जापान में माउंट फुजी के पास एक जंगल है ओकिघारा, इसे सुसाइड फारेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसको जापान में जुकारी कहा जाता है। ये जंगल यहां होने वाली आत्म हत्याओं की वजह से फेमस है।
पहले तो इस जंगल में आना निषेध था। पर अब इसमे टूरिस्ट गाइड लेकर आ सकते है।
जापान के ही रहने वाले कुछ दोस्तों ने उस जंगल मे घुमने का प्लान बनाया।
अकिहितो, तोशिरो,होशी और दाइची ने एक टूरिस्ट गाइड हायर किया और निकल पड़े जंगल के सफर पर।
सुबह 10 बजे चारो ने गाइड के साथ जंगल मे प्रवेश किया। वैसे जंगल सुसाइड की वजह से बदनाम है पर प्राकृतिक रूप से ये काफी सुंदर है। जंगल के पेड़ बहुत घने और लंबे है। काफी गहन होने की वजह से जंगल में दिन में भी अंधेरा रहता है।
पांचों लोग 10 बजते बजते जंगल के लिए निकल गए। जैसे जैसे ये जंगल के अंदर जा रहे थे, वहां अंधेरा बढ़ता जा रहा था।
थोड़ी दूर चलने पर इन्हें एक बोर्ड लगा मिला जिस पर लिखा था "आपकी जिंदगी अनमोल है, आत्महत्या करने से पहले एक बार और विचार करे"।
अकिहितो- कोई भला इस खूबसूरत जंगल मे आकर मरने की कैसे सोच सकता है?"
गाइड- फिर भी यहां बहुत लोग आत्म हत्या करते है। हर साल पुलिस इस जंगल मे से लाशें निकालती है। कभी भी लोगो को ये नही बताया गया कि कुल कितनी लाशें निकलती है।"
दाइची- "क्या कभी इस जंगल मे किसी ने भूत को देखा है?"
गाइड- "ज्यादतर इसमे आने वाले लोगो ने आत्म हत्या ही करली। और जो बचे उन्होंने ऐसा कुछ बताया नहीं।"
होशी- "मुझे लगता है यहां कोई नेगेटिव एनर्जी होगी जिसकी वजह से लोग आत्म हत्या करते होंगे।"
गाइड- "यहां ये आज तक साबित नही हो सका कि लोग आत्म हत्या क्यों करते है।"
वो लोग जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे उन्हें लोगो के मरने के सबूत मिलते जा रहे थे। कहीं रस्सी पड़ी दिखती तो कही लोगो के जूते दिखाई देते।
थोड़ा अंदर जाने पर एक कंकाल दिखा।
तोशिरो- "कितना डरावना है सब कुछ।"
गाइड- "हर साल लाशों को निकालने के बावजूद भी यहां कही न कही लाश रह ही जाती है।"
ये पांचों थोड़ा और आगे बढ़ते है। तभी दाइची बोलता है कि उसे टॉयलेट जाना है। वो चारो एक जगह रुक कर उसका वैट करने लगते है।
कोई तीन चार मिनट बीत जाते है। थोड़ी देर और होती है। अब दाइची को गए कोई दस मिनट बीत गए थे। पर वो नही आया।
अकिहितो- "ये आखिर क्या कर रहा है? अब तक नहीं आया।"
तोशिरो- "चलो उसको देखते है।"
चारो उसी तरफ जाते है जिधर दाइची गया था। ये लोग आगे बढ़ते हुए दाइची को आवाजे लगाते जा रहे थे। कोई 500 मीटर आगे चलने पर इन्हें दाइची एक पेड़ के नीचे बैठा दिखा। चारो उसे बुला रहे थे पर वो ऐसे बैठा था जैसे उसे कुछ सुनाई ही ना दे रहा हो।
चारो दौड़ कर उसके पास पहुँचे।
अकिहितो- "दाइची क्या कर रहे हो तुम यहाँ?" अकिहितो ने उसका कंधा पकड़ कर हिलाया।
दाइची मानो नींद से जागा हो। उसने चौंक कर आस पास देखा। "मैं इधर कैसे आया?" दाइची ने उन सबसे पूछा।
गाइड- तुम टॉयलेट के लिए बोल कर इधर आये थे।"
दाइची- "मैं कब आया? मुझे कुछ याद नहीं है।"
होशी- "ये प्रैंक करना बंद करो। तुम्हे क्या लगता है हम इससे डर जाएंगे?"
अकिहितो- "यार ये प्रैंक यहां मत करो प्लीज।"
दाइची- "मैं कोई प्रैंक नही कर रहा हूँ। मुझे सच मे कुछ याद नहीं।"
गाइड- "आप लोगो को अभी भी आगे जाना है?"
होशी- "हाँ बिल्कुल। इसे कुछ नही हुआ है, इसकी आदत है इस तरह के प्रैंक करने की।" बाकी सबने भी होशी की हाँ में हाँ मिलाई।
दाइची की बात पर किसी ने विश्वास नहीं किया और फिर से आगे बढ़ गए।
अकिहितो अपने साथ लाये कैमरे से जंगल की फ़ोटो भी लेता जा रहा था।
दोपहर के 12 बजे तक ये लोग जंगल के काफी अंदर तक आ गए थे। चलते चलते इन लोगो को भूख भी लग आयी थी।
ये लोग एक जगह पर थोड़ा सुस्ताने और खाने के लिए रुक गए। अपने अपने बैकपैक उतार कर खाने का सामान निकाल लिया। जैसे ही वो लोग खाने को हुए तभी जंगल मे कहीं अंदर की तरफ से किसी के रोने की आवाज सुनाई दी।
पहले तो इसे सबने अपना वहम समझा और उसे नजरअंदाज किया पर आवाज धीरे धीरे तेज हो गयी।
अकिहितो-"कोई है जंगल मे। कोई तकलीफ में है, हमे जाना चाहिए मदद के लिए।"
गाइड- "नहीं ये हमे बहकाया जा रहा है। कोई भी आगे मत जाना इस आवाज को इग्नोर करके खाना खाओ।"
दाइची-"कोई जंगल मे मुसीबत में है और आप चाहते है कि हम यहां चुपचाप खाना खाएं?"
गाइड- "ये निश्चित नही है कि जिसकी आवाज आ रही है वो कोई इन्सान ही है।"
अकिहितो- "अगर इंसान ही हुआ तो? उसे हमारी मदद की जरूरत हुई तो? क्या हम उसे ऐसे ही छोड़ देंगे?"
गाइड- "मेरा विश्वास करो ये एक भृम से ज्यादा और कुछ नहीं है।"
अकिहितो- "ठीक है आप नहीं आना चाहते है मत आओ। मैं अकेला जाऊंगा।"
ये कह अकिहितो उस आवाज की तरफ बढ़ गया। पीछे पीछे होशी, दाइची औऱ तोशिरो भी चले गए। गाइड ने कुछ देर रुक कर सोचा और फिर वो भी पीछे चला गया।
अकिहितो उसी आवाज की दिशा में बढ़ता जा रहा था। पर जैसे जैसे वो बढ़ता जा रहा था आवाज की दूरी भी बढ़ती जा रही थी।
कोई एक किलोमीटर चलने के बाद अकिहितो रुक गया। वो चारों भी पास गए।
गाइड- "मैंने कहा था ना कि ये कोई इंसान नही है।"
अकिहितो- "तो भूत था तो वो भी तो नहीं दिखा।"
गाइड- "उसने अपना काम कर दिया।"
ये सुन चारों भौचक्के रह गए।
"मतलब।" सबके मुँह से एक निकला।
गाइड- "हम अपने सामान को और खाने को वही छोड़ आये है। मुझे ये पता था कि खाने के वक़्त ऐसा कुछ होता है फिर भी वहां से चलते वक़्त मुझे भी याद नहीं रहा।"
होशी- "तो इसमें क्या दिक्कत है। हम वापिस जा कर अपना सामान ले लेंगे।"
गाइड-"चलो देखते है।"
पांचों जिस तरफ से आये थे वापिस उसी तरफ चले गए। वो एक किलोमीटर की बजाय दो किलोमीटर चल चुके थे, पर वो जगह नही मिल रही थी जहां सामान छोड़ा था।
अकिहितो- "हम दुगुना चल चुके है पर वो जगह अभी तक नहीं मिली।"
गाइड-"मिलेगी भी नहीं। बेहतर होगा हम यहां से बाहर निकलने की कोशिश करे।"
सबने इस बात पर सहमति जताई। दोपहर के 2 बजे इन लोगो ने वापिस निकलना शुरू किया। गाइड काफी सोच समझ कर आगे बढ़ रहा था फिर भी उसे बाहर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था।
गाइड- "आह हम फंस चुके है।"
ये सुन कर सबके होश उड़ गए।
होशी-"हम सब अलग अलग डायरेक्शन में निकल कर रास्ता ढूढने की कोशिश करते है।"
अकिहितो- "पर इस तरह हमे खतरा हो सकता है?"
होशी- "वो वैसे भी है। अगर हम अलग अलग ढूढने निकले तो कम से कम वो इंसान तो बचेगा जिसे रास्ता मिल जाएगा। अगर मरना ही है तो कोशिश करके मरते है।"
सबको भी यही ठीक लगा। पांचों अलग अलग दिशा में निकल पड़े रास्ता ढूढने।
अकिहितो उत्तर की तरफ बढ़ा। कोई एक किलोमीटर चलने के बाद अकिहितो को एक बच्चे के हंसने की आवाज सुनाई दी। अकिहितो एक अनजाने आकर्षण में बंधा उस तरफ चला गया।
अकिहितो ने पास जाकर देखा एक दस साल का बच्चा घर के बाहर खेल रहा था। अकिहितो ऐसे सम्मोहन में बंधा था कि उसे ये भी होश नहीं रहा कि इस जंगल मे घर कहाँ से आया। वो यंत्रचालित से बढ़ता उस बच्चे के पास पहुँचा। बच्चे ने किसी के आने की आवाज सुन जैसे ही सिर ऊपर उठाया तो अकिहितो ने देखा कि वो बच्चा बिल्कुल वैसा ही दिख रहा था जैसा बचपन मे अकिहितो दिखता था।
अकिहितो-"क्या नाम है तुम्हारा?"
बच्चा-"अकिहितो।"
अकिहितो ने सोचा ये तो नाम भी मेरे ही जैसा है। अभी बच्चा और अकिहितो बाहर खड़े ही थे कि तभी घर के अंदर से किसी आदमी के चिल्लाने की आवाज आने लगी।
बच्चा और अकिहितो दोनों अंदर की तरफ देखने लगे। अंदर से एक आदमी औरत का हाथ पकड़ घसीट कर बाहर ले आया। वो आदमी औऱ औरत अकिहितो के ही मां बाप थे।
वो आदमी उस औरत को बेल्ट से बुरी तरह मारे जा रहे था। ये देख कर वो छोटा अकिहितो बुरी तरह "मम्मा मम्मा" चिल्ला कर रोने लगा।
ये देख अकिहितो की भी आँखो से आंसू बहे जा रहे थे। बचपन मे उसका बाप इसी तरह उसकी मां को मारा करता था। उसने रोते रोते सामने देखा। वो आदमी अभी भी उस औरत को बुरी तरह पीट रहा था। वो औरत पिटते पिटते बेदम हो चुकी थी। आखिर में उस आदमी ने बेल्ट से उसके गले को कस कर उसे मार डाला।
वो बच्चा वही गिर कर बुरी तरह रोये जा रहा था। अकिहितो के सामने मानो उसका बचपन दोहराया जा रहा था। उसने एक बार फिर से अपनी मां का मरना देखा। ये देख वो बुरी तरह रोने लगा। उसका दिमाग कुछ काम ही नहीं कर रहा था।
अकिहितो वहां से रोता हुआ वापिस चल दिया। वो बुरी तरह टूट गया था। ये जंगल उसके दिमाग के साथ खेल रहा था। जो कुछ अभी उसने देखा था ये देख कर उसका दिमाग फटा जा रहा था। वो एक पेड़ के नीचे जाकर रुक गया। वहां पर एक बड़ी सी रस्सी पड़ी हुई थी। अकिहितो ने उसे उठाया और फांसी का फंदा बनाने लगा। उसका दिमाग इतना तनाव झेलने की हालत में नही रहा था। वो जल्दी से जल्दी मर जाना चाहता था।
अकिहितो उसी पेड़ से फांसी का फंदा बना लटक गया। उसकी सांसे अटक रही थी। दम घुट रहा था। बस कुछ ही देर में वो मरने वाला था। तभी किसी ने नीचे से उसके पैर पकड़ लिए। ये और कोई नही वही गाइड था।
गाइड- "अकिहितो जल्दी फंदा निकालो गले से।"
अकिहितो मानो किसी और ही दुनिया मे था। गाइड ने उसे बहुत आवाज दी पर उस तक जैसे आवाज पहुँच ही नही रही थी। तभी गाइड के दिमाग मे एक तरकीब सूझी। उसने अपनी कमर में लटका चाकू निकाल अकिहितो के पैर पर वार किया। चाकू लगते ही मानो अकिहितो की तन्द्रा लौट आयी हो।
अकिहितो-" मुझे नीचे उतारो।"
गाइड- "ये लो चाकू अपने गले का फंदा काटो।" गाइड ने उसे चाकू दिया।
अकिहितो फंदा काट कर नीचे उतरा।
गाइड- "अब बताओ क्या हुआ था?"
अकिहितो-"मैंने ख़ुद को देखा। अपना बचपन मेरे मां बाप। मेरे बाप का मेरी माँ को मारना।"
गाइड-"तो तुम फांसी पर क्यो लटके?"
अकिहितो -"वो सब देख कर मेरा दिमाग फटने लगा था। मैं कुछ भी बर्दाश्त कर पाने की हालत में नही था। मैं बस मरना चाहता था।"
गाइड -"समझ गया ये हमारे दिमाग के साथ खेलता है। अब चलो फटाफट रात होने से पहले बाकी लोगो को भी ढूढना है।"
शाम के पांच बज चुके थे। वो दोनों बाकी लोगो को ढूढने निकल पड़े। कोई बीस मिनट का रास्ता तय करने के बाद दोनों को एक पेड़ पर गुड़िया लटकी मिली।
वो गुड़िया बड़ी ही विकृत और डरावनी लग रही थी। ऐसा लग रहा था मानो वो इन दोनों को ही घूर रही हो।
अकिहितो-"वो हमें घूर रही है।"
गाइड-"वहम है उसकी तरफ मत देखो सीधे चलो।"
गाइड ने कहने को तो कह दिया। पर उसे भी यही लग रहा था कि उस गुड़िया की नजर इन्ही पर गड़ी हुई थी।
दोनों आगे बढ़े थोड़ा, पर उन्हें बराबर यही लग रहा था कि कोई पीछे से उन्हें देख रहा है। अकिहितो ने पलट कर देखा उस गुड़िया की नजर अकिहितो पर ही थी। गाइड भी पलटा उसे भी यही लगा कि वो गुड़िया उसे देख रही है। डर के मारे दोनों के रोंगटे खड़े हो गए।
अकिहितो-"क्या करे? वो हमारी ही तरफ देख रही है।"
कुछ देर को गाइड को ऐसा लगा कि वो गुड़िया उसे अपने वश में कर रही है पर उसने खुद को सम्हाला।
गाइड -"हमे फंसाया जा रहा है। उसको बिना देखे आगे बढ़ो।"
दोनों पलट कर फिर से चल दिये। उनके चलते ही पीछे से छोटे बच्चे के रोने की आवाजें आने लगे। पर गाइड ने अकिहितो को बिना रुके औऱ बिना मुड़े चलने को कहा। दोनों जैसे जैसे आगे बढ़ते बच्चे के रोने की आवाज तेज होती जाती है। पर दोनों बिना रुके बढ़ते बढ़ते गए। थोड़ा और आगे निकलने पर आवाज आनी बन्द हो गयी।
उन तीनों का कोई नामो निशान भी मिल रहा था। थोड़ी देर में अंधेरा होने वाला था।
गाइड-" जाने वो लोग किधर होंगे?"
अकिहितो-"तुमने मुझे कैसे ढूढा?"
गाइड -"तुम्हारी तरह मैं भी भृम में फंस गया था। मैं जब वहां से निकला तो मैं हिप्नोटाइज होने लगा। मैं बस आगे बढ़ता ही चला गया बिना कुछ सोचे समझे। काफी दूर निकलने पर मुझे मेरी दादी दिखाई दी जिन्हें मैं बहुत प्यार करता था। वो मुझे एक पेड़ के नीचे बैठी दिखी और उन पर जंगली जानवरों ने हमला कर दिया। वो उन्हें मेरे ही सामने नोच नोच कर खा गए। वो मदद के लिए चिल्लाती रही। वो देख कर मुझे बहुत सदमा लगा मैं मरने के लिए चल दिया। पर अचानक मेरे फ़ोन का अलार्म बज उठा और उससे मेरा सम्मोहन टूट गया। थोड़ा आगे चलने पर मुझे तुम दिखाई दे गए।"
अकिहितो- "इसका मतलब ये जो भी है वो हमें सम्मोहन में बांध कर आत्म हत्या के लिए उकसाता है।"
गाइड- "हां यही लग रहा है। एक काम करो तुम भी अपने फोन में हर आधे घण्टे का अलार्म लगा लो। मैं भी लगाता हूँ वैसे भी बिना नेटवर्क के ये किसी काम का तो है नहीं।"
दोनों ने अपने अपने फ़ोन में अलार्म सेट कर लिए। दोनों फिर से बढ़ चले उन तीनों को ढूढने। अब अंधेरा होने में सिर्फ कुछ ही देर बची थी। दोनों आगे बढ़ते जा रहे थे औऱ उन तीनों को आवाज भी देते जा रहे थे।
कोई पंद्रह मिनट चलने के बाद इन दोनों को पेड़ के नीचे पांच लोग चलते हुए दिखाई दिए। जरा ध्यान से देखा तो पता चला कि वो कोई औऱ नही बल्कि यही पांच लोग थे। दोनो चुपचाप खड़े देख रहे थे।
तभी सामने के लोगो में दाइची टॉयलेट का बोल कर चला गया। ठीक वैसे ही जैसे पहले गया था। थोड़ा आगे जाकर दाइची ने पलट के चारो को देखा औऱ शैतानी अंदाज में मुस्कुराया। दाइची थोड़ा औऱ आगे निकल गया, आगे जाकर दाइची किसी से बात करने लगा। इधर ये चारों उसका इंतजार कर रहे थे। जब वो नही आया तो चारो उसे ढूढने निकल पड़े। इधर दाइची किसी से अपने तीनो दोस्तो को मार देने की बात कर रहा था। जब उसने उन लोगो के आने की आहट सुनी तो वो जल्दी से जाकर पेड़ के नीचे बैठ गया और कुछ भी याद ना होने का नाटक करने लगा।
तभी दोनों के फ़ोन का अलार्म बज उठा औऱ सामने का दृश्य गायब हो गया।
अकिहितो- "ये क्या था?"
गाइड- "भृम था ये भी। इसके चक्कर मे मत आना।"
अकिहितो -" पर ये सच है कि दाइची इसी तरह गया था और बाद में उसने यही कहा कि उसे याद नही वो कैसे आया।"
गाइड -"फिलहाल इसको छोड़ो। उन लोगो को ढूढने की कोशिश करते है।"
शाम के साढ़े छह हो चुके थे। जंगल घना होने की वजह से उसमे घुप्प अंधेरा हो चुका था। हलकी हल्की बारिश भी होने लगी थी। आधा घण्टे औऱ चलने के बाद इन्हें दाइची मिल गया। दरअसल जैसे ही ये एक तालाब के पास से गुजरे तो उसमें किसी के डूबने की आवाज आई। वो दाइची था जो आत्म हत्या करने के लिये उसमें कूदा था। दोनों उसे बाहर निकाल कर लाये।
गाइड -"तुमने क्या देखा?"
दाइची- "खुद को देखा था मैंने। तुम दोनों लोगो ने मिल कर मुझे बहुत बुरी तरह मार डाला। वो देख कर मैं सदमे में चला गया औऱ मरने के लिए तालाब में कूद गया।
गाइड -"वो सब एक भृम में से ज्यादा कुछ भी नहीं है। हम दोनों ने भी देखे है। तुम्हारा फोन किधर है?"
दाइची-" वो तो तालाब में ही डूब गया।"
गाइड -" चलो कोई बात नहीं। तुम हमारे साथ ही रहना।"
अकिहितो- "एक बात बताओ दाइची। तुम यहाँ आने के बाद किसी से मिले थे क्या?"
गाइड -"मैंने कहा था वो सब बहकाने के लिए है हमे औऱ कुछ नही।"
अकिहितो- "मैं बस जानना चाहता हूँ।"
दाइची-"नहीँ मैं यहां कब किसी से मिल लिया? यहां जंगल मे कौन मिलेगा मुझे?"
अकिहितो- "जब तुम टॉयलेट के लिए गए थे तब?"
दाइची- "नहीं मुझे उस वक़्त का कुछ भी याद नहीं है।"
अकिहितो- "ऐसा कैसे हो सकता है?",
दाइची- "मैं सच कह रहा हूँ।"
गाइड -"चुप रहो औऱ यहां से चलो।"
पर अकिहितो दाइची से भिड़ गया। "बता किसको लाया था हमे मरवाने को।"
दाइची- "मारना तो तुम दोनों मुझे चाहते हो। मैंने देख लिया है पहले ही।"
लड़ते लड़ते अकिहितो ने दाइची को एक जोर का धक्का दिया। दाइची लड़खड़ा कर सीधा नीचे खाई में चीखता हुआ गिर गया।
दोनों को बुरी तरह शॉक लगा।
अकिहितो -"ये खाई यहां कहाँ से आ गयी?" उसकी जुबान बुरी तरह लड़खड़ा रही थी। "यहां तो कुछ भी नहीं था फिर ये खाई कैसे?"
गाइड -"मार दिया ना तुमने उसे।" गुस्से में गाइड ने अकिहितो के एक थप्पड़ जड़ दिया।
अकिहितो- "मैंने उसे नहीं मारा यहां खाई थी ही नही। मैंने दाइची को नही मारा। मैंने उसे नहीं मारा।" अकिहितो बुरी तरह चिल्ला चिल्ला कर रोने लगा।
गाइड -"होश में आओ। हमे फंसाया गया है। यहां खाई थी पर हमारी नजरो से उसे दूर रखा गया। होश में आओ तुम।"
अकिहितो उसकी बात सुन ही रहा था वो बस बराबर रोये जा रहा था। तभी फ़ोन का अलार्म फिर से बजा। 7 बज चुके थे।
अकिहितो आवाज सुन होश में आया। "उसने दाइची को मेरे ही हाथ से मरवा दिया।"
गाइड -"जरूरी नही की जो खाई से नीचे गिरा वो असली दाइची हो। हो सकता है वो भी एक भृम हो। चलो अब चले।"
दोनों आगे बढ़ गए। फ़ोन की टोर्च जला कर दोनों देखते हुए बढ़ रहे थे। अब ढूढने के लिए सिर्फ होशी और तोशिरो ही बचे थे।
साढ़े सात बजे की अलार्म बजने के बाद इन्हें एक नदी मिली। उस नदी पर एक छोटा सा पुल था और उस पुल पर बच्ची बैठी थी। बच्ची की उम्र कोई दस साल के आस पास थी। पर उसके चेहरे के भाव बड़े डरावने थे। एकदम सपाट भावनाहीन चेहरा देख कर ही पसीना छूट जाए। उस बच्ची के हाथ मे वही गुड़िया थी जो उन्हें उस पेड़ पर दिखी थी। बच्ची और गुड़िया दोनों ही इन दोनों को एकटक देख रही थी।
डर के मारे दोनों का दिल बैठा जा रहा था।
अकिहितो- "हम पुल पर नही जाएंगे।"
गाइड -" हम्म हम नदी के साथ साथ चलते है।"
दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर आगे बढ़े। वो जैसे जैसे आगे बढ़ते उन्हें लगता कि दो जोड़ी नजरे उनका पीछा कर ही है। डर के मारे दोनों दौड़ने लगे। दौड़ते दौड़ते अचानक गाइड किसी से टकराया। टोर्च लगा कर देखा तो वो होशी था। होशी बेहोशी जैसी हालत में चलता जा रहा था। उसके हाथ की नस कटी हुई थी उससे खून बहता जा रहा था।
गाइड- "होशी...होशी देखो हम लोग आए है।"
होशी- "मैंने उसे मार दिया।" होशी की आँखो से आंसू बहे जा रहे थे।
अकिहितो- "किसे मार दिया?"
होशी- "अपनी गर्लफ्रैंड को।"
अकिहितो- "पागल हो तुम्हारी गर्लफ्रैंड यहां कहाँ से आई?"
जब अकिहितो ने देखा कि होशी सम्मोहन में है तो उसने होशी को एक खींच कर थप्पड़ मारा। थप्पड़ के पड़ते ही होशी को होश आ गया। अकिहितो ने अपने जैकेट के टुकड़े को फाड़ कर उसके हाथ पर बांधा।
अकिहितो- "अब बताओ क्या हुआ था?"
होशी- "मुझ पर एक जंगली से दिखने वाले आदमी ने हमला किया। मैंने उससे बचने की कोशिश में उसे नीचे गिरा कर पत्थरों से मारा। मेरे मारने से वो मर गया। जब वो मर गया तो मुझे उसकी जगह मेरी गर्लफ्रैंड दिखने लगी।"
अकिहितो- "वही जो तुम्हे डंप कर गयी थी। उसके लिए तुम मरने जा रहे थे। वैसे भी वो इस जंगल मे कहा से आई। वो तो टोक्यो से भी जा चुकी है।"
ये सुन होशी रोने लगा।
गाइड- "सच बताओ तुम्हारी गर्लफ्रैंड के साथ क्या हुआ था?"
होशी- "वो मेरे ही हाथो मारी गयी थी। वो मेरे घर आई हुई थी। सुबह सुबह हम दोनों बालकनी में खड़े हुए थे। किसी बात पर हम दोनों में बहस होने लगी। हम झगड़ते हुए सीढ़ियों तक आ गए। बहस करते करते मुझे गुस्सा आ गया और मैंने उसे चुप रहने का बोल कर धक्का देकर खुद से दूर कर दिया। वो उस धक्के से सम्हल नही पाई औऱ सीढ़ियों से नीचे गिर गयी। उसके सिर में चोट लगी थी वो तुरन्त मर गयी। मैं बहुत डर गया था मैंने उसकी लाश को बाहर लॉन में ही दफना दिया।"
अकिहितो- "तूने उस लड़की की जान लेली जिसे तू प्यार करता था और डर कर तूने बताया तक नही किसी को। शर्म आती है तुझ पर।"
होशी- "वो सब अनजाने में हुआ था मैं उसे मारना नही चाहता था।"
अकिहितो- "तेरा भरोसा नही कर सकते। तू हमे भी मार सकता है।"
गाइड- "ये बाते यहां से निकल कर कर लेना।
अकिहितो होशी की तरफ नफरत स देखता हुआ आगे बढ़ गया। अब आठ बजे की अलार्म बज चुकी थी।
तीनो वहां से फिर आगे बढ़े। थोड़ा आगे बढ़ने पर इन्हें एक पेड़ के नीचे कुछ लोग बैठे हुए दिखे।
गाइड ने टोर्च लगा कर देखा तो यही पांचो लोग खाना खाने बैठे थे।
तीनो ने एक दूसरे का मुंह देखा और वापिस उसी तरफ देखने लगे।
वो पांचों जैसे पहले बैठे थे बिल्कुल वैसे ही खाना खाने बैठे। तभी अकिहितो को किसी की आवाज सुनाई देती है और वो सबसे बहस कर वहां से चला जाता है। पीछे पीछे बाकी तीनो भी चले जाते है सिर्फ गाइड बचता है। चारो के जाने के बाद गाइड इधर उधर देखता है और चारो के खाने में जहर मिला देता है।
अकिहितो और गाइड एक दूसरे की तरफ देखते है। होशी गाइड से उलझ जाता है। "तुमने खाने में जहर मिलाया था। वो तो अच्छा हुआ कि समान वापिस नही मिला वरना तुमने तो कर दिया था अपना काम।"
गाइड- "मेरा विश्वास करो मैंने ऐसा कुछ नही किया था। ये सब एक भृम में है।"
होशी- "बस मैंने देख लिया। तभी तुम हम लोगो के पीछे देर से आये थे क्योकि तुम तो जहर मिला रहे थे।"
अकिहितो- "होशी ये इल्लुशन है बस और कुछ नही ये सच नहीं है।"
होशी- "अच्छा तो तुम भी इसके साथ मिले हो।"
होशी गाइड पर टूट पड़ता है। गाइड खुद को बचाने के लिए होशी को एक जोरदार धक्का देता है। होशी सीधे पेड़ से टकराता है, पेड़ से निकली हुई एक नुकीली टहनी होशी के पेट मे घुस जाती है, और वो मर जाता है।
गाइड- "मैंने उसे नहीं मारा। वो....वो धोखे से मर गया।"
अकिहितो चुपचाप आंसू भरी आँखो से सब देखता है। तभी साढ़े आठ की अलार्म बजती है।
दोनों अब चुप आगे बढ़ते है वहां से। थोड़ा आगे चलने पर इन्हें दो सीधे लंबे पेड़ दिखते है। दोनो पेड़ रास्ते के दाएं बाएं खड़े थे। दोनों पेड़ की टहनी पर वैसी ही एक एक गुड़िया लटक रही थी।
उसे देख अकिहितो डर से चिल्लाया "इसकी आंखे मुझे मार डालेगी। ये मुझसे बर्दाश्त नही होता।"
गाइड अकिहितो का हाथ पकड़ उसे वहां से खींच ले गया। थोड़ा आगे चलने पर इन्हें तोशिरो मिला। तोशिरो भी एक पेड़ से फांसी लगा कर लटकने वाला था पर इन दोनों ने पकड़ लिया।
गाइड- "क्या देखा था तुमने?"
तोशिरो -"तुम लोगो को। तुम लोगो ने उन दोनों का मार डाला। अकिहितो ने दाइची को और तुमने होशी को।"
अकिहितो- "ये झूठ है वो दोनों हमे नही मिले है। ये भृम है सिर्फ।"
तोशिरो- "उस गुड़िया की आंखे बरदाश्त नही होती है।" तोशिरो रोते हुए बोला।
अकोहितो ने उसे गले से लगा लिया। "तुम्हे कुछ नही होने दूंगा। चलो यहां से।"
तीनो फिर से निकलने की कोशिश करने लगे। थोड़ा आगे चलने पर इन्हें फिर से वही चारों दिखाए दिए। इस बार होशी, दाइची, अकिहितो औऱ गाइड दिखे। गाइड और अकिहितो एक तरफ होशी औऱ दाइची को मारने की प्लानिंग कर रहे थे। फिर जैसे उन दोनों उन दोनों को मारा था वो दिखाई दिया। ये देख कर तोशिरो पागल हो गया। "ये मुझे फिर से दिखाई दिया इसका जरूर कोई मतलब है। तुम दोनों ने ही मारा है उन्हें।"
गाइड- ये भरम है इसके चक्कर मे मत आओ।"
तोशिरो- "तुम दोनों ने ही मारा है उनको।"
अकिहितो- " हां मारा है। अगर नही मारते तो वो हमें मार देते।" अकिहितो चिल्लाया।
तोशिरो- "मतलव तुम दोनों ने ही मारा है। मेरा शक सही था। तुम लोग...तुम लोग मुझे भी मार दोगे। लेकिन मैं ऐसा नही होने दूंगा।" ये कह कर तोशिरो ने गाइडेंस के कमर में लटक रहा चाकू खींच लिया। "मैं तुम दोनो को मार दूंगा।" ये कह तोशिरो अकिहितो पर झपटा पर वो एक तरफ होकर वार बचा गया। वो फिर से झपटना चाहा पर इस बार गाइड ने उसे पकड़ लिया और उसका चाकू छुड़ा कर उससे तोशिरो का गला काट दिया।
ये देख अकिहितो गाइड पर टूट पड़ा। "तूने उसे क्यो मारा?"
गाइड- "वो तुम्हे मार रहा था। मैंने तुम्हें बचाया है।"
अकिहितो - "मैं उसे समझा लेता। वो भृम में था एक थप्पड़ खा कर होश में आ जाता। तूने उसे मारा क्यो?"
गाइड- "वो तुम्हे मारने पर आमादा था, मैंने तुम्हारी जान बचाई है।"
अकिहितो- "तू ही है। तेरी ही वजह से सब मरे है। तूने होशी को मारा अब तोशिरो को। मैं तुझे नही छोडूंगा।" ये कह अकिहितो ने वो चाकू लेकर गाइड का गला काट दिया। तभी नौ बजे की अलार्म बज उठी और अकिहितो होश में आ गया। उसने देखा कि उसने गाइड को मार डाला था। तोशिरो भी मर चुका था। अब इस भयावह जंगल मे वो अकेला बचा था।
वो इससे भाग जाना चाहता था पर नही निकल सकता था। वो उठ कर भागा वापिस इस जंगल से निकलने के लिए। भागता भागता वो काफी आगे निकल आया। उसने मोबाइल की टोर्च जला आस पास देखना चाहा तो उसे हर पेड़ पर वही गुड़िया नजर आयी। हर गुड़िया उसे घूर रही थी। अकिहितो उन गुड़ियाओं की वजह से पागल सा होने लगा। वो पागलों की तरह कभी हसंते तो कभी रोते हुए जल्दी जल्दी कुछ ढूढने लगा। तभी उसे एक पेड़ के पास रस्सी पड़ी मिल गयी। वो जल्दी से उसका फंदा बना पेड़ से झूल गया औऱ थोड़ी देर तड़प कर मर गया। वही पास पड़े फ़ोन में दस बजे की अलार्म बज रही थी।
दूसरी सुबह पुलिस इन पांचो को ढूढने जंगल मे निकली। तो उसे इन पांचो की लाश मिली। आकिहितो की लाश सबसे पहले पेड़ से लटकी हुई। उसके बाद गाइड नाकामुरा की गला कटी हुई। उसके बाद तोशिरो की पेड़ से लटकी हुई। उसके बाद होशी की लाश पेड़ के नीचे बैठी हुई मिली वो हाथ की नस काट कर मर गया था। सबसे बाद में दाइची की तालाब में उतराती हुई मिली।
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