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गर्भवती

F
Funtel
21 Mar 2026

By - Sanjay Kamble

रात के अंधेरे में सुनसान सड़क के ऊपर एक तेज रफ्तार कार बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही थी। आसमान से गिरने वाली बारिश की बूंदे कार की विंडशील्ड पर गिरते ही गाड़ी के वाईपर उन्हें दूर धकेल देते जिसकी वजह से कुछ पल के लिए सब साफ़ नज़र आता पर अगले ही पल दूसरी बूंदे उनकी जगह ले लेती थी। यह चोर पुलिस का खेल चल ही रहा था। कार के अंदर ड्राइवर सीट पर बैठा वह शख्स काफी टेंशन में लग रहा था क्योंकि उसकी बाजू वाली सीट पर बैठी महिला को लेबर पेन शुरू हो चुके थे। उस आदमी को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचना था क्योंकि डिलीवरी कभी भी हो सकती थी। दर्द के कारण वो महिला रो रही थी। चिल्ला रही थी ।और उसकी बगल में बैठा आदमी उसे धीरज दे रहा था। उनकी कार शहर के एक बड़े से अस्पताल के गेट से भीतर दाखिल हुई । वह आदमी जल्दबाजी में उतरा और स्ट्रेचर लाने के लिए भीतर गया। अपने साथ दो वार्डबॉय को लेकर आया और उसने कार का दरवाजा खोला। पर गाड़ी के भीतर वह महिला नहीं थी। वो हैरान हो गया।

"लगता है आपके अस्पताल के कर्मचारी उन्हें दाखिल करने अंदर ले गए होगे।"

दोनों वार्ड बॉय और वह आदमी सब तेजी से अस्पताल में घूमकर उसे तलाशने लगे। हर कमरे की तलाशी ले ली गई। सीढ़ीयां चढ़कर हर माले पर देखा लेकिन वह औरत कहीं पर भी नहीं थी।

काफी तलाश करने के बाद वार्डबॉय ने उस आदमी से पूछा।

"सर क्या वे आपकी पत्नी थी ?"

उसने परेशान नजरों से इधर-उधर देखते हुए कहा।

" जी नहीं। वो सड़क किनारे एक पत्थर पर बैठे गाड़ी को हाथ कर रोकने की कोशिश कर रही थी । मुझे उसकी हालत का अंदाजा आ गया , इसलिए मैंने उसे अपनी गाड़ी में लिया और अस्पताल लिए ले आया।"

" मतलब आप का भी सामना उस आत्मा से हो गया।"

" आत्मा से ? तुम कहना क्या चाहते हो ?"

" उस 'प्रेग्नेंट लेडी' की कहानी यहां का बच्चा-बच्चा जानता है । अगर आप इन बातों पर यकीन नहीं करते तो मैं आपको डराऊंगा नहीं । आपसे पहले भी कई राहगिर उस महिला को हमारे अस्पताल में लेकर आने का दावा करते हैं। वैसे आपको जाना कहां था ?"

" मुझे जाना तो कहीं और था पर उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए इस रास्ते आ गया। खैर , मैं चलता हूं"

इतना कहकर वह अपने गाड़ी में बैठा और दोबारा अपनी मंजिल की तरफ जाने लगा।

सड़क से गुजरते हुए वो एक चौराहे के पास पहुंचा। यह वही चौराहा था जहां से मुड़कर उसे दूसरी तरफ जाना था पर उस महिला की वजह से उसे शहर जाना पड़ा। गाड़ी की लाइट ऑन करके वह कुछ पल के लिए वही रुक आ रहा।

' कौन होगी वो औरत ? .. जाने दो। इतना क्या सोचना ?'

अपने आप से बुदबुदाते हुए गाड़ी पीछे लेने के लिए स्टेरिंग घुमाकर पीछे देखा तो एक खून से लथपथ महिला उसकी गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी उसे घूरे जा रही थी।वह डरावना दृश्य देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए। गाड़ी रोककर वो झट से नीचे उतरा और दूर हट गया। उस घटना से उसके दिल की धड़कन तेज हो गई थी। उसे कार का दरवाजा खोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। खुद को संभालते हुए वो आगे बढ़ा और कार का पीछला दरवाजा खोलने लगा। दरवाजा खोलकर वो झट से दूर हट गया और नीचे झुककर पीछली सिटपर नजरें घुमाई पर वहां कोई नहीं था। और तभी एक कार हॉर्न बजाते हुए वहां से निकल गई। जो कुछ भी हो रहा था सब उसकी कल्पना से परे था। आज तक इतना सफर किया, रात रात बाहर रूका पर इस तरह का अनुभव कभी नहीं हुआ। पर आज ये सब देख उसे डर लगने लगा था। बीना कुछ सोचे वो गाड़ी में बैठा और वहां से तेजी से निकल गया।

अगले दिन

वो ऑफिस में बैठा जरूर था पर उसका ध्यान कहीं और था। सब अपने अपने काम में मशगूल थे। पर उसके दिमाग में कल रात की वह डरावनी घटना घर कर के बैठी हुई थी । उसे इस तरह खामोश बैठा देख उसकी एक सहकर्मी राधीका जो उसे पसंद करती थी वो उसके पास कुर्सी पर आकर बैठ गई।

" हैलो, क्या सोच रहे हो ?"

उसकी बात सुनकर वो झट से अपने खयालों से बाहर आ गया।

" अरे राधिका तुम। बोलो ना।"

"सुबह से ना हाय हेलो किया, ना एक बार भी मुड़ कर देखा. बस गुमसुम से बैठे हुए हो. कोई और मिल गई है क्या ?"

" तुम भी ना कुछ भी बोलती रहती हो।"

" इतने खोए खोए लग रहे हो मतलब जरूर किसी लड़की का चक्कर है !"

" नहीं यार। बोलो ना क्या बात है।"

" कल घर में एक पुजा रखी है। सब को बता दिया है। तुम्हें भी आना होगा। और वैसे भी कल छुट्टी है तो नो एक्सक्यूज ।"

कहते हुए राधिका ने उसकी तरफ देखा तो वो अभी भी कुछ सोच रहा था । उसका ध्यान बिल्कुल भी राधिका की तरफ नहीं था। उसे इस तरह देख राधिका ने पूछा।

" क्या बात है ? तुम कुछ ज्यादा ही परेशान लग रहे हो । कुछ हुआ है क्या ?"

वो कुछ पल खामोश बैठा रहा। और एकदम से राधिका की तरफ देखकर बोला।

" तुम भुत प्रेत भटकती आत्मा इन बातों पर यकीन करती हो ?"

" यह अचानक तुम्हें क्या हो गया ? हमेशा मजाक मस्ती करने वाला इंसान एकदम से भूत प्रेतों की बातें कैसे करने लगा ?"

" यार मैं मजाक नहीं कर रहा । प्लीज बताओ क्या तुम भूत-प्रेतों पर यकीन करती हो ? या तुमने किसी से उनके बारे में सुना है ? "

" सुना तो है, मगर मैं खुद यकीन नहीं करती । वैसे हुआ क्या है ?"

" तुम यकीन नहीं करोगी कल रात मैंने किस तरह की शक्ति का सामना किया है . "

"किस तरह की शक्ति का सामना किया। कुछ साफ साफ बोलोगे?"

उसकी बात सुनकर उसने आंखें बंद कर अपना सर दोनों हाथों से पकड़ा और टेबल पर सिर रखकर वैसा ही बैठे रहा। सब कुछ शांत लग रहा था। पर अगले ही पल उसके कानों में अजीब सी आवाज गूंज उठी। आवाज किसी छोटे बच्चे की हंसने की आवाज़।

उसने ऊपर देखा तो पुरा ऑफिस खाली पड़ा था। छत पर कई सारी ट्युबलाईट्स में से कुछ बंद चालू हो रही थी। सिर्फ एक पल में बदल चुका मंजर देखकर उसकी सांस अटक गई। और दोबारा उसे किसी बच्चे के खिलखिलाने की आवाज सुनाई दी, उसने झट से मुड़कर आवाज की तरफ देखा। बाई तरफ कुछ दूरी पर बाथरूम था। पर वहां की लाइट बंद होने के कारण कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था। उसने गौर से देखा तो वहां कोई बाथरूम के अंदर से उसी को झांकता नजर आया। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। फिर भी हिम्मत जुटाकर वह बाथरूम की तरफ जाने लगा। बाथरूम के भीतर की लाइट चालू बंद हो रही थी जिसकी वजह से कभी अंधेरा तो कभी उजाला हो जाता। वो बाथरूम के दरवाजे के पास पहुंच गया था। उसने आधे खुले दरवाजे से अंदर झांक कर देखा पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। तभी उसे अपने पीछे किसी के होने का एहसास हुआ। जैसे पीछे खड़ा कोई उस के काफी करीब पहुंच चुका था । डर के कारण उसकी गर्दन पर जमा पसीने के ऊपर पीछे खड़े शख्स की सांसो का अहसास हो रहा था। वो इतना डरा हुआ था कि उसे खुद अपने दिल की धड़कन साफ-साफ सुनाई दे रही थी। गला पूरी तरह सूख चुका था। पीछे से आ रहा वह डरावना एहसास उसकी बर्दाश्त के बाहर हो गया। उसने हिम्मत जुटाई और झट से पीछे मुड़कर देखा। पर पीछे तो कोई नहीं था। पूरा ऑफिस बिल्कुल खाली पड़ा था। उसकी जान में जान आ गई। गहरी सांस लेकर उसने सामने बाथरूम की तरफ देखा और पलभर में अंदर से एक काला साया उसके ऊपर झपटा।

एकदम से वह होश में आ गया। राधिका अभी भी उसके सामने बैठी उससे पूछ रही थी।

"तुम बताओगे नहीं तो हमें कैसे पता चलेगा कि तुम्हारे साथ हुआ क्या है। "

उसने टेबल पर पानी की बोतल उठाई और दो घूंट पिकर गहरी सांस ली। राधिका की तरफ देखकर बताने लगा।

" अरे कल रात हमारे ऑफिस की पार्टी थी ना, तो तुम लोग चले गए और मैं थोड़ी देर रुक आ रहा। करीब 11:30 बजे मैं यहां से घर के लिए निकला। शहर से थोड़ी दूर पहुंचा हुंगा तभी मुझे सड़क की दूसरी तरफ एक औरत पत्थर पर बैठी नजर आई जो लगातार गाड़ियों को रोक कर मदद मांग रही थी। मैंने आगे जाकर यू-टर्न लिया और उस औरत के पास जा पहुंचा तो पता चला कि वह 9 महीने की प्रेग्नेंट है और उसको लेबर पेन शुरू हो चुके हैं। मैंने बिना कुछ समझे इस औरत को अपनी गाड़ी में बिठाकर दोबारा शहर लौटा और अस्पताल ले आया। पर जब हम अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि वह औरत गाड़ी में नहीं थी।"

उसकी बात सुनकर राधिका ने मजाक में कहा।

" मतलब तुम ने उस 'प्रेग्नेंट लेडी' के भूत की मदद की है।"

" भुत ?"

" हां भुत । तुम पहले शख्स नहीं हो। कई लोगों ने यह अनुभव किया है। वो औरत जिसे तुमने लिफ्ट दी थी उस औरत को 2 बेटियां थी और तीसरी बार प्रेग्नेंट थी, पर उसके घर वालों को बेटा चाहिए था और जब रिपोर्ट में उन्हें पता चला कि इस बार भी बेटी होने वाली है तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्हें अपनी जायदाद के लिए वारिस चाहिए था। उसे अपने रास्ते से हटाने की हर मुमकिन कोशिश वे करने लगे। पर लोगों का शक न जाये इसलिए सोच समझकर काम कर रहे थे। फिर वो रात आ गई। रात होते होते उस औरत को लेबर पेन शुरू हो गए। पर जानबूझकर घर वालों ने उससे अस्पताल नहीं पहुंचाया। वो रो रही थी। अस्पताल ले जाने के लिए हाथ जोड़ रही थी। और रात करीब 2:00 बजे वे उसे अस्पताल के लिए ले जाने लगे। रात का समय होने के कारण सड़क बिल्कुल खाली थी। सुनसान इलाका और सड़क के दोनों तरफ झाड़ियां देखकर उसके पति ने उसकी तरफ का दरवाजा खोला और चलती गाड़ी से उसे धक्का देकर फेंक दिया "

" कैसे वहशी लोग होंगे यार। फिर क्या हुआ ?"

" अगले दिन किसी राहगीर को वह औरत सड़क के किनारे गढ्ढे में पड़ी नजर आई । पास में उसकी बेटी भी थी। दोनों मर चुकी थी।"

" और उसकी बाकी दो बेटियां ?"

" उन्हें कौन पालने वाला। एक दिन उनका बाप एक बड़े घर की चौखट पर उन दोनों को बिठाया जो अनाथ आश्रम था, और चॉकलेट लाने गया । पर कभी वापस नहीं आया।"

ऑफिस खत्म हो गया था। एक-एक करके सारे सहकर्मी ऑफिस से जाने लगे। राधिका ने बताई हकिकत सुनकर उससे भी काफी बुरा लगा था। उसकी आंखें नम हो गई थीं। बगैर कुछ बोले उसने अपनी बैग उठाई और ऑफिस से जाने लगा। अपनी कार निकाली और अपने घर जाने लगा।

आवाजाही काफी कम थी। घर पहुंचा और सारी घटनाएं उसके दिमाग में किसी बवंडर की तरह घूमने लगी। वह बेड पर लेटा जरूर था पर उसे नींद नहीं आ रही थी। रह रह कर उसके सामने उस बेबस औरत का चेहरा आ रहा था। वो उठकर बैठ गया। उसने टेबल पर रखी चाबीयां उठाई और घर से बाहर निकला। कार लेकर वह दोबारा शहर की तरफ जाने लगा। कुछ ही देर में वह उसी जगह पहुंच गया था जहां कल रात उस महिला को लिफ्ट दी थी। पल भर वही रुका रहा। इलाका काफी सुनसान और घनी झाड़ियों से घिरा हुआ था। दिन के वक्त जो गाड़ियां हर 2 मिनट में गुजरती थी रात के वक्त वह बिल्कुल ना के बराबर हो जाती। अपनी गाड़ी में वैसे ही बैठा रहा। गाड़ी के दोनों तरफ के शीशे नीचे कर दिए थे। वह कभी सिर के ऊपर लगे शीशे पर पिछली सीट पर नजर डालता तो कभी दोनों खिड़कियों से बाहर देखता। अगले कुछ मिनट तक गहरा सन्नाटा पूरे इलाके में छाया रहा। अगले ही पल सामने वाले शीशे पर ऊपर से घने बाल नीचे सरकते हुए नजर आने लगे । यह देखकर उसकी जान हलक तक आ गई। और फिर आधा चेहरा ऊपर से अंदर झांकता हुआ दिखाई दिया। उसने गाड़ी शुरू की और तेज रफ्तार से यु टर्न लेते हुए घर की तरफ दौड़ाई।

सुबह हो चुकी थी। अच्छी तरह तैयार होकर वह अपनी गाड़ी में बैठ गया। राधिका के घर जाना था। वो भी राधिका को मन ही मन में पसंद करता था। आज के घर में पूजा भी थी , तो आज अच्छा मौका था उसे अपने दिल की बात बताने का। पर रह रह कर वह डरावनी बात उसके दिमाग को परेशान कर रही थी। 'अगर राधिका हां बोलेगी तो उसके साथ यह शहर हमेशा के लिए छोड़ कर दूर कहीं चला जाऊंगा, '

राधिका के घर पहुंचा तो लोग बैठकर खाना खा रहे थे। टेबल पर रखी एक तस्वीर को लोगों ने काफी फुल मालायें चढ़ाई थी। शायद राधिका के घर में किसी की बरसी थी। उसे देखकर राधिका दौड़ते हुए आगे आई और बोली

"तुम्हारा आना आज मेरे लिए सबसे इंपॉर्टेंट है। आज मेरी मां के चौदवी बरसी है। "

उसका हाथ पकड़कर वो अपनी मां की तस्वीर के सामने ले गई। राधिका अपनी मां की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े आंखें बंद कर के खड़ी थी। उस तस्वीर को देख कर उसे समझ में आ गया कि जिस प्रेग्नेंट औरत की आत्मा को उसने लिफ्ट दी थी वह राधिका की ही मां थी। वह हैरान हो चुका था। पर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया। अपने पॉकेट में हाथ डालकर वह छोटी सी अंगूठी निकाली और तस्वीर के सामने ही राधिका की उंगली में पहनाते हुए कहा।

" सासू मां, आपकी बेटी से बहुत प्यार करता हूं और शादी करना चाहता हूं आप आशीर्वाद चाहता हूं।"

राधिका ने आंखें खोल कर उसकी तरफ देखा, पर अब वह आंखें बंद करके राधिका की मां की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े खड़ा था। और राधिका की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे।

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