आधी रात हो चुकी थी। मर्क्युशियो और बेनवोलियो, रोमियो को पुकारते हुए कैपुलेट की हवेली के बाहर ढूंढ रहे थे। वे उसे घर ले जाने के लिए आए थे, लेकिन रोमियो का मन अब उसके वश में नहीं था। उसका शरीर तो बाहर था, लेकिन उसकी आत्मा कैपुलेट की उस चारदीवारी के भीतर थी, जहाँ जूलियट मौजूद थी।
अपने दोस्तों की आवाज़ों को अनसुना कर, रोमियो ने अंधेरे में एक ऊंची दीवार फांदी और कैपुलेट के निजी बगीचे में कूद गया। यह एक पागलपन था—दुश्मन के घर में, वह भी रात के अंधेरे में घुसना मौत को दावत देने जैसा था। लेकिन प्रेम ने उसके डर को खत्म कर दिया था।
वह पेड़ों की छाया में छिपा ही था कि अचानक ऊपर एक खिड़की खुली। वहां जूलियट खड़ी थी। उसकी मौजूदगी ने रात के अंधेरे को ऐसे चीर दिया जैसे पूरब से सूरज निकल आया हो।
रोमियो नीचे झाड़ियों में सांस रोके खड़ा था, उसे निहारता रहा। वह खुद से बुदबुदाया, "हौले! वह देखो, उस खिड़की से कौन सी रोशनी फूट रही है? वह पूरब है, और जूलियट सूरज है।"
जूलियट को पता नहीं था कि कोई उसे सुन रहा है। वह अपनी हथेलियों पर चेहरा टिकाए, रात के आसमान को देख रही थी और उसका दिल एक ही नाम पुकार रहा था।
"ओह रोमियो, रोमियो!" जूलियट ने एक गहरी आह भरी, जो सन्नाटे में गूंज उठी। "तुम रोमियो क्यों हो? अपने पिता को नकार दो, अपना नाम बदल दो। और अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते, तो बस कसम खा लो कि तुम मेरे हो, और मैं कैपुलेट नहीं रहूंगी।"
रोमियो का दिल जोर से धड़कने लगा। वह सुनना चाहता था कि जूलियट और क्या कहती है।
जूलियट ने फिर कहा, "सिर्फ तुम्हारा नाम ही तो मेरा दुश्मन है। तुम तुम हो, चाहे मोंटेग्यू हो या न हो। आखिर मोंटेग्यू है क्या? न हाथ, न पैर, न चेहरा। नाम में क्या रखा है? अगर हम गुलाब को किसी और नाम से पुकारें, तो भी वह उतनी ही खुशबू देगा। अगर रोमियो का नाम रोमियो न होता, तब भी वह उतना ही प्यारा होता। रोमियो, अपना नाम छोड़ दो, और उस नाम के बदले, जो तुम्हारा हिस्सा भी नहीं है, मुझे पूरा ले लो।"
अब रोमियो से और रहा नहीं गया। वह छाया से बाहर निकल आया।
"मैं तुम्हारी बात पर यकीन करता हूं!" रोमियो ने नीचे से पुकारा। "मुझे अपना प्रेमी कह दो, और मैं अपना नाम मिटा दूंगा। अब से मैं रोमियो नहीं रहूंगा।"
जूलियट घबरा गई। "अंधेरे में छिपा यह कौन है जो मेरे राज़ सुन रहा है?"
"मैं नाम से कैसे बताऊं कि मैं कौन हूं," रोमियो ने कहा, "क्योंकि मेरा नाम अब मुझे ही चुभता है, क्योंकि वह तुम्हारा दुश्मन है।"
जूलियट ने तुरंत आवाज़ पहचान ली। "क्या तुम रोमियो नहीं हो? एक मोंटेग्यू?"
"न रोमियो, न मोंटेग्यू, अगर तुम्हें ये दोनों नापसंद हों," रोमियो ने जवाब दिया।
जूलियट की चिंता अब उसके प्रेम से बड़ी हो गई थी। "तुम यहाँ कैसे आए? और क्यों? अगर मेरे परिवार के किसी आदमी ने तुम्हें यहाँ देख लिया, तो वे तुम्हें मार डालेंगे।"
"मुझे उनकी तलवारों का इतना डर नहीं है, जितना तुम्हारी आंखों में इनकार देखने का है," रोमियो ने जोश में कहा। "प्रेम ने मुझे यहाँ तक उड़ने के पंख दिए हैं; पत्थर की दीवारें प्रेम को नहीं रोक सकतीं।"
शर्म से जूलियट का चेहरा लाल हो गया, शुक्र था कि रात का अंधेरा उसे छिपा रहा था। उसने संकोच छोड़ दिया। "रोमियो, अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो, तो साफ-साफ कह दो। और अगर तुम्हें लगता है कि मैं बहुत आसानी से मान गई हूं, तो मैं नखरे दिखाऊंगी और 'ना' कहूंगी, ताकि तुम मुझे मनाओ। लेकिन सच तो यह है कि मैं तुम्हें अपनी जान से ज्यादा चाहती हूं।"
दोनों ने चांद की रोशनी में एक-दूसरे से वफा की कसमें खाईं। जूलियट ने रोमियो को रोका जब उसने चांद की कसम खाने की कोशिश की।
"चांद की कसम मत खाओ," जूलियट ने कहा, "वह हर महीने बदलता रहता है। कहीं तुम्हारा प्यार भी उसकी तरह न बदल जाए।"
तभी अंदर से धाय की आवाज़ आई, "मैडम!"
जूलियट हड़बड़ा गई। "मैं आ रही हूं!" उसने जल्दी से रोमियो की ओर मुड़कर कहा, "मेरे पास वक्त कम है। अगर तुम्हारे इरादे नेक हैं और तुम मुझसे शादी करना चाहते हो, तो कल मुझे खबर भिजवा देना। मैं सुबह नौ बजे अपना एक आदमी तुम्हारे पास भेजूंगी। तुम उसे बताना कि हम कब और कहाँ शादी कर सकते हैं। तब मैं अपनी सारी किस्मत तुम्हारे कदमों में रख दूंगी और दुनिया के किसी भी कोने तक तुम्हारे पीछे चलूंगी।"
"मैडम!" धाय की आवाज़ फिर आई।
"जाती हूं!" जूलियट ने कहा, लेकिन फिर रुकी। "शुभ रात्रि, रोमियो। बिछड़ना इतना मीठा गम है कि मन करता है सुबह तक अलविदा कहती रहूं।"
जूलियट खिड़की से हट गई और रोशनी बुझ गई। बगीचे में फिर से अंधेरा छा गया, लेकिन रोमियो का दिल अब रोशनी से भरा था।
रोमियो वहां से सीधे अपने गुरु, फादर लॉरेंस के पास जाने के लिए मुड़ा। उसे अब एक ही काम करना था—अपनी और जूलियट की शादी का इंतजाम।
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