[BGM: एक तेज़ और रहस्यमयी आर्केस्ट्रा संगीत (Intro Theme)]
नैरेटर: मुंबई शहर... जहाँ हर रोज़ लाखों सपने बनते हैं और टूटते हैं। इस शहर में दो लोग रहते हैं। एक, जो आसमान की बुलंदियों पर है—विक्रम रायचंद। और दूसरी, जो ज़मीन पर रहकर भी आसमान छूना चाहती है—नैना। क्या होगा जब ये दो अलग दुनियाएं एक तूफ़ानी रात में टकराएंगी?
(दृश्य 1: रायचंद टावर - 40वीं मंज़िल)
[SFX: ऑफिस का शांत माहौल। ए.सी. की हल्की हमिंग (Humming)। एक काँच के गिलास में व्हिस्की डालने की आवाज़ (Clink)।]
[SFX: फ़ोन की घंटी बजती है।]
विक्रम (गहरी और नाराज़ आवाज़ में): "हैलो।"
दादी (फ़ोन पर): "विक्की! तूने फिर मेरी भेजी हुई लड़की को मना कर दिया? वो मिनिस्टर की बेटी थी!"
विक्रम (खिड़की के पास चलते हुए): "दादी, मुझे बिज़नेस डील में दिलचस्पी है, शादी की डील्स में नहीं। मुझे वो लड़कियाँ नहीं चाहिए जो मेरे क्रेडिट कार्ड से प्यार करें।"
दादी (सख़्ती से): "सुन ले विक्रम! अगर अगले महीने मेरी 75वीं सालगिरह तक तू अपनी पत्नी को लेकर घर नहीं आया, तो रायचंद ग्रुप का चेयरमैन पद... मिस्टर खन्ना को मिल जाएगा। ये मेरी आखिरी चेतावनी है।"
[SFX: फ़ोन कटने की आवाज़। विक्रम गुस्से में फ़ोन टेबल पर पटकता है।]
विक्रम (गुस्से में बड़बड़ाते हुए): "शादी... शादी... शादी! सब को सिर्फ़ मेरी आज़ादी छीननी है। मुझे कोई ऐसा चाहिए जो पत्नी होने का नाटक करे, लेकिन मेरी ज़िंदगी में दखल न दे।"
[SFX: बिजली कड़कने की ज़ोरदार आवाज़ (Thunder)।]
(दृश्य 2: मुंबई की सड़कें - मूसलाधार बारिश)
[SFX: बहुत तेज़ बारिश का शोर। गाड़ियों के हॉर्न। पानी के छींटे।]
नैना (स्कूटी स्टार्ट करने की कोशिश करते हुए): "अरे चल ना बसंती! प्लीज... आज नखरे मत दिखा। वो 50 बुके (Bouquets) डिलीवर करने हैं। अगर आज पेमेंट नहीं मिली, तो मकान मालिक दुकान से सामान बाहर फेंक देगा।"
[SFX: किक मारने की आवाज़ (Kick start sound)... फट-फट-फट... इंजन स्टार्ट होता है।]
नैना (राहत की सांस लेते हुए): "शुक्रिया भगवान जी! चलो, अब जल्दी पहुँचते हैं।"
[SFX: स्कूटी बारिश में चलने की आवाज़।]
नैना (गुनगुनाते हुए): "ज़िंदगी की यही रीत है... हार के बाद ही जीत है..." (अचानक डरते हुए) "अरे! ये सामने से कौन आ रहा है इतनी तेज़??"
(दृश्य 3: टक्कर)
[SFX: एक हाई-स्पीड लक्ज़री कार का इंजन (Vroom)।]
ड्राइवर (घबराते हुए): "सर! सामने स्कूटी है! ब्रेक... ब्रेक नहीं लग रहे!"
विक्रम (चिल्लाते हुए): "What the hell! गाड़ी घुमाओ!"
[SFX: टायरों के फिसलने की तीखी आवाज़ (Screech)। एक ज़ोरदार टक्कर (CRASH)। कांच टूटने की आवाज़।]
[BGM: सस्पेंस म्यूजिक, एकदम सन्नाटा छा जाता है, सिर्फ़ बारिश की आवाज़।]
नैना (दर्द में कराहते हुए): "आह... मेरा पैर... मेरी स्कूटी... हे भगवान, मेरे सारे फूल!"
[SFX: कार का दरवाज़ा खुलने की आवाज़। जूतों की भारी आवाज़ (Thud... Thud... Thud) कीचड़ में चलते हुए।]
नैना (गुस्से में खड़ी होते हुए): "दिखाई नहीं देता क्या? पूरी सड़क क्या तुम्हारे बाप की है?"
विक्रम (शांत लेकिन डरावनी आवाज़ में): "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी गाड़ी को छूने की?"
नैना (हैरान होकर): "क्या? अक्ल के अंधे हो क्या? तुमने मुझे ठोक दिया, मेरे सारे फूल बर्बाद कर दिए, और तेवर मुझे दिखा रहे हो?"
विक्रम (व्यंग्य से हंसते हुए): "फूल? (हंसता है) इन कचरे के ढेर जैसे फूलों के लिए तुम मेरी 5 करोड़ की गाड़ी के सामने आ गयीं? तुम्हें पता भी है मैं कौन हूँ?"
नैना (तेज़ आवाज़ में): "होंगे तुम कोई रईसज़ादे! लेकिन मेरे लिए मेरे फूल तुम्हारी इस लोहे के डिब्बे से ज़्यादा कीमती हैं। माफ़ी मांगो! अभी के अभी!"
[BGM: तनावपूर्ण संगीत (Intense Drama Music) बढ़ता है।]
विक्रम: "विक्रम रायचंद किसी के सामने नहीं झुकता। ड्राइवर! इसे चेक देकर इसका मुँह बंद करो।"
नैना (चेक को फाड़ने की आवाज़ - Rip sound): "ये लो अपना चेक! मुझे भीख नहीं, इन्साफ चाहिए। और सुन लो मिस्टर अकड़ू... आज तुमने मेरे फूलों को कुचला है, देखना एक दिन तुम्हारी ये अकड़ भी ऐसे ही कुचली जाएगी!"
विक्रम (पास आकर, धीरे से): "इंटरेस्टिंग... (Interesting). पहली बार कोई मुझसे डरा नहीं। चेहरा याद रहेगा तुम्हारा।"
नैरेटर: बारिश की उस रात, एक एक्सीडेंट ने दो तकदीरों को मिला दिया था। लेकिन क्या होगा जब विक्रम को पता चलेगा कि जिस लड़की को वो चेक फेंक कर आया है, वही उसकी सबसे बड़ी ज़रुरत बनने वाली है?
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