1 अध्याय १ — एक अजनबी की पहली रात FREE 2 अध्याय २ — दूसरी मुलाक़ात और कैथरीन लिंटन FREE 3 अध्याय ३ — खिड़की पर एक भूत FREE 4 अध्याय ४ — नेली डीन की कहानी शुरू FREE 5 अध्याय ५ — श्री एर्न्शॉ का अंतिम दिन FREE 6 अध्याय ६ — थ्रशक्रॉस ग्रेंज की पहली झलक FREE 7 अध्याय ७ — क्रिसमस का खाना और एक भयानक अपमान FREE 8 अध्याय ८ — फ्रांसिस की मृत्यु और हिंडली का पतन FREE 9 अध्याय ९ — "मैं हीथक्लिफ़ हूँ" FREE 10 अध्याय १० — एक अमीर अजनबी का बदला FREE 11 अध्याय ११ — एक झगड़ा और कैथरीन का पागलपन FREE 12 अध्याय १२ — पंखों के बीच पागल कैथरीन FREE 13 अध्याय १३ — इसाबेला का भागना FREE 14 अध्याय १४ — वुदरिंग हाइट्स में नेली की मुलाक़ात FREE 15 अध्याय १५ — आख़िरी मिलन और कैथरीन की मृत्यु FREE 16 अध्याय १६ — हिंडली की मौत और एक नया मालिक FREE 17 अध्याय १७ — छोटी कैथी और एक भूली हुई दुनिया FREE 18 अध्याय १८ — लिंटन की वापसी और एक पिता का दावा FREE 19 अध्याय १९ — चुपके से एक चिट्ठी-व्यवहार FREE 20 अध्याय २० — मूरों पर एक गुप्त मिलन FREE 21 अध्याय २१ — एक मजबूर विवाह FREE 22 अध्याय २२ — वुदरिंग हाइट्स की क़ैदी FREE 23 अध्याय २३ — एक रूखे रिश्ते में कोमलता का बीज FREE 24 अध्याय २४ — लॉकवुड का प्रस्थान FREE 25 अध्याय २५ — एक बदला हुआ वुदरिंग हाइट्स FREE 26 अध्याय २६ — हीथक्लिफ़ का धीमा पागलपन FREE 27 अध्याय २७ — एक छोटी पुस्तक का जादू FREE 28 अध्याय २८ — कैथरीन की पुकार FREE 29 अध्याय २९ — मूरों पर दो छायाएँ FREE 30 अध्याय ३० — एक नई शुरुआत FREE 31 अध्याय ३१ — नेली डीन की अपनी कहानी FREE 32 अध्याय ३२ — कब्रिस्तान में एक यात्रा FREE 33 अध्याय ३३ — एक मीठी विदाई FREE 34 अध्याय ३४ — एक प्रेम जो मरने के बाद भी मरता नहीं FREE
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अध्याय १ — एक अजनबी की पहली रात

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१८०१ की एक भयानक सर्दी की रात — इंग्लैंड के योर्कशायर के तूफ़ानी मूरों पर — जब एक यात्री वुदरिंग हाइट्स की देहरी पर पहली बार पाँव रखता है, और उसकी मुलाक़ात उस आदमी से होती है जो आगे चलकर इस पूरी कहानी का केंद्र बनेगा।

"वुदरिंग — यह एक स्थानीय शब्द है। हवाओं की उस प्रचंडता के लिए — जो तूफ़ानी मौसम में इस पहाड़ी पर हमला करती है। शायद यहाँ की हवा को कभी विश्राम नहीं मिलता।"

एक नया किरायेदार

मेरा नाम है — लॉकवुड। मैं लंदन से आया हूँ। शहर की भीड़, थका देने वाली राजनीति, और कुछ अप्रिय व्यक्तिगत घटनाओं से दूर भागकर — मुझे एकांत चाहिए था। ऐसा एकांत जहाँ कोई पहचान न हो। कोई बात न हो। कोई उम्मीद न हो।

योर्कशायर के दूरस्थ मूरों में मुझे ऐसी ही एक जगह मिली — थ्रशक्रॉस ग्रेंज नाम की एक हवेली। बड़ी, पुरानी, अकेली। उसके मालिक — एक श्री हीथक्लिफ़ — मूरों की दूसरी पहाड़ी पर एक और हवेली में रहते हैं। उन्हीं की हवेली का नाम है — वुदरिंग हाइट्स

थ्रशक्रॉस ग्रेंज मुझे एक साल के लिए किराए पर मिली। मैंने सोचा — चलो, अपने नए मकान-मालिक से एक बार जाकर मिल आऊँ। आख़िर वही इस इलाक़े का सबसे प्रमुख आदमी है। शिष्टाचार बनाए रखना ज़रूरी है।

तो उस ठंडी, धुँधली सुबह — मैंने अपना घोड़ा खोला और चार मील की उस कठिन चढ़ाई पर निकल पड़ा।

तूफ़ानी पहाड़ी की पहली झलक

जैसे-जैसे मैं ऊपर चढ़ता गया, मूरों की प्रकृति बदलती गई। पेड़-पौधे कम होते गए। हवा तेज़ होती गई। आसमान में काले बादल मँडराने लगे। चारों तरफ़ — सिर्फ़ बंजर ज़मीन, घास के ख़राब टुकड़े, और दूर तक फैले हुए बीहड़ मूर।

शायद चार मील की चढ़ाई के बाद — मुझे हवेली दिखी। एक पुरानी, गहरी पत्थरों की हवेली। इतनी पुरानी कि उसके पत्थरों पर काई जम चुकी थी। उसकी छत झुकी हुई। दीवारें मोटी और ऊँची। खिड़कियाँ छोटी, और कई जगह तो शीशे टूटे हुए।

उसके दरवाज़े के ऊपर — पत्थर पर खुदा हुआ — एक नाम था: "हेयरटन एर्न्शॉ — १५००"। और साथ में कुछ अजीब आकृतियाँ — पत्थर पर खोदी हुई। तीन सौ साल पुरानी इमारत। उसमें कितने जीवन गुज़रे होंगे, कितने सपने दफ़न हुए होंगे — कौन जाने।

द्वार के पास खड़े होकर मैंने ज़ोर से दस्तक दी। हवा का एक प्रचंड झोंका मेरे चेहरे पर आकर लगा। मुझे लगा — यह जगह खुले मूरों पर बेरहम हवाओं के लिए छोड़ दी गई है। शायद यही कारण है कि इसका नाम "वुदरिंग" है — यानी "जो हवा से धिक्कारा जाए, जो लगातार तूफ़ान सहे।"

मालिक से पहली मुलाक़ात

दरवाज़ा खुला। एक लंबा, साँवला, गंभीर चेहरे वाला आदमी सामने खड़ा था। उसकी आँखें — काली, गहरी, बेधक — मुझे ऐसा लगा जैसे वे मेरे भीतर तक देख रही हों। उसके बाल काले, घुँघराले, थोड़े बेतरतीब। कपड़े साधारण — पर साफ़। आदमी कोई पच्चीस-पैंतीस साल का होगा, या शायद उससे थोड़ा ज़्यादा।

"हीथक्लिफ़, मैं अनुमान करता हूँ?" मैंने हाथ बढ़ाया।

उसने सिर हिलाया। पर हाथ नहीं मिलाया। उसकी आँखों में मेरे लिए कोई स्वागत नहीं था। बस एक खोखली, उदासीन निगाह।

"लॉकवुड," मैंने अपना नाम बताया, "आपका नया किरायेदार। थ्रशक्रॉस ग्रेंज पर आज से रहूँगा। मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य पहले ही मिल जाना चाहिए था।"

"अंदर आ जाओ।" — उसका जवाब था। बस इतना। न मुस्कान, न प्रसन्नता, न औपचारिक स्वागत।

पर उसकी आवाज़ में कुछ ऐसा था — एक रहस्य, एक उदासी, एक छिपा हुआ ग़ुस्सा — जिसने मुझे अंदर आने के लिए विवश कर दिया।

हवेली के अंदर

हवेली के अंदर का दृश्य भी कुछ कम अजीब नहीं था। एक बड़ा कमरा — जिसमें फ़र्श पत्थरों का। दीवारों पर पुराने पेंडल लटके हुए। एक विशाल चूल्हा — जिसमें लकड़ियाँ धीमी आग से जल रही थीं। चूल्हे के सामने एक पुरानी आरामकुर्सी।

दीवार पर एक राइफल टँगी थी। पास में पिस्तौल। फ़र्श पर कुछ शिकारी कुत्ते — काले, बड़े, ख़तरनाक दिखते। वे मेरी तरफ़ शक की निगाह से देख रहे थे। एक तो मुझ पर गुर्राया भी।

"बैठ जाओ," हीथक्लिफ़ ने कुर्सी की तरफ़ इशारा किया।

मैं बैठा। पर एक कुत्ते ने अचानक आकर मेरी टाँग पर हमला कर दिया!

"जुनो!" — हीथक्लिफ़ ने चिल्लाकर कुत्ते को रोका। पर कुत्ते ने मेरी पैंट फाड़ दी थी।

"आपके कुत्ते मेहमानों का स्वागत ख़ास तरीक़े से करते हैं," — मैंने मज़ाक की कोशिश की।

हीथक्लिफ़ हँसा नहीं। बस इतना कहा — "वे मेहमानों के आदी नहीं हैं।"

एक बूढ़ा नौकर — जोज़ेफ़

तभी एक बूढ़ा आदमी कमरे में दाख़िल हुआ। शायद सत्तर साल का। बेहद कुरूप — झुर्रियों से भरा चेहरा, सख़्त नज़र, मुँह में बीड़ी जैसी कुछ चीज़। वह बीच-बीच में कुछ बुदबुदा रहा था।

"जोज़ेफ़!" हीथक्लिफ़ ने उसे आदेश दिया, "इन सज्जन के लिए कुछ शराब लाओ।"

जोज़ेफ़ ने मुझे एक कड़ी निगाह से देखा। उसकी आँखों में स्पष्ट नापसंदगी थी। वह कुछ बुदबुदाया — कुछ धार्मिक-सी बातें — और फिर रसोई की तरफ़ चला गया।

हीथक्लिफ़ चुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठ गया। उसने मुझसे कोई बात नहीं की। बस आग को घूरता रहा। मानो मेरी उपस्थिति उसके लिए कुछ ख़ास नहीं हो।

मुझे यह व्यक्ति बहुत अजीब लग रहा था। एक तरफ़ — एक देहाती ज़मींदार, अनगढ़, कठोर। दूसरी तरफ़ — कुछ ऐसा जो उसके रूप में, उसकी आँखों में, उसकी चुप्पी में था — जो उसे एक रहस्य बनाता था। एक टूटा हुआ रईस? एक भगोड़ा कलाकार? एक पागल? कौन जाने।

एक अजीब आत्मीयता का अहसास

शराब पीते हुए — मैंने कुछ हल्की बातें करने की कोशिश की। मौसम के बारे में, मूरों के बारे में, इलाक़े की हवेलियों के बारे में।

हीथक्लिफ़ के जवाब छोटे थे, ठंडे थे। पर एक बात मैंने नोटिस की — जब मैंने ग्रेंज के बारे में बात की — कि वहाँ कितनी सुनसानी है, कितने कमरे ख़ाली हैं — तो उसकी आँखों में एक पल के लिए कुछ चमका। मानो किसी पुरानी याद ने अचानक उसे झकझोरा हो।

"ग्रेंज में पहले कौन रहता था?" मैंने पूछा।

हीथक्लिफ़ ने मेरी तरफ़ देखा। एक लंबा, गहरा, स्थिर देखना। फिर बस एक शब्द — "एडगर लिंटन।"

"वे अब कहाँ हैं?"

"मर चुके।"

उसकी आवाज़ में कोई दुख नहीं था। पर मुझे लगा — यह "मर चुके" शब्द उसने इस तरह कहा जैसे वह बहुत पुरानी बात हो, और जैसे उसके पीछे कोई बहुत बड़ी कहानी छुपी हो।

एक रहस्यमयी हवेली के संकेत

शाम होने को थी। मैं उठा। "हीथक्लिफ़ साहब, मुझे चलना चाहिए। बहुत दूर का रास्ता है।"

"आओगे फिर?"

उसका सवाल अजीब था। न उसमें गर्मजोशी, न उपेक्षा। बस एक सूखा सवाल।

"ज़रूर। कल फिर आऊँगा।"

उसने सिर हिलाया।

दरवाज़े से निकलते वक़्त मैंने ऊपर देखा। उस पत्थर पर खुदे "हेयरटन एर्न्शॉ — १५००" को।

"यह नाम — आपके परिवार का है?" मैंने पूछा।

हीथक्लिफ़ का चेहरा एक पल के लिए कठोर हो गया। "नहीं। हेयरटन एर्न्शॉ — मेरे एक रिश्तेदार का नाम है। अंदर रहता है। तुम उसे देख चुके हो।"

मैंने अंदर के दृश्य को याद किया। हाँ — एक नौजवान वहाँ बैठा हुआ था। शायद बीस-पच्चीस साल का। साँवला, लंबा, गुस्सैल चेहरा। पर पहनावे से और तरीक़े से वह नौकर लग रहा था — रईस नहीं।

"वह आपका भाई है?"

हीथक्लिफ़ हँसा। पर उसकी हँसी में कोई हास्य नहीं था। एक क्रूर, ख़ौफ़नाक हँसी।

"नहीं," उसने कहा, "वह मेरा भतीजा है। पर अब मेरे लिए — एक नौकर से अधिक कुछ नहीं।"

बर्फ़ीली रात की दस्तक

बाहर निकलते ही मेरा सामना मौसम से हुआ। सुबह की धुँध अब बर्फ़ीले तूफ़ान में बदल चुकी थी। हवा इतनी तेज़ कि मेरा घोड़ा भी डर गया। बर्फ़ की बूँदें मेरे चेहरे पर सुइयों की तरह चुभ रही थीं। और मूरों पर — कोई रास्ता, कोई निशान — कुछ नहीं दिखता था।

मैं भटक गया।

एक घंटे तक मैं इधर-उधर भटकता रहा। ठंड हाड़ों तक पहुँच रही थी। उँगलियाँ सुन्न हो गई थीं। आख़िर — किसी तरह — मैं वापस वुदरिंग हाइट्स पर ही पहुँच गया।

"हीथक्लिफ़ साहब!" मैंने दरवाज़ा पीटा। "मैं रास्ता भूल गया हूँ! मुझे शरण दीजिए — बस आज की रात के लिए!"

दरवाज़ा खुला। हीथक्लिफ़ मेरे सामने था। उसकी आँखों में — एक पल के लिए — एक चिढ़चिढ़ापन। फिर एक अजीब सी थकावट।

"अंदर आ जाओ। कोई कमरा नहीं है। पर एक — एक सोने की जगह है। पुरानी। उसमें कोई रहता नहीं।"

मैंने उसका धन्यवाद किया। मुझे क्या पता था कि उस पुरानी, अनछुई, बंद पड़ी जगह में — मेरी ज़िंदगी का सबसे रहस्यमयी अनुभव होने वाला था।

एक प्रेत की मुलाक़ात।

एक नाम — जो मैंने पहले कभी नहीं सुना था — पर जो उस रात के बाद कभी नहीं भूल पाऊँगा।

कैथरीन।

"वुदरिंग हाइट्स की पहली रात — और मेरी ज़िंदगी कभी पहले जैसी नहीं रहेगी।"

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अध्याय १ — एक अजनबी की पहली रात

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