1 कथा 1: कछुआ और खरगोश FREE 2 कथा 2: भेड़िया-भेड़िया चिल्लाने वाला लड़का FREE 3 कथा 3: चींटी और टिड्डा FREE 4 कथा 4: शेर और चूहा FREE 5 कथा 5: लोमड़ी और अंगूर FREE 6 कथा 6: प्यासा कौआ FREE 7 कथा 7: भेड़ की खाल में भेड़िया FREE 8 कथा 8: सोने के अंडे देने वाली मुर्गी FREE 9 कथा 9: कुत्ता और उसकी परछाई FREE 10 कथा 10: उत्तरी हवा और सूरज FREE 11 कथा 11: दूधवाली का सपना FREE 12 कथा 12: शहरी चूहा और देहाती चूहा FREE 13 कथा 13: भेड़िया और मेमना FREE 14 कथा 14: पिता, पुत्र और गधा FREE 15 कथा 15: शेर और मूर्ति FREE 16 कथा 16: लाठियों का गट्ठर FREE 17 कथा 17: कौआ और लोमड़ी FREE 18 कथा 18: मेंढक और बैल FREE 19 कथा 19: बीमार शेर FREE 20 कथा 20: भालू और दो मित्र FREE 21 कथा 21: गधा शेर की खाल में FREE 22 कथा 22: पेट और शरीर के अंग FREE 23 कथा 23: लड़का और बादाम FREE 24 कथा 24: हिरण और जलछवि FREE 25 कथा 25: भेड़िया और सारस FREE 26 कथा 26: बिना पूँछ की लोमड़ी FREE 27 कथा 27: बिल्ली के गले में घंटी FREE 28 कथा 28: चरनी में कुत्ता FREE 29 कथा 29: व्यर्थ का कौआ FREE 30 कथा 30: लोमड़ी और सारस FREE 31 कथा 31: ज्योतिषी और कुआँ FREE 32 कथा 32: मछुआरा और छोटी मछली FREE 33 कथा 33: नमक का गधा FREE 34 कथा 34: दो बर्तन FREE 35 कथा 35: ऊँट और अरब FREE 36 कथा 36: चमगादड़, पक्षी और जानवर FREE 37 कथा 37: प्रेम में शेर FREE 38 कथा 38: प्रसव में पहाड़ FREE 39 कथा 39: ओक और सरकंडा FREE 40 कथा 40: मोर और सारस FREE 41 कथा 41: नकली डॉक्टर मेंढक FREE 42 कथा 42: किसान और साँप FREE 43 कथा 43: खरगोश और मेंढक FREE 44 कथा 44: लोमड़ी और बकरी FREE 45 कथा 45: कुत्ता और भेड़िया FREE 46 कथा 46: किसान का खजाना FREE 47 कथा 47: लोमड़ी और शेर FREE 48 कथा 48: एक आँख वाली हिरणी FREE 49 कथा 49: ईगल और कछुआ FREE 50 कथा 50: किसान और सारस FREE
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कथा 1: कछुआ और खरगोश

F
Funtel
05 May 2026

एक खरगोश था जो अपनी तेज़ चाल पर बहुत घमंड करता था, और एक कछुआ था जो अपनी धीमी चाल के लिए प्रसिद्ध था।

एक दिन खरगोश ने जंगल के सब जानवरों के सामने कछुए का मज़ाक़ उड़ाया। "देखो इसे, चलने में जितना समय लगाता है उतने में तो मैं पूरा जंगल नाप लूँ।" कछुए ने धैर्य से सुना और शांत स्वर में बोला, "मित्र, क्या तुम मेरे साथ दौड़ लगाने को तैयार हो?" खरगोश ज़ोर से हँसा। "तुम और मेरे साथ दौड़! ठीक है, आज ही दौड़ लगाते हैं।"

जंगल के सब जानवर इकट्ठे हुए। दौड़ का मार्ग तय हुआ। सीटी बजते ही खरगोश तीर की तरह आगे निकल गया। थोड़ी देर में उसने पीछे मुड़कर देखा — कछुआ बहुत दूर था। खरगोश ने सोचा, "इतनी देर है, क्यों न एक झपकी ले लूँ। जागते ही फिर दौड़ शुरू कर दूँगा, और आराम से जीत लूँगा।" वह एक पेड़ की छाया में लेट गया।

कछुआ धीरे-धीरे, परन्तु बिना रुके, अपनी चाल से चलता रहा। उसने सोते हुए खरगोश को पार किया, फिर भी रुका नहीं। जब खरगोश की नींद खुली, सूरज ढल रहा था। वह घबराकर भागा, परन्तु तब तक कछुआ अंतिम रेखा पार कर चुका था। सब जानवरों ने तालियाँ बजाईं और कछुए की प्रशंसा की।

खरगोश शर्मिंदा होकर खड़ा रह गया। उसका घमंड टूट चुका था। उसने उसी दिन सीख लिया कि गति तभी काम आती है जब उसके साथ निरंतरता और गंभीरता हो। आलस्य और अहंकार बड़ी से बड़ी क्षमता को भी व्यर्थ कर देते हैं।

इस कथा से शिक्षा यह है कि निरंतर परिश्रम करने वाला धीमा प्रतिस्पर्धी, अहंकारी और आलसी तेज़ प्रतिस्पर्धी से सदा आगे निकल जाता है। प्रतिभा बड़ी बात है, परन्तु अनुशासन और दृढ़ता उससे भी बड़ी।

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