(ध्वनि प्रभाव: जूतों की भारी आवाज़ कमरे के ठीक बाहर रुकती है। दरवाज़ा धीरे से चरमराते हुए खुलता है।)
वॉर्डन खन्ना: (ठंडी और सख्त आवाज़ में) इतनी रात को यहाँ क्या तमाशा हो रहा है? मैंने कहा था न, इन्वेस्टिगेशन खत्म करो और यहाँ से निकलो।
गौरव तिवारी: (शांति से) हम अपना काम कर रहे थे खन्ना जी। और देखिए, हमें क्या मिला।
(ध्वनि प्रभाव: गौरव अपनी हथेली खोलता है, जिसमें वो पुरानी जंग लगी चाबी है। खन्ना के चेहरे का रंग उड़ जाता है।)
वॉर्डन खन्ना: (हकलाते हुए) य-ये... ये कूड़ा कहाँ से मिला? यहाँ कुछ नहीं है। चलो, बाहर निकलो सब के सब! अभी के अभी ये कमरा सील होगा।
आर्यन: (आक्रोश में) ये कूड़ा नहीं है सर, ये समीर का आई-कार्ड है। 20 साल से ये इस अलमारी के पीछे दबा था। आप क्यों चाहते हैं कि हम सच न जानें?
वॉर्डन खन्ना: (चिल्लाते हुए) गार्ड! गार्ड! इन लोगों को बाहर निकालो!
(ध्वनि प्रभाव: झींगुरों की आवाज़। गौरव और आर्यन को हॉस्टल से बाहर निकाल दिया गया है। वे अंधेरे में खड़े हैं।)
आर्यन: अब हम क्या करेंगे गौरव? उन्होंने हमें बाहर निकाल दिया। वो चाबी तो उन्होंने छीन ली।
गौरव तिवारी: (मुस्कुराते हुए) खन्ना को लगा कि उसने चाबी छीन ली, लेकिन वो चाबी का गुच्छा मेरे पास पहले से था। मैंने उसे सिर्फ एक नकली चाबी थमाई जो मेरे बैग में पड़ी थी। असली चाबी ये रही।
आर्यन: (हैरान होकर) कमाल है! पर ये चाबी लगेगी कहाँ?
गार्ड शंकर: (अंधेरे से निकलते हुए, फुसफुसाते हुए) मैं बताता हूँ साहब... कहाँ लगेगी।
(ध्वनि प्रभाव: आर्यन के चौंकने की आवाज़।)
गार्ड शंकर: मैं उस रात ड्यूटी पर था। समीर बाबू को वो लड़के घसीटते हुए पीछे की पुरानी स्टोर-रूम वाली सीढ़ियों की तरफ ले गए थे। वहां एक पुराना दरवाजा है जो बेसमेंट (तहखाने) में जाता है।
(ध्वनि प्रभाव: भारी कदमों की आवाज़, सूखी पत्तियों के चरमराहट की आवाज़। टॉर्च के ऑन होने की 'क्लिक-क्लिक' आवाज़।)
गौरव तिवारी: शंकर, तुम हमारे साथ क्यों आ रहे हो? तुम्हें डर नहीं लगता?
गार्ड शंकर: बहुत डर लगता है साहब। लेकिन 20 साल से उस लड़के की रूह मुझे सोने नहीं देती। हर रात मुझे उसकी सिसकियाँ सुनाई देती हैं। आज ये खत्म होना चाहिए।
(ध्वनि प्रभाव: एक बहुत पुराने लोहे के दरवाजे के सामने रुकने की आवाज़।)
गौरव तिवारी: यही है वो दरवाज़ा। आर्यन, टॉर्च इधर दिखाओ।
(ध्वनि प्रभाव: चाबी को ताले में घुमाने की आवाज़—'कड़क... कचक'। दरवाज़ा खुलने की भारी गूँज।)
(ध्वनि प्रभाव: धूल भरी हवा की आवाज़। अजीब सी बदबू। टपकते हुए पानी की 'टप-टप'।)
आर्यन: यहाँ कितनी घुटन है। गौरव, मेरा 'इलेक्ट्रिक मीटर' (K-II) पागलों की तरह रेड लाइट दिखा रहा है!
गौरव तिवारी: (गंभीरता से) यहाँ बहुत ज्यादा निगेटिव एनर्जी है। सावधान रहो।
(ध्वनि प्रभाव: अचानक बेसमेंट का दरवाज़ा अपने आप ज़ोर से बंद हो जाता है—'धड़ाम!'।)
आर्यन: (चिल्लाते हुए) बंद हो गया! गौरव, दरवाज़ा लॉक हो गया!
गौरव तिवारी: डरो मत आर्यन! ये हमें डराने की कोशिश है। शंकर? शंकर कहाँ गए?
(ध्वनि प्रभाव: शंकर गायब है। सन्नाटे में एक भारी साँस लेने की आवाज़ सुनाई देती है।)
आवाज़ (बेसमेंट के अंधेरे से): "वहाँ... मत जाना..."
आर्यन: गौरव, देखो! फर्श पर... वो क्या है?
(ध्वनि प्रभाव: टॉर्च की रोशनी एक पुरानी लकड़ी की संदूक पर पड़ती है। संदूक पर 'समीर' लिखा हुआ है, लेकिन उस पर खून के सूखे हुए धब्बे हैं।)
गौरव तिवारी: ये उसका सामान है। इसे गायब कर दिया गया था।
(ध्वनि प्रभाव: अचानक एक भयानक चीख गूँजती है। बेसमेंट की दीवारों पर परछाइयाँ नाचने लगती हैं।)
आर्यन: गौरव, मेरे पीछे! कोई खड़ा है!
(ध्वनि प्रभाव: आर्यन के गिरने और घिसटने की आवाज़।)
(ध्वनि प्रभाव: गौरव के चिल्लाने की आवाज़—'आर्यन! अपना हाथ दो!'। चारों तरफ से समीर की आवाज़ गूँजने लगती है—'वो आ रहे हैं... वो सब आ रहे हैं!')
गौरव तिवारी: (चिल्लाते हुए) कौन आ रहा है समीर? साफ बताओ!
(ध्वनि प्रभाव: बेसमेंट की दीवारें हिलने लगती हैं। अचानक एक पुरानी फिल्म की तरह दीवार पर कुछ धुंधले दृश्य दिखाई देने लगते हैं—चार लड़के समीर को पीट रहे हैं और उनमें से एक का चेहरा बिल्कुल... वॉर्डन खन्ना जैसा है, लेकिन 20 साल जवान।)
आर्यन: (कांपते हुए) खन्ना... खन्ना भी उनमें शामिल था!
(ध्वनि प्रभाव: सस्पेंस संगीत तेज़ होता है। अचानक बेसमेंट के कोने से एक हाथ निकलता है और आर्यन का पैर पकड़ लेता है।)
आवाज़ (गहरी और डरावनी): "अब... तुम भी यहीं रहोगे।"
(ध्वनि प्रभाव: ज़ोरदार धमाका और सन्नाटा।)
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