(शुरुआत)
[BGM: उदास और धीमी धुन (Melancholic Morning Music)]
नैरेटर: रात की बारिश थम चुकी थी, लेकिन नैना की ज़िंदगी का तूफ़ान अभी शुरू ही हुआ था। टूटी हुई स्कूटी और बर्बाद हुए फूलों के साथ जब वो सुबह अपनी दुकान 'खुशबू फ्लोरिस्ट' पहुंची, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि वहां एक और बुरी खबर उसका इंतज़ार कर रही है।
(दृश्य 1: नैना की फूलों की दुकान - सुबह का समय)
[SFX: झाड़ू लगाने की आवाज़। चिड़ियों की चहचहाहट। दुकान का शटर खुलने की आवाज़।]
नैना (गहरी सांस लेते हुए): "काका, जो फूल थोड़े भी ठीक हैं, उन्हें बुके (Bouquet) में लगा दीजिये। कल का नुकसान तो हो गया, लेकिन आज दुकान बंद नहीं रख सकते।"
काका (चिंतित आवाज़ में): "बिटिया, फूलों की चिंता छोड़ो... वो देखो, सुबह-सुबह कौन आया है। कोट-पैंट पहने कोई वकील लगता है।"
[SFX: चमड़े के जूतों की आवाज़ नज़दीक आती है।]
वकील (रूखी आवाज़ में): "क्या तुम ही नैना हो? इस दुकान की मालिक?"
नैना: "जी हाँ। कहिये, क्या बात है?"
वकील (कागज़ पकड़ाने की आवाज़ - Paper rustling): "ये लीगल नोटिस है। ये ज़मीन 'रॉयचंद ग्रुप' ने ख़रीद ली है यहाँ नया मॉल बनाने के लिए। तुम्हारे पास दुकान खाली करने के लिए सिर्फ़ 24 घंटे हैं।"
[SFX: एक तेज़ धक्का लगने जैसा संगीत (Shock sting)।]
नैना (घबराते हुए): "क्या? 24 घंटे? आप क्या कह रहे हैं? मेरे पिताजी ने ये दुकान 30 साल पहले ली थी। हमारे पास इसके कागज़ भी हैं!"
वकील: "वो लीज़ (Lease) के कागज़ थे, जो पिछले महीने ख़त्म हो चुके हैं। या तो कल सुबह तक दुकान खाली करो, या फिर 20 लाख रुपये जमा करो ज़मीन ख़रीदने के लिए। वरना बुलडोजर तैयार है।"
[SFX: जीप स्टार्ट होकर जाने की आवाज़।]
नैना (रोते हुए): "20 लाख? काका... मैं इतने पैसे एक दिन में कहाँ से लाऊंगी? अगर ये दुकान चली गयी, तो बाबा की यादें, हमारा घर... सब ख़त्म हो जायेगा!"
(दृश्य 2: रॉयचंद ऑफिस - कॉन्फ्रेंस रूम)
[SFX: ऑफिस का तेज़ माहौल। फ़ोन की घंटियाँ। टाइपिंग की आवाज़।]
विक्रम (गुस्से में फाइल पटकते हुए): "रोहन! उस ज़मीन का क्या हुआ? मुझे वो प्रोजेक्ट अगले हफ़्ते शुरू करना है। वो छोटी सी दुकान अभी तक वहां क्यों है?"
रोहन (डरते हुए): "सर, हमने नोटिस भेज दिया है। लेकिन... वो लड़की बहुत जिद्दी है। वो दुकान छोड़ने को तैयार नहीं है।"
विक्रम: "हर चीज़ की एक कीमत होती है रोहन। पता करो कौन है वो।"
[SFX: एक मैसेज टोन बजता है (Ting)।]
विक्रम (फ़ोन चेक करते हुए): "दादी का मैसेज... (पढ़ता है) 'विक्रम, अगर आज शाम तक तूने शादी के लिए हाँ नहीं की, तो मैं बोर्ड मेंबर्स की मीटिंग बुला रही हूँ। चेयरमैन बदलने के लिए।' Damn it!"
[BGM: तनावपूर्ण संगीत (Tension rises)]
विक्रम (खुद से): "चारों तरफ से मुसीबत! एक तरफ दादी की ज़िद, दूसरी तरफ वो ज़मीन का लफड़ा।"
रोहन: "सर, ये लीजिये उस दुकान मालिक की डिटेल्स। नाम है—नैना शर्मा।"
[SFX: फाइल पलटने की आवाज़।]
विक्रम: "नैना..." (अचानक रुकता है) "एक मिनट... ये फोटो..."
[BGM: फ्लैशबैक साउंड (Whoosh)। कल रात की एक्सीडेंट वाली आवाज़ें गूंजती हैं - "माफ़ी मांगो मिस्टर!"]
विक्रम (हैरानी और मुस्कराहट के साथ): "तो ये वही लड़की है? कल रात वाली? जो मुझे एटीट्यूड दिखा रही थी?"
रोहन: "जी सर? आप इसे जानते हैं?"
विक्रम (कुर्सी पर पीछे झुकते हुए, एक शातिर हंसी के साथ): "जानता नहीं हूँ रोहन... लेकिन अब जान जाऊंगा। किस्मत ने मुझे दो समस्याओं का एक ही हल दे दिया है।"
रोहन: "मतलब सर?"
विक्रम: "मुझे वो ज़मीन चाहिए, और उसे पैसे। मुझे एक नकली पत्नी चाहिए, और उसे अपनी दुकान। डील पक्की है।"
[SFX: कुर्सी से उठने की आवाज़।]
विक्रम: "रोहन, गाड़ी निकालो। हम अभी उस 'फूलवाली' से मिलने जा रहे हैं। और हाँ... एग्रीमेंट पेपर्स तैयार रखना।"
(दृश्य 3: नैना की दुकान - दोपहर)
[SFX: ट्रेफिक का शोर। नैना के सिसकने की आवाज़।]
नैना (भगवान की मूर्ति के सामने): "हे कान्हा जी, कोई रास्ता दिखाओ। मैं हार मान रही हूँ..."
[SFX: एक महंगी लग्ज़री कार आकर रुकने की आवाज़ (Smooth Engine stop)।]
काका: "नैना बिटिया... देखो, वही गाड़ी फिर आई है! कल रात वाली!"
नैना (आँसू पोंछते हुए बाहर देखती है): "ये... ये यहाँ क्यों आया है?"
[SFX: कार का दरवाज़ा खुलता है। विक्रम के भारी कदमों की आवाज़ पास आती है।]
विक्रम (भारी और रौबदार आवाज़ में): "मिस नैना। उम्मीद है अब तुम्हारे 'फूलों' से ज्यादा तुम्हें अपनी 'जमीन' की चिंता होगी।"
नैना (गुस्से में): "तुम? तो ये सब तुम्हारा किया धरा है? तुम मेरी दुकान छीनना चाहते हो?"
विक्रम: "मैं छीनने नहीं, देने आया हूँ। एक मौका।"
नैना: "कैसा मौका?"
विक्रम: "20 लाख रुपये। और ये दुकान हमेशा के लिए तुम्हारी। बदले में... तुम्हें मेरी एक छोटी सी मदद करनी होगी।"
नैना: "कैसी मदद?"
[BGM: ड्रामेटिक पॉज़। सस्पेंस म्यूज़िक पीक पर।]
विक्रम: "अगले 6 महीने के लिए... मिसेस विक्रम रायचंद बनने की एक्टिंग करनी होगी।"
नैना (हैरान): "क्या??"
नैरेटर: नैना की आँखों में गुस्सा था, और विक्रम की आँखों में जीत का नशा। क्या नैना अपनी इज़्ज़त और दुकान के बीच, इस अजीब सौदे को कबूल करेगी?
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