एपिसोड 1: "श्राप की शुरुआत"
[SFX: हवा की सर्द सिहरन, धीमे-धीमे बच्चे के रोने की आवाज़, जो दूर होती जाती है। उल्लू की आवाज़ और पेड़ों के पत्तों की खड़खड़ाहट।]
[BGM: धीमे और रहस्यमय सुर, जो धीरे-धीरे डरावना होता जाता है।]
गुंजन (हड़बड़ाते हुए): कौन है?
[SFX: खिड़की पर फिर से दस्तक। हवाओं की गूंज तेज़ होती है।]
Narrator – एक अजीब सी आवाज ने बिस्तर पर सोई गुंजन को झकझोर कर रख दिया । गुंजन हिम्मत बटोर कर खिड़की के पास गई , उसने धीरे से खिड़की खोलकर देखा , पर बाहर कोई नहीं था । लेकिन जैसे ही वह खिड़की बंद करने लगती है, उसे आँगन में कोई काली परछाई दिखी ।
गुंजन (डरते हुए): कौन है वहाँ?
[SFX: बच्चे के रोने की धीमी आवाज़, जैसे बहुत करीब से आ रही हो।]
गुंजन (घबराते हुए): ये कैसी आवाज़ है?
Narrator - गुंजन को अब हल्का हल्का डर लगने लगा और वो खिड़की से पीछे हटने लगती है, लेकिन तभी उसे ऐसा लगा कि कोई उसकी पीठ के पीछे खड़ा है। उसने तुरंत पलटकर देखा , पर वहाँ कोई नहीं था ।
गुंजन (चीखते हुए): माँ!!! माँ माँ माँ
[SFX: तेज़ चीख और दरवाजे के खुलने की आवाज़।]
Narrator – गुंजन की चीखे सुनकर सारे घरवाले जग गए , और सब गुंजन के कमरे की तरफ भागे ।
Nirmala (चिंतित होकर): क्या हुआ, गुंजन? तू ऐसे क्यू चीख रही है , सब ठीक तो है न ?
गुंजन (थरथराते हुए): वहाँ... वहाँ कोई था। उसने मुझे देखा... और वो रोने की आवाज़... वो वो वो ,,,,
Nirmala – क्या , ये क्या कह रही है तू , रुक मुझे देखने दे ।
Narrator – निर्मला ने गुंजन के कमरे की अच्छी तरह से छानबीन की , उसने खिड़की खोलकर बाहर देखा तो बाहर भी कोई नहीं था ।
Nirmala – कोई तो नहीं है रे , तुझे कुछ वहम हुआ है , और मैंने तुझे कितनी बार समझाया है की रात में ये खिड़की बंद रखा कर । पर तू है की सुनती ही नहीं है ।
Gunjan – नहीं मैं कह रही हूँ कोई था यहाँ , आप मेरा यकीन करो ।
Narrator – गुंजन को इस कदर परेशान देख अब निर्मला को भी कुछ अजीब लग रहा था । उसने गुंजन के सर पर हाँथ फेरते हुए कहा ,
Nirmala – देख गुंजन , तेरा पाँचवा महीना चल रहा है न , और pregnancy के वक्त ऐसे वहम अक्सर होते हैं तू डर मत देख हम सब यही हैं , सब ठीक है , तू सोजा ।
Gunjan – माँ आप यहीं रुको , आप कहाँ जा रही हैं ।
Nirmala – नहीं मैं कही नहीं जा रही गुंजन , तू सोजा , आज मैं यहाँ तेरे कमरे में तेरे साथ ही सोऊँगी और कल से तुझे वैसे भी डरने की जरूरत नहीं है , कल अभिजीत आ जाएगा ।
Gunjan – क्या ? वो वापस आ रहे हैं ?
Nirmala – हाँ , आज ही उसके बाउजी ने उससे बात की थी , अब जब तक तुम दोनों का बच्चा इस दुनिया में नहीं आ जाता अभिजीत यही तेरे साथ रहेगा ।
Narrator – निर्मला की बातों ने अब गुंजन को तसल्ली दे दी थी , क्योंकि पिछले 5 महीनों में अभिजीत मुश्किल से 4 बार उससे मिलने आया था , और अब जैसे जैसे वक्त गुजर रहा था गुंजन को अभिजीत की सबसे ज्यादा जरूरत थी । पर काम के चलते अभिजीत को वक्त ही इतना नहीं मिलता की वो घर आ सके । पर अब गुंजन के सुना की अभिजीत घर आ रहा है तब उसकी जान में जान आई ।
अगले दिन सुबह से ही गुंजन दरवाजे पर टकटकी लगाये अभिजीत की राह देख रही थी ।
Nirmala – गुंजन , अंदर आजा , बाहर बहुत ठंड है , अभिजीत को आने में वक्त है अभी ।
Gunjan - नहीं माँ , मैं यहीं रहकर उनका इंतजार करूंगी ।
Narrator – निर्मला ने मुसकुराते हुए अपने पती की तरफ देखकर कहा ,
Nirmala – अब आप ही कुछ कहिए इसे , मेरी तो सुनती ही नहीं है , पागलों की तरह दरवाजे के पास बैठकर उसका इंतजार कर रही है ।
Narrator – सब आपस में बातें कर ही रहे थे की तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया ।
Nirmala – अरे देखो कौन है , लगता है अभिजीत आया है ।
Narrator – गुंजन ने जैसे ही अभिजीत को देखा , वो भाग कर उसके पास गई और उसके गले लगकर रोने लगी ।
Abhijeet – अरे पगली अब तू रो क्यों रही है , अब तो मैं आ गया हूँ देख ।
Nirmala – अरे लल्ला सुबह से तेरी राह देख रही है , न कुछ खाया है न पिया है । अब तू ही समझा इसे ।
Abhijeet – ठीक है माँ अब मैं आ गया हूँ अब सब सम्हाल लूँगा ।
Narrator – अभिजीत के आने के बाद से ही गुंजन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी । अब उसे बीती रात के बारे में कुछ भी याद नहीं था । और अब सारा दिन अच्छे से बिताने के बाद फिर रात हो गई , अभिजीत और गुंजन सोने चले गए थे और रात का वही कुछ 12 बज रहा था , तभी एक आवाज से गुंजन की नींद टूट गई ।,
Gunjan ( shockingly ): कौन है ?
Random child – माँ , माँ आओ न मेरे पास ।
Narrator – गुंजन के कानों में बार बार एक बच्चे की आवाज गूंज रही थी , जैसे वो उसे अपनी तरफ बुला रहा हो , थोड़ी देर बाद ही गुंजन को एक परछाई दिखी , और वो उसके पीछे पीछे चल दी , उस वक्त गुंजन अपने होश में नहीं थी । वो पागलों की तरह उस परछाई के पीछे चल रही थी और चलते चलते वो घर के आँगन में पहुच गई तभी उसका भ्रम टूटा और उसकी आँखों के सामने जो था उसे देख उसकी चीख निकल गई ।
Gunjan – बचाओ , बचाओ ये लाल कदमों के निशान , ये खून ।
Narrator – चीखते चीकते गुंजन वही आँगन में बेहोश होकर गिर गई , जब सारे घर वाले बाहर आए और उन्होंने गुंजन को इस तरह बेहोश पड़े देखा तो सब हैरान रह गए ।
Abhijeet – गुंजन , उठो क्या हुआ तुम्हें उठो गुंजन ।
Nirmala – लल्ला तू तो उसके साथ ही सोया था न , फिर ये यहाँ कैसे ?
Abhijet – मुझे नहीं मालूम माँ गुंजन बाहर कब आई । मैं तो सोया हुआ था । अब छोड़िए ये सब पहले इसको अंदर ले चलते हैं ।
Narrator – सब गुंजन को कमरे में लाकर उसे होश में लाने की कोशिश करने लगे , थोड़ी देर बाद जब गुंजन को होश ये तो फिर वो उन्ही लाल कदमों के निशान के बारे में बात कर रही थी ।
Gunjan – वो वो लाल निशान वो खून ,,,, वो बच्चा ।
Abhijeet – क्या कह रही हो गुंजन , कौन सा बच्चा कौन से कदमों के निशान ? कुछ नहीं है यहाँ , और तुम इतनी रात गए आँगन में क्या करने गई थी ।
Gunjan – मैं वो , वो मैं , वो वो वो बच्चा ।
Nirmala – कौन सा बच्चा गुंजन? अपने घर में कोई बच्चा नहीं है ।
Gunjan – मैं आप लोगों से कह रही हूँ न यहाँ एक बच्चा था , और वो लाल कदमों के निशान , वो खून रुकिए आप सबको मुझपर यकीन नहीं है न मैं अभी दिखाती हूँ ।
Narrator – गुंजन भागी भागी आँगन की तरफ गई और जमीन के ओर इशारा करने लगी ।
Gunajn – ये देखो यहीं थे वो निशान ,,,
Abhijeet – गुंजन कौन से निशान यहाँ कोई निशान नहीं है ।
तुम्हें क्या हो गया है क्यों ऐसी बहकी बहकी बातें कर रही हो ।
Narrator – गुंजन ने देखा की कोई उसकी बातों पर यकीन नहीं कर रहा है , वो चीख चीख के रोने लगी ।
Gunjan – आप सबको लग रहा है मैं झूठ बोल रही हूँ , माँ आप तो मेरा यकीन करो ,वो बच्चा यहीं था और वो निशान भी ,
Nirmala – बेटा ऐसा नहीं है ,की हम तुझपर यकीन नहीं कर रहे , पर बेटा यकीन करने के लिए कुछ होना तो चाहिए । तू खुद देख यहाँ कोई निशान नहीं हैं कोई बच्चा नहीं है । मेरी बात मन तुझे आराम की जरूरत है ,आजा सो जा चलकर ।
Gunjan – नहीं , नहीं मुझे कहीं नहीं जाना जब तक आप लोग मेरी बात नहीं मान लेते ।
Abhijeet – ये क्या पागलपन है गुंजन , बच्चों जैसी जिद मत करो और चलो यहाँ से ।
Narrator – सब गुंजन को अंदर ले जाने की कोशिश कर ही रहे थे तभी अचानक उसके पेट में तेज दर्द होने लगा , 5 महीने की pregnant गुंजन का पेट अब अच्छा खास फूल गया था और समझ में भी आने लगा था , अचानक गुंजन को महसूस होने लगा जैसे उसके पेट में कोई हलचल हो रही हो ।
Gunjan – आह मेरा पेट , आह माँ ये दर्द ।
Nirmala – देख मैंने कहा था तुझसे तेरी तबीयत बिगड़ जाएगी , अब बात माँ ले गुंजन अंदर चल और आराम कर ।
Narrator – निर्मला और अभिजीत जैसे तैसे गुंजन को कमरे में लाए , उसे दवाई दी और थोड़ी देर में ही गुंजन सो गई ।
अभिजीत बाहर आया और निर्मला से सवाल करने लगा ।
Abhijeet – कबसे हो रहा है ये सब ?
Nirmala – क्या बताऊ लल्ला , यही कुछ 15 दिन पहले से ही बहु ऐसी अजीब सी हरकतें कर रही है , कभी आधी रात में उठकर कहती है कोई है , कोई बच्चा है , कोई बुला रहा है तो कभी नींद में चलते चलते छत तक चली जाती है ।,
Abhijeet – आपने doctor से बात की ?
Nirmala – नहीं लल्ला, 4 महीने के बाद ऐसा सब होता है गर्भवती औरतो के साथ , हमे लगा एक दो बार के बाद सब सही हो जाएगा , पर अब जब पानी सर के ऊपर जाने लगा तो तेरे बाउजी ने तुझे बुलाया ।
Abhijeet – आप लोग ये बात मुझे अब बता रहे हैं । ठीक है अब जो हो गया सो हो गया पर कल सबसे पहले हम गुंजन को doctor के पास ले जाएंगे ।
Narrator – अभिजीत ने ठान लिया था की अब वो गुंजन के साथ जो भी हो रहा है उसे ठीक करके रहेगा , उसे लग रहा था doctor के पास जाने से सब ठीक हो जाएगा , पर वो ये नहीं जानता था की ये दलदल है और अब सिर्फ गुंजन नहीं बल्कि भीलवाडा की हर गर्भवती औरत इस दलदल में फस चुकी थी । कौन सा तूफान अब भीलवाडा पर आने वाला था ये तो वक्त ही बताएगा ।
Sfx – चिड़ियों की चहचाहाट ।
Bgm – soft music
Narrator – रात के हंगामे के बाद अब सुबह सब ठीक था , सब चैन की नींद में थे तभी एक आवाज ने हर किसी की धड़कने रोक दी ।
Gunjan ( चीखने की आवाज ) : माँ , बाउजी , अभी , जल्दी आओ सब ये ये देखो ये क्या हुआ , जल्दी आओ सब , मेरा बच्चा ।
Narrator – सब दौड़ते हुए गुंजन के कमरे में गए और उन्होंने वहाँ जो देखा उसे देखने के बाद सबकी आँखे फटी की फटी रह गई ।
Nirmala – गुंजन , ये ये तेरे पेट को क्या हुआ , कल तक तो ये फूला हुआ था,
Gunjan – माँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है , ये ये ये सब क्या है , मेरा बच्चा , माँ मैंने कहा था न आप लोगों से कुछ तो ठीक नहीं हो रहा है पर आपने मेरी बात नहीं मानी अब देखिए ये सब क्या हो गया ।
Abhijet – गुंजन तुम घबराओ मत हम अभी डॉक्टर के पास जाएंगे , तुम देखना सब ठीक होगा , हमारे बच्चे को कुछ नहीं होगा , तुम आओ चलो मेरे साथ ।
Narrator – निर्मला गुंजन की हालत देखकर अपना सर पकड़कर जमीन पर बैठ गई , क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वो कोई साधरण बात नहीं थी या यूं कहें की नामुमकिन है , कल तक जोई गुंजन 5 महीने की pregnant थी , उसके पेट में उसका बच्चा था , उसका पेट फूला हुआ था ,आज अचानक उसका पेट बिल्कुल normal हो गया , भला रातों रात ऐसा हो कैसे सकता है ।
Doctor – देखिए आप अपनी बीवी से कहिए की ये रोना बंद करके मुझे बताए की आखिर हुआ क्या है ।
Abhijeet – गुंजन , शांत हो जाओ देखो अब हम डाक्टर के पास आ गए है अब सब ठीक हो जाएगा ।
Gunjan – डॉक्टर क्या बताऊँ अब , कल तक मेरे पेट में एक बच्चा था मैं माँ बनने वाली थी , और आज देखिए , मेरा पेट ये बिल्कुल normal हो गया है , मुझे ऐसा लग रहा है जैसेव अब मेरे अंदर कुछ नहीं है ।
Doctor – आपका दिमाग खराब हो गया है क्या ? कैसी पागलों जैसी बाते कर रही हैं आप ? और आप आप इनके पती हैं न आप तो पढे लिखे हैं आप कैसे इनकी ऐसी बातों में इनका support कर सकते हैं । ये hospital है गाँव की दाई का घर नहीं जहां ऐसी बकवास बातें हो ।
Abhijeet – डॉक्टर मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही होता अगर मैंने सब अपनी आँखों से न देखा होता तो ।
Narrator – अभिजीत ने गुंजन की सारी reports doctor के सामने रख दी , और जिन्हे देखने के बाद doctor के मुह से बस एक ही बात निकली ।
Doctor – ये नामुमकिन है , नहीं ये नहीं हो सकता ।
Gunjan – देखा मैंने आपसे कहा था न , मैं झूठ नहीं बोल रही थी , पर किसी ने मेरा यकीन नहीं किया ।
Narrator – गुंजन का रो रो कर बुरा हाल था, उसने doctor का हाँथ पकड़ कर कहा ,
Gunjan – अब आप ही कुछ कर सकती हैं , आप ही मेरी मदद कर सकती हैं देख कर बताइए न मेरा बच्चा ठीक तो हैं न । उसे कुछ हुआ तो नहीं है ।
Narrator – डॉक्टर की कुछ समझ नहीं आ रहा थी की वो गुंजन से क्या कहे , उन्होंने अपने पूरे carrier में ऐसा कोई case न तो कभी देखा था और न ही सुना था । पर फिर भी उन्होंने अपनी और गुंजन की तस्सलि के लिए उसके कुछ tests करना ठीक समझा । doctor ने अभिजीत की तरफ देखकर कहा ,
Doctor – अभी हम इनके कुवह tests करने जा रहे हैं ,हो सकता है उससे कुछ पता चल सके ।
Abhijeet – आपको जो करना है करिए , बस एक बार ये बता दीजिए मेरा बच्चा aउर गुंजन तो बिल्कुल ठीक हैं न उन्हे तो कुछ नहीं हुआ है न ।
Narrator – डॉक्टर ने गुंजन का ultrasound किया और उसकी report देखने के बाद उनकी ये समझ नहीं आ रहा था की वो अभिजीत और गुंजन को क्या जवाब दे , और तब तक निर्मला और अभिजीत के बाउजी भी hospital आ गए थे ।
Nirmala – क्या हुआ लल्ला , डाक्टर क्या बोली? सब ठीक तो हैं न ?
Abhijeet – माँ वो अभी कुछ tests करने के लिए गुंजन को अंदर लेकर गए हैं उसके बाद ही कुछ मालूम चलेगा ।
Nirmala – मुझे तो लग रहा है ये कहीं कोई प्रेत पिसाच का चक्कर तो नहीं । हमें बहु को किसी भगत के पास ले जाना चाहिए ।
Abhijeet – माँ please अब आप मत शुरू हो जाइय , कैसी बेवकूफी भारी बातें कर रही हैं आप । बाउजी आप ही समझाइए इन्हे ।
Bauji – भगवान के लिए अब तुम चुप हो जो , वैसे भी कम मुसीबत नहीं है ।
Narrator – सब आपस में बाते कर ही रहे थे की तभी डॉक्टर अंदर से गुंजन को साथ लेकर आई । डॉक्टर को देखते ही वो तीनों उनकी तरफ चले गए ।
Abhijeet – कुछ पता चला डॉक्टर , सब ठीक है न ?
Nirmala – हाँ मेडम बताइए न , बहु और उसका बच्चा ठीक तो है न ?
Doctor – देखिए अब जो बात मैं आपसे कहने जा रही हूँ उसे सुनने के लिए शायद आप में से कोई तैयार नहीं है , और न ही मैं थी , पर अब यही सच है ।
Narrator – आखिर क्या बताने वाली थी डॉक्टर ? और ऐसा कैसे हुआ , कहाँ गया गुंजन के गर्भ का बच्चा , रातों रात उसका फूला हुआ पेट एकदम से normal कैसे हो गया ? और किसके थे वो लाल कदमों के निशान जो दिखते थे गुंजन को ? क्या ये सब सच था या वाकई गुंजन दिमागी बीमार थी ? जानने के लिए dekhiye अगला episode सिर्फ Once Upon A Time Horror Stories पर ।
[BGM: धीमे डरावने सुर, जैसे किसी अनदेखी शक्ति का संकेत दे रहे हों।]
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