वैशाली,गौरव,फ्रूटी और विकी चारों गहरे दोस्त थे, जो इंडोनेशिया में पढ़ाई के लिए आए हुए थे।एक दिन चारों दोस्त कही बाहर घूमने का प्लान बनाते हैं।
गौरव: मैं एक ऐसी जगह को जानता हूं जहां थोड़ा सा क्वालिटी टाइम स्पेंड करना हो तो वहां चल सकते हैं,वह जगह शहर से थोड़ी दूर है। अंधेरा होने के बाद उधर ही कैंप लगा लेंगे।चारों तरफ कोहरा सन सन बहती ठंडी हवाएं और बीच में जलती आग..!आग के चारों तरफ बैठे हुए हम चारों… खूब मस्ती करेंगे …क्या कहते हो तुम लोग?
वैशाली:वाव वेरी एक्साइटिंग ! मजा तो तभी आता है ना, जब चारों तरफ सन्नाटा हो और हम वहां बैठकर पानी की हलचल को महसूस कर पाए।
गौरव, वैशाली, फ्रूटी और विकी चारों लोग रात के समय शहर से दूर,एक गुमनाम सी झील के किनारे नाइट आउट करने के लिए तैयार हो गए थे।सारी तैयारियां हो चुकी थी और प्लान के मुताबिक, शाम के 6:00 बजे वो लोग अपनी डेस्टिनेशन के लिए निकल चुके थे।
फ्रूटी:गौरव सर्दी के मौसम में तो शाम के 7:00 बजे ही ऐसा लग रहा है,जैसे आधी रात हो गई हो मुझे तो ऐसा लग रहा है हम लोग कहीं जंगल की सैर पर निकले हैं।अभी भी सोच लो मुझे तो अब थोड़ी स्पूकी वाईब्स आ रही है।
वैशाली:अरे यार तू पूरे मूड का सत्यानाश मत कर, स्पुकी नहीं मुझे तो रोमांटिक वाईब्स आ रही है।
कुछ देर में वो चारों लोग झील के किनारे पहुंच गए थे,बहुत ही खूबसूरत नजारा था।चारों ओर से पेड़ पौधों से घिरा हुआ एक छोटा सा तालाब था,आसपास ज्यादा आबादी नहीं थी।उन चारों ने एक साफ सुथरी सी जगह देखकर लकड़ियां जमा की,और वहीं पर आग जलाकर बैठ गए।कुछ देर तक खाने-पीने का प्रोग्राम चला और उसके बाद वे लोग हंसी मजाक करने लगे।
गौरव:मेरा ड्रिंक खत्म हो गया है,मैं गाड़ी से दूसरा लेकर आता हूं।किसी और को चाहिए..?
गौरव के इतना पूछने पर सभी लोग अपना अपना हाथ ऊपर उठा देते हैं ।
गौरव हंसते हुए:अच्छा बाबा ठीक है,मैं सबके लिए लेकर आता हूं।
गौरव अपनी गाड़ी से चार बोतल निकाल कर बैग में डालता है,और जैसे ही पीछे मुड़ता है उसे अंधेरे में सामने पेड़ के पीछे कोई काली परछाई सी नजर आती है।
गौरव:विकी यह तू है क्या..?
गौरव के इतना पूछने पर पेड़ के पीछे दिखाई दे रहा वह साया,अचानक से वहां से गायब हो जाता है।गौरव एक दो बार अच्छे से देखने की कोशिश करता है,लेकिन फिर उसे अपना वहम समझ कर उस ख्याल को झटक कर वापस अपने दोस्तों के पास जाने लगता है।
गौरव विकी से:अभी जब मैं गाड़ी की तरफ गया था,तू भी आया था क्या मेरे पीछे-पीछे..?
विकी:कैसी बात कर रहा है यार,मैं तो इधर ही बैठा हूं इन लोगों के साथ। क्या हुआ कोई था क्या उधर..?
गौरव:पता नहीं यार, एक पल को ऐसा लगा कि उधर पेड़ के पीछे से कोई मुझे देख रहा है।लेकिन फिर अगले पल मैंने देखा तो वहां कोई नहीं था।
फ्रूटी:तू यह सब हमें डराने के लिए स्टोरी बना रहा है न??
गौरव:पागल हो क्या तुम लोग, मैं क्यों कहानी बनाऊंगा…?यह कोई जगह है मजाक करने की,खैर छोड़ो यह लो तुम लोग अपना ड्रिंक लो।
विकी:यार मुझे बाथरुम जाना है,मैं अभी आता हूं।
कुछ देर बाद…
गौरव:यह विकी अभी तक नहीं आया, इसे क्या हुआ..?तुम लोग बैठो मैं देख कर आता हूं।
फ्रूटी:नहीं नहीं हम दोनों अकेले नहीं रहेंगे यहां पर..!
गौरव:अरे तुम दो हो अकेले थोड़ी हो,और मैं यही सामने हूं कहीं दूर नहीं जाऊंगा डोंट वरी।अरे यार कुछ नहीं होता है । चिल..!
गौरव मोबाइल का टॉर्च ऑन करके थोड़ा आगे जाकर विकी को ढूंढने लगता है।
गौरव:विकी…विकी… क्या हुआ ..?
गौरव थोड़ा घबराते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ा रहा था,तभी विकी पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रख देता है।
गौरव:क्या कर रहा है यार तू ,कहां चला गया था ..?
विकी:डरा दिया ना,कहीं नहीं गया था बस देख रहा था तू डरेगा कि नहीं..!
गौरव: हो गया तेरा..!
विकी: हां उधर एक गड्ढा खुदा हुआ था उसी में हल्का हो गया मैं..!
गौरव वापस आकर:फ्रूटी तुम इसके लिए डर रही थी, मस्ती सूझ रही है इसको ।जानबूझकर छिपा हुआ था। जब मैं इसे ढूंढने गया तो मुझे डराने की कोशिश कर रहा था।
फ्रूटी:विकी ये कोई मसखरी करने की जगह है ,तुम्हारी ना मस्ती खत्म नहीं होती है।अब तुम हिलना नहीं यहां से चुपचाप बैठो।
वैशाली: गायज़ काफी लेट हो गया है, और ठंड भी बहुत हो गई है।मुझे लगता है कि हम लोग को अपने- अपने टेंट में चलना चाहिए ।
सभी लोग अपने अपने टेंट में जाकर सोने की कोशिश करने लगते हैं,कुछ ही देर में चारों लोग गहरी नींद में सो गए थे।कुछ देर बाद वैशाली को ऐसा महसूस होता है,कि बाहर कोई डरावनी सी धुन में सिटी बजा रहा है।
वो धुन सुनकर वैशाली के मानो रोंगटे खड़े होने लगे थे।कुछ देर के बाद वो सिटी की आवाज सुनाई देनी बंद हो जाती है।और उसे ऐसा लगने लगता है,जैसे कोई उसके टेंट को खरोच रहा है।वैशाली चौक कर उठ जाती है, बाहर उसे एक आकृति सी नजर आती है जो बिल्कुल सीधी खड़ी हुई थी और उछलते हुए एक जगह से दूसरी जगह जाती हुई नजर आ रही थी।वैशाली को यह दृश्य बहुत अजीब सा लग रहा था।वैशाली का यह नजारा देखने के बाद डर से बुरा हाल होने लगा था।
वैशाली:पक्का विकी ही होगा,उसे ही हर समय मस्ती सुझती रहती है।इग्नोर कर देती हूं,अपने आप वापस चला जाएगा।
वैशाली वापस अपने बिस्तर पर लेट गई थी और आंखें बंद करके सोने की कोशिश तो कर रही थी,लेकिन अभी भी उसके मन में कई तरह की बातें घूम रही थीं।बाहर से लगातार किसी के यहां से वहां कूदने की आवाजे सुनाई दे रही थी।
कुछ देर कोशिश करने के बाद वैशाली गहरी नींद में चली गई थी,कुछ देर बाद विकी को भी अपने टेंट के बाहर कुछ अजीबोगरीब सी सीटी की आवाज सुनाई देने लगती हैं।विकी चौक कर उठ कर बैठता है।उसे टेंट के बाहर एक साया सा लहराता हुआ नजर आ रहा था ।
विकी:अभी तो रात के 2:00 रहे हैं इतनी रात को कौन बाहर घूम रहा है।
विकी:गौरव..? तू है क्या बाहर…!??
विकी के कई बार गौरव गौरव पुकारने पर भी जब,उसे कोई जवाब नहीं मिलता तो वह अपने टेंट से बाहर निकल आता है।
विकी:ये क्या चीज है..?जो सामने पेड़ से लग कर खड़ी नजर आ रही है।
विकी अपने मोबाइल की टॉर्च ऑन करता है और उसी आकृति की ओर कदम बढ़ा देता है।थोड़ा आगे जाने पर जैसे ही टॉर्च की रोशनी सामने खड़े साए पर पड़ती है,मानो विकी की सांस ही थम जाती है।
सामने एक साढ़े पांच फीट की महिला खड़ी हुई थी,जिसका पूरा शरीर खून से लथपथ था।और वो एक प्लास्टिक पेपर में लिपटी हुई थी।उसके दोनों पांव आपस में बंधे थे,और चेहरा भी कुछ गला सड़ा सा नजर आता था। विकी जैसे ही टॉर्च उसके मुंह की ओर करता है,वो गली सड़ी लाश अपनी आंखे खोल देती है,जिसे देखकर विकी के मुंह से चीख निकल जाती है।
विकी दौड़ते हुए अपने टेंट में लौट आता है,और अंदर आकर सिमट कर एक कोने में बैठ जाता है।
डर से विकी की सांस फूल रही थी।तभी उसे बाहर से एक आवाज सुनाई देने लगती है मानो कोई भारी सी चीज़ जमीन पर उछल रही हो।
विकी:वह जो कुछ भी था,मेरे टेंट के अंदर नहीं आ सकता है।शांत हो जा विकी वो अंदर नहीं आ सकता।
बाहर से लगातार आ रही धम्म धम्म की आवाज, एकाएक शांत हो गई थी। आवाज बंद होने के बाद विकी घबराते हुए अपने टेंट की ओर देखता है।सामने प्लास्टिक में लिपटी वो लाश उसके टेंट के अंदर एक कोने में खड़ी नजर आ रही थी।
विकी:ये मेरा वहम है बस।। कुछ नहीं है यहां..!
विकी ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली थीं। कुछ पलों के बाद विकी को वही डरावनी सी सीटी की आवाज खुद से दूर जाती हुई सुनाई देने लगती है।
कुछ देर बाद जब वह आवाज पूरी तरह से बंद हो जाती है,तब विकी अपनी आंखें खोल कर देखता है।इस समय उसके टेंट में कोई भी नहीं था, लेकिन वह सब जो उसने अभी कुछ देर पहले खुली आंखों से देखा था। वह देखने के बाद अब वह सो नहीं सकता था, ना तो उसके अंदर टेंट से बाहर जाने की हिम्मत थी और ना ही अकेले टेंट में रह पाने की।उसकी सांसे लगातार तेज होती जा रही थी,कुछ पलों के बाद अचानक विकी बेहोश होकर नीचे गिर पड़ता है।अगली सुबह उसके दोस्त जब उठते हैं,तो विकी को वहां पर बेहोश पड़ा हुआ देखकर परेशान हो जाते हैं।किसी तरह पानी के छींटे मारकर उसे होश में लेकर आते हैं।लेकिन विकी अभी भी कुछ कह पाने की हालत में नहीं था।विकी की ऐसी हालत देख जल्दी से वो लोग़ वापस अपने-अपने घर की ओर निकल जाते हैं।
घर पहुंच कर…
गौरव:कुछ तो बोल यार क्या हो गया था तुझे..?ऐसे कैसे अचानक बेहोश हो गया तू।
विकी:उस जगह पर जाकर बहुत बड़ी गलती कर दी हम लोगों ने,कुछ बहुत खतरनाक और डरावना है वहां पर।मैंने एक डेड बॉडी देखी जिसके पांव आपस में बंधे हुए थे। चेहरा बिल्कुल पीला और गला सड़ा सा था।
और वो मुझे घूर घूर कर देख रही थी।
गौरव:यह विकी को अचानक क्या हो गया, और जो कहानी ये सुना रहा है।क्या उस पर यकीन किया जा सकता है??
वैशाली:विकी ठीक कह रहा है वहां कुछ तो था। मेरी भी आधी रात गए नींद टूट गई थी। मैने भी कुछ बहुत डरावना सा महसूस किया वहां पर। कुछ था जो टेंट के बाहर उछलता नजर आ रहा था।
फ्रूटी:चाहे जो भी हो फिलहाल तो हम लोग वहां से सेफली लौट आए हैं। इसलिए अब उसे बुरा सपना समझ कर भूलने की कोशिश करो।।
गौरव:एकदम सही बोल रही है ये।देखो आज मॉम डैड घर पर नहीं हैं। तुम लोग चाहो तो आज रात यहां रुक सकते हो।
विकी और वैशाली की हालत देख सभी लोग गौरव के यहां पर ही रुक जाते हैं।
विकी आराम करने के लिए अपने कमरे में चला जाता है ।
ऋचा:समीर हम लोग कहां जा रहे हैं..? मुझे डर लग रहा है।
समीर:डरो मत मै हूं ना तुम्हारे साथ..!मैने एक स्पेशल डेट प्लान की है तुम्हारे लिये!
ऋचा:लेकिन यहां सुनसान जगह पर..?अंधेरा हो गया है बोलो ना क्या सरप्राइस है ..?
समीर और ऋचा पिछले कई सालों से रिलेशन शिप में थे। समीर एक अमीर लड़का था, जिसके पापा की एक बहुत बड़ी कंपनी थी।उसी कंपनी में ऋचा एक कंप्यूटर ऑपरेटर थी।
समीर को ऋचा पहली नजर में ही भा गई थी,इसलिए उसने ऋचा के लिए प्यार का जाल बिछाया और उसे झूठी बातें करके फंसा लिया।ऋचा को अपनी बातों से बरगलाने के लिए, उसने मंदिर में जाकर उससे गुपचुप शादी तक रचा ली थी।
शादी के कुछ दिनों के बाद ऋचा अपनी प्रेगनेंसी की खबर समीर को सुनाती है और अपनी शादी को सार्वजनिक करने के लिए दबाव बनाने लगती है ,जिससे समीर परेशान हो गया था।
समीर:बस हम पहुंच ही गए।आओ गाड़ी से नीचे उतरो देखो कितनी खूबसूरत जगह है।
समीर के कहने पर ऋचा गाड़ी से नीचे उतरती है। अंधेरा ही चुका था चांद की मध्यम सी रोशनी में सामने एक खूबसूरत सा तालाब नजर आ रहा था।आसपास हरे भरे पेड़ पौधे और ठंडी ठंडी हवा चल रही थी।
ऋचा को यह जगह बहुत पसंद आई थी,समीर का हाथ थामकर वो अब काफी रिलैक्स फील कर रही थी। कुछ देर बाद अचानक ही समीर ने पास में रखी कांच की बोतल को ऋचा के सर पर दे मारा। जिससे उसके सर से खून का फव्वारा छूट जाता है।और अगले कुछ ही मिनटों में वह निढाल सी जमीन और गिर पड़ी थी। ऋचा को मरा हुआ समझ कर समीर जल्दी से गाड़ी में रखा हुआ सफेद कपड़ा, ऋचा की पूरी बॉडी पर लपेटता है।लेकिन ब्लड तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था,और जल्दी ही कफ़न के लिए लाया गया सफेद कपड़ा पूरी तरह से खून से रंग गया था।।
बहते खून को रोकने के लिए समीर सफेद कपड़े में बंधी लाश को एक प्लास्टिक बैग में ठूस देता है,और वहीं तालाब के किनारे गड्ढा खोदकर उसमें लाश को दफना देता है।चूंकि इस जगह पर ज्यादा लोग आते जाते नहीं थे इसलिए समीर को पकड़े जाने का कोई खौफ नहीं था।
प्लास्टिक में बंद होने के बाद,ऋचा का दम घुटने लगता है और झटके से उसे होश आ जाता है।वो हिलने डुलने और मदद मांगने की बहुत कोशिश करती है,लेकिन बंधी होने के कारण वो कुछ कर नहीं पाती और ऑक्सीजन की कमी से कुछ ही पलों में एक बार फिर बेहोश हो जाती है।बेहोश ऋचा को लाश समझकर समीर जिंदा ही उसी दफना देता है।
अचानक ही विकी को ऐसा महसूस होने लगता है, जैसे किसी ने उसका मुंह किसी प्लास्टिक में बंद कर दिया हो और उसे सांस न आ रही हो।
सांस लेने के लिए छटपटाते हुए अचानक उसकी आंख खुलती है, तो वो देखता है सामने गौरव बैठा हुआ है। वो अपने कमरे में है,लेकिन उसकी गर्दन पर नीला निशान है।
विकी:मैने अभी जो देखा वो शायद सपना नहीं था। वो लड़की ही शायद अब भूत बनकर उस झील के पास भटक रही है।मुझे सब समझ में आ गया है।
गौरव:क्या समझ में आ गया है..?कौन लड़की..?
विकी गौरव को अपने सपने के बारे में बताता है।विकी गौरव से बाते कर रहा था, कि तभी विकी को वही डरावनी सीटी जैसी आवाज एक बार फिर से सुनाई देने लगती है। जिसे सुनकर उसके चेहरे के रंग उड़ने लगते हैं।
विकी:ओह गॉड..! वो यहां भी आ गई..! तूने ये आवाज सुनी..?
गौरव: कैसी आवाज..? क्या बात कर रहा है?
विकी जाकर अपने कमरे का दरवाजा लॉक करने लगता है, तभी उसे खट खट की आवाज सुनाई देने लगती है।
गौरव:ये कैसी आवाज आ रही है बाहर हॉल से, मैं देखकर आता हूं।
विकी(हकलाते हुए):वो… वो आ गई..! बाहर मत जाना..! वरना…!
इतना कहते ही वो जमीन पर गिर पड़ता है,और उसके पूरे शरीर पर फफोले पड़ने लगते हैं।देखते ही देखते उसका पूरा शरीर एक लाश की तरह सड़ने लगता है।
विकी के चेहरे का मांस पीला,बदबूदार और गला हुआ दिखाई देने लगता है।एक जीता जागता लड़का कुछ ही मिनट में एक गली सड़ी लाश के रूप में बदलने लगा था,और कुछ घंटों के भीतर ही अचानक उसकी मौत हो जाती है।
विकी की ऐसी हालत देखकर गौरव,वैशाली और फ्रूटी बहुत डर जाते हैं।
फ्रूटी:यह सब क्या हो गया गौरव..?यह सच नहीं हो सकता…!हमारी आंखों के सामने विकी का हाथ हमारे हाथों से छूट गया।आखिर किस गलती की सजा मिली है उसे।
वैशाली(हकलाते हुए):विकी ने उसे देख लिया था, इसीलिए वह उसे अपने साथ ले गई ।उस रात उस पोचोंग को देखा तो मैंने भी था इसका मतलब मैं भी..?
गौरव:कुछ नहीं होगा तुम्हे..!शांत हो जाओ..!मैं कुछ होने नहीं दूंगा..!
वैशाली:गौरव मुझे उस सिटी की आवाज सुनाई दे रही है,वह यहीं है इसी घर में।तुम सब लोग जाओ,अगर उसकी नजर तुम लोगों के ऊपर पड़ गई तो तुम्हारा भी वही हाल होगा जो मेरा होने वाला है।
फ्रूटी:वैशाली प्लीज ऐसी बातें मत करो,कुछ नहीं होगा तुम्हें। मुझे बहुत डर लग रहा है।
वैशाली अपने दोस्तों को किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती थी,वह पोचोंग किस हद तक जा सकता है,ये उसने अभी अभी अपनी आंखों के सामने देखा था।इसलिए वह गौरव और फ्रूटी को इस कमरे में छोड़कर, कमरे से बाहर निकल जाती है । बाहर हॉल में पांचोंग खड़ा हुआ नजर आ रहा था। वैशाली डरते हुए कुछ कदम उसकी ओर बढ़ाती है। अचानक वैशाली को प्लास्टिक बैग के फटने की आवाज सुनाई देती है।pocong उस प्लास्टिक से निकलकर बाहर आ जाता है। वह अपने हाथों पर बंधी रस्सी को झटके के साथ तोड़ देता है और एक लंबी छलांग लगाकर वैशाली के ठीक सामने खड़ा हो जाता है।
वैशाली वहां से भागकर दूसरे कमरे में जाकर खुद को लॉक कर लेती है।
फ्रूटी:गौरव हमने विकी को तो खो दिया, लेकिन हम अपनी वैशाली को कुछ नहीं होने दे सकते।प्लीज कुछ करो,कुछ करो।
गौरव:इंडोनेशिया आने के कुछ दिन बाद मुझे यहां के कुछ दोस्तों ने बताया था,कि यहां पर सुनसान इलाकों में कुछ पोचोंग घूमते हैं। यहां पर मान्यता है कि मौत के 40 दिनों तक,इंसान की आत्मा उसके शरीर के आसपास ही मंडराती रहती है। इसलिए 40 दिनों के अंदर दफनाने की बाद डेड बॉडी के पैर और हाथ खोलना जरूरी होता है।ताकि आत्मा उनके शरीर से निकलकर मुक्त हो सके, लेकिन ऐसी डेड बॉडीज जिनको दफनाने के बाद मुक्त न किया गया हो,तो फिर वह जीवन और मृत्यु के बीच में फंस कर रह जाती हैं।ये पोचौंग भी वैसा ही है। जैसा बिकी ने बताया उसकी मौत बहुत दर्दनाक तरीके से हुई थी।मरने के बाद भी इसकी आत्मा इसके शरीर से बंधी रह गई।अगर हम उसकी बॉडी तक जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दें तो..? तो शायद उसे मुक्ति मिल जाए।
वैशाली को बचाने का शायद यह आखिरी तरीका था,कुछ भी सोचे समझे बिना गौरव और फ्रूटी तेजी से उस जगह पहुंचते हैं। जिसके बारे में विकी ने उन्हें बताया था।
वहां पहुंचने के बाद वह देखते हैं कि एक कब्र खुदी हुई है,जिसके अंदर एक ताबूत रखा हुआ नजर आ रहा है।
फ्रूटी:यह देखो यह ताबूत यहां रखा है ,जरूर इसी ताबूत में से वह पोचौंग निकलकर इधर-उधर भटकता है।
गौरव और फ्रूटी जल्दी जल्दी उस ताबूत को खोलते हैं।ताबूत के अंदर एक सड़ी गली लाश दिखाई दे रही थी।
लास से इतनी बदबू आ रही थी कि वहां पर खड़ा हो पाना भी,उनके लिए बहुत मुश्किल हो रहा था।किसी तरह खुद पर काबू रखते हुए,गौरव जल्दी-जल्दी उस लाश को प्लास्टिक से बाहर निकलता है और उसके हाथ और पैर खोल देता है।
फ्रूटी:तुम्हें यकीन है ना गौरव, इतना करने से वह pochong वैशाली का पीछा छोड़ देगी।
गौरव:मुझे नहीं पता फ्रूटी,इसीलिए मैं अपने साथ ही गंगाजल भी लेकर आया था।भगवान का नाम लेकर इस लाश के ऊपर यह गंगाजल डाल देते हैं,विश्वास रखो हमारी वैशाली को कुछ नहीं होगा।
पोचोंग को मुक्त करने के बाद, गौरव और फ्रूटी घर पहुंचते हैं तो वहां पर उन्हें वैशाली अपने कमरे में बेहोश पड़ी हुई नजर आती है। वैशाली के ऊपर पानी छिड़क कर होश में लाने के बाद…
गौरव:वैशाली तुम ठीक हो ना..?
वैशाली:पता नहीं मैं जिंदा कैसे बच गई,मैने खुद को इस कमरे में कैद कर लिया था।काफी देर तक वह मेरे कमरे के बाहर यहां वहां कूदता रहा और उसके बाद पता नहीं कैसे मेरे कमरे में घुस गया। उसने मेरी गर्दन दबोचा और मेरा सर ले जाकर दीवार में दे मारा।
मेरे पूरे शरीर पर फफोले पड़ने शुरू हो गए थे, मेरे हाथ पैर चेहरा सब गलने लगा था घबराहट में पता नहीं कब मुझे चक्कर आया और मैं जमीन पर गिर गई।
गौरव:डरने की जरूरत नहीं है वैशाली,अब वह कभी नहीं आएगी हम लोगों ने उसे मुक्ति दिला दी है। तुम अब बिलकुल सेफ हो। तुम्हारी जान तो हमने बचा ली लेकिन विक्की को ना बचा पाने का गम हमारे दिल में हमेशा रहेगा।
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