कमाना आसान, संभालना मुश्किल
पैसे के मामले में सबसे अमीर आदमी वो नहीं होता जो सबसे ज़्यादा कमाता है — वो होता है जो सबसे कम गँवाता है। और ये गणित नहीं, बर्ताव की बात है। यह किताब ये नहीं बताती कि पैसा कहाँ लगाइए। यह उस चीज़ के बारे में है जिस पर कोई बात नहीं करता — पैसे के बारे में आप कैसे सोचते हैं। बीस अध्यायों में — बचपन से आई पैसे की राय, क़िस्मत और जोखिम, वक़्त की ताक़त, बचत की दर, "काफ़ी" कितना है, और वो हिस्सा जो सिर्फ़ हमारे यहाँ है : सोना-ज़मीन-मकान, शादी और त्योहार का ख़र्च, EMI का जाल, बीमा, बुज़ुर्ग माँ-बाप का इलाज, भाई-बहनों वाली बातचीत, घर की औरतों को पैसे की जानकारी, और बच्चों को क्या सिखाएँ। हर अध्याय के अंत में एक लाइन का निचोड़ और एक छोटा काम, साथ में 90 दिन का प्लान। नोट : यह सामान्य जानकारी है, किसी की निजी निवेश सलाह नहीं — इसमें किसी स्कीम या कंपनी का नाम नहीं है।
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