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कमला

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Funtel
21 Mar 2026

पिछले भाग में आपने देखा कि शादी के बाद एक सप्ताह बड़ी शांति से बीत जाता है। जब परिवार में सभी लोग राहत की सांस ले ने ही वाले होते हैं कि एक बार फिर कमला डरावनी और असामान्य हरकतें करने लगती है कमला के साथ हो रही घटनाओं से शशि, कुलदीप और अखिलेश को इतना तो समझ में आ ही गया था कि कमला के ऊपर किसी प्रेत का साया है। शशि कमला के ऊपर से इस नेगेटिव एनर्जी को हटाने के लिए घर में एक छोटा सा हवन करने की कोशिश करती है लेकिन कमला उसे भी पूरा नहीं होने देती और पंडित को चेतावनी देकर भगा देती है .शशि के पति अखिलेश ठाकुर को इतना तो समझ में आ गया था कि यह कोई बहुत शक्तिशाली प्रेत है जो इतनी आसानी से उसका पीछा नहीं छोड़ेगा। इसलिए वह शमशान में वास करने वाले अघोरी बाबा के पास जाता है। और अपनी समस्या हल करने को कहता है। अब आगे…

15 साल पहले….

पन्ना: मालकिन सुना है आपको बाबा की देखभाल के लिए किसी आया की जरूरत है हमें काम पर रख लीजिए ,मालकिन हम बहुत गरीब है कोई सहारा नहीं है सारी जिंदगी आप लोगों के पैर धो-धो कर पियेंगे.

शशि: कहां से आई हो तुम किस गांव की हो तुम्हारा पति बच्चे बाकी सब कहां है .

पन्ना: (रोते हुए) कोई नहीं है मालकिन हमारा इस दुनिया में..! कोई भी नहीं । जिस गरीब के सर पर बाप का साया ना हो उससे कौन शादी करेगा मालकिन, बस हमें तो सर छुपाने भर की जगह मिल जाए इससे ज्यादा की इच्छा नहीं है।

पन्ना के आंसू को देखकर शशि का मन पिघल जाता है और वह अपने बेटे कुलदीप की देखभाल के लिए उसे अपने घर में रख लेती है।

पन्ना ने जैसा वादा किया था वाकई ठाकुर अखिलेश की हवेली में आने के बाद वो मन लगाकर अपना काम करने लगी ।वैसे तो उसका काम सिर्फ कुलदीप की देखभाल करना था लेकिन पन्ना कभी किसी काम से जी नहीं चुराती थी ।अखिलेश की पसंद का खाना बनाना हो उसके कपड़े धोकर आयरन करने हो या फिर कुलदीप को खेलने के लिए ले जाना हो आधी रात को भी उठकर अगर कुलदीप पन्ना का नाम पुकार दे तो पन्ना दौड़ी चली आती थी। पन्ना की लगन और मेहनत देखकर धीरे-धीरे वह शशि की सबसे खास हो गई। कहने को तो घर में आधा दर्जन नौकर थे लेकिन पन्ना ने उन नौकरों में अपनी एक अलग ही जगह बना ली थी ।बाकी नौकरों को तो तमाम रोक-टोक थी लेकिन कुलदीप की आया होने के कारण पन्ना घर के किसी भी हिस्से में आ जा सकती थी।

कुलदीप की देखभाल के अलावा भी पन्ना का यहां आने का कोई कारण हो सकता है ये तो शशि ने कभी सोचा ही नहीं था। उसके हवेली में आने का कारण बरसो पहले हवेली के सीने में दफन हुआ वो राज था जिस पर आज तलक पर्दा लगा हुआ था। उस बंद दरवाजे के पीछे का राज कोई नही जानता था।

इसीलिए पन्ना के बरसो उस घर में रहकर हाथ पैर मारने के बाद भी उसके हाथ कुछ भी नही लग रहा था।

आज के दिन…

अखिलेश बाबा का जल लेकर घर लौट गया था। आज कमला अपने कमरे में अकेले सोई हुई थी उसके कमरे को बाहर से कुंडी लगाकर उस पर एक मोटी लोहे की चैन भी लपेटी गई थी ताकि किसी भी हाल में वो अपने कमरे से बाहर न आ पाए।

सभी अपने अपने कमरे में चैन से सो रहे थे। आधी रात बीतने के बाद एक काला सा साया आकर कमला के दरवाज़े की चैन को खोलता है और अंधेरे में हवेली में ही गायब हो जाता है।

कुछ देर बाद हवेली कमला की चीखों से गूंज रही थी जैसे ही चीख पुकार की आवाज सुनाई देती है अखिलेश शशि और कुलदीप दौड़ते हुए ऊपर कमला के कमरे में पहुंचते हैं तो पाते हैं कि उसके दरवाजे पर लगी हुई लोहे की चेन और कुंडा सब कुछ खुलकर एक तरफ लटका है और कमरे के दरवाजे चौपट खुले पड़े हैं।

दौड़ते हुए वे लोग कमरे के अंदर पहुंचते हैं तो देखते हैं कि कमला अपने कमरे से गायब हो गई है।

कुलदीप: बाबूजी ये कमला कहां चली गई और इतनी मोटी चेन अपने आप आखिर कैसे खुल गई..?

शशि: कुछ समझ नहीं आता की रात होते ही आखिर इसे हो क्या जाता है??

कुलदीप: कमला के चीखने की आवाज नीचे तहखाने से आ रही है जल्दी चलिए कहीं वह खुद को कुछ नुकसान न पहुंच ले।

सभी दौड़ते हुए नीचे तहखाने में पहुंचते हैं जहां पर एक कमरे में छिपे हुए गुप्त दरवाजे से कमला अंदर खुफिया कमरे में पहुंच गई थी।

कुलदीप: यह कौन सा खुफिया कमरा है मां आज से पहले मैंने तो कभी यह कमरा नहीं देखा..!

बेटे की बात सुनकर शशि थोड़ा घबरा जाती है और इधर उधर देखने लगती है।

कुलदीप :क्या हो गया कमला क्यों चिल्ला रही हो..?

कमला अपने हाथो को जोर जोर से झटक रही थी और पागलों की तरह चीख रही थी।

कमला चिल्लाते हुए : खून खून… यहां पर खून है ..! खून बिखरा हुआ है यहां चारों तरफ..! देखो वहां वो बैठी हुई है…! वो बुला रही है मुझे…! मैं नहीं जाऊंगी उसके साथ..!

शशि: देखो कमला होश में आओ कोई नहीं है यहां देखो मेरी बात पर यकीन करो आंखें खोल कर एक बार देखो तो सही वहां कोई नहीं है ।

कमला : नहीं खून है यहां..! वो कह रही है वो ले जाएगी मुझे..!

कमला की बिगड़ी हुई हालत को देखते हुए कुलदीप, अखिलेश और शशि उसे उठाते हैं और तहखाने से लेकर बाहर आ जाते हैं और ले जाकर उसके कमरे में लिटा देते हैं .

कमला :मुझे ये सब साफ करना होगा। मेरा पूरा शरीर खून से गंदा हो गया है। मैं नहाना चाहती हूं .

शशि: ठीक है मैं पन्ना को बुलाती हूं वह तुम्हे नहला देगी तुम बिल्कुल रिलैक्स हो जाओगी.

अखिलेश चुपचाप उसके नहाने के पानी में दो बूंद बाबा की दी हुई अभिमंत्रित जल की भी डाल देता है ।

सभी नीचे हॉल में आकर बैठ जाते हैं तभी पन्ना दौड़ते हुए नीचे आती है।

मालकिन: बहू जी फिर से वैसे ही हो गई हैं। मैं उन्हे नहलाने के लिए जैसे ही गुसलखाने में गई वो जानवर की तरह गुर्राने लगी और पानी की बाल्टी उठाकर दूर पटक दी।मैं उनका कमरा बाहर से बंद करके आ गई हूं। मेरी तो अब वहां जाने की हिम्मत नही है।

शशि: ठीक है फिर तुम जाओ जाकर अपना काम करो हम देखते हैं .

कुलदीप :मा एक बात बताओ मैं इसी घर में पैदा हुआ यहीं पर रहते हुए मैं 25 साल का हो गया लेकिन आज तक मैं उस कमरे के बारे में नहीं जानता। फिर यह कमला उस खुफिया कमरे तक कैसे पहुंच गई और ऐसा क्या है उस कमरे में जो इतने सालों से वह बंद पड़ा है?? जिसके बारे में किसी को पता तक नहीं था कि वहां ऐसा कोई कमरा भी है।

शशि: बेकार की बातों में दिमाग मत लगाओ कुलदीप इस समय इस कमरे से ज्यादा जरूरी कमला की हालत है यकमलह सोचो कि तुम्हारी पत्नी ठीक कैसे होगी अरे बहुत आश्वासन देकर विदा करके लाए थे हम कमला को क्या पता था कि आने के बाद स्थिति बिल्कुल नियंत्रण से बाहर ही हो जाएगी हम तो यह सोच-सोच के परेशान है कि अगर कल को कमला को कुछ हो गया तो इसके मां-बाप को क्या जवाब देंगे हम.

अखिलेश :कुछ भी कहो मुझे ऐसा लगता है बहू के साथ जो कुछ भी हो रहा है ना वह सब इस हवेली से ही जुड़ा हुआ है ।अरे अच्छी खासी हट्टी कट्टी लड़की थी इस घर से रिश्ता जोड़ने के बाद देखो क्या से क्या हो गई ..! कोई पहचान भी नहीं सकता ऐसी हालत हो गई है बिचारी बच्ची की। चांद जैसा रूप था उसका ।

कमला की हालत पर चिंता जताते हुए अखिलेश ठाकुर अपने माथे पर हाथ रखकर बैठे हुए थे अब तो उन्हें बस किसी तरह यह दिन बीतने का इंतजार था ताकि बाबा की साधना पूरी हो और वह आकर इस समस्या का कुछ तो हल सुझाए।

अगले दिन सुबह चार बजे ही ठाकुर की हवेली पर अघोरी बाबा दस्तक देते हैं।

बाबा:कहां है वह बच्ची..? क्या ये जो जोर जोर से दरवाजा पीटने की आवाज आ रही है ये वही है..?

शशि:बाबा वह ऊपर अपने कमरे में है ।हमने दरवाजा बाहर से बंद किया हुआ है। मजबूर है हम लोग ..! क्या करें कुछ समझ नहीं आता जिस लड़की को इतने अरमानों से अपने घर दुल्हन बनाकर लाए थे आज उसकी ऐसी दशा देखकर मन एक-एक पल में सौ आंसू बहा रहा है।

हम तो कहते हैं अगर ऊपर वाले को कष्ट देना ही था तो हमें देता हमारी फूल सी बहु का जीवन शुरू होने से पहले ही क्यों बर्बाद कर दिया..?

बाबा: थोड़ा धीरज रखिए मैं अपनी तरफ से प्रयास करता हूं यह पता लगाने का की आखिर आपकी बहू के साथ ऐसा क्या हुआ है जो उसकी हालत ऐसी हो गई।आप एक बर्तन में अपने घर का जल भरकर लाइए।

बाबा के कहने पर शशि एक बर्तन में जल लाकर बाबा को दे देती है बाबा अपने साथ लाई हुई सामग्री को घर में बिछाते हैं और उसके बाद उस जल के ऊपर कुछ मंत्रों की क्रिया करने लगते हैं कुछ देर तक जल को अभिमंत्रित करने के बाद।

बाबा: आपके घर में अवश्य ही कोई एक ऐसा हिस्सा है जहां से यह सब शुरू हुआ है क्या आप जानते हैं वह कौन सी जगह है . ऐसी घटनाओं का केंद्र अवश्य ही होता है।

अखिलेश: नहीं बाबा हमें इस बारे में कुछ नहीं पता पहली बार तो जब बहू विदा होकर हमारे यहां आई तो वह आराम से अपने कमरे में सो रही थी . और तभी पहली बार उसके साथ वो सब शुरू हुआ।

बाबा :ठीक है आप मुझे उसके कमरे तक ले चलिए.

बाबा वो जल लेकर कमला के कमरे की तरफ जाते हैं वहां पहुंचकर .

बाबा:नहीं यह वह जगह नहीं है ठीक है आप ऐसा करिए उन सभी जगहों को मुझे दिखाइए जहां-जहां कमला के साथ कुछ भी अनहोनी हुई है .

बाबा की बात सुनकर अचानक ही कुलदीप को कुछ याद आता है .

कुलदीप :हां बाबा कल कमला अचानक से तहखाने में पहुंच गई थी और वहां जाकर जोर-जोर से चिल्ला रही थी कि यहां पर चारों तरफ खून ही खून है और सबसे अजीब बात तो यह है कि कमला तहखाने के जिस कमरे में पहुंची वह खुफिया कमरा था। उस कमरे के बारे में तो आज तक मैं भी नहीं जानता फिर वह अचानक वहां कैसे पहुंच गई .

बाबा :जरूर उस कमरे का ताल्लुक इन घटनाओं से है आप मुझे उस तहखाने तक ले चलिए .

बाबा के कहने पर कुलदीप बाबा को उसे तहखाने तक ले जाता है वहां पहुंचकर बाबा वह जल का पात्र उस कमरे में रख देते हैं । और मंत्र पढ़ने लगते हैं। देखते ही देखते पात्र में रखा हुआ जल जोर-जोर से हिलने लगता है।

बाबा :मेरा शक बिल्कुल सही था यही वह कमरा है जहां से इन सब चीजों की शुरुआत हुई है। इस कमरे में एक बहुत शक्तिशाली रूह का वास है। जल में हो रही हलचल बता रही है की यह रूह कोई आम रूह नहीं है यह एक शैतानी रूह है जो बहुत ताकतवर है ।आमतौर पर यह जल इतना जोर जोर से हिलोर नहीं मारता जितना इस बर्तन में मार रहा है।

आप सब लोग इस कमरे से बाहर चले जाएं यहां रुकना आपके लिए ठीक नहीं है .बाबा सभी को लेकर उस तहखाने से बाहर आते हैं।

बाबा: यह कमरा आपकी हवेली में कब से है ??आप कुछ तो जानते होंगे इस कमरे के बारे में वरना इस तरह से इसे खुफिया रखने का तो कोई मतलब नहीं है ना ..! जरूर कुछ तो राज है इस कमरे के पीछे।

अखिलेश :बाबा वैसे तो ये हवेली मेरे पुरखों के जमाने की है। मेरे दादा के पिताजी ने यह हवेली बनवाई थी लेकिन मेरा बचपन इसी हवेली में बीता है मुझे अच्छी तरह याद है पहले यहां ऐसा कोई खुफिया कमरा नहीं था इस कमरे को छोटा करके बाद में यह खुफिया कमरा बनाया गया है। अब किसने किया और क्यों किया यह तो मैं भी नहीं जानता।

बाबा शशि से :यदि आप कुछ जानती है तो बता दीजिए। वैसे तो मेरे पास सच पता करने के और भी तरीके हैं । मैं अपनी सिद्धियों से उस आत्मा से सारा सच पता लगा सकता हूं।लेकिन ऐसा हो सकता है कि उसमें लंबा समय जाए और उतने समय में आपकी बहू को यह आत्मा कोई नुकसान पहुंचा सकती है

जरूर आप लोग कुछ ना कुछ छुपा रहे हैं अगर सच नहीं बताना चाहते तो ठीक है लेकिन फिर आपकी बहू की जान बचाने की मेरी भी कोई जिम्मेदारी नहीं है ।मैं अपनी तरफ से सिर्फ प्रयास कर सकता हूं।

आपने बताया था कि आपकी बहू के सुहाग के समान के साथ भी कुछ छेड़छाड़ हुई थी

अखिलेश:जी बाबा हमारी बहू की सुहाग की चूड़ियों की जगह न जाने कहां से काली चूड़ियां आ गई थी ।

बाबा : क्या वह चूड़ियां अभी भी है आपके पास अगर है तो लेकर आईये..!

बाबा की बात सुनकर शशि तेज कदमों से अपने कमरे में जाती हैं और वह काली चूड़ियां लेकर बाबा के सामने आ जाती है .

शशि :लीजिए ..! बहू के हाथों से उतरवा कर यह चूड़ियां मैंने अपने पास रख ली थी।

बाबा कुछ देर तक आंखें बंद करके कुछ मंत्र पढ़ते हैं और फिर हाथ में जल लेकर कुछ बूंदे उन चूड़ियों पर छिड़कते है तो चूड़ियों का रंग बदलने लगता है। और फिर धीरे धीरे लाल हो जाता है।

बाबा: यह देखिए ये चूड़ियां काली कभी भी नहीं थी। ये वही लाल चूड़ियां है जो आपने अपनी बहू के शगुन में रखवाई थी ।किसी ने काला जादू किया है इनके ऊपर..! आपकी बहू के ऊपर तंत्र प्रयोग किया गया है।

To be continued…..

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