और फिर  तुम्हारे मन में उस श्राप का डर डाल कर तुम्हे अपनी बेटियों की बलि देने के लिए मजबूर किया। 

 

मोहन (गुस्से) : क्या, यह सब क्या बकवास कर रहे हो आप। अगर ये सच है ना तो याद रखना हमसे बुरा कोई नहीं होगा। गांव के चौराहे पर जिंदा जला देंगे तुम्हें। सच सच बता आखिर यह सब क्या चल रहा है। 

 

तांत्रिक ने उन लोगों के आगे सारा सच उगल दिया, गांव वाले सच जानकार उसे मारने के लिए दौड़ पड़े लेकिन तभी तांत्रिक बोला। 

 

तांत्रिक (दुख में हकलाते हुए) : अगर तुम लोगों को मुझे मारना है तो मार डालना लेकिन अभी मुझे तुम्हारी बेटियों को बचा लेने दो। मेरी बेटी ने मुझसे वचन लिया है कि मैं उन्हें बचाऊं वरना उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलेगी। मैं तुमसे वादा करता हूं कि तुम्हारे गांव के किसी एक भी इंसान पर कोई आंच नहीं आने दूंगा। मुझे मेरी क्रिया कर लेने दो, उसके बाद चाहे मुझे अपने हाथों से मार डालना। 

 

तांत्रिक को अगली अमावस्या तक का इंतजार करना था। अगली अमावस की रात को वो श्मशान घाट में गया और उसने अपनी क्रिया करनी शुरू की। यज्ञ कुंड में वो सामग्री डालता रहा लेकिन बलि देने के स्थान पर उसने अपनी हथेली पर चीरा लगाकर यज्ञ कुंड में अपने रक्त की कुछ बूंदें टपकाई तभी वहां बहुत तेज रोशनी हुई और वो जिन्न तांत्रिक के सामने आकर खड़ा हो गया। वो बहुत गुस्से में था, उसकी आंखों में खून उतरा हुआ था। वो तांत्रिक की और बढ़ा। 

 

जिन्न (गुस्से में) : बलि कहां है मेरी। तूने तो मुझसे वादा किया था ना हर अमावस को मुझे बलि देता रहेगा। बलि कहां पर है। कुंवारी लड़की की बलि चाहिए मुझे। 

 

तांत्रिक (घबराया हुआ) : नहीं, पहले ही बहुत बड़ा पाप कर चुका हूं मैं। आगे तुझे और बलि देकर और पाप नहीं कर सकता। नहीं चाहिए मुझे तुझसे कुछ, चला जा यहां से। मेरी बेटी इस दुनिया से जा चुकी है अब मुझे कोई डर नहीं

 

जिन्न (भयंकर आवाज़, हंसते हुए, गुस्सा) : हा हा हा हा हा हा। तू मेरे जाल में फंस चुका है।मैं ऐसे नहीं जाने वाला। तुझे अब मुझसे कुछ नहीं चाहिए वह तेरी मर्जी है लेकिन अगर मुझे बलि नहीं मिली तो मैं तुझे ले जाऊंगा। हा हा हा हा हा हा। 

 

तांत्रिक : मैं तो वैसे भी खत्म हो चुका हूं लेकिन तेरा खात्मा करना अभी बहुत जरूरी है। अगर तुझे खत्म नहीं किया तो तू और बच्चियों की जिंदगी भी खराब करेगा। 

 

तांत्रिक ने कुछ मंत्रों को बोलना शुरू किया जो उर्दू भाषा के थे। उसने जैसे ही मंत्रों का उच्चारण करना शुरू किया, जिन्न बहुत ज्यादा गुस्से में आ गया, वो तांत्रिक की तरफ उसे खत्म करने के लिए बढ़ा लेकिन कोई शक्ति थी जो उसे तांत्रिक तक पहुंचने नहीं दे पा रही थी। तांत्रिक ने चीन की और देखा जिनके मार्ग में उसे अपनी बेटी का साया उसे खुद तक पहुंचने से रोकना हुआ नजर आया।

 

तांत्रिक की आंखों में आंसू डबडबाने लगे। अपनी बेटी को अपनी रक्षा में खड़े देख तांत्रिक का मनोबल और भी बढ़ गया था।मंत्रों को पढ़ते हुए तांत्रिक का शरीर के शरीर की सारी ताकत खत्म होती जा रही थी उसका शरीर मानो बेहद कमजोर होता जा रहा था।

जिन्न ने अपने शक्ति से श्मशान घाट में घूम रही अतृप्त आत्माएं को भी तांत्रिक की ओर मोड दिया जो अब  तांत्रिक पर हावी होने का प्रयास कर रही थी। लेकिन तांत्रिक को बार-बार अपनी बेटी का चेहरा नजर आ रहा था और उसी को अपनी हिम्मत बनाकर वो मंत्रों का उच्चारण करता जा रहा था। तांत्रिक की नाक कान और आंखों से खून बहने लगा था उसके सर में इतना तेज दर्द हो रहा था मानो उसका दिमाग फट जाएगा। लेकिन उसने मंत्रों को पढ़ना जारी रखा। पूरे डेढ़ घंटे तक उसने जिन्न के साथ वह लड़ाई लड़ी, और आखिरी मंत्र के साथ ही एक भयंकर विस्फोट हुआ जिसमें वो जिन्न वहीं पर नष्ट हो गया और उसके साथ ही तांत्रिक ने भी अपना दम तोड़ दिया। उसने अपने जीवन में कमाया हुआ सारा ज्ञान और सारी शक्तियां जिन्न को खत्म करने में झोंक दी थी ताकि वह अपनी बेटी से किया हुआ वादा पूरा कर सके और उसकी बेटी की आत्मा को मुक्ति मिल सके। 

 

 कहते हैं जन्म और मृत्यु पर किसी का जोर नहीं है जो इस संसार में आया है उसे एक दिन संसार छोड़कर जाना भी पड़ता है। एक वो पिता था जिसने अपनी छोरी के मोह में गांव की 18 छोरियों को बलि चढ़ा दिया तो दूसरी ओर  वह पिता थे जिन्होंने अपनी छोरियों को गाजर मूली समझकर छोरो की सलामती के लिए बलि चढ़ा दिया ।इस कहानी में कौन सही और कौन गलत इसका निर्णय हम आपके ऊपर छोड़ते हैं । कहानी तो खत्म हो गई है लेकिन अपने साथ छोड़ गई है ऐसे सवाल जिनके जवाब आज भी मिलने बाकी हैं ।

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