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Episode 2 4 min read 15 0 FREE

कालधारा की हवेली

P
Preeti Jain
22 Mar 2026

 ( पार्ट – 1)

रात के तकरीबन ग्यारह ही बजे थे अवनी ,,अपने ससुर गौतम साइनवाल और ड्राइवर नितेश के साथ अपने घर से लगभग चार सौ किलोमीटर दूर एक जमीन की डील साइन करने के लिए आई हुई थी| ये डील शहर से बाहर एक गांव की सीमा पर होनी थी,, रास्ता थोड़ा ऊबड़ खाबड़ था और एजेंट ने भी आज आने में देर कर दी जिसकी वजह से उन्हें लगभग रात हो ही गई| बारिश की हल्की फुहार पड़ रही थी मौसम में कुछ ठंडी हवाओं की लहर दौड़ पड़ी थी लेकिन ना जाने क्यों अवनी के ससुर और ड्राइवर के चेहरे पर हाव भाव बदले हुए थे| डील तो साइन हो ही चुकी थी इसलिए उन्होंने सोचा कि अब इस रात के मौसम में कहा ही जायेंगे तो क्यों ना शहर में घुसते ही किसी होटल में ठहर जाते है| 

 

“ पापा…मै सोच रही हु रात बहुत हो चुकी है और एजेंट बता रहा था कि यहां रास्तों में गड्ढे बहुत है तो मै सोच रही थी कि क्यों ना आगे किसी होटल या धर्मशाला में ठहर लिया जाए”| अवनी ने अपने ससुर के सामने ये सलाह रखी| 

 

लेकिन इससे पहले वे कुछ कहते उन्हें अचानक से एक कॉल आ गई अवनी को नहीं पता वो कॉल किसकी थी क्योंकि फोन में रिंग बजने के बाद ही गौतम जी वहा से उठकर चले गए| 

 

“ हा आलोक बोलो सब ठीक है ना”| वो कॉल आलोक यानी अवनी के पति की होती है| अभी गौतम जी अपने बेटे से बात कर ही रह थे कि अचानक से उनकी आवाज में चिंता दौड़ पड़ती है और उनके कुछ शब्द ही अवनी के कानो में पड़ते है| अवनी ने सुना,” मैने तुमसे बोला था ना घर टाइम से पहुंच जाना मैने तुम्हे बताया भी था हम कालधारा की सीमा से लगते हुए एक गांव की तरफ जा रहे है फिर भी”| अवनी के कानो में अपने ससुर के कहे हुए शब्द हल्के हल्के सुनाई दे रहे थे लेकिन जो आलोक ने बोला भला वो ,, वो अवनी कैसे सुन सकती थी| 

 

“ पापा मैने आपको बोला था अवनी को इंकार कर दीजिए लेकिन आपको भी जमीन के सस्ते सौदे का लालच आ गया”| आलोक ने नाराजगी जताते हुए अपने पापा को जवाब दिया| 

 

अगले ही पल गौतम जी ने कड़क आवाज में आलोक से कहा,” चुपचाप सारा काम छोड़कर अभी इसी वक्त घर जाओ मुझे और कुछ नहीं सुनना”| इतना बोलते हुए गौतम जी आलोक की कॉल काट देते है| अगले ही पल वो जैसे ही मुड़ते है तो अपने पीछे अवनी को देखकर एकदम से डर जाते है और उनके चेहरे के भाव ऐसे हो जाते है जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो| इससे पहले अवनी कुछ बोलती गौतम जी ने उसे अंदर चल का इशारा किया| 

 

एजेंट अवनी और बाकी सबके लिए खाना लेकर आया उसने गांव के ही एक घर से उनके खाने का बंदोबस्त करवा दिया था| अवनी को बहुत भूख लगी थी इसलिए वो झट से खाना खाने बैठ गई लेकिन तभी अचानक से गौतम जी का फोन फिर बजा| अवनी ने कॉल रिसीव की तो वो कॉल आलोक की ही थी| 

 

“ पापा,,पापा मम्मी ,,मम्मी” आलोक की आवाज में बहुत ज्यादा घबराहट और चिंता झलक रही थी| 

 

उसकी लड़खड़ाती आवाज सुनकर अवनी ने उससे पूछा,” आलोक क्या हुआ ?? क्या हुआ मम्मी को”??

 

आलोक रोते हुए बोला,” पापा कहा है ?? मम्मी सीढ़ियों से गिर गई है| मै ऑफिस से निकलने वाला था लेकिन तभी घर से नौकर का फोन आया उसने बताया मम्मी सीढ़ियों से गिर गई है उनकी हालत बहुत नाजुक है”| 

 

ये सुनते ही अवनी ने फौरन फोन रखा और खाने की थाली को जरा सा सरकाते हुए बाहर की तरफ दौड़ी जहा उसे अपने ससुर ड्राइवर नितेश के साथ खड़े दिखाई दिए| अवनी उनके पास गई और उन्हें सारी बात बताई| उसके बाद गौतम जी ने एक पल भी वहा रुकना ठीक नहीं समझा उन्होंने अवनी को फौरन गाड़ी में बैठने के लिए कहा और नितेश से भी गाड़ी तेज चलाने की बात कही लेकिन नितेश तो जैसे अपनी जगह पर बर्फ की तरफ जम गया था| गौतम जी ने जब उसकी तरफ रुख करके देखा तो वो एकदम से नितेश का नाम पुकारते हुए चिल्लाए और उनकी तेज कड़क आवाज सुनकर ही नितेश फौरन ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया| 

 

अवनी अपने ससुर के साथ गाड़ी में पीछे बैठी हुई थी और नितेश आगे ड्राइविंग सीट पर| गाड़ी स्टार्ट करने से पहले नितेश ने मुड़कर पीछे की तरफ देखा और बोला, “ मा…मालिक ,,हमें घर पहुंचते पहुंचते सुबह के लगभग चार बज जायेंगे इस वक्त बाढ़ बजने को है आपको पता है ना अगर हम इस वक्त घर के लिए निकले तो हमें उसी रास्ते को पार करके जाना होगा तो क्यों ना हम सुबह तक का इंतजार कर ले”| नितेश की आवाज में बहुत ज्यादा घबराहट थी लेकिन उसकी ये बात अवनी को समझ नहीं आई वो उस पर गुस्से वाले लहजे में बोलने को ही थी तभी उसके ससुर शांत धीमी आवाज में नितेश से पूछने लगे….

 

गौतम जी : नितेश गाड़ी की टंकी फुल है ना ??

 

नितेश : हा बड़े मालिक लेकिन …( लेकिन बोलते बोलते नितेश रुक गया और उसने एक नजर पहले अवनी की तरफ देखा और फिर गौतम जी की तरफ और फिर बोला) बड़े मालिक गाड़ी में वो सामान नहीं है| 

 

अवनी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था उसने तपाक से नितेश से पूछा ,” कौन सा सामान”??

 

तभी गौतम जी ने नितेश को गाड़ी चलाने के लिए कहा और नितेश ने गाड़ी स्टार्ट कर दी| यहां एक तरफ अवनी हैरान अचंभे में थी और वही दूसरी तरफ नितेश के साथ साथ अवनी के ससुर गौतम जी भी बहुत ज्यादा परेशान थे| अभी बस पांच मिनट का समय ही बीता था बारह बजने में लगभग दस मिनट बाकी थे| अवनी के ससुर गौतम जी ने अवनी से एकदम शांत स्वर में कहा,

 

गौतम जी : अवनी मै जो तुमसे कहने जा रहा हु उसे ध्यान से सुनना और प्लीज मेरी कही हुई हर बात पर अमल करना क्योंकि ये तुम्हारे लिए बहुत जरूरी है| अवनी मै यहां कभी नहीं आता लेकिन तुम्हारी इच्छा थी इसलिए मै तुम्हारे साथ यहां जमीन की डील साइन करने चला आया पर आगे का रास्ता थोड़ा मुश्किल है”| 

 

अवनी पहले से हैरान थी उसने अपने ससुर जी से पूछ ही लिया,” कैसा मुश्किल पापा”??

 

गौतम जी : अवनी वो सब मै तुम्हे बाद में बताऊंगा लेकिन अब जैसा मै तुमसे कहूंगा बस वैसा ही करोगी तो हम तीनों ही सुरक्षित रहेंगे| अवनी अगर आगे किसी मोड़ पर हमारी गाड़ी रुक जाती है तो तुम कुछ नहीं बोलोगी एकदम शांत रहोगी चाहे तुम्हे कोई पुकारे कोई आवाज दे या कितनी भी बेचैनी हो,, वो आवाज खुद आलोक की या किसी की भी हो तुम कुछ नहीं बोलोगी सिर्फ चुप रहोगी और आँखें बंद करके एकदम शांत बैठी रहोगी| तुम एक पल के लिए भी तब तक आँखें नहीं खोलेगी जब तक मै नितेश से गाड़ी स्टार्ट करने को ना कह दूं| और हा एक और बात ( अवनी ध्यान से आप ससुर की सारी बाते सुन रही थी ) अपने फोन साइलेंट कर दो उनकी रोशनी भी बंद कर दो चाहे आवाज नहीं होनी चाहिए| 

 

अपने ससुर की ये बात सुनकर अवनी कुछ देर के लिए सोच में पड़ गई वो उनसे इस बारे में पूछना चाहती थी लेकिन उसके ससुर ने उसे शांत रहने का इशारा दिखा कर आगे रास्ते की तरफ देखने लगे| जैसा अवनी के ससुर ने कहा अवनी ने वैसा ही किया उसने अपने फोन की आवाज बंद कर दी और उसकी रोशनी भी बिल्कुल धीमी कर दी उसने देखा नितेश ने भी बिल्कुल वैसा ही किया बल्कि उसने गाड़ी के अंदर जल रही लाइट्स भी बन कर दी| आगे रास्ते पर पड़ती हैडलाइट की रोशनी में सिवाय घुप्प अंधेरे और दोनों तरफ से जंगल के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दे रहा था| अवनी को थोड़ा डर लगने लगा था क्योंकि ये एरिया भले ही गांव का था लेकिन यहां दूर दूर तक भी कोई मामूली सी रोशनी तक दिखाई नहीं दे रही थी| अवनी ने मोबाइल में वक्त का जायजा लिया रात के एक बज चुके थे उसे रास्ते के एक कोने में कॉन्क्रीट के पत्थर पर कालधारा का नाम लिखा हुआ दिखाई दिया| तभी अवनी के ससुर फिर से अवनी से बोले,” अवनी मैं तुमसे जो बाते कही उन पर अब अमल करने का वक्त आ गया है| प्लीज कोई भी आवाज मत करना”| ऐसा बोलकर वे फिर से शांत हो गए| 

 

कुछ और वक्त बीता रात के लगभग डेढ़ बजे थे कि अचानक हमारी गाड़ी खुद ब खुद रुक गई| आमतौर पर जब किसी की गाड़ी रुक जाती है तो वो उसे दुबारा से स्टार्ट कर की कोशिश करता है लेकिन नितेश ने ऐसा कुछ नहीं किया| गाड़ी में सब खामोश बैठे थे घुप्प अंधेरे के बीच एक दूसरे तक को देखना नामुमकिन सा हो रहा था| बारिश की बूंदों की धीमी आवाज सबके कानो में सुनाई पड़ रही थी| अचानक से चांद पर से काले बादलों की छाया हट गई जैसे उन्हें किसी से जानबूझकर हटाया हो और फिर तेज बिजली कड़कने लगी मानो वो बिजली जानबूझकर शोर मचा रही थी वो किसी को पुकार रही थी देखो देखो कोई आया है लेकिन गाड़ी में सब खामोश बैठे थे| अवनी को बेहद डर लग रहा था उसने पहली बार बिजली की ऐसी कौंधती हुई गर्जना सुनी थी जिसमें बिजली बार बार कड़क रही थी और शांत ही नहीं हो रही थी| एक तरफ बिजली कड़कने की रोशनी तो दूसरी तरफ आज चांद अपने पूरे रंग के साथ चांदी जैसी चमक उस चीज पर बिखेर रहा था| 

 

वो चीज,, एक जर्जर हवेली जिसकी ऊंचाई से लेकर जमीन तक उसमें दरारों की लकीरें भी साफ चमक रही थी| काई के चिकनेपन ने उसे चारो तरफ से घेर लिया था| एक धीमी सी खटखटाहट की आवाज अवनी को सुनाई देने लगी उसने उस आवाज को ध्यान से सुनना शुरू किया जैसे वो किसी खिड़की की आवाज हो| अवनी की आँखें बंद थी उस आवाज से उसे सिर्फ यही एहसास हो रहा था कि ये किसी खिड़की की आवाज है जो हवा के तेज झोंके से लगातार हिल रही है| उसके मन की उत्सुकता बार बार उसका ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वही दूसरी तरफ उसे उसके ससुर की कही हुई बात भी ध्यान थी जिसकी वजह से अवनी ने अपने मन को रोक रखा था| 

 

लेकिन कहते है ना इंसान कभी अपने मन को काबू नहीं कर सकता इसलिए अवनी भी उन आवाजों को अपने मन के भीतर काबू नहीं कर पा रही थी| उसने अपनी आंखे धीरे से खोली उसके पास उसका पर्स था जिसमें एक शीशा रखा हुआ था अवनी ने ध्यान से उस शीशे को बिना किसी आवाज के निकाला और उस शीशे को अपनी गोद में रखकर उसमें देखने लगी| कड़कती बिजली की रोशनी और पूरे चांद का रंग जैसे ही उस हवेली पर पड़ा अवनी को शीशे में उसकी दरारें साफ दिखाई देने लगी| उस बेजान जर्जर हवेली का रूप इतना खौफनाक दिखने लगा जो अवनी ने कभी सोचा भी नहीं था| अगले ही पल उसने शीशा पलट दिया उसकी सांसे तेज चलने लगी| अचानक से बारिश की बूंदों ने भी शोर मचाना शुरू कर दिया| बूंदों के इसी शोर में खिड़की की आवाज तो बंद हो गई लेकिन एक धीमी सी आवाज जो शायद न तो अवनी को सुनाई दे सकती थी और ना ही गौतम जी को लेकिन किसी और ने वो आवाज सुन ली थी| 

 

एक नन्हा सा बिल्ली का बच्चा भीगता हुआ हवेली की सीमा के अंदर चला गया| उसके पैर गीली मिट्टी में अपनी छाप छोड़ते हुए जा रहे थे हवेली के दरवाजे से वो लगभग बीस कदम की दूरी पर ही थी और अचानक से एक छाया उसके पीछे पीछे चलने लगी| अगले ही कुछ पलो में जैसे ही वो बिल्ली का बच्चा आगे बढ़ा हवेली के चारों तरफ से एक लाल रंग की रोशनी सिर्फ एक पल के लिए निकली और वही अंधेरे में गुम हो गई| अगले ही पल उस बिल्ली के बच्चे का सिर हवा में उछलता हुआ दिखाई दिया| उसका बेजान शरीर हवेली के पास खून से लथपथ पड़ा हुआ था| पच - पच की आवाज धीमे धीमे बढ़ने लगी जैसे कोई उस बिल्ली के बच्चे के शरीर को स्वाद ले लेकर खा रहा हो| तभी अचानक से दूर एक बिल्ली के रोने की गूंज सुनाई दी| हवेली के दरवाजे पर बैठी एक बिल्ली जोर जोर से रोने लगी वो अंदर नहीं जा रही थी लेकिन वही हवेली के सामन बैठी रो रही थी| उसके रोने की गूंज में ऐसी भयानक डरावनी चीखे शामिल थी कि गाड़ी में बैठी अवनी डर गई जिसे उसके ससुर गौतम जी ने भांप लिया| 

 

अगले ही पल अचानक से गाड़ी के शीशे पर तेज वार हुआ जैसे किसी ने शीशे पर कुछ फेंककर मारा हो| अवनी बेहद घबरा गई वो तो पलटकर देखने ही वाली होती है कि तभी उसके ससुर उसका हाथ पकड़कर कसकर दबा देते है जो अवनी के लिए एक तरह का संकेत था कि उसे वहा मुड़कर नहीं देखना है| अवनी की आंखों में डर से आंसू आ चुके थे उसकी आँखें अभी भी बंद थी और वही दूसरी तरफ बिल्ली के रोने की गूंज शांत हो चुकी थी| 

 

“ आखिर कौन सी जगह है ये क्या हो रहा है यहां !! गाड़ी यहां रुक कैसे गई”?? अवनी के मन में ढेरों सवाल चल रहे थे| तभी उसकी नजर फोन की स्क्रीन पर पड़ी| कम रोशनी में भी उसे साफ दिखाई दे गया था कि उसका पति आलोक उसे कॉल कर रहा है लेकिन वो उसकी कॉल नहीं उठा सकती थी| आलोक ने चार से पांच बार अवनी को कॉल की लेकिन अवनी मजबूर थी न वो आलोक की कॉल उठा सकती थी और न ही उसे ये बता सकती थी कि इस वक्त वो लोग कालधारा की जमीन पर मौजूद है| 

 

वही दूसरी तरफ आलोक इस बात से बिल्कुल बेखबर था| वो हॉस्पिटल में मौजूद था अंदर आई.सी.यू. में उसकी मम्मी का ऑपरेशन चल रहा था| आलोक इधर से उधर घूमते उंगलियों में उंगलियां घूम रहा था उसकी बेचैनी और घबराहट ठीक वैसी ही थी जैसे वहा उन लोगों की थी| तभी डॉक्टर बाहर आते है और आलोक से कहते है…..

 

उस जर्जर हवेली की सिर्फ एक झलक से अवनी का पूरा शरीर कांपने लगा और तभी उसी पल में माहौल में एक तेज चीख गूंजी जिसे सुनकर अवनी की आँखें फौरन खुल गई और अगले ही पल उस चीख के साथ कई और चीखे भी गूंज लगी| वो सारी चीखे एक साथ इस तरह माहौल में गूंज रही थी मानो एक भयंकर तांडव होने वाला हो| उन भयानक चीखों को तोड़ते हुए एक दर्द भरी चीख बहुत पास से अवनी को सुनाई देने लगी,” मदद करो मेरी मुझे बचा लो मेरी मदद करो मै मरना नहीं चाहती मेरा हाथ थाम लो ,,थाम लो बचा लो मुझे”| वो आवाज इतने करीब जरूर थी लेकिन उससे पहले जब अवनी की आँखें खुली थी तो उसने खुद को हवेली के बाहर सड़क पर पाया था| भले ही उसका चेहरा हवेली की तरफ नहीं था लेकिन उसने खुद को उस जर्जर हवेली के बाहर उस घुप्प अंधेरे में सड़क पर अकेले मौजूद देखा था और उस आवाज को सुनने के बाद तो उसकी उत्सुकता इतनी बढ़ गई कि वो खुद को वहा देखने से रोक नहीं सकी| 

 

अवनी को इस बात का एहसास भी नहीं हुआ कि वो क्या करने जा रही है| अवनी अपना चेहरा मोड़कर उधर देखने ही जा रही थी और जैसे ही उसकी नज़रे उस जर्जर भयावह हवेली की तरफ मुड़ी उसने देखा कि हवेली की दूसरी मंजिल पर एक लड़की दर्द से उसे पुकार रही है और ठीक उसके पीछे एक साया उसे बुरी तरह नोच रहा है| उस साए ने लड़की को कसकर दबोचा हुआ था लड़की के चेहरे पर जगह जगह से खून की लकीरें दिखाई दे रही थी वो खिड़की पर जोर जोर से हाथ पटककर मदद की गुहार लगा रही थी| ये सब कुछ सिर्फ चंद पलो का एहसास साबित हुआ जब अचानक से गाड़ी के स्टार्ट होने की आवाज अवनी के कानो में गूंजी| अवनी ने अपना रुख सामन की तरफ किया और पाया कि वो अकेली नहीं है बल्कि वो तो गाड़ी में ही अपने ससुर और ड्राइवर नितेश के साथ मौजूद है| अवनी ने एक बार फिर हल्का सा रुख करके हवेली की दूसरी मंजिल की तरफ देखा और वो दृश्य उसकी नजरों में समाकर रह गया| 

 

अगले पंद्रह मिनट बाद जब उस हवेली का रास्ता खत्म हुआ तब अवनी के ससुर ने उससे पूछा,” अवनी तुम ठीक हो ना”??

 

अवनी पहले कुछ नहीं बोली लेकिन फिर जब गौतम जी ने उसे कंधे से झकझोरा तो अवनी डर से बुरी तरह चिल्ला पड़ी| कुछ पल के लिए गौतम जी को बस यही लगा कि वो उस हवेली की वजह से डर गई है लेकिन अवनी ये कैसे उन्हें बताए कि चलते वक्त उसने वहा क्या देखा| गौतम जी ने अवनी को शांत रहने के लिए कहा और नितेश को लगातार गाड़ी चलाते रहने के लिए बोलने लगे| उस वक्त तो अवनी शांत हो गई लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं कि उसने उस हवेली की तरफ रुख करके कितनी बड़ी गलती कर दी थी| 

 

गाड़ी में अवनी अपने डर पर काबू करते हुए आराम से नींद की आगोश में समा चुकी थी तो गाड़ी भी अपनी पूरी रफ्तार से सड़क पर दौड़ रही थी| सड़क पर दौड़ती हुई सौ किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी से अचानक से कुछ निकलकर गिरता है और सड़क पर कुछ दूर उछलते हुए एक जगह जाकर थम जाता है| वो चीज बिल्ली के बच्चे का सिर होता है जो अब सिर्फ मांस के टुकड़े के जैसे सड़क पर पड़ा हुआ था| कुछ देर बाद एक कुत्ता वहा आता है और बिल्ली के बच्चे के उस सिर को आप मुंह में दबाकर वहां से ले जाता है| 

 

आखिर ऐसा क्या देखा वहां अवनी ने जो वो अपने ससुर को नहीं बता सकती !! आखिर क्या खौफनाक दृश्य था उन चंद लम्हों में जिसकी वजह से ये चंद लम्हों अवनी के लिए बेहद खौफनाक बन गए !! आखिर क्या ??

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