1 दस्तक FREE 2 CHAPTER II. दबी हुई आवाज़ें FREE 3 CHAPTER III. तहखाने का रहस्य FREE 4 CHAPTER IV. खूनी विरासत ₹0 5 CHAPTER V. कमरा नंबर 105 - नई शुरुआत? ₹0 6 CHAPTER VI. माया का साया ₹0 7 CHAPTER VII. नींव का पाप (1970) ₹0 8 CHAPTER VIII. वो चार चेहरे ₹0 9 CHAPTER IX. काली छाया और तंत्र ₹0 10 CHAPTER X. लाइब्रेरी का गुप्त गलियारा ₹0 11 CHAPTER XI. खूनी दीवारें (द न्यू केस) ₹0 12 CHAPTER XII. लाल दरवाज़े की पांडुलिपि ₹0 13 CHAPTER XIII. खामोश कब्रें ₹0 14 CHAPTER XIV. शून्य का प्रवेश द्वार ₹0 15 CHAPTER XV. रसातल ₹0 16 CHAPTER XVI. चांसलर का मुखौटा ₹0 17 CHAPTER XVII. अमावस्या की बावली ₹0 18 CHAPTER XVIII. बर्फ और खामोशी ₹0 19 CHAPTER XIX. लाल बर्फ और बौने साये ₹0 20 CHAPTER XX. तारीख का जाल ₹0 21 CHAPTER XXI. दिल्ली की ओर दौड़ ₹0 22 CHAPTER XXII. कमरे की पुकार ₹0 23 CHAPTER XXIII. आर्किटेक्ट का चक्रव्यूह ₹0 24 CHAPTER XXIV. मलबे में दफन सच ₹0 25 CHAPTER XXV. शून्य से अनंत तक ₹0
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CHAPTER II. दबी हुई आवाज़ें

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Public Domain
22 Mar 2026

(ध्वनि प्रभाव: आईने के टूटे हुए कांच पर चलने की आवाज़—चरमराहट। गौरव और आर्यन अभी भी कमरे के अंदर हैं।)

आर्यन: (घबराहट में) गौरव, वो आईना... वो अपने आप कैसे टूट सकता है? और वो आवाज़... 'सच छिपाया गया'। क्या आपको वाकई लगता है कि यहाँ किसी का खून हुआ था?

गौरव तिवारी: (कैमरे की फुटेज चेक करते हुए) आर्यन, पैरानॉर्मल दुनिया में 'एनर्जी' कभी खत्म नहीं होती। अगर किसी के साथ बहुत ज्यादा हिंसा हुई हो, तो वो जगह उस पल को बार-बार 'रीप्ले' करती है। इसे हम 'रेसिडुअल हॉन्टिंग' कहते हैं। लेकिन यहाँ... यहाँ कुछ 'इंटेलिजेंट' है। वो हमसे बात कर रहा है।

आर्यन: पर हम सच का पता कैसे लगाएंगे? कॉलेज प्रशासन तो बात दबाने में लगा है।

गौरव तिवारी: हर कॉलेज की एक याददाश्त होती है, और वो याददाश्त अक्सर पुरानी फाइलों और लाइब्रेरी के कोनों में दबी होती है। कल सुबह हमें रिकॉर्ड रूम जाना होगा।

(ध्वनि प्रभाव: भारी पुरानी अलमारियों के खुलने की आवाज़। धूल झाड़ने की आवाज़—'अक्खूं-अक्खूं' (खांसी)।)

जोशी (लाइब्रेरियन): (धीमी, कड़कती आवाज़ में) रूम 217 के बारे में पूछ रहे हो? बेटा, उस कमरे की चाबी तो सालों तक जंग खाती रही थी। तुम नए लड़कों को वहाँ किसने भेज दिया?

आर्यन: जोशी जी, हम बस ये जानना चाहते हैं कि साल 2005-2006 के बैच में क्या हुआ था? समीर नाम का कोई छात्र था?

(ध्वनि प्रभाव: जोशी जी के हाथ से फाइलों का बंडल गिरने की आवाज़। सन्नाटा छा जाता है।)

जोशी: (कांपते हुए) समीर... वो नाम यहाँ मत लो। वो बहुत ही होनहार लड़का था। लेकिन... लेकिन कुछ सीनियर्स को उसका आगे बढ़ना पसंद नहीं आया।

गौरव तिवारी: जोशी जी, डरिए मत। जो भी आप जानते हैं, बताइये। क्या वो वाकई एक एक्सीडेंट था?

जोशी: (फुसफुसाते हुए) उस रात बहुत शोर हुआ था। रैगिंग के नाम पर उसे 217 में बंद कर दिया गया था। अगली सुबह जब वॉर्डन ने कमरा खोला, तो फर्श खून से सना था। कहा गया कि समीर ने खिड़की से कूदने की कोशिश की, पर... उसकी चीखें आज भी मुझे सुनाई देती हैं।

(ध्वनि प्रभाव: छात्रों के शोर-शराबे और कैंटीन की दूर से आती आवाज़।)

आर्यन: गौरव, जोशी जी ने जो कहा वो भयानक है। समीर को टॉर्चर किया गया था। और सबसे अजीब बात... उस वक्त के वॉर्डन कौन थे पता है?

गौरव तिवारी: कौन?

आर्यन: खन्ना जी के पिता। यानी ये वॉर्डन की कुर्सी खानदानी है और राज भी।

गौरव तिवारी: (गंभीरता से) इसका मतलब वॉर्डन खन्ना को सब पता है। इसलिए वो हमें रोकने की कोशिश कर रहे हैं। आर्यन, आज रात हम एक 'Sprit Box' सेशन करेंगे। हमें समीर से सीधे सवाल पूछने होंगे।

(ध्वनि प्रभाव: स्पिरिट बॉक्स की तेज़ आवाज़—रेडियो फ्रीक्वेंसी के तेज़ी से बदलने की आवाज़ 'शू-शू-शू-पट्ट-पट्ट')

गौरव तिवारी: समीर, क्या तुम यहाँ हो? (शांति) हम तुम्हें इंसाफ दिलाना चाहते हैं।

(ध्वनि प्रभाव: स्पिरिट बॉक्स से एक कटी-फटी आवाज़ आती है।)

आवाज़: "दरवाज़ा... बंद... दर्द..."

आर्यन: (डरते हुए) गौरव, देखो! दीवार पर कुछ उभर रहा है!

(ध्वनि प्रभाव: दीवार पर खुरचने की आवाज़। जैसे कोई नाखून से प्लास्टर उखाड़ रहा हो।)

गौरव तिवारी: आर्यन, कैमरा घुमाओ!

(ध्वनि प्रभाव: अचानक कमरे की सारी लाइटें बुझ जाती हैं। आर्यन के हाथ से कैमरा गिरता है।)

आर्यन: गौरव! मेरा पैर... कोई मुझे खींच रहा है! गौरव!

गौरव तिवारी: अपना हाथ बढ़ाओ आर्यन! समीर, रुको! हम दुश्मन नहीं हैं!

(ध्वनि प्रभाव: एक ज़ोरदार धमाका—जैसे कोई अलमारी गिर गई हो। अचानक सन्नाटा छा जाता है। आर्यन के ज़ोर-ज़ोर से हांफने की आवाज़।)

(ध्वनि प्रभाव: टॉर्च की रोशनी की आवाज़। गौरव आर्यन को सहारा देकर बिठाता है।)

गौरव तिवारी: तुम ठीक हो?

आर्यन: (हाफते हुए) उसने... उसने मुझे कुछ दिखाया गौरव। जैसे ही मेरा पैर खिंचा, मुझे एक विज़न दिखा। चार लड़के... एक हॉकी स्टिक... और एक अलमारी के पीछे छिपाई गई कोई चीज़।

गौरव तिवारी: अलमारी के पीछे? (गौरव टॉर्च की रोशनी कमरे के कोने में लगी भारी लोहे की अलमारी पर डालता है।)

(ध्वनि प्रभाव: अलमारी को खिसकाने की भारी आवाज़—रगड़ने की आवाज़।)

आर्यन: यहाँ... यहाँ दीवार में एक छोटा सा छेद है। और इसके अंदर...

(ध्वनि प्रभाव: प्लास्टिक के सरसराने की आवाज़।)

गौरव तिवारी: ये तो समीर का आई-कार्ड है... और ये क्या? एक पुरानी रस्टी (जंग लगी) चाबी?

आर्यन: ये चाबी किसकी है?

गौरव तिवारी: शायद उस सच की, जिसे वॉर्डन खन्ना ने 20 साल से दबा कर रखा है।

(ध्वनि प्रभाव: सस्पेंस भरा संगीत। अचानक कॉरिडोर में किसी के भारी जूतों की आवाज़ सुनाई देती है जो 217 की तरफ आ रहे हैं।)

आर्यन: (फुसफुसाते हुए) कोई आ रहा है...

(ध्वनि प्रभाव: दरवाज़ा धीरे से चरमराता है। संगीत तेज़ होता है और समाप्त हो जाता है।)

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