उस पुरानी कोठरी में लॉकवुड एक डायरी पाता है — कैथरीन एर्न्शॉ की बीस साल पुरानी डायरी। उसमें वह पढ़ता है — एक प्यारी लड़की और उसके दो दोस्त — हीथक्लिफ़ और हिंडली। पर उस रात — खिड़की पर एक हाथ दस्तक देता है। एक स्त्री का प्रेत। और हीथक्लिफ़ — पहली बार लॉकवुड के सामने टूटता है।
क्लोज़्ड बेड में लेटे-लेटे — मुझे नींद नहीं आ रही थी। बाहर तूफ़ान का शोर। अंदर — एक भयानक चुप्पी। दीवार पर खुदे "कैथरीन" के तीन नाम — मेरे दिमाग़ में घूम रहे थे।
मैं उठा। मेज़ पर एक मोमबत्ती जलाई। शायद कुछ पढ़कर मन भटक जाए। मेज़ पर कुछ पुरानी किताबें रखी थीं — धूल जमी हुई, पन्ने पीले पड़े। बाइबल, प्रार्थना-पुस्तकें, कुछ धार्मिक रचनाएँ।
एक बाइबल मैंने उठाई। उसमें — पन्नों के बीच — हाथ से लिखे हुए कई पन्ने थे। मानो किसी ने एक डायरी की तरह वहाँ अपनी बातें लिख रखीं हों।
पहले पन्ने पर — मोटे अक्षरों में — लिखा था:
"कैथरीन एर्न्शॉ की पुस्तक — जो उसकी एकमात्र है।"
तारीख़ — २० साल पहले की।
मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह वही "कैथरीन" थी जिसका नाम दीवार पर खुदा था? वही — जो "एर्न्शॉ" थी? तो "हीथक्लिफ़" और "लिंटन" — उसके बाद के नाम — शायद उसके दो शादियों के?
मैंने पन्ने पलटे। एक पन्ने पर एक छोटी, बच्चे जैसी लिखावट में:
"आज जोज़ेफ़ ने हमें फिर से तंग किया। उसने हीथक्लिफ़ और मुझे चेतावनी दी कि हम अगर बाइबल नहीं पढ़ते, तो नरक में जाएँगे। पर मैं और हीथक्लिफ़ — हमने मिलकर बाइबल को कोने में फेंक दिया। और हम फिर मूर पर भागे। हिंडली ने हमें देखा। वह हीथक्लिफ़ को मारेगा — मुझे डर है। पर मैं — मैं अपने प्यारे हीथक्लिफ़ की रक्षा करूँगी। चाहे जो हो।"
एक छोटी लड़की की डायरी। पर उसके शब्दों में — एक तीव्र भावना। एक प्यार जो शब्दों से बाहर निकल रहा था।
मैंने एक और पन्ना पलटा।
"हीथक्लिफ़ और मैं — हम मूरों पर भागे। बारिश में भीगते हुए। हमने एक पुरानी हवेली देखी — थ्रशक्रॉस ग्रेंज। हमने झाँककर देखा अंदर — वहाँ एडगर लिंटन और इसाबेला लिंटन — दो भाई-बहन — महंगे कपड़ों में, सोने के झूमर के नीचे — एक खिलौने के लिए लड़ रहे थे। मूर्ख! हम कितने अमीर थे — क्योंकि हमारे पास एक-दूसरे थे, और मूर थे, और तूफ़ान थे। और उनके पास सिर्फ़ एक खिलौना!"
लड़की के शब्दों में — एक स्वच्छंद आत्मा। एक हीथक्लिफ़ नाम के लड़के से उसकी गहरी मित्रता। एक हिंडली नाम का भाई — जो हीथक्लिफ़ से नफ़रत करता था।
मैंने पढ़ना जारी रखा। हर पन्ने पर — कैथरीन और हीथक्लिफ़ की बातें। उनकी छोटी-छोटी ख़ुशियाँ। उनके दर्द। हिंडली की क्रूरता।
एक पन्ने पर — एक वाक्य ने मुझे चौंकाया।
"आज मैंने हीथक्लिफ़ को बताया — उसके बिना मैं नहीं जी सकती। हमारे आत्मा एक हैं। बना ली गई हैं — एक ही पल में। चाहे लोग क्या कहें — मैं हीथक्लिफ़ हूँ। और हीथक्लिफ़ मैं हूँ।"
एक छोटी लड़की के शब्द। पर इन शब्दों में — एक ऐसा प्रेम जो शब्दों से ऊपर। एक ऐसा बंधन जो किसी भी सामाजिक रिश्ते से गहरा।
मेरी आँखें भारी हो रही थीं। डायरी मेरी गोद में गिर गई। मैं तकिए पर सिर रखकर — आधा सोया, आधा जागा — पड़ा रहा।
हवा बाहर ज़ोर से चल रही थी। खिड़की के शीशे काँप रहे थे। और — कहीं दूर से — एक टहनी खिड़की के शीशे पर रगड़ रही थी। ख़र-ख़र-ख़र।
एक खटक। एक और। फिर एक तीसरी।
मैं उठा। नींद में डूबा हुआ। उस अजीब आवाज़ ने मुझे परेशान किया। मैंने सोचा — टहनी को तोड़ देता हूँ। फिर शांति से सो सकूँगा।
मैंने खिड़की का शीशा तोड़ा — अपनी मुठ्ठी से एक छोटा सा छेद बनाया — और हाथ बाहर निकाला। टहनी को पकड़ने के लिए।
पर — मेरा हाथ जब बाहर गया — मेरा सामना टहनी से नहीं हुआ।
एक हाथ ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
एक छोटा, बर्फ़ीला, ठंडा हाथ।
मेरी जान निकल गई। मैंने अपना हाथ खींचने की कोशिश की। पर वह हाथ — अद्भुत ताक़त से — मेरा हाथ पकड़े था।
"मुझे अंदर आने दो!" — एक रोती हुई, स्त्री-स्वर वाली आवाज़ — खिड़की के बाहर से आई।
"कौन है?" मैंने काँपती आवाज़ में पूछा।
"कैथरीन लिंटन! मुझे अंदर आने दो! बीस साल हो गए! बीस साल! मैं भटक रही हूँ!"
मेरे रोंगटे खड़े हो गए। ओह भगवान! यह क्या? यह तो ज़रूर मेरा वहम है। यह डायरी पढ़ने का असर है। पर वो हाथ — वो ठंडा हाथ — वो मेरा हाथ पकड़े हुए था।
मेरी ज़िंदगी और मेरा होश बचाने की बेताबी में — मैं बेरहम हो गया। मैंने उस हाथ को टूटे शीशे की तेज़ धार पर खींचा। हाथ काटा। ख़ून बहा। पर वो हाथ अब भी मुझे पकड़े था।
"मुझे अंदर आने दो!" — रोती हुई आवाज़ ने फिर पुकारा।
"नहीं! कभी नहीं! जा! दूर हो!"
"बीस साल! इन बीस सालों से मैं भटक रही हूँ! मेरा हीथक्लिफ़ कहाँ है? मुझे उसके पास जाना है!"
आख़िर — किसी तरह — मैंने अपना हाथ छुड़ा लिया। मैं चिल्लाया —
"दूर हो जाओ! कौन हो तुम?"
"कैथरीन! कैथरीन एर्न्शॉ! कैथरीन लिंटन! मेरे प्यारे हीथक्लिफ़ को बता देना — मैं आ गई हूँ! मैं इतनी रातों से उसे ढूँढ़ रही हूँ!"
मैंने ज़ोर से चिल्लाकर खिड़की से दूर भागा। मेरी मोमबत्ती बुझ गई। अंधेरे में — मैं ज़मीन पर गिरा। मेरा शरीर पसीने से तरबतर। डर से थर-थर काँपते हुए।
"हीथक्लिफ़!" — मैंने जोर से चिल्लाया। "हीथक्लिफ़! कोई मेरी मदद करो!"
दरवाज़ा खुला। हीथक्लिफ़ — मोमबत्ती हाथ में — दौड़ता हुआ आया। उसके बाल बिखरे, चेहरा घबराहट से भरा।
"क्या हुआ? कौन चिल्ला रहा है?"
मैं ज़मीन पर बैठा हुआ था। मेरा हाथ — टूटे शीशे से कटा हुआ — ख़ून से भरा।
"वह — वह — खिड़की पर," मैंने हकलाते हुए कहा। "एक स्त्री! बीस साल से भटक रही है! अपने आप को कैथरीन कहती है! कैथरीन लिंटन!"
हीथक्लिफ़ का चेहरा — एक पल के लिए — बिल्कुल सफ़ेद हो गया। उसकी आँखें — विशाल, काली, शून्य — कैसी लग रही थीं — मानो किसी ने उन्हें छुरा घोंपा हो।
"कैथरीन?" उसकी आवाज़ — एक फुसफुसाहट। "तुम — तुमने उसे देखा?"
"मैंने... मैंने सिर्फ़ हाथ छुआ। पर उसने अपना नाम बताया। बीस साल से..."
हीथक्लिफ़ ने मुझे एक तरफ़ धकेला। वह मुझे लगभग नहीं देख रहा था। उसकी पूरी निगाह — खिड़की की तरफ़ — एक उन्मत्त, बेसब्र, हताश निगाह।
वह क्लोज़्ड बेड पर चढ़ा। खिड़की को खोला। टूटा हुआ शीशा। बाहर — बस तूफ़ान। बर्फ़। हवा। और कोई नहीं।
पर — हीथक्लिफ़ — अब वह अपने आप में नहीं था। वह खिड़की पर लटक गया। एक टूटी आवाज़ में — फूट-फूट कर रोते हुए — चिल्लाया —
"कैथरीन! आ! आ! एक बार और! एक बार और मेरे पास आ! मेरी प्यारी कैथी! मेरे जीवन! आ — आ — मुझे फिर से सुना!"
उसकी आवाज़ — टूटे काँच की तरह तेज़, दर्द से भरी, उन्मत्त। उसने अपने सिर को खिड़की के फ्रेम पर पीटा। ख़ून बहा। पर उसे महसूस नहीं हुआ।
"बीस साल!" — वह चिल्ला रहा था। "बीस साल मैंने तुझे बुलाया! रोज़! हर रात! आ! आ अब! एक बार आ!"
मैं स्तब्ध था। यह कौन सा हीथक्लिफ़ है? कल जो मुझे देखकर ठंडा, क्रूर, उदासीन था — वह आज खिड़की पर — एक बच्चे की तरह — रो रहा है? चिल्ला रहा है? एक प्रेत को बुला रहा है?
एक भूत के लिए — एक आदमी इतना दीवाना? बीस साल से?
मैंने पहली बार समझा — हीथक्लिफ़ की कठोरता — एक खोखला, झूठा कवच था। उसके भीतर — एक टूटा, बिखरा, जलता हुआ इन्सान था।
हीथक्लिफ़ — कुछ देर बाद — खिड़की से नीचे उतरा। उसका चेहरा भीगा हुआ — आँसू और बारिश से। उसने मुझे एक टूटी निगाह से देखा।
"लॉकवुड," उसने धीमे से कहा। "तुम — तुमने उसे देखा? सच — सच में?"
"मुझे लगता है — हाँ। पर मैं नींद में था। शायद — शायद यह मेरा वहम..."
"नहीं!" — उसने कहा, ज़ोर से। "वहम नहीं! वो वहाँ है! बीस साल से! रोज़ रात — मैं उसे बुलाता हूँ। पर वो आती नहीं। आज — पहली बार — किसी ने उसे देखा! किसी ने उसे सुना! तुमने उसे सुना!"
"पर — कौन है वो? कौन थी कैथरीन?"
हीथक्लिफ़ की आँखों में — एक पल के लिए — पूरी ज़िंदगी का दर्द उतर आया।
"वो थी," उसने कहा, "वो थी मेरा सब कुछ। मेरी आत्मा। मेरी ज़िंदगी। मेरी एक मात्र — एक ही — कैथरीन।"
"वो मरी थी?"
"उन्होंने उसे मार डाला। और मेरी आत्मा भी उसी के साथ कब्र में गाड़ दी।"
उसकी आवाज़ में — एक क्रूर, गहरा, बीस साल पुराना बदला — खौलता हुआ। मैंने पहली बार समझा कि क्यों यह आदमी इतना कड़वा है। इतना सख़्त। इतना क्रूर।
क्योंकि उसके भीतर — एक प्यार था जो मरा नहीं था। एक प्रेत था जो छोड़ता नहीं था।
हीथक्लिफ़ ने मुझे आदेश दिया कि मैं उस कमरे को छोड़ दूँ। उसने मुझे एक और कोने में सुलाया।
"तुम्हें वहाँ नहीं सोना चाहिए था," उसने कहा। "वह कमरा — वह कैथरीन का था। उसका सबसे प्रिय कमरा। और वहाँ अब — सिर्फ़ उसकी आत्मा रहती है।"
मैं नहीं सो सका। बाक़ी रात — मैं जागकर सोचता रहा। कौन थी कैथरीन? यह आदमी क्यों इतना टूटा हुआ? यह सब क्या है?
सुबह — जब मैं नीचे उतरा — हीथक्लिफ़ कहीं नज़र नहीं आया। मैंने सुना — वह भोर से ही मूरों पर भटक रहा है।
नौकरानी ज़िली ने मुझे चाय परोसी। एक बूढ़ी, सहानुभूतिशील नौकरानी।
"नेली डीन — पुरानी नौकरानी — थ्रशक्रॉस ग्रेंज पर है," उसने मुझसे कहा। "अगर तुम्हें इस घर की कहानी जाननी है — तो उसी से पूछना। उसने सब कुछ देखा है। बचपन से।"
तूफ़ान अब थम गया था। मैं अपने घोड़े पर बैठा। ग्रेंज की तरफ़ चला।
पर अब — मुझमें — एक पागल कौतूहल जाग गया था। यह कैथरीन कौन थी? यह हीथक्लिफ़ क्या है? इन तीन कैथरीनों के पीछे की कहानी क्या है?
मुझे यह पूरी कहानी सुननी थी।
और नेली डीन — वही — मुझे यह सब सुनाएगी।
"एक खिड़की पर हाथ। एक प्रेत की पुकार। और एक आदमी जो बीस साल से उसे ढूँढ़ रहा था। यहीं से — असली कहानी शुरू होने वाली थी।"
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