(ध्वनि प्रभाव: पुराने पंखे की घरघराहट, दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़, जूतों की फर्श पर गूंजती आवाज़। गलियारा खाली है।)
आर्यन (मन ही मन): दिल्ली की ये सर्द रातें वैसे ही डरावनी होती हैं, लेकिन करोल बाग के इस पुराने इंजीनियरिंग हॉस्टल की हवा में आज कुछ अलग ही भारीपन है। लोग कहते हैं ये बिल्डिंग अंग्रेज़ों के ज़माने की है, पर मुझे इन कहानियों पर कभी यकीन नहीं हुआ। रूम नंबर 217... पिछले एक महीने में तीन लोग ये कमरा छोड़ चुके हैं। और अब रोहन...
(ध्वनि प्रभाव: अचानक एक खिड़की के पल्ले के जोर से टकराने की आवाज़। आर्यन चौंक कर रुकता है।)
आर्यन: (लंबी सांस लेते हुए) रिलैक्स आर्यन... बस हवा है।
(ध्वनि प्रभाव: वह एक लकड़ी के भारी दरवाजे के सामने रुकता है। दरवाजे पर '217' लिखा है। वह चाबी लगाता है। ताला खुलने की कर्कश आवाज़।)
(ध्वनि प्रभाव: दरवाजा खुलने की आवाज़। सन्नाटा। आर्यन अंदर कदम रखता है। अचानक, एक अजीब सी सरसराहट की आवाज़ होती है।)
आर्यन: रोहन? तुम जाग रहे हो?
(ध्वनि प्रभाव: रोहन की भारी और डरी हुई सांसें सुनाई देती हैं।)
रोहन: (कांपती आवाज़ में) आर्यन... मत जलाना लाइट। वो... वो कोने में खड़ा है।
आर्यन: कौन खड़ा है रोहन? यहाँ कोई नहीं है। देखो, मैंने लाइट जलाई।
(ध्वनि प्रभाव: स्विच दबाने की आवाज़। ट्यूबलाइट की झपझपाहट।)
रोहन: (चिल्लाते हुए) नहीं! उसे रौशनी पसंद नहीं है! आर्यन, मेरा गला... कोई दबा रहा है... बचाओ!
(ध्वनि प्रभाव: रोहन के खांसने और छटपटाने की आवाज़। आर्यन की तरफ भागने और उसे पकड़ने की आवाज़।)
आर्यन: रोहन! शांत हो जाओ! यहाँ कोई नहीं है! तुम सिर्फ सपना देख रहे हो। तुम्हारी तबीयत बिगड़ रही है, चलो वार्डन के पास चलते हैं।
रोहन: (फुसफुसाते हुए) वो सपना नहीं था आर्यन... उसने मुझसे कहा... 'मुझे बाहर निकालो'।
(ध्वनि प्रभाव: चाय के कप की खनक। मेज पर हाथ मारने की आवाज़।)
वॉर्डन खन्ना: (गुस्से में) फिर वही बकवास! आर्यन, तुम एक इंजीनियरिंग के छात्र हो। ये सब 'तनाव' है। सेमेस्टर परीक्षाएँ पास आ रही हैं, इसलिए लड़कों के दिमाग चल गए हैं।
आर्यन: सर, रोहन के गले पर उंगलियों के निशान हैं। वो खुद को चोट नहीं पहुँचा सकता। और रूम 217 का तापमान... बाहर 15 डिग्री है, लेकिन उस कमरे के अंदर हाथ जम रहे हैं।
वॉर्डन खन्ना: देखो, मुझे फालतू की अफवाहें नहीं चाहिए। कल सुबह तक सब शांत हो जाना चाहिए, वरना मैं तुम दोनों को सस्पेंड कर दूँगा।
आर्यन: (दृढ़ता से) सर, प्रशासन मदद करे या न करे, मैंने एक टीम को बुलाया है। वो दिल्ली की सबसे बड़ी पैरानॉर्मल सोसाइटी से हैं। वो आज रात यहाँ पहुँच रहे हैं।
(ध्वनि प्रभाव: एक काली एसयूवी के रुकने की आवाज़। दरवाजा खुलने और भारी बूट्स की आवाज़।)
गौरव तिवारी: (गंभीर और आत्मविश्वास से भरी आवाज़) जगह पुरानी है... और यहाँ की ऊर्जा बहुत ही निगेटिव महसूस हो रही है।
आर्यन: मिस्टर गौरव तिवारी? मैं आर्यन हूँ। शुक्रिया आने के लिए।
गौरव तिवारी: (हाथ मिलाते हुए) नमस्ते आर्यन। मैंने सुना है तुम्हारे दोस्त की हालत ठीक नहीं है। घबराओ मत, हम यहाँ सिर्फ भूत पकड़ने नहीं, बल्कि सच का पता लगाने आए हैं। क्या हम रूम 217 चल सकते हैं?
आर्यन: जी, बिलकुल। इस तरफ।
(ध्वनि प्रभाव: बीप-बीप की आवाज़ें - K-II मीटर और ईएमएफ डिटेक्टर की आवाज़।)
गौरव तिवारी: टीम, कैमरे सेट करो। ईएमएफ (EMF) लेवल्स चेक करो। आर्यन, तुम खिड़की के पास खड़े हो जाओ और कुछ भी असामान्य महसूस हो तो तुरंत बताना।
टीम सदस्य: गौरव सर, ईएमएफ लेवल अचानक बढ़ रहे हैं। बेस रीडिंग 0.1 थी, अब 4.5 पर है।
गौरव तिवारी: (शांत होकर) ठीक है। हम डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर (EVF) ऑन कर रहे हैं।
(ध्वनि प्रभाव: एक स्थिर 'हिस' की आवाज़, जो रिकॉर्डर की होती है।)
गौरव तिवारी: क्या यहाँ कोई है? (शांति) क्या तुम हमसे बात करना चाहते हो? हम तुम्हारी मदद करने आए हैं।
(ध्वनि प्रभाव: अचानक कमरे का तापमान गिरने की आवाज़ - जैसे ठंडी हवा का झोंका आया हो।)
आर्यन: (कांपते हुए) गौरव... तापमान... मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
गौरव तिवारी: शांत रहो आर्यन। डर को अपने ऊपर हावी मत होने दो।
(ध्वनि प्रभाव: अचानक कमरे का रेडियो अपने आप चालू हो जाता है। उसमें से केवल स्टैटिक नॉइज़ आ रही है।)
आवाज़ (रेडियो से): (बेहद धीमी और फटी हुई फुसफुसाहट) ...म...ु...झे...
आर्यन: क्या था वो?
गौरव तिवारी: श्शश! चुप रहो।
(ध्वनि प्रभाव: सन्नाटा। अचानक दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक सुनाई देने लगती है।)
गौरव तिवारी: समय क्या हुआ है?
टीम सदस्य: सर... रात के 2 बज कर 16 मिनट।
(ध्वनि प्रभाव: घड़ी की टिक-टिक रुक जाती है। सन्नाटा इतना गहरा है कि दिल की धड़कन सुनाई दे।)
(ध्वनि प्रभाव: दरवाजे पर तीन स्पष्ट दस्तक - ठक... ठक... ठक।)
आर्यन: (सहम कर) बाहर कोई है?
गौरव तिवारी: आर्यन, दरवाजा मत खोलना।
(ध्वनि प्रभाव: दस्तक फिर से होती है, लेकिन इस बार जोर से। ठक! ठक! ठक!)
एक अनजान आवाज़ (फुसफुसाते हुए): मुझे... बाहर... निकालो...
(ध्वनि प्रभाव: अचानक कमरे का आईना तड़क कर टूटने की आवाज़। आर्यन की चीख सुनाई देती है।)
गौरव तिवारी: लाइट जलाओ! तुरंत!
(ध्वनि प्रभाव: स्विच की आवाज़। कमरे में हलचल।)
गौरव तिवारी: (तेज़ सांस लेते हुए) रिकॉर्डर चेक करो। अभी।
टीम सदस्य: (घबराकर) सर, रिकॉर्डिंग में कुछ है। सुनिए...
(ध्वनि प्रभाव: ऑडियो रिकॉर्डिंग प्ले होती है। भारी सांसें सुनाई देती हैं और फिर वही फुसफुसाहट साफ़ होती है: "मुझे बाहर निकालो... उन्होंने मुझे बंद कर दिया था।")
आर्यन: उन्होंने? किसने?
गौरव तिवारी: (गंभीरता से) इस हॉस्टल की दीवारों में कोई राज दफन है आर्यन। ये कोई साधारण साया नहीं है। ये एक ऐसी आत्मा है जिसे इंसाफ चाहिए।
(ध्वनि प्रभाव: पक्षियों के चहचहाने की हल्की आवाज़। चाय की चुस्की।)
गौरव तिवारी: आर्यन, आज रात जो हुआ वो सिर्फ शुरुआत थी। हमें इस कॉलेज के पुराने रिकॉर्ड्स देखने होंगे। 'उन्होंने मुझे बंद कर दिया था'... ये शब्द किसी पुरानी दुश्मनी या हादसे की तरफ इशारा कर रहे हैं।
आर्यन: मुझे पता चला है कि 20 साल पहले यहाँ एक छात्र की मौत हुई थी। लोग कहते हैं वो एक्सीडेंट था।
गौरव तिवारी: (कैमरे की तरफ देखते हुए) एक्सीडेंट... या मर्डर? हम कल फिर बैठेंगे। लेकिन याद रखना, वो अभी हमारे आसपास ही है।
(ध्वनि प्रभाव: सस्पेंस भरा संगीत। गौरव के रिकॉर्डर की आखिरी आवाज़ बजती है।)
रिकॉर्डर की आवाज़: (अस्पष्ट) "सच... छिपाया गया..."
(ध्वनि प्रभाव: ज़ोरदार संगीत और फेड आउट।)
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