बिहार का दानापुर गांव , मुखिया की बेटी कमलेश्वरी की हल्दी की रस्म चल रही थी। कमलेश्वरी अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी ।बहुत लाड प्यार से पाला था उसे मुखिया ने ।बेटी बड़े घर में जाकर राज करे यही इच्छा मन में दबाकर वह अपनी बेटी के रिश्ते की बात एक बहुत बड़े घराने में चलाता है।
कमला की सुंदरता पर मोहित होकर किसी जमाने में जमीदार रहे अखिलेश बाबू अपने बेटे कुलदीप के लिए कमला को पसंद कर लेते हैं.
काकी : फुलवा ये ले ,ये हल्दी उबटन और पानी बिटिया के ससुराल से आया है। जल्दी से इसे हल्दी में मिला ला..! फिर रस्म शुरू करते हैं।
काकी की बात सुनकर कमलेश्वरी की मां फुलवा जाकर बिटिया के ससुराल से आई शगुन की हल्दी घोल कर ले आती है।
चारों ओर चहल-पहल थी ढोलक की थाप पर औरतें मंगल गीत गा रही थी ।जैसे ही हल्दी की रस्म शुरू होती है कमलेश्वरी जोर जोर से चीखने लगती है।
कमलेश्वरी: आह…! ये क्या लगा दिया मेरे पूरे बदन में ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने खाल खींच ली हो. बहुत दर्द हो रहा है मां..!
कमलेश्वरी के जोर-जोर से चिल्लाने पर उसको हल्दी लगा रही औरतेंओ उसे ले जाकर पानी से उसका सारा शरीर धोने लगती हैं।
फुलवा: हाय राम ये क्या हो गया बिटिया को..? ऐसा लगता है जैसे किसी ने कांच पीस कर हल्दी में मिला दिया हो. लेकिन कोन करेगा ऐसा काम..?
कमलेश्वरी के बदन पर जहां जहां हल्दी रगड़ी गई थी वहां पर लाल धब्बे हो गए थे । दर्द से दुल्हन बुरी तरह छटपटा रही थी। और उसकी मां और बड़ी मां उसके घावों पर मलहम लगा रही थी
बड़ी मां: छोटी मुझे तो यह कोई सामान्य घटना नहीं लगती। अरे घर में बाहर का है कौन ,ऐसे कौन बिटिया की हल्दी में कांच मिला गया?? कोई छोटी-मोटी बात है क्या ..?वह तो शुक्र है मुंह पर नहीं लगाया था वरना पूरा चेहरा बिगड़ जाता बेचारी का।
फुलवा: मेरा तो दिमाग ही काम नही कर रहा है जीजी कौन मेरी कमला से जलेगा..? इसने क्या बिगाड़ा है किसी का..?
शादी ब्याह का माहौल था दोनों देवरानी जेठानी वैसे तो इस घटना से अंदर तक डर गई थी लेकिन फिर भी इस समय कुछ भी सोचने के लिए उनके पास ज्यादा समय नहीं था, दो दिन में कमला की शादी थी।घर में ढेरों मेहमान जमा थे उनके खाने पीने की व्यवस्था करने के अलावा दोनो देवरानी जेठानी को तमाम रस्मे पूरी करनी थी इसलिए इस बात को यहीं दबाकर वह शादी की तैयारी में जुट जाती है।
अगले दिन सुबह…
कमला का भाई: मां कमला के ससुराल से शादी का जोड़ा और शगुन आया है। आओ जरा देखो तो..!
एक बड़ी सी गाड़ी से दो नौकर जैसे दिखने वाले आदमी गाड़ी से नीचे उतरते हैं और बड़े से थाल में लाल रंग के कपड़े से ढका हुआ शादी का शाही जोड़ा और गहने कमला की मां फुलवा को सौंप देते हैं।
नौकर :बड़ी मां ने संदेश भिजवाया है शाम के समय दुल्हन को यही खानदानी जोड़ा और गहने पहन कर तैयार होना है और हां उन्होंने खास एक बात का ख्याल रखने के लिए हिदायत दी है कि इस जोड़े पर किसी की भी बुरी नजर ना पड़ने पाए .वह काली नजर और अपशगुन जैसी बातों में बहुत यकीन करती हैं इसलिए खास तौर पर इस जोड़े को एहतियात से रखने को कहा है।
फुलवा: आप फिक्र न करें कमला और उसका ये जोड़ा अगले दो दिनों के लिए हमारी अमानत है,हम पूरा ख्याल रखेंगे।
फुलवा वह बड़ा सा थाल लेकर तेज कदमों से अपने कमरे में जाती है और एक बड़े से संदूक को खोलकर पूरा थाल ऐसे ही उसमे रख देती है।
पूरा दिन शादी की भागदौड़ में बिताने के कारण फुलवा को याद ही नहीं था कि उसने कमला को उसके ससुराल से आया जोड़ा दिखाया ही नहीं है।
अगले दिन दोपहर चार बजे..!
बड़ी मां: फुलवा अरे कमला को तैयार करने का समय हो गया है इसके ससुराल से जोड़ा आया था ना कहां रखवाई हो जाओ ले आओ चूड़ी पहना कर हम शगुन कर देते हैं उसके बाद इसकी सहेलियां मिलकर उसको सजा देगी .
फुलवा: मेरे तो ध्यान से ही उतर गया था एक बार खोल कर देखा भी नहीं मैने की उन्होंने क्या-क्या सामान भेजवाया है.
फुलवा तेजी से पल्लू अपनी कमर में खोंसते हुए अपने कमरे में जाती है और संदूक खोलकर वह थाल लेकर सीधा कमला के कमरे में पहुंचती है.
बड़ी मां: छोटी यह क्या भिजवाया है इसके ससुराल वालों ने ..? दिमाग तो ठिकाने पर है यह लाल रंग के शगुन के जोड़े के साथ काले रंग की चूड़ियां कौन भिजवाता है..? अरे ये तो अपशगुन होता है । कहने को तो इतने बड़े लोग हैं लेकिन क्या यही समझदारी है इन ऊंची हवेली वालो की..?नई दुल्हन को काली चूड़ियां कौन पहनाता है??
फुलवा: यह सब मैं क्या जानू जीजी जो इसके ससुराल से आया मैंने तो ऐसे का ऐसा उठाकर संदूक में बंद कर दिया था! अब हो सकता है बड़े लोग हैं उनके कुल में कोई परंपरा हो नई दुल्हन को काली चूड़ी पहनने की।
बड़ी मां :आधी जिंदगी बीत गई हमारी हमने तो कभी नहीं देखा किसी दुल्हन के लिए ससुराल से काले रंग का जोड़ा या चूड़ी आई हो। अरे शादी सिर्फ उनकी बहू की नहीं हो रही हमारी बिटिया की भी हो रही है। मैं तो कहती हूं कि काली चूड़ी को हटा दे और लाल चूड़ी पहना इसे सुहाग जोड़े के साथ।.
फुलवा :अरे नहीं जीजी वह जो नौकर आए थे ना इस जोड़े के साथ वह खास तौर पर कह गए हैं की छोटी बहू जी को यही जोड़ा पहना कर तैयार करना है।
कमला की मां की बात सुनकर उसकी जेठानी कमला के हाथों में वही काली चूड़ियां पहना देती है। कमला के ससुराल से आया हुआ लहंगा बहुत ही शानदार था लहंगे को देखकर ऐसा लगता था जैसे किसी रानी महारानी की पोशाक हो। जैसे ही कमला की सहेलियां दुपट्टा कमला को पहनाने लगती हैं तभी एक सहेलीजोर से चीखती है और दो कदम पीछे हट जाती है।
कमला : क्या हुआ मीना..? तू चिल्लाई क्यों..?
मीना: ये देख तेरे दुपट्टे का एक कोना गायब है। ऐसा कौन करता है..? इस तरह का कटा फटा लहंगा दुल्हन को कौन भिजवाता है..?
कमला की सहेली की चीख सुनकर फुलवा एक बार फिर दौड़ते हुए बेटी कमला के कमरे में आती है और जैसे ही वह दुपट्टे का कटा हुआ कोना देखती है अपना माथा पकड़ लेती है।
फुलवा :हाय राम ये क्या अपशगुन हुए जा रहे हैं ..? मुझे तो समझ नहीं आ रहा..!
भगवान ऐसी क्या भूल हो गई हमसे … पता नहीं इस कमला का ब्याह शांति से निपटेगा या नही..?
कमला: अरे मां जाने दो ना..! जिसने सिला है उसी से गलती से कट गया होगा..! और ये माधुरी है ना ये ऐसे पहनाएगी कि ये हिस्सा नजर ही नही आएगा।
फुलवा: बेटा गलती से कटता तो ऐसे ना कटता..! तेरा दुपट्टा देखकर साफ समझ में आ रहा है किसी ने जानबूझकर इसका एक टुकड़ा काट कर निकाला है।
कमला: अरे मांजी ऐसा क्यों करेगी और ऐसा तो हो नहीं सकता कि यहां भेजने से पहले उन्होंने लहंगा देखा ना हो ..! जरूर दर्जी की गलती से ही कटा होगा।
फुलवा अपने पति के पास जाकर: सुनिए कुछ तो अपशुगुन हो रहा है। कुछ तो है जो ठीक नहीं है। हम ये शादी करके ठीक तो कर रहे हैं ना..? बार बार ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कुछ अनहोनी होने वाली है।
फुलवा का पति: अरे तुम औरतें बस शगुन अपशगुन ही करती रहा करो हर समय..! इतने बड़े घर का रिश्ता ढूंढ कर लाया तेरी बेटी के लिए। नौकर चाकर राजमहल सब है उनका और क्या चाहिए तुझे..? सारा जीवन दिया लेकर ढूंढोगी तब भी ऐसा लड़का नही पाओगी अपनी बेटी के लिए।
पति की गुस्से से भरी आवाज सुनकर फुलवा चुपचाप जाकर मंडप सजाने लगती है। कुछ ही देर में कुलदीप दरवाजे पर बारात लेकर पहुंच गया था।
जय माल के लिए पूरी तैयारी हो चुकी थी। कुलदीप आकर अपने स्थान पर बैठ गया था। दूसरी ओर से कमला को उसकी सहेलियां पकड़कर मंडप की ओर ला रही थी। कुछ पल पहले तक शर्म से लाल होता उसका चेहरा धीरे धीरे बदलने लगा था।
अचानक ही उसके चेहरे के हाव भाव बदलने लगते हैं और वह उसका हाथ पकड़कर लेकर आती उसकी सहेलियों को पूरा जोर लगाकर दूर धकेल देती है ।
देखते-देखते खूबसूरत तरीके से सजे अपने बालों को नोच नोच कर वह बाहर निकालने लगती है और जोर-जोर से चीखने लगती है।
फुलवा: कमला बेटा होश में आ क्या हुआ..? अरे बेटा बोल न क्या हुआ तू ऐसे क्यू चीख रही है..?
कमला ( जोर जोर से रोते हुए): आह मुझे बहुत दर्द हो रहा है मां…! कुछ है मेरे बालो में..!
बेटी के इतना कहते ही उसकी मां और बड़ी मां तेजी से उसके बालो को खोल कर कुछ देखने लगती हैं।
तभी बालो का एक बहुत बड़ा सा गुच्छा जमीन पर गिरता है जिसे देखकर फुलवा की चीख निकल जाती है।
बड़ी मां कमला के बालो को देखती है तो पाती है कि सर के एक हिस्से के बाल पूरी तरह से गायब हो गए है और वहां पर एक गोल घेरा जैसा बन गया है.
बड़ी मां: ये कैसे हो सकता है..? ऐसे कैसे अपने आप बाल टूटकर जमीन पर गिर पड़े..?
किसी की काली नजर लगी है हमारी बच्ची की खुशियों को..! इतनी सारी बाते एक साथ होना कोई संयोग नहीं हो सकता।
कमला अभी भी घबराकर अपनी मां के गले लगे हुई थी। और जोर जोर से रो रही थी।
कमला के पिता: फुलवा ..बिटिया को ले जाओ ..! ले जाकर इसका हूलिया ठीक करो और फिर से जयमाल के लिए लेकर आओ ।समय निकाला जा रहा है दामाद जी इंतजार कर रहे हैं। पता नहीं लगता है आज का मुहूर्त ही गलत है..!
कमला की सास: आप बिल्कुल भी फिक्र मत करिए बहन जी कमला अब सिर्फ आपकी जिम्मेदारी नहीं है वह हमारे घर की बहू भी है। मैं समझ सकती हूं उसके ऊपर इस घटना का कितना बुरा प्रभाव पड़ा है हमसे जो संभव हो सकेगा हम वह सब करेंगे लेकिन फिलहाल मुहूर्त निकला जा रहा है शुभ मुहूर्त पर शुभकाम कर लेते हैं बाकी बिटिया की मानसिक स्थिति का हम हवेली में पूरा ख्याल रखेंगे। और हां इस बात को ऐसे ही जाने नहीं देंगे आप बेफिक्र रहिए ।
अपनी सास (शशि ) की बाते सुनकर कमला थोड़ी शांत हो गई थी।
ब्याह का सारा उत्साह छू हो गया था और बुझे मन से ही कमला मुर्छाए चेहरे और बिखरे बालो में ही कुलदीप के गले में माला डाल देती है। फेरो के बाद ….
सास शशि: 1 मिनट ठहरे बहन जी क्या काले रंग की चूड़ियां बेटी को पहनाने की आपके यहां कोई रस्म है क्या..?
फुलवा:अरे नहीं उल्टा हमारे यहां तो बहुत अपशगुन मानते हैं लेकिन आपने भिजवाई तो हमने मजबूरन पहना दी हमें लगा नहीं पहनाएंगे तो शायद आपको बुरा लगेगा .
शशि: क्या बात कर रही है आप हम बहू के लिए काली चूड़ियां क्यों भिजवाने लगे भला! जरूर आपको कोई गलतफहमी हुई है!
बड़ी मां: मतलब आपने कमला के लिए यह काली चूड़ियां नहीं भेजी थी .
शशि: हरगिज नहीं हमने तो लाल रंग का राजस्थानी चूड़ा भेजा था खास तौर पर मंगवाया था बहू के लिए!
सारी घटनाएं एक बहुत बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रही थी।
शशि: आपके घर पर ही लगता है किसी ने कोई काला जादू किया है। तभी तो आपके घर में रखे सामान पर ये सब हुआ। मुझे लगता है कमल की भलाई इसी में है कि वह जल्द से जल्द घर से दूर चली जाए।
बड़ी मां: तुम ठहरो छोटी मैं जरा पहले बिटिया की नजर उतार देती हूं उसके बाद कमला की विदाई करेंगे। बड़ी मां दौड़ कर जाती है और कुछ सामान अपनी मुट्ठी में लेकर कमला के पास आ जाती हैं।
मन ही मन मंत्र बुद् बुडाते हुए वह पांच बार कमला के ऊपर से मुट्ठी में लिया हुआ वह सामान उतारती है और आखिरी बार जैसे ही वह कमला के सिर पर से नजर उतारने के बाद उसके माथे को छूती है। उसे एक जोरदार झटका लगता है और वह उछलकर दूर जा गिरती है।
यह सब देखकर सभी लोग स्तबध थे जुबान जैसे हलक में अटक गई थी समझ ही नहीं आता था कि आखिर हो क्या रहा है वहां..!
शशि: कमला बेटा तुम ठीक तो हो ना अच्छा हमें बताओ अभी तुम कैसा महसूस कर रही हो.
कमला: मैं ठीक हूं ..लेकिन बड़ी मां .!
शशि: चिंता मत करो उनका पैर फिसल गया होगा इसलिए गिर पड़ी .अपने मन में कोई वहम मत लाओ।
शशि अपनी समधन फुलवा के पास आकर .
शशि: अभी तो हम बहू को लेकर अपने घर जा रहे हैं हमारे दरवाजे पर भी तमाम रिश्तेदार जमा है इस समय तो चर्चा करना ठीक नहीं होगा लेकिन बहू की मुंह दिखाई के बाद हम पता करते हैं कि आखिर बहू को समस्या क्या है तब तक आप भी कोई जानने वाले आदमी को बुलाकर अपने घर का शुद्धिकरण कर लीजिए.
फुलवा: जी बहन जी ठीक कह रही हैं आप वैसे हमारे बड़े बुजुर्ग कहते थे शादी विवाह में अगर पूजा पाठ में कुछ गलती हो जाए ना तो पितृ नाराज हो जाते हैं और कई बार पितरों के नाराज होने पर भी कई तरह के अपशगुन हुआ करते हैं ।हो सकता है जो कुछ हम सोच रहे हैं वैसा ना हो और यह सब पितरों का ही क्रोध हो ।हम पितरों की शांति के लिए भी हवन करेंगे आप लोग फिक्र मत करिए .
दोनों समधन गले मिलकर एक दूसरे से विदा लेती है और बारात कमला को लेकर विदा हो जाती है।
ससुराल आने के बाद बहू की गृह प्रवेश से लेकर मुंह दिखाई तक की सारी रस्में बहुत ही शांति से संपन्न हो जाती है जिससे शशि और कुलदीप के मन को बड़ी तसल्ली मिली थी । उन्हे लग रहा था कि शायद जो भी बला थी वह बहू के मायके में ही पीछे छूट गई और यह सब शांत हो गया हो।
लेकिन कहते हैं ना जब कोई बहुत बड़ा तूफान आने वाला होता है ना तो उससे पहले एक लंबी खामोशी होती है।
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