इटली का खूबसूरत शहर वेरोना अपनी वास्तुकला और संस्कृति के लिए जाना जाता था, लेकिन इसकी हवा में एक अजीब सा जहर घुला हुआ था। यह जहर था नफरत का—एक ऐसी नफरत जो दो प्रतिष्ठित परिवारों, कैपुलेट और मोंटेग्यू, के बीच पीढ़ियों से चली आ रही थी। यह दुश्मनी इतनी पुरानी थी कि अब किसी को याद भी नहीं था कि इसकी शुरुआत किस बात पर हुई थी, लेकिन इसका अंजाम हर दिन खून-खराबे के रूप में सामने आता था।
जुलाई की एक उमस भरी सुबह, वेरोना का मुख्य चौराहा पहले से ही गर्म था। कैपुलेट खानदान के दो नौकर, सैमसन और ग्रेगरी, अपनी तलवारें लटकाए और ढालें थामे, शहर के बीचोबीच मटरगश्ती कर रहे थे। वे किसी काम से नहीं, बल्कि मुसीबत मोल लेने के इरादे से निकले थे। उनकी आंखें मोंटेग्यू घराने के किसी भी सदस्य को ढूंढ रही थीं ताकि वे अपनी खुजली मिटा सकें।
तभी उन्हें मोंटेग्यू परिवार के दो नौकर, अब्राहम और बाल्थासार आते दिखे।
सैमसन ने ग्रेगरी को कोहनी मारी। "मेरा हथियार तैयार है। तुम झगड़ा शुरू करो, मैं तुम्हारे पीछे हूँ।"
जैसे ही वे पास आए, सैमसन ने उन्हें अपमानित करने के लिए अपने अंगूठे को दांतों तले दबाया—जो उस समय वेरोना में एक गहरा अपमान माना जाता था। बात अंगूठा चबाने से शुरू हुई और देखते ही देखते तलवारें म्यानों से बाहर निकल आईं। लोहे से लोहा टकराने लगा और शांत सड़क युद्ध के मैदान में बदल गई।
तभी मोंटेग्यू परिवार का एक नौजवान, बेनवोलियो, जो स्वभाव से शांत था, वहाँ पहुंचा। उसने जब नौकरों को लड़ते देखा, तो अपनी तलवार खींच ली, लेकिन वार करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें अलग करने के लिए।
"रुक जाओ, बेवकूफों!" वह चिल्लाया। "अपनी तलवारें नीचे करो। तुम नहीं जानते तुम क्या कर रहे हो!"
लेकिन शांति की यह कोशिश बेकार गई। उसी पल, कैपुलेट खानदान का सबसे गुस्सैल और खतरनाक सदस्य, टाइबाल्ट, वहाँ आ धमका। उसने बेनवोलियो की हाथ में नंगी तलवार देखी और गलत समझ बैठा।
"क्या? इन कायर नौकरों के बीच तलवार ताने खड़े हो?" टाइबाल्ट ने नफरत से थूकते हुए कहा। "मुड़ो, बेनवोलियो, और अपनी मौत का सामना करो।"
"मैं केवल शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा हूँ," बेनवोलियो ने सफाई दी।
"शांति?" टाइबाल्ट हंसा, लेकिन उसकी हंसी में खंजर जैसी चुभन थी। "मुझे इस शब्द से उतनी ही नफरत है, जितनी नर्क से, सभी मोंटेग्यू से और तुझसे है। कायर, अपनी रक्षा कर!"
टाइबाल्ट ने बेनवोलियो पर हमला बोल दिया। अब लड़ाई सिर्फ नौकरों के बीच नहीं थी, बल्कि दोनों खानदानों के रईसजादे भी इसमें कूद पड़े थे। शोर सुनकर आसपास के नागरिक लाठियां और पत्थर लेकर दौड़ पड़े। कुछ ही देर में, बूढ़े लॉर्ड कैपुलेट और लॉर्ड मोंटेग्यू भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और एक-दूसरे को ललकारने लगे, जबकि उनकी पत्नियां उन्हें रोकने की कोशिश कर रही थीं।
वेरोना की सड़क पर कोहराम मच गया था। तभी, घोड़ों की टापों और भारी बूटों की आवाज़ ने सबको चौंका दिया। यह वेरोना के राजकुमार एस्केलस थे।
राजकुमार का चेहरा गुस्से से लाल था। उनके सिपाही भीड़ को तितर-बितर करने लगे। जब शोर थमा, तो राजकुमार की भारी आवाज़ गूंजी:
"शांति के दुश्मन! तुम लोग, जिन्होंने अपनी तलवारें अपने ही पड़ोसियों के खून से रंगी हैं! मेरी बात सुनो!"
सन्नाटा छा गया। तलवारें झुक गईं।
"यह तीसरी बार है," राजकुमार ने मोंटेग्यू और कैपुलेट की ओर उंगली उठाते हुए कहा, "जब तुम दोनों की आपसी रंजिश ने मेरी सड़कों का अमन-चैन छीना है। अगर आज के बाद तुम लोगों ने वेरोना की सड़कों पर हंगामा किया, तो उसकी कीमत तुम्हें अपनी जान देकर चुकानी होगी। यह मेरा आखिरी फरमान है! अब सब अपने घर जाओ।"
मौत की सजा की धमकी ने असर दिखाया। भीड़ धीरे-धीरे छंटने लगी। कैपुलेट परिवार अपने रास्ते चला गया और मोंटेग्यू अपने रास्ते।
जब सब शांत हो गया, तो लेडी मोंटेग्यू ने बेनवोलियो से पूछा, "शुक्र है कि मेरा बेटा रोमियो इस लड़ाई में शामिल नहीं था। क्या तुमने उसे आज देखा है?"
बेनवोलियो ने सिर हिलाया। "चाची, सूरज उगने से पहले मैंने उसे शहर के पश्चिम में गूलर के पेड़ों के नीचे टहलते देखा था। लेकिन जैसे ही उसने मुझे देखा, वह जंगलों में छिप गया। वह आजकल बहुत उदास रहता है, अपने कमरे में अंधेरा करके बैठा रहता है। मुझे लगता है कोई गहरा गम उसे खाए जा रहा है।"
लॉर्ड मोंटेग्यू ने चिंता जताई, "वह अपनी परेशानियां किसी को नहीं बताता। वह उस कली की तरह है जो खिलने से पहले ही मुरझा रही है।"
तभी दूर से एक उदास सा साया आता दिखाई दिया। वह रोमियो था—खोया हुआ, बिखरे बाल और चाल में एक अजीब सी थकान।
"वह आ रहा है," बेनवोलियो ने कहा। "आप लोग जाइए, मैं उससे बात करके पता लगाता हूँ कि उसके दिल में क्या है।"
जब रोमियो पास आया, तो उसकी बातों में पहेलियाँ थीं। वह प्यार में था, लेकिन यह प्यार उसे खुशी नहीं, दर्द दे रहा था। वह रोज़ालिन नाम की एक लड़की से एकतरफा मोहब्बत करता था, जिसने कसम खाई थी कि वह कभी शादी नहीं करेगी।
"प्यार एक धुआं है जो आहों से बनता है," रोमियो ने एक गहरी सांस लेते हुए बेनवोलियो से कहा। "यह खो जाए तो समंदर है आंसुओं का, और मिल जाए तो आंखों में चमकती आग। मैं जिंदा हूँ, दोस्त, पर मेरा दिल कहीं और मर चुका है।"
बेनवोलियो ने उसे समझाने की कोशिश की, "भाई, उस लड़की को भूल जाओ। दुनिया में और भी सुंदर चेहरे हैं। अपनी आंखें खुली रखो और दूसरी लड़कियों को देखो।"
रोमियो ने एक फीकी मुस्कान के साथ सिर हिलाया। "तुम अंधे को देखना नहीं सिखा सकते, बेनवोलियो। उसके जैसी कोई नहीं है। उसे भूलना नामुमकिन है।"
रोमियो अपनी उदासी के अंधेरे में डूबा हुआ था, और उसे खबर भी नहीं थी कि तकदीर ने उसके लिए रोज़ालिन से भी ज्यादा खूबसूरत, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक कुछ और ही लिख रखा था। वेरोना की उस शाम में, जहाँ एक तरफ नफरत की आग सुलग रही थी, वहीं दूसरी तरफ एक अमर प्रेम कहानी की चिंगारी जलने ही वाली थी।
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