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शैतान के साथ समझौता (1)

M
Mamta Sahaye
07 Apr 2026

शैतान के साथ समझौता!

 

वो अस्पताल का एक छोटा सा कमरा था, उस कमरे में पीछे की तरफ एक बेड लगा हुआ था और उस बेड पर एक पच्चीस-तीस वर्षीय शख्स लेटा हुआ था, उसके बेड के बाजू में ही एक वेल्टिलेटर था जिसके ऊपर तरह तरह की तरंगें उभर रही थी।

 

उस कमरे के बाहर एक पैंतालीस पचास साल की औरत जिसने नीला सूट पहना हुआ था, अपने दुपट्टे से मुंह दबाकर रोए जा रही थी!

 

उसकी आंखों से आंसू रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे और अस्पताल के उस गलियारे में उस औरत के अलावा फिलहाल कोई भी नहीं था।

 

कुछ ही देर में पीली कमीज और काली पतलून में एक आदमी जिसका भरा पूरा शरीर था, एक हाथ में एक कागज लेकर वहां आया।

 

उसने उस औरत से कहा -”अरे क्यों रोती हो धीरज की मां, हौंसला रखो, हमारा बेटा बिल्कुल ठीक है… बस बेहोश हैं।”

 

ये सुनकर वो औरत रोते हुए बोली -”अब क्या करूं मैं एक मां हूं, एक मां की पीड़ा तुम क्या जानो… वैसे भी वो…” बोलते बोलते उस औरत ने अपने होंठ ना जाने क्यों सी लिए, वो एकदम से चुप हो ग‌ए, कुछ देर तक तो वहां पर काफी ज्यादा शांति छाई रही लेकिन फिर अगले ही पल वो बोली -”हां बोलो ना आगे… देखो मैं मानता हूं कि वो मेरा सगा बेटा नहीं है लेकिन क्या बार बार मुझे इस बात का एहसास दिलाना जरूरी है क्या? क्या मुझे अच्छा लगता है उसे यूं अस्पताल के बिस्तर पर देखकर?”

 

ये सुनकर वो औरत खामोश रही, अब उस गलियारे में एक कोने में वह आदमी और दूसरे में वही औरत खड़े थे।

 

कुछ देर बाद उन्हें कमरे के अंदर से किसी के करहाने की आवाज आई, वो औरत जैसे ही उस कमरे के अंदर आई तो पाया कि बिस्तर पर लेटा धीरज उठने की कोशिश कर रहा था!

 

ये देखकर उसकी मां बोली -”अरे बेटा ये तू क्या कर रहा है! आराम कर…”

 

ये सुनकर धीरज बोला -”नहीं मां मुझे जाने दो, अगर मैं समय रहते यहां से नहीं गया तो अनर्थ हो जाएगा… मुझे जाने दो मां…” बोलकर धीरज ने अपने हाथों में लगी सारी पारदर्शी पाइपें खींचकर निकाली,इस दौरान उसके हाथ से काफी खून बह रह था, इसी के साथ ही दर्द की वजह से धीरज के होंठ भिंच भी गए थे लेकिन फिर भी उसने जैसे तैसे करके हिम्मत इकट्ठी की और वहां से जाने की कोशिश करने लगा।

 

वो उठकर दरवाजे तक ही आया होगा कि तभी धीरज के सौतेले पिता डाक्टर को लेकर वहां आ गए।

 

धीरज को ऐसे देखकर वो दोनों घबरा ग‌ए और किसी तरह से उसे उसके बिस्तर पर लेकर गए।

 

धीरज बार बार एक ही बात बोले जा रहा था -”मुझे जाने दो, वरना बहुत देर हो जाएगी, मुझे जाने दो…” लेकिन उन लोगों ने उसकी एक ना सुनी और फिर अगले ही पल उस डाक्टर ने धीरज को एक इंजेक्शन लगा दिया और फिर कुछ ही देर में धीरज के आंखों के आगे अंधेरा छा गया और वो बिस्तर पर गिर पड़ा।

 

उसके नींद में जाते ही उस डाक्टर ने वो सारी नलियां वापस से उसके हाथ में लगाई और कहा -”देखिए मिस्टर दीपक डरने की कोई बात नहीं है कभी कभी ऐसा होता है कि कभी कभी बेहोश होने के बाद होश में आने के बाद मरीज को ऐसे बेचेनी हो, लेकिन सब ठीक है। कुछ देर में ये बिल्कुल सामान्य हो जाएंगे।”

 

बोलकर वो धीरज की सांसें और बाकि चीजें चेक करके वहां से चला गया, उसके जाने के बाद दीपक जी बोले -”चलो ये अच्छा है कि धीरज को होश आ गया, अब कुछ दिनों बाद इसे अस्पताल से डिस्चार्ज मिला जाएगा।” ये बोलते बोलते उनकी नजर प्रतिभा जी के चेहरे पर पड़ी जो कि थोड़ी परेशान लग रही थी, उन्हें इस तरह से परेशान देखकर दीपक जी बोले -”कमाल है प्रतिभा, दीपक ठीक है फिर भी तुम परेशान लग रही हो!”

 

ये सुनकर प्रतिभा बोली -”ये धीरज क्या बोल रहा था? अगर वो नहीं गया तो क्या अनर्थ हो जाएगा? और आखिर इसका एक्सीडेंट उस खाली रोड पर हुआ तो हुआ कैसे?”

 

ये सुनकर दीपक जी बोले -”अरे भाग्यवान तुम कुछ ज्यादा ही सोच रही हो… ये बेहोश था या शायद गहरी नींद में था, तब उसने कोई सपना देखा होगा और उसी को ये सच मान रहा था, क‌ई बार हमारे साथ ऐसा होता नहीं है… बस वही… और रही बात एक्सीडेंट होने की तो कभी कभार खुद पर काबू नहीं रहता है तो हो गया… अब ये सब छोड़ो सबसे जरूरी बात तो ये है कि वो ठीक है अब तुम भी इसे छोड़ो और धीरज को घर लाने की तैयारी करो।”

 

इसके आगे प्रतिभा जी भी कुछ ना बोली लेकिन उनके मन में अब किसी का डर बैठ गया था जिसका जबाब उन्हें सिर्फ धीरज ही दे सकता था।

 

__________________________________

 

देर रात तीन बजे

 

उस बड़े से आलीशान घर में एक कमरे में से किसी के चीखने और दरवाजा पीटने की आवाजें आ रही थी! उस घर में फिलहाल कोई भी नहीं था यहां तक कि कोई चौकीदार भी नहीं था जिसकी वजह से उस आवाज पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा था।

 

उस भयानक आवाज के कारण आसपास का माहौल काफी ज्यादा भयानक हो गया था, हर गुजरते समय के साथ वो अजीब तरह से चीखने की आवाज पहले से ज्यादा तेज हो गई और फिर अगले ही पल एक और जोरदार चीख आई -”क्रीऽऽऽ!......” और फिर एक ही झटके के साथ उस कमरे का दरवाजा टूट गया।

 

उस कमरे के अंदर से एक बेहद भयानक लाल जीव बाहर आया, उस भयानक जीव के पीठ पर लाल पंख थे, चेहरा किसी जानवर की तरह था और सिर पर दो धारदार सींग थे।

 

वो जीव इतना ज्यादा भयानक लग रहा था कि उसे देखकर किसी के भी रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ जाए!

 

उसने दोबारा से एक चीख मारी -”क्रीऽऽऽ!...” और फिर अपने पंख फड़फड़ाते हुए वहां से उड़ गया, इस दौरान उसके रास्ते में जो भी चीजें आई उसे वो ध्वस्त करता चला गया।

 

 

कहानी जारी रहेगी दूसरे भाग में।

 

क्रमश!.......

 

 

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