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गीले कदमों के निशान

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Monika Agarwal
22 Mar 2026

 

अगली सुबह रतनपुरा की हवा में एक भारीपन था। तन्वी ने अपनी पॉडकास्ट की स्क्रिप्ट में लिखा, “यहाँ का भूत कोई शौकिया नहीं है, उसे कोरियोग्राफी आती है। गीले पैरों के निशान और परफेक्ट टाइमिंग।” हालांकि वह मज़ाक कर रही थी, लेकिन उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

पुलिस आई, लेकिन उन्होंने इसे ‘लापता’ होने का केस कहकर रफा-दफा कर दिया। गांव में पुलिस भी कुएँ के पास जाने से डरती थी। तन्वी ने विवान के साथ मिलकर उस कमरे की फिर से जांच की जहाँ से दूल्हा गायब हुआ था।

“विवान, अगर कोई इंसान गायब होता है, तो उसका कोई तो लॉजिक होगा। गीले पैर मतलब कुएँ से कोई आया था। लेकिन सातवें दिन ही क्यों?” तन्वी ने अपने EMF डिटेक्टर को चेक करते हुए पूछा।

विवान ने उसे बताया कि सातवां दिन वह दिन होता है जब सातवां फेरा और सात वचन पूरे होने का जश्न मनाया जाता है। चंद्रकला का सातवां फेरा कभी पूरा नहीं हुआ था।

उस रात तन्वी ने तय किया कि वह अपने गैजेट्स का इस्तेमाल करेगी। उसने कुएँ के चारों तरफ मोशन सेंसर कैमरे और इन्फ्रारेड सेंसर लगा दिए। गांव वाले उसे देखकर हँस रहे थे। “दिल्ली वाली मैडम मशीन से भूत पकड़ेगी!”

रात के 2:17 बजे। तन्वी अपने लैपटॉप पर फीड देख रही थी। अचानक बीप की आवाज़ हुई। मोशन सेंसर एक्टिवेट हो गया था। कैमरे में एक धुंधली सी आकृति दिखाई दी। वह लाल जोड़े में थी। तन्वी की सांसें थम गईं। वह आकृति कुएँ की मुंडेर पर खड़ी थी।

तन्वी तुरंत अपने कमरे से बाहर निकली। विवान भी उसके साथ था। वे कुएँ की तरफ भागे। लेकिन जब वे वहाँ पहुँचे, तो वहाँ कोई नहीं था। तन्वी ने वापस आकर फुटेज चेक की। जो उसने देखा, उसने उसके होश उड़ा दिए।

वीडियो में वह दुल्हन जैसी परछाई धीरे से कैमरे की तरफ मुड़ी। उसका चेहरा साफ नहीं था, लेकिन उसकी मुस्कान साफ दिख रही थी। वह हँसी नहीं थी, वह एक शांत जीत की मुस्कान थी। और फिर, स्क्रीन अचानक ब्लैक हो गई।

तन्वी ने अपना ऑडियो रिकॉर्डर चेक किया जो उसने पास ही एक पेड़ पर टांगा था। उसमें 2:17 बजे एक फुसफुसाहट रिकॉर्ड हुई थी।

“तन्वी... तुम्हारी शादी कब है?”

तन्वी ने रिकॉर्डर पटक दिया। वह विवान की तरफ मुड़ी। “ये मुझे मेरा नाम लेकर बुला रही है विवान! ये पॉसिबल नहीं है।”

विवान ने उसका हाथ पकड़ा। उसके हाथ ठंडे थे। “तन्वी, अब ये जांच नहीं रही। अब तुम उसके रडार पर हो। भाग जाओ यहाँ से।”

लेकिन तन्वी की ज़िद उसके डर से बड़ी थी। उसने फैसला किया कि वह इस ‘अधूरी दुल्हन’ के राज को खोलकर ही रहेगी। उसे लगा कि विज्ञान कहीं न कहीं फेल हो रहा है, और उसे अब कहानी के उस हिस्से में जाना होगा जिसे गांव वाले छिपा रहे हैं।

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