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चंद्रमुखी

F
Funtel
21 Mar 2026

विक्की : चलो ना यार, आज कोई तो एडवेंचर करते हैं। ये एक जैसी जगहों पर जा जाकर मै तो बोर हो चूका हूँ। आज कल पैरानॉर्मल वीडियोस का बड़ा ट्रेंड चल रहा है और मैंने सुना है, भीमगढ़ में एक पुराना महल है, लोग कहते हैं कि वो हॉन्टेड है, वहां पर किसी चंद्रमुखी की आत्मा भटकती है। लेकिन कोई वहां पर रात के समय सालों से गया नहीं है। मुझे नहीं लगता कि वो भूतिया होगा, हम वहीँ चलते हैं। किसी ने उस लोकेशन की वीडियो भी नहीं बनाई है। अगर हमने वहां जाकर फेक पैरानॉर्मल वीडियो शूट कर ली तो ट्रेंड पर आ जाएंगे हम। 

 

समीर : तो चलो फिर वहीँ चलते हैं और अगर वहां भूत मिल भी गया तो लाइफ में कुछ तो एक्साइटेड होगा। 

 

मेघना : क्या यार तुम लोग, मुझे ऐसी किसी भी जगह पर नहीं जाना और माँ को अकेले छोड़कर तो मै वैसे भी कहीं नहीं जाने वाली। वो भी इतनी दूर। 

 

शीतल : अरे इतनी दूर कहाँ है मेघना। पांच छे घंटे का ही तो रास्ता है और रही आंटी की बात तो एक रात के लिए अपनी पड़ोस वाली आंटी को बोल देना। वो रख लेंगी आंटी का ध्यान। तुम भी तो कितनी बार उनके बच्चों का ध्यान रखती हो। 

 

नैतिक: हाँ यार, तुझे तो चलना ही पडेगा। तेरे बिना वहां हमें मज़ा नहीं आएगा। तू नहीं चली तो वहां हम डराएंगे किसे। हाहाहा। 

 

मेघना : हाहा वैरी फनी। डरपोक नहीं हूँ मै, समझे। चलूंगी तुम्हारे साथ। 

 

नैरेटर : रात को समीर ने अपनी गाडी ली और वो पाँचों भीमगढ़ के लिए निकल गए, लेकिन जैसे जैसे भीमगढ़ नज़दीक आता जा रहा था, वैसे वैसे मेघना का मन घबराता जा रहा था। उसके चेहरे पर एक अलग सा डर था। 

 

नैतिक : अरे क्या हो गया तुझे, भूत देख लिया हो ऐसी शक्ल क्यों बनाई हुई है तूने। 

 

मेघना : मज़ाक मत करो नैतिक, पता नहीं क्यों मुझे बहुत घबराहट सी हो रही है। बार बार ऐसा लग रहा है कि वहां नहीं जाना चाहिए हमे। वो जगह ठीक नहीं है। 

 

समीर : तुझे तो हर चीज़ में ही डर लगता है। तेरे पास आकर बिल्ली म्याऊं करती है तो तू उसमे भी डर जाती है। चिंता मत कर, कुछ नहीं है वहां पर, हम बस वीडियो शूट करेंगे और आ जाएंगे वहां से और बात रही तेरे डर की तो अगर कुछ हुआ भी तो हम कुछ नहीं होने देंगे तुझे। 

 

नैरेटर : समीर की बातें सुनकर मेघना का मन थोड़ा शांत हुआ। लगभग छे घंटे तक लगातार ड्राइव करने के बाद वो भीमगढ़ पहुँच गए। उस महल की लोकेशन उन्हें मिल गई थी। समीर ने महल के पास अपनी गाडी रोकी, लेकिन जैसे ही मेघना ने उस महल की पहली झलक देखी तो वो बुरी तरह घबरा गई। 

 

मेघना (घबराई खुद से) : पता नहीं क्यों, लेकिन ऐसा लगता है कि, इस महल से मेरा ज़रूर कोई पुराना नाता है। कुछ बुरा, कुछ बहुत बुरा। लेकिन कैसे रोकूं इन सबको इसके अंदर जाने से। 

 

शीतल : अरे, तुम फिर से अपने ख्यालों में खो गई। चलो ना। 

 

मेघना : ह ह हाँ। 

 

नैरेटर : मेघना उन सबके साथ आगे बढ़ी तभी सामने से उन्हें एक बूढ़ा आदमी जिसके हाथ में एक जलती हुई लालटेन थी, आता दिखाई दिया। वो इतना बूढ़ा था कि चलते हुए उसका पूरा शरीर काँप रहा था लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। वो गुस्से में उनकी ओर बढ़ा। 

 

बूढ़ा (कांपती हुई आवाज़, हल्का गुस्सा) : जानते हो ना इस जगह के बारे में। बिना जाने तो यहाँ पर आए नहीं हो। जब सब पता है तो क्यों अपनी मौत को न्योता देने आए हो। शांत है वो इतने सालों से, अगर जाग गई तो किसी को नहीं छोड़ेगी। 

 

नैतिक : अरे अंकल, ये ऐसी ऐसी लोकेशंस पर आपके जैसे लालटेन वाले बुड्ढे फिक्स होते हैं क्या। बेफालतू में डराने आ जाते हो, और मुझे समझ नहीं आ रहा, रात के बारह बजे तुम इस महल के पास क्या कर रहे हो। तुम्हारी उम्र हो गई है चाचा, अपने घर जाओ और जाकर सो जाओ आराम से।  

 

बूढ़ा (कांपती हुई आवाज़, हल्का गुस्सा) : कोई बात नहीं, मरना ही है तो जाओ शोक से। मैंने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया। 

 

नैरेटर : उस बूढ़े आदमी ने उनकी तरफ गुस्से से देखा और वहां से आगे बढ़ गया, वो पाँचों भी महल की तरफ बढे तभी मेघना ने पीछे मुड़कर देखा तो वो बूढ़ा पीछे मुड़ा और मेघना को देखते हुए उसने एक अजीब सी मुस्कान दी। उसके चेहरे की मुस्कराहट ने मेघना को और डरा दिया। वो पाँचों अब महल के दरवाज़े पर पहुंचे तो दरवाज़े पर ढेर सारे ताबीज़ बंधे हुए थे। समीर ने बिना कुछ सोचे समझे उन ताबीजों को तोड़ दिया। 

 

मेघना (घबराई) : ये क्या किया तुमने। ताबीजों तो तोड़ दिया। 

 

समीर : अरे तो बिना ताबीज़ तोड़े दरवाज़ा कैसे खोलता। तुम प्लीज अब डरना बंद करो। उस बूढ़े की बातों पर ज्यादा ध्यान मत दो। नैतिक, कैमरा रेडी रखना। 

 

नैतिक : अरे रेडी ही है, तू बस दरवाज़ा खोल। 

 

नैरेटर : समीर ने महल का दरवाज़ा खोला, वो जैसे ही महल के अंदर पहुंचे तो वहां घुप्प अँधेरा था। विक्की ने अपने बैग से टोर्च निकालकर उसे जलाया तो महल में हर तरफ जाले लगे हुए थे और पूरा महल मानो धूल की चादर में लिपटा हुआ था। हर तरफ से एक अजीब सी किर्र किर्र की  आवाज़ गूँज रही थी तभी विक्की ने टोर्च को दूसरी दिशा में घुमाया, और तभी एक चमगादड़ों का झुण्ड आकर उनके ऊपर झपट पड़ा। 

 

शीतल (डरी हुई) : ओह माय गॉड, ये तो हमने सोचा ही नहीं कि ये जगह इतनी पुरानी है तो यहाँ पर ये चमगादड़ भी होंगे। अगर ये एक बार शरीर से चिपक गए तो हालत खराब कर देंगे। गाइज़ हटाओ ये वीडियो का आइडिया और निकलो यहाँ से। ये चमगादड़ तो यहाँ बढ़ते ही जा रहे हैं। 

 

नैरेटर : एक के एक बाद चमगादड़ उनके सर पर मंडराने लगे, वो सभी दौड़कर दरवाज़े की तरफ भागे लेकिन हवा के झोंके से दरवाज़ा अचानक बंद हो गया। उन्होंने दरवाज़ा खोलने की बहुत कोशिश की लेकिन दरवाज़ा मानो जाम हो गया। जैसे तो वो महल चाहता ही नहीं था कि अब वो पाँचों उस महल से बाहर निकल सकें। 

 

विक्की (घबराया) : अरे अब इस दरवाज़े को क्या हो गया, खुल क्यों नहीं रहा है ये। 

 

मेघना (डरी हुई) : मैंने तो तुम सब से पहले ही कहा था कि यहाँ पर आना ठीक नहीं है लेकिन तुम लोगों ने मेरी बात ही नहीं सुनी। अब कैसे निकलेंगे हम सब यहाँ से। 

 

नैरेटर : मेघना ने जैसे ही यह कहा वैसे ही वहां पर बहुत जोर से हवा चली और चमगादड़ों की किर किर की आने वाली वह आवाज अचानक से बिल्कुल शांत हो गई। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो वहां पर अब एक भी चमगादड़ नहीं था। यह देखकर उन सबके होश उड़ गए। 

 

समीर (घबराया हुआ शॉक्ड) : य य ये कैसे हो सकता है। अभी तक तो यहां पर चमगादड़ों का झुंड लगा हुआ था और अब यहां पर एक भी चमगादड़ नहीं है। 

 

नैतिक (डरा हुआ) : जितनी जल्दी हो हमें यहां से निकलना होगा। पुराने महलों में आने जाने के लिए काफी सारे दरवाजे होते थे। इस दरवाजे के अलावा भी यहां बाहर जाने के लिए कोई ना कोई दूसरा दरवाजा जरूर होगा। हमें वह ढूंढना होगा। 

 

मेघना (डरी हुई) : मुझे नहीं लगता कि अब हमें यहां से बाहर निकलने के लिए कोई दरवाजा मिलेगा। मुझे तो लगता है हम इस महल के जाल में फंस गए हैं, और अब ये महल हमें यहां से बाहर निकलने नहीं देगा। 

 

शीतल (डरी हुई) : अरे शुभ शुभ बोलो मेघना, एक तो हम सब पहले ही इतने ज्यादा डरे हुए हैं और तुम हमें अपनी बातों से और डरा रही हो। 

 

नैरेटर : वो सभी दूसरा दरवाजा ढूंढने के लिए पीछे की तरफ जाने लगे तभी उन्हें वहां पर घुंघरूओ की आवाज सुनाई दी। जैसे तो कोई अपने पैरों में घुंघरू पहने उनकी ओर ही बढ़ता हुआ आ रहा हो। वो आवाज धीरे-धीरे बढ़ने लगी और चारों तरफ से वह आवाज उनके कानों में गूंजने लगी। अचानक फिर से चमगादड़ों ने उनके ऊपर हमला कर दिया और खुद को बचाने के लिए वह सभी इधर-उधर भागने लगे, भागते-भागते मेघना छिपने के लिए ऊपर की तरफ भागी, उसके पीछे चमगादड़ों का झुंड था। उसने देखा कि सामने एक कमरे का दरवाजा खुला है तो वह चमगादड़ों से बचने के लिए सामने के उस कमरे में चली गई और अंदर से दरवाजे को बंद कर लिया। वो अभी भी बुरी तरह हांफ़ रही थी। उसने कुछ देर वहां चैन की सांस ली तभी उसके कानों में एक आवाज पड़ी, जैसे तो कोई बड़ी दर्द भरी आवाज में कुछ गा रहा हो। 

 

मेघना (घबराई हुई कन्फ्यूज़) : ये, ये कैसी आवाज आ रही है। यह गाने की आवाज, जैसे तो कोई बहुत दर्द में हो, लेकिन मेरे अलावा यहां पर और कौन है। कहीं कोई आत्मा तो नहीं। कहीं ये चारों ही तो मुझे डराने की कोशिश नहीं कर रहे। शीतल, विक्की, समीर, नैतिक, तुम लोग मुझे डराने की कोशिश कर रहे हो ना। देखो प्लीज अपना मजाक बंद करो। मुझे सच में डर लग रहा है। 

 

नैरेटर : मेघना को उसकी बात का कोई जवाब नहीं मिला तभी उसे कमरे में घुंघरूओ की आवाज सुनाई दी। उसने पलट कर देखा तो कमरे की खिड़की बड़ी ही तेज आवाज के साथ खुली, कमरे के अंदर जैसे ही चांद की हल्की रोशनी पड़ी तो दूसरी तरफ एक परछाई उभरी। बिखरे बाल और नृत्य करती हुई एक स्त्री। उस परछाई को देखकर मेघना मानो उसकी ओर ही खिंचती चली गई। मेघना ने कमरे में अंदर की तरफ बढ़कर देखा तो एक बड़ी ही खूबसूरत नर्तकी के कपड़े पहनी एक औरत उसकी ओर पीठ करके खूब सुंदर नृत्य कर रही थी, उसके घुंघरूओ की आवाज और संगीत की धुन उस पूरे कमरे में गूंज रही थी। मेघना एक टकटकी लगाकर बस उसे ही देखे जा रही थी। तभी अचानक उसने नृत्य करना बंद कर दिया और अचानक वह मेघना की तरफ पलटी, उसका चेहरा बेहद भयानक था। आंखों की पुतलियां पलट कर ऊपर को हो चुकी थी और चेहरे का मांस गल कर उसके भीतर कीड़े रेंग रहे थे। शरीर पर भी हर जगह कीड़े लिपटकर उसके सड़े हुए मांस को खा रहे थे। उसका इतना भयानक चेहरा देखकर मेघना की चीख निकल गई। वो औरत अचानक से मेघना के ऊपर झपटी, मगर इससे पहले वो उसे कुछ नुकसान पहुंचा पाती, अचानक से कमरे का दरवाजा खुला और वह औरत कहीं गायब हो गई। मेघना ने देखा तो उसके दोस्त भागते हुए उसके पास आ रहे थे। उन्हें देखकर उसका मन कुछ शांत हुआ। वो जल्दी से उठी। 

 

नैतिक (डरा हुआ) : अच्छा हुआ तुम मिल गई हमें, यह जगह बहुत खतरनाक है। भाड़ में गया यह वीडियो का आईडिया, जल्दी निकलो यहां से। 

 

नैरेटर : नैतिक ने मेघना का हाथ पकड़ा और वह पांचो वहां से नीचे की तरफ भागे। दरवाजा अभी भी खुलने का नाम नहीं ले रहा था मगर उन सब ने मिलकर जोर लगाया तो दरवाजा खुल गया। वो जल्दी से भाग कर अपनी गाड़ी में बैठ गए और उसी वक्त वहां से निकल गए, मगर वहां से निकलने के बाद भी मेघना के चेहरे पर एक अजीब सा डर था। वो बहुत बुरी तरह सहमी हुई थी। 

 

शीतल : क्या हुआ मेघना, तुम अभी भी इतनी घबराई हुई क्यों हो। हम वहां से वापस आ गए हैं, प्लीज तुम डरना बंद करो। यह सब गलती हमारी ही है, हमें तुम्हारी बात मान लेनी चाहिए थी। तुम तो पहले ही वहां पर चलने के लिए मना कर रही थी। 

 

नैरेटर : मेघना ने शीतल की तरफ देखा, मगर उसकी बात का उसने कोई जवाब नहीं दिया। वह लोग पहले ही 6 घंटे की ड्राइव करके वहां पहुंचे थे और वापस आते हुए भी उन्हें गाड़ी चलाते हुए लगभग चार घंटे बीत चुके थे। सुबह की हल्की-हल्की रोशनी होने लगी थी तभी समीर में एक ढाबे के पास अपनी गाड़ी रोकी। 

 

समीर : बहुत भूख लग रही है यार, चलो ना कुछ खा लेते हैं। वैसे भी कल रात से बहुत दिमाग खराब हो चुका है मेरा। 

 

विक्की : अरे तुम अभी भी क्यों बुत बन कर बैठी हो। चलो ना खाना खाने चलते हैं, मुझे तो बहुत भूख लग रही है। 

 

नैरेटर : उनके कहने पर मेघना गाड़ी से उतर गई, लेकिन उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वो ढाबे के अंदर जाकर खाने के लिए बैठे, टेबल पर खाना सर्व हुआ। मेघना के सामने पानी का भरा गिलास रखा था। उसने जैसे ही उसके अंदर देखा तो उसमें उसे उसी औरत की परछाई दिखाई दी जो पीछे से उसकी ओर झपट रही थी। ये देखकर मेघना ने उस गिलास को उठाकर दूर फेंक दिया और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसका पूरा शरीर कांपने लगा और पसीने से भीग गया, उसकी ऐसी हालत देखकर उसके दोस्त भी बुरी तरह घबरा गए। 

 

मेघना (डरी हुई हांफकर) : वो, वो मुझे मार डालेगी। वह यहां तक मेरे पीछे आ गई है। मुझे उससे बचा लो। वो मार डालेगी मुझे। 

 

शीतल (टेंशन) : कौन तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा मेघना, कोई भी नहीं है यहां पर और तुम प्लीज डरो मत। कल जो भी हुआ उसे भूल जाओ, हम सब तुम्हारे साथ हैं, तुम्हें कुछ नहीं होगा। गाइज, प्लीज चलते हैं यहां से। मेघना की हालत तो देखो। 

 

नैरेटर : मेघना की हालत देखकर वो सब वहां से निकल गए। सबसे पहले उन्होंने मेघना को उसके घर ड्रॉप किया। मेघना की बीमार मां अपने बिस्तर पर लेटी सोई हुई थी। मेघना ने अपनी मां और अपने बंजर घर की हालत देखी तो परेशान होकर चारपाई पर बैठ गई। 

 

मेघना (दुखी) : समझ नहीं आता यह कैसी जिंदगी दी है भगवान ने मुझे। पैदा हुई तो पापा को छीन लिया और जब से होश संभाला तब से मां को इस चारपाई पर ही देखा। पता नहीं मां कभी ठीक हो भी पाएगी या नहीं। ऐसे कौन से बुरे कर्म किए हैं मैंने कि मेरी मां इतना दुख झेल रही है। 

 

नैरेटर : मेघना की आवाज़ से उसकी मां की नींद टूट गई, उन्होंने अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में मेघना को आवाज़ लगाई। 

 

गोमती (लड़खड़ाती आवाज़) : आ गई तू, जरा मुझे एक गिलास पानी तो दे दे।  

 

नैरेटर : मेघना ने सहारा देकर अपनी मां को उठाया और उसे पाने पिलाया। उसकी मां की हालत इतनी खराब थी कि पानी पीते हुए भी आधा पानी उनके मुंह से नीचे गिर रहा था, मेघना हर रोज अपनी मां की हालत देखकर रोने लगती थी। ना तो इतने सालों से उसकी मां की हालत में कोई सुधार आया था और ना ही भगवान उन्हें अपने पास बुलाता था। अपनी मां का दुख देखकर मेघना हर दिन तड़पती थी। रात हुई मगर मेघना के दिमाग से कल रात की बातें नहीं जा रही थी, उसे बार-बार आंखें बंद करते ही वो औरत अपनी आंखों के सामने दिखाई दे रही थी।  

 

मेघना (घबराई परेशान) : आखिर वह बार-बार मुझे ही क्यों नजर आ रही है। हम सब साथ में ही तो वहां पर गए थे तो उन चारों को वह नजर क्यों नहीं आ रही और पता नहीं बार-बार मुझे क्यों ऐसा लग रहा है, कि उसका नाता मेरे अतीत से जुड़ा हुआ है। कुछ बुरा, कुछ बहुत बुरा। 

 

नैरेटर : यही सब सोचते सोचते मेघना की आंख लग गई, बड़ी मुश्किल से उसे आज नींद आई थी मगर जैसे ही वह गहरी नींद में जाने लगी तभी उसे दरवाजे पर ठक ठक की आवाज सुनाई दी। उस आवाज से वह अचानक से नींद में हड़बड़ाकर उठी। कुछ पल के लिए वह आवाज शांत हो गई, मेघना को लगा शायद वह कोई ऐसा सपना देख रही थी मगर वह जैसे ही दोबारा अपनी आंखें बंद करने लगी तभी फिर से दरवाजे पर ठक ठक की वही आवाज हुई। 

 

मेघना (घबराई) : इतनी रात को दरवाजे पर कौन आया है। अगर दरवाजा नहीं खोला तो मां की नींद टूट जाएगी। ऑफो। 

 

नैरेटर : मां की नींद ना टूट जाए इसलिए मेघना ने दरवाजा खोल दिया मगर दरवाजे के बाहर उसने जो देखा, वो देख कर उसकी रूह कांप गई। नर्तकी के कपड़े पहने एक औरत अपने चेहरे पर घूंघट लिए ठीक उसके सामने खड़ी थी। मेघना ने कांपती हुई आवाज में उससे पूछा। 

 

मेघना (कांपती हुई आवाज) : क क कौन हो तुम, और इतनी रात को यहां पर क्या कर रही हो। 

 

नैरेटर : मेघना के इतना पूछते ही उसने कसकर मेघना का हाथ पकड़ लिया। हवा के झोंके से उसके चेहरे का घूंघट हटा तो मेघना की जान उसके हलक में अटक गई। उसका चेहरा ठीक वैसा ही था, मेघना को जो आत्मा महल में दिखाई दी थी। आंखें ऊपर की ओर पलटी हुई और चेहरे और शरीर का मांस सड़ा हुआ जिस पर कीड़े रेंग रहे थे। मेघना ने उससे अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की, मगर तभी उस भयानक औरत के मुंह से एक काले रंग का धुआं निकला, मेघना अचानक हवा में ऊपर उठी, और उसके शरीर में वो काला धुआं जाकर समा गया। मेघना वहीं पर निढाल होकर गिर पड़ी और उसके घर का दरवाजा खुद बखुद एक तेज़ हवा के झोंके के साथ बंद हो गया।

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