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कमला

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Funtel
21 Mar 2026

इस कहानी की लेखिका है सोनिया सैनी।

पिछले भाग में आपने देखा कि मुखिया की बेटी कमलेश्वरी जिसे प्यार से सभी कमला कहा करते हैं उसकी शादी एक बहुत बड़े घराने के लड़के कुलदीप से तय होती है। घर में शादी की रस्मे चल रही होती है कि अचानक एक के बाद एक अपशगुन होने लगते हैं।

कभी कमला के शादी के जोड़े में रखी चूड़ियां लाल से काली हो जाती है तो कभी शगुन की हल्दी लगाने से कमला लहूलुहान हो जाती है। धीरे धीरे कमला के साथ होती ये घटनाएं गंभीर रूप लेने लगती हैं जिससे कमला के मायके और ससुराल दोनों और अफरा तफरी मच जाती है। इसी अफरा तफरी के बीच किसी तरह कमला के फेरे पड़ते हैं और वह ब्याहकर कुलदीप के घर पहुंच जाती है।

अब आगे….

कमला की मुंह दिखाई की रस्म थी। पूरी हवेली को दुल्हन की तरह सजाया गया था। कमला और कुलदीप का कमरा तो ऐसा लगता था जैसे फूलो के बगीचे में बदल गया हो। महंगे दीपदानो से मध्यम सी रोशनी फूट कर बाहर आ रही थी। दूर दूर से मंगाए गए खास तौर से सफेद और लाल फूल कमरे की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे।

इतने गुलाबो के बीच भी कमला का चेहरा किसी चांद की तरह चमकता नजर आ रहा था। सबकुछ बिलकुल वैसे ही सामान्य था जैसे कि किसी भी घर में दुल्हन आने के बाद हुआ करता है। पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

कुलदीप और कमला के नए जीवन की सुखद शुरुवात हो चुकी थी। धीरे धीरे एक सप्ताह बीतने को आया था। कमला के हावभाव व्यवहार सब एकदम सामान्य था। शशि और कुलदीप शादी के दौरान हुई घटनाओं को एक बुरा सपना समझ कर भूलने ही लगे थे। कि

एक दिन…

रात के तकरीबन 2 बजे का समय था। कुलदीप की आंख खुली तो उसे एहसास हुआ कमला अपने बिस्तर पर नही है।

कुलदीप बिस्तर पर लेटे लेटे कुछ मिनट तक कमला के आने का इंतजार करता है लेकिन कमला की कोई आहट उसे सुनाई नही देती।

चिंता की लकीरें अब कुलदीप के माथे पर दिखाई देने लगी थी। कुलदीप अपने बिस्तर से उतर कर पहले बाथरूम का दरवाजा खोलकर देखता है। बाथरूम बिल्कुल खाली पड़ा हुआ था। अब तो कुलदीप को और भी घबराहट होने लगी।।

कमरे का दरवाजा भी अंदर से बंद था इसका मतलब कमला कमरे से बाहर भी नहीं गई थी।बहुत ध्यान से सुनने पर कुलदीप को एक अजीब सी धीमी धीमी गुनगुनाहट सुनाई पड़ने लगती है।

कुलदीप धीमे कदमों से उस आवाज की ओर बढ़ता है और धड़ाम से कमरे से बालकनी तक जाने वाला दरवाजा खोल देता है।

बाहर का नजारा देखकर कुलदीप का कलेजा उछलकर उसके मुंह को आ गया था।

बालकनी में कमला एक डरावनी सी आवाज में सुबक रही थी। उसके लंबे घने बालों से उसका चेहरा पूरी तरह ढका हुआ था और एक एक करके अपने बाल तोड़ तोड़ कर वह जमीन पर फेंक रही थी। उसके सर का वो हिस्सा जहां से बाल टूट कर गिर पड़े थे वो अब और भी बड़ा दिखाई देने लगा था।

कुलदीप: कमला… ये क्या कर रही हो..? रो क्यों रही हो हुआ क्या है तुम्हे..? कमला..!

कुलदीप के झिन झोड़ने के कारण कमला एक पल को बिलकुल शांत हो जाती है लेकिन अगले ही पल वह अपना सर पकड़कर जोर जोर से रोने लगती हैं।

कुलदीप को कुछ सूझ नही रहा था कि वो करे तो क्या करे ,वह दौड़ता हुआ जाता है और अपनी मां को लेकर ऊपर आ जाता है।

शशि: हे भगवान ये क्या हो गया इसको ये क्या किया इसने..? चलो कमला बेटा अंदर चलो।

शशि जैसे ही उसके सर के नजदीक जाती हैं कमला का सर देखकर उसकी चीख निकल जाती है।

कमला के नोचे हुए बालो के स्थान पर सर से खून रिस रहा था और वह जगह जहां पर शादी के दिन बाल झड़ गए थे वहां पर कीड़े रेंग रहे थे।

शशि: कुलदीप ये क्या हो रहा है बेटा इसे ??मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा !अरे कल तक तो एकदम भली चंगी थी अब अचानक यह क्या हालत हो गई इसकी..?

कुलदीप: पता नहीं मां जब सोई तब तो एकदम ठीक थी पता नहीं कब रात में उठकर यहां आकर बैठ गई और तब से ही अपने बाल नोच नोच कर फेंक रही है ऐसा करते हैं इसे किसी किसी डॉक्टर को दिखा लेते हैं मुझे इसकी मानसिक हालत ठीक नहीं लग रही .

शशि: बेटा मानसिक रोगी के सर में ऐसे रातो रात कीड़े नहीं हो जाते। ये सब मुझे तो कुछ और ही लग रहा है।

कमला अपना सर पकड़ के जोर-जोर से चीख चीख कर रो रही थी । जिसे देखकर शशि और कुलदीप के हाथपैर ढीले पड़ रहे थे।

कमला: बहुत दर्द हो रहा है..! आ.. ह..! कोई बचाओ मुझे…!

कुलदीप: इसे बहुत तकलीफ हो रही है आप डॉक्टर को बुलाइए मां..! कहीं इसे कुछ हो न जाए।

शशि: बेटा इतनी रात गए कौन मिलेगा..? रात के 2:00 बज रहे हैं। वैसे भी हमारी हवेली से शहर की तरफ जाने में बीच में घना जंगल पड़ता है इस समय कहां जंगलों में भटकेंगे हम लोग..? हम कल उसे लेकर चलते हैं। अभी तू कोशिश कर कि किसी तरह ये सो जाए बस।

कमला उठकर फिर से कही न चली जाए इस लिए कुलदीप उसके पैरो के पास बैठा बस एक टक उसे ही निहार रहा था। कमला की आंखे नींद से बोझिल हो रही थी। कुछ ही देर में कमला गहरी नींद में चली जाती है।कमला के सोने के बाद कुलदीप की भी आंख लग जाती है।

कुछ ही देर के बाद अचानक ही कुलदीप की आंख खुलती हैं तो वो देखता है कमला छत पर लगे पंखे पर बैठी हुई है ।

कुलदीप: कमला… वहां क्या कर रही हो तुम..? वहां कैसे चढ़ी. तुम.?

कमला कुलदीप की बात सुनकर एक नजर उसकी ओर देखती है और फिर भयानक तरीके से कमरे की दीवार पर चलने लगती है। नीचे उतरकर वो कुलदीप की ओर देखकर एक अमानवीय हंसी हंसती है और जोरदार आवाज में चीखने लगती है।

कमला: खाना….! मुझे खाना चाहिए..! बहुत भूख लगी है..! मांस खाना है मुझे..! कच्चा मांस…!

कमला के बात सुनकर कुलदीप एक बार फिर अपनी मां को आवाज लगाता है।

शशि: हे भगवान ये सब क्या हो रहा है..? कुलदीप बेटा जाओ जो ये मांग रही है इसके लिए लेकर आओ..!

मां की बात सुनकर कुलदीप दौड़ते हुए नीचे जाता है और नौकर से कहकर कच्चा मांस और मोटी रस्सी लेकर वापस कमरे में लौट आता है .

कुलदीप :यह लो कमला मांस खाओ थाली में रखे हुए मांस को देखकर कमला उसकी सुगंध लेते हुए जानवरो की तरह लपक कर थाली की ओर आती है और एक रहस्यमय सी मुस्कान बिखेर कर दोनो हाथो से उठाकर मांस खाने लगती है।

कमला को मांस खाता देख मौका पाकर कुलदीप पीछे से उसे रस्सी से जकड़ लेता है .

कुलदीप: मा जल्दी बांधो इसे यह कुछ भी कर सकती है । सिर्फ हमे इससे खतरा नहीं है ये खुद को भी नुकसान पहुंचा सकती है।यह हमारी कमला नहीं है कुछ बहुत गलत हो रहा है इसके साथ .

कुलदीप और उसकी मां शशि कमला को रस्सी से बांधकर लाकर पलंग पर लिटा देते हैं .

शशि: अब जब तक हमारे घर का शुद्धिकरण नहीं हो जाता तब तक इसे यही बंधा रहने दो।

सुबह 5:00 बजे ही शशि ने दो नौकरों को बड़े पंडित को लाने के लिए भेज दिया था .

शशि बड़े पंडित से :देखिए पंडित जी हमें नहीं पता हमारे घर पर ये कौन सी मुसीबत आई है हम बस इतना जानते हैं कि अपने जीते जी अपने बेटे बहु का जीवन खराब होने नही देंगे हम..! आप इस घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए हवन कराइए…! जो भी सामग्री लगेगी हम व्यवस्था कराएंगे।

शशि की बात सुनकर पंडित जी नीचे हॉल में आकर ग्रह शांति पूजा शुरू कर देते हैं ।पूजा शुरू होने के कुछ ही मिनट के अंदर कमला के कमरे से भयानक चीखों की आवाज सुनाई देने लगती है। वह आवाज इतनी भयानक थी कि किसी की भी कमला के कमरे तक जाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी .

नौकर : मेम साहब छोटी बहू जी ठीक तो है कहीं उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं हो रही एक बार दरवाजा खोल कर देखिए ना.

शशि: नहीं कोई भी ऊपर नहीं जाएगा। वो चाहे जितना भी चिल्लाए हमारी मर्जी के बिना उसका दरवाजा खुलना नही चाहिए।

कुछ देर चीखने के बाद अचानक कमला के कमरे से आ रही आवाज बंद हो जाती है कुछ ही पल बीते होंगे की हवेली के बाहर पहरा दे रहा एक आदमी दौड़ते हुए हवेली के अंदर आता है .

आदमी : मेम साहब वह बहू जी .

शशि :क्या हुआ बहु जी को कुछ बात है क्या?? .

आदमी :वह बहू जी…वो बाहर दीवार पर चल रही हैं और दीवार से होते हुए वह नीचे उतर रही हैं।

शशि: कैसी बेतुकी बात कर रहे हो उसे तो उसके कमरे में बांधा हुआ है ।वह अपने कमरे से बाहर नहीं आ सकती उसके कमरे में मैने खुद अपने हाथों से ताला लगाया है।

नौकर की बात सुनकर शशि दौड़ते हुए हाल से बाहर जाती है तो देखती है कि कमला दीवार से होते हुए नीचे उतर रही हैं कमला की ऐसी हालत देखकर सबकी चीखे निकल जाती है।

पंडित जी: देखिए बहन जी हम जितना समझ रहे थे ना यह समस्या उससे कहीं गुना ज्यादा बड़ी है। मेरे ग्रह शांति हवन से कुछ नहीं होने वाला है हां मेरे मंत्रो की गूंज से यह थोड़ी विचलित जरूर हुई है लेकिन उससे आपकी बहु की हालत में कोई सुधार नहीं आएगा।

आपके लिए सुनने में थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन यह आपकी बहू कमला नहीं है .कोई भी इंसान ऐसी हरकत कर ही नहीं सकता कोई और शक्ति है इसके अंदर..!

दीवार से उतरने के बाद कमला दौड़ते हुए हॉल में पहुंचती है और हवन कुंड को उठाकर हवा में उछाल देती है। उसके मुंह से बेतहाशा लार गिर रही थी ।आंखें पलटी हुई और बाल बुरी तरह से बिखरे हुए थे ।उसे बांधने में इस्तेमाल हुई रस्सी अभी भी उसके हाथो से लटक रही थी और कलाई से खून रिस रहा था।उसका रूप इतना डरावना लग रहा था कि कोई भी उसे देखकर चक्कर खा जाए।

कमला( दोहरी आवाज में): तूने बुलाया था इस पंडित को..?

शशि: देखो कमला बेटा शांत हो जाओ हम तुम्हारा बुरा नहीं चाहते हम तो बस यह चाहते हैं कि तुम हमारे बेटे की पत्नी बनकर इस घर में आई हो हमारे घर की लक्ष्मी हो बेटा तुम ,तुम खुशी खुशी घर में रहो इससे ज्यादा हमे और कुछ नहीं चाहिए।

कमला चिल्लाते हुए : आह.! चुप कर बुढ़िया…!

कमला ( पंडित से): चला जा पंडित..! जा….!

कमला की भयानक आवाज सुनकर पंडित राम राम करता वहां से भाग खड़ा होता है।

तभी कमला का शरीर ढीला पड़ने लगाता है और वह जमीन में गिरकर बेहोश हो जाती है।

कुलदीप: मां क्या हो रहा है ये सब..? मुझे तो अब बहुत डर लग रहा है अगर ऐसा ही चलता रहा तो पता नहीं आगे क्या कुछ देखने को मिलेगा..?

शशि : घबराओ मत बेटा अगर दुनिया में शैतान है तो भगवान भी है । मैं कल ही शमशान वाले बाबा को खबर कराती हूं अब वही हमारी समस्या का समाधान करेंगे।

अखिलेश: शशि तुम कुलदीप के साथ घर पर ही रुको मैं जाता हूं और जाकर बाबा को सारी बातें बता कर यहां लाने की कोशिश करता हूं .

,अखिलेश जब शमशान घाट पहुंचा तो दोपहर के तकरीबन 2:00 बजे होंगे बाबा अपनी कुटिया में नहीं थे उसने देखा बाहर खुले जगह में अग्नि जल रही है और बाबा आंखें बंद किए उसके सामने बैठे हैं .इतनी गर्मी में जब धूप में खड़ा रह पाना भी संभव नहीं था बाबा वहां अग्नि के सामने बैठे जाने कब से अपनी साधना में लीन थे ।.अखिलेश कुछ देर तक हाथ जोड़कर वहीं बैठा रहता है ,इतनी गर्मी में खुले आसमान के नीचे बैठ पाना अखिलेश के लिए बहुत कठिन हो रहा था तकरीबन आधे घंटे के बाद बाबा अपनी आंखें खोलते हैं, तो देखते हैं कि सामने बड़ी कोठी वाले अखिलेश बाबू हाथ जोड़ उनके सामने बैठे हुए हैं.

बाबा: क्या समस्या है बच्चा जो तुम इतनी भयानक गर्मी में यहां मेरी आंख खुलने के इंतजार में बैठे हुए थे .

अखिलेश :समझ नहीं आता बाबा कहां से शुरू करूं?? मेरा एक ही बेटा है जिसका नाम कुलदीप है ! तकरीबन सप्ताह भर पहले उसकी शादी रायपुर गांव के प्रधान की बेटी कमला के साथ हुई है। हमने बड़ी धूमधाम से शादी की क्योंकि हमारे लिए ऐसा अवसर जीवन में दोबारा नहीं आने वाला था किंतु जाने हमसे ऐसी क्या भूल हो गई कि जिस दिन से ब्याह की रस्मे शुरू हुई है हमारी बहु के साथ एक के बाद एक अपशगुन होते जा रहे हैं। पहले तो हमें लगा कि शायद शादी के बाद हम ग्रह शांति हवन करेंगे तो उससे सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन हम गलत थे शादी के बाद तो मेरी बहू कमला की हालत और भी खराब हो गई । ऐसा लग रहा है जैसे वह अपने आपे में ही नहीं है। किसी ने उसके पूरे शरीर पर कब्जा कर लिया हो जैसे।

अखिलेश अभी तक हुई सारी घटनाएं बाबा को सुनाता है।

बाबा: तुम्हारी बहू जरूर किसी प्रेत के वश में है लेकिन मैं अभी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊंगा। उसके लिए पहले मुझे तुम्हारे घर आना होगा। अभी मैं एक साधना कर रहा हूं अगले 24 घंटे तक तो मैं अपना स्थान छोड़कर हिल भी नहीं सकता ।हां इतना वादा करता हूं कि मेरी साधना खत्म होने के बाद मैं तुम्हारी समस्या को हल करने का प्रयास जरूर करूंगा…अभी तो मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकता हां लेकिन तुम्हारी इतनी मदद जरूर कर सकता हूं, यह लो यह अभिमंत्रित जल है किसी भी दुष्ट आत्मा या शैतानी शक्ति के ऊपर इसकी एक बूंद भी पड़ी तो वह तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी ।इसे अपने पास रखो जब तक मैं तुम्हारे घर आकर सारी स्थिति को भांप नहीं लेता तब तक यह जल ही तुम्हारी रक्षा करेगा..! जाओ कल्याण हो .

अखिलेश बाबा का दिया हुआ जल लेकर वापस अपने घर की और लौट जाता है….

to be continued….

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