मेघना… एक साधारण सी लड़की, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी ज़िंदगी में अजीब घटनाएँ होने लगी थीं। रात को जब भी वह सोती, उसे बार-बार एक ही सपना आता… एक टूटा-फूटा, वीरान सा महल… जहां घुप्प अंधेरे के बीच किसी औरत के पायल और घुंघरुओं की आवाज़ गूंजती। एक दिन, दोस्तों के साथ बाहर जाते समय उनकी कार अचानक सुनसान रास्ते पर खराब हो गई। मदद की तलाश में वे पास के उसी पुराने महल की तरफ बढ़ गए, जिसे मेघना ने बार-बार अपने सपनों में देखा था। महल की दहलीज़ पार करते ही सबके कदम ठिठक गए। सामने… एक औरत… सजी-धजी नृत्यांगना की तरह… घुंघरुओं की आवाज़ के साथ नृत्य कर रही थी। उसका चेहरा धुंधला था, लेकिन उसकी परछाईं बेहद डरावनी थी। सब घबरा कर वहाँ से भाग गए। पर उसी पल से मेघना की ज़िंदगी बदल गई। धीरे-धीरे उसका व्यवहार असामान्य होने लगा। कभी अचानक दीवार को घूरना… कभी ज़ोर से सिर पटकना… और कभी बीच रात को किसी अजनबी सी आवाज़ में हँसना। अब सबको यक़ीन हो गया था कि उस पर किसी आत्मा का साया है। और ये वही आत्मा थी… जिसे उन्होंने महल में नृत्य करते देखा था।
नैरेटर : रात के लगभग तीन बजे होंगे। मेघना की मां अपने बिस्तर पर सो रही थी तभी उसे बड़ी ही तेज़ ठक ठक की आवाज सुनाई दी, उसने इधर-उधर देखा मगर अंधेरे में उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया। गोमती के मन में घबराहट होने लगी, उसने घबराते हुए मेघना को आवाज़ लगाई।
गोमती (घबराते हुए कांपती आवाज़) : मेघना, मेघना। यह कैसी आवाज है बेटा, क्या हो रहा है यहां पर। मेघना।
नैरेटर : कमरे में आने वाली वह ठक ठक की आवाज उसी वक्त बिलकुल शांत हो गई। गोमती को अंधेरे कमरे में किसी के कदमों की आहट महसूस हुई, जैसे तो कोई चलता हुआ उसके पास ही आ रहा हो। गोमती घबराई मगर तभी कमरे में एक रोशनी हुई, मेघना उसके सामने अपने हाथ में मोमबत्ती लिए बढ़ रही थी। जैसे ही मोमबत्ती की रोशनी में गोमती ने मेघना के चेहरे को देखा तो उसकी रूह कांप गई। मेघना का पूरा माथा खून से भरा था और वह किसी डायन की तरह मुस्कुरा रही थी।
गोमती (डरी हुई कांपती हुई) : म म मेघना। ये, ये क्या हुआ तुम्हें। तुम्हारे माथे पर यह चोट कैसे लग गई और चोट लगने के बाद भी तुम इस तरह से क्यों मुस्कुरा रही हो।
मेघना : श….
नैरेटर : मेघना ने अपने मुंह पर हाथ रखा और हंसते हुए अपनी मां को चुप रहने का इशारा किया।
गोमती (डरी हुई कांपती हुई) : म म मेघना, ये सब तू क्या कर रही है बेटा। रुक, मैं तेरे माथे का यह खून साफ कर देती हूं।
नैरेटर : गोमती ने अपना दुपट्टा लिया और मेघना के माथे पर लगे खून को साफ करने लगी, मगर मेघना ने उसके हाथ से वो दुपट्टा लेकर दूर फेंक दिया और अपनी हड्डियों को मरोड़ने लगी। उसकी ऐसी हालत देखकर गोमती बुरी तरह डर गई।
गोमती (डरी हुई कांपती हुई) : म म मेघना, होश में आ मेरी बच्ची, ये तू क्या कर रही है।
नैरेटर : मेघना ने गुस्से में अपनी मां की तरफ देखा और अपने हाथ पैरों को मरोड़ा। वो अपने हाथ पैरों के बल उल्टी चलती हुई अपने बिस्तर पर गई और दीवार की तरफ अपना चेहरा करके बैठ गई और दबी आवाज में किसी से बात करते हुए अपने मुंह पर हाथ रख कर हंसने लगी। उसकी हालत देखकर गोमती समझ गई थी की जरूर उसके साथ कुछ ना कुछ हुआ है। उसने मेघना को कुछ नहीं कहा और भगवान का नाम जपते हुए अपने बिस्तर पर लेटी रही। अगले दिन सुबह जब गोमती की आंख खुली तो उसने देखा कि मेघना अभी भी अपने बिस्तर पर लेटी हुई है।
गोमती (कांपती हुई) : मेघना, मेघना। अरे तू उठी नहीं अभी तक। तेरी तबीयत ठीक तो है ना। तेरे माथे की वह चोट?
नैरेटर : गोमती की आवाज से मेघना की नींद टूट गई। उसने आंखें खोल कर उसकी तरफ देखा तो उसकी आंखों के नीचे काले गड्ढे बन गए थे और चेहरा पूरी तरह सफेद पड़ चुका था, जैसे तो किसी ने उसके शरीर से खून को पूरी तरह चूस लिया हो और न जाने वह कब से बीमार हो। उसके माथे पर लगी चोट में भी कीड़े लग चुके थे मगर मेघना के चेहरे पर तो मानो कोई भाव ही नहीं था, वो बस एक टक अपनी मां को देखे जा रही थी।
गोमती (परेशान कांपती आवाज़) : पता नहीं, मेरी बच्ची को क्या हो गया है। हो ना हो, उस रात जब ये अपने दोस्तों के साथ बाहर गई थी, उसके बाद ही यह सब हुआ है। कुछ ना कुछ अजीब जरूर घटा है। अब तो वही लोग मुझे इसके बारे में बता सकते हैं।
नैरेटर : गोमती के सिरहाने एक पुराना कीपैड फोन रखा था। उसमें मेघना के सभी दोस्तों के नंबर थे, गोमती ने शीतल को फोन किया और उसे मेघना की हालत के बारे में बताया।
शीतल (शॉक्ड परेशान) : क क्या, ये आप क्या बोल रही हैं आंटी। मैं अभी घर आती हूं, आप चिंता मत कीजिए, मैं मेघना को डॉक्टर के पास ले जाऊंगी।
नैरेटर : शीतल ने जल्दी से कॉल कट की और तुरंत समीर को फोन लगाया।
शीतल (कॉल पर) : बहुत बड़ी परेशानी हो गई है समीर। तुम जल्दी से मुझे पिक करने के लिए आ जाओ, हमें मेघना को अस्पताल लेकर जाना होगा लेकिन मुझे लगता नहीं कि सिर्फ हॉस्पिटल से काम चलेगा, कुछ ना कुछ और ही बात लग रही है मुझे।
समीर (कॉल पर) : अरे तुम ज्यादा सोचो मत, मेघना ने उस बात को अपने दिमाग में बिठा लिया है। ज्यादा सोच रही है वह उस बात के बारे में इसीलिए उसके साथ शायद ऐसा हो रहा है। तुम चिंता मत करो, मैं अभी आता हूं।
नैरेटर : समीर ने शीतल को उसके घर से पिक किया और वह दोनों मेघना के घर पहुंचे। मेघना की हालत उनसे देखे नहीं बन रही थी कि आखिर एक रात में मेघना की हालत ऐसी कैसे हो सकती है।
गोमती (कांपती आवाज़) : तुम दोनों सच-सच बताओ बच्चों। उस रात क्या हुआ था जब तुम लोग बाहर घूमने गए थे। जब से मेघना वहां से आई है, तब से पता नहीं इसे क्या हो गया है। कुछ हुआ था क्या बाहर, जो तुम लोग मुझसे छुपा रहे हो।
शीतल : हां आंटी वो….
समीर (हिचकते हुए) : नहीं नहीं आंटी कुछ भी नहीं हुआ। लगता है मेघना की तबीयत ठीक नहीं है, आप टेंशन मत लीजिए, हम इसे डॉक्टर के पास लेकर जा रहे हैं।
नैरेटर : समीर ने शीतल को चुप रहने का इशारा किया और वह दोनों मेघना को लेकर अस्पताल चले गए, डॉक्टर अंदर मेघना के माथे पर बैंडेज कर रहे थे तभी शीतल ने समीर की ओर देखा।
समीर : अरे अब तुम्हें क्या हो गया, तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो।
शीतल : तुमने आंटी से झूठ क्यों बोला कि उस रात कुछ भी नहीं हुआ था। अगर मेघना को कुछ हो गया तो जानते हो ना उसके जिम्मेदार हम सब होंगे। हमें आंटी को सब कुछ सच-सच बता देना चाहिए था।
समीर : बेवकूफ मत बनो शीतल, मेघना को कुछ भी नहीं हुआ है। उसने बस बातों को अपने दिमाग पर हावी कर लिया है और अगर हम यह सब आंटी को बता देते ना, तो जानती हो ना उनकी तबीयत और खराब हो जाती। वो पहले ही इतनी बीमार रहती हैं, तुम उन्हें यह सब बता देती तो पता नहीं उनका क्या हाल होता।
शीतल : तुम ठीक कह रहे हो समीर, यह तो मैंने सोचा ही नहीं। मेघना की बैंडेज हो गई होगी शायद, उसे घर लेकर चलते हैं।
नैरेटर : मेघना की बैंडेज करवा कर वह दोनों उसे गाड़ी में ले आए, लेकिन वह अभी भी ना तो अपनी पलकें झपका रही थी और ना ही उन दोनों की तरफ देख रही थी।
समीर : अरे मैडम क्या हो गया है तुझे, कोई भूत घुस गया है क्या तेरे अंदर, जो ऐसी शकल बनाई हुई है। उस रात वहां महल में जो भी हुआ उसे भूल जा। दुनिया में बहुत ही जगहें हैं ऐसी, जहां ऐसी आत्माएं भटकती हैं। अब हर चीज़ को अपने दिमाग पर हावी तो नहीं होने दे सकते ना हम।
शीतल : शायद हमें मेघना को मंदिर लेकर जाना चाहिए। वो मंदिर जाएगी तो उसे अच्छा लगेगा। और हो सकता है उसके मन में जो यह भारीपन हो रहा है, यह भी मंदिर जाने के बाद कम हो जाए। तुम गाड़ी मंदिर की तरफ ले लो।
नैरेटर : शीतल ने जैसे ही यह बात कही, मेघना का चेहरा गुस्से से भर गया, उसने स्टीयरिंग व्हील को अपने हाथ से घुमा दिया। गाड़ी का बैलेंस बिगड़ा और गाड़ी सीधी सामने के पेड़ से जाकर टकराई। टक्कर इतनी तेज़ थी कि समीर का माथा सीधा स्टीयरिंग पर जाकर लगा और उसके माथे पर गहरी चोट लग गई। उसके माथे से खून टपक कर नीचे गिर रहा था, डर के मारे शीतल हाँफ़ रही थी, मेघना पीछे बैठी शीतल की तरफ मुड़ी और उसकी गर्दन को उसने अपने दोनों हाथों में जकड़ लिया।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : अगर अपनी जान बचाना चाहती है तो आज के बाद इससे दूर रहियो। वरना इसके साथ-साथ तू भी मरेगी।
नैरेटर : मेघना के मुंह से ये बात सुनकर शीतल के होश उड़ गए। उसका दम घुट रहा था, मेघना के हाथों की पकड़ से उसका चेहरा बिल्कुल लाल पड़ चुका था। मेघना ने एक झटके से उसकी गर्दन को छोड़ा और गाड़ी से निकल कर वहां से चली गई। शीतल ने जल्दी से एंबुलेंस को फोन किया और समीर को हॉस्पिटल लेकर गई।
डॉक्टर : ओह माय गॉड, इसे तो बहुत ज्यादा चोट लगी है। अगर इन्हें यहां लाने में आप थोड़ी भी देर और कर देते तो हमारे लिए इन्हें बचाना बहुत मुश्किल हो जाता।
शीतल (घबराई खुद से) : मुझे कुछ भी करके मेघना से दूर रहना होगा और नैतिक और विक्की को भी इस बारे में बताना होगा। अगर हमने मेघना की मदद करने की कोशिश की तो हम भी फंस जाएंगे। वो छोड़ेगी नहीं हमें।
नैरेटर : शीतल ने नैतिक और विक्की को कॉल करके हॉस्पिटल में बुलाया और उनको सारी बात बताई। ये सब सुनकर वह दोनों भी घबरा गए।
विक्की : अगर ऐसी बात है तो मेघना से दूर रहना ही बेहतर है। आज समीर की जान जाते-जाते बची है, कल को हम में से कोई हुआ तो क्या करेंगे। समीर की किस्मत अच्छी थी जो बच गया लेकिन जरूरी नहीं कि हमारी किस्मत भी उतनी ही अच्छी हो।
नैरेटर : मेघना की हालत देखकर सब ने उससे पल्ला छुड़ा लिया। कुछ देर बाद मेघना अपने घर पहुंची और सीधी जाकर अपने बिस्तर पर बैठ गई। वो गुस्से में दीवार की तरफ लगातार देखे जा रही थी और अपने सर को बार-बार तेजी से हिला रही थी।
गोमती (कांपती आवाज़) : मेघना, थोड़ी देर आराम कर ले बेटा। तेरे सर में दर्द हो रहा होगा। शीतल और समीर तेरे साथ वापस नहीं आए क्या, वो बाहर तक तुझे छोड़कर चले गए?
मेघना (भयानक आवाज़) : चुप हो जा बुढ़िया वरना तेरी बेटी के साथ साथ तेरा भी खात्मा कर दूंगी, लेकिन तुझे मारने से पहले मैं इसे मारूंगी, ताकि तू इसे तड़पते हुए देखे। इसे तो मैं इतना तड़पा तड़पा कर मारुंगी कि तू खुद मुझसे इसकी मौत की भीख मांगेगी।
गोमती (डरी हुई कांपती आवाज़) : क क क्या, कौन है तू। क्या बिगाड़ा है मेरी बेटी ने तेरा। क्यों परेशान कर रही है उसे। मैं अभी के अभी पंडित जी को लेकर आऊंगी। छोड़ मेरी बेटी का शरीर।
मेघना (भयानक आवाज़ हंसती हुई) : पंडित को बुलाकर तो तू जब लाएगी ना बुढ़िया, जब अपने बिस्तर से उठ पाएगी। हाहाहाहाहा। कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। अपना बदला तो मैं लेकर ही जाऊंगी।
गोमती (डरी हुई कांपती आवाज़) : ब बदला, क क कैसा बदला। किस बात का बदला लेना चाहती है मेरी बेटी से तू।
मेघना (भयानक आवाज़) : ये तुझे बहुत जल्द पता चलेगा लेकिन जब तक तुझे ये समझ आएगा, तब तक तेरे पास पछतावा करने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होगा।
नैरेटर : अपनी मां की तरफ देखकर मेघना जोर जोर से हंसने लगी। उसने जमीन पर रेंगते हुए एक कीड़े को देखा, और उसे उठाकर चॉकलेट की तरह चबाकर खा गई। उसने अपनी गर्दन को पूरी तरह पीछे की तरफ घुमा दिया और उसकी आंखों की पुतलियां पूरी तरह सफेद पड़ गई। अचानक से वो निढाल होकर जमीन पर गिर पड़ी, तभी पड़ोस में रहने वाली माया आंटी उनके घर आई।
माया (घबराई) : अरे, ये मेघना को क्या हुआ। ये इस तरह जमीन पर क्यों गिरी हुई है।
नैरेटर : माया ने मेघना के चेहरे पर पानी छिड़का मगर जैसे ही उसने उसे उठाने के लिए उसे छुआ तो मेघना का पूरा शरीर बुरी तरह कांप उठा। उसे मानो एक जोरदार बिजली का झटका लगा हो। वो बड़ी ही फुर्ती से वहां से उठी और दीवार के सहारे जाकर चिपक गई। वो माया को देखकर घबरा रही थी तभी गोमती का ध्यान माया के गले में पहनी रुद्राक्ष की माला पर गया।
माया (घबराई) : क क क्या हो गया मेघना तुम्हें। तुम इस तरह मुझसे घबरा क्यों रही हो।
मेघना (अटकते हुए) : ज ज जाओ यहां से, मैंने कहा जाओ यहां से। इसे भेज दो यहां से।
नैरेटर : माया को मेघना का बर्ताव कुछ अजीब सा लगा, उसने गोमती की ओर देखा तो गोमती ने उसे इशारों से कुछ ऐसा समझा दिया जो शब्द नहीं समझा सकते थे। माया जल्दी से उनके घर से बाहर निकली और दौड़ती हुई गांव के मंदिर में पहुंची।
पुजारी जी : क्या हुआ बेटी, तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो। सब कुछ ठीक तो है ना।
माया (हांफती हुई) : वो गोमती, गोमती की बेटी मेघना। उसके ऊपर कोई ऊपरी साया है पुजारी जी। आप मेरे साथ उसके घर चलिए, वरना वह साया उसे अपने साथ ले जाएगा।
पुजारी जी (टेंशन) : क्या, गोमती की बेटी पर कोई साया हावी है। तुम चिंता मत करो, मैं अभी तुम्हारे साथ चलता हूं।
नैरेटर : माया पुजारी जी को लेकर गोमती के घर के दरवाज़े पर पहुंची तो मेघना कमरे के कोने में दुपक कर बैठी थी और दबी आवाज में कुछ बडबडाते हुए दीवार को नोच रही थी। गोमती लाचार थी इसलिए अपनी बेटी को बचाने के लिए वह अपने बिस्तर से भी नहीं उठ सकती थी। पुजारी जी जैसे ही घर के भीतर दाखिल हुए तो मेघना को भनक लग गई। वो बड़े ही गुस्से में पीछे की तरफ मुड़ी।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : पुजारी, क्यों आया है तू यहां पर। अगर इसे बचाने के लिए आया है तो चला जा यहां से क्योंकि मेरी आत्मा इतने सालों से सिर्फ अपने बदले के लिए भटक रही है और अगर तूने बीच में आकर मेरा बदला पूरा नहीं होने दिया तो खत्म कर दूंगी मैं तुझे भी।
पुजारी (सीरियस) : बदला, कैसा बदला। आखिर किस बदले की बात कर रही है तू। इस बच्ची ने क्या बिगाड़ा है तेरा।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : जरूरी नहीं है पुजारी, कि इंसान हमेशा अपने ही कर्म का फल भोगे। कभी-कभी उसे दूसरों के कर्मों का फल भी भोगना पड़ता है। और इसे वह भोगना पड़ेगा, वह भी इसकी मां की आंखों के सामने।
पुजारी (कन्फ्यूज़) : क्या, या तो तू सब कुछ सच-सच बता दे, या मुझे और भी तरीके पता हैं। जिससे तू सच तो बताएगी लेकिन उससे सो गुना पीड़ा होगी तुझे।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : नहीं बताऊंगी, कुछ नहीं बताऊंगी। तू जो कर सकता है कर ले।
नैरेटर : पुजारी जी ने अपने हाथ में पकड़े कमंडल से जल निकाला और मेघना के ऊपर छिड़क दिया। जल का स्पर्श पाते ही मेघना बुरी तरह चिल्ला उठी तभी पुजारी जी ने अभिमंत्रित विभूति से मेघना के चारों तरफ एक घेरा बना दिया।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : ये तू ठीक नहीं कर रहा पुजारी। तू इस तरह से इसे बचा नहीं सकता, अगर तू आज इसे मुझसे बचा भी लगा तो कल मैं फिर इसके ऊपर हावी होंगी, क्योंकि मेरी आत्मा मुक्त नहीं होने वाली। मेरी आत्मा सालों से इंसाफ के लिए भटक रही है, अपने बदले के लिए भटक रही है।
पुजारी (गुस्से में) : तू मुझे भटकाने की कोशिश मत कर। मैं तेरी इन बातों में आने वाला नहीं हूं। तुझे तो मैं मुक्त करा कर ही रहूंगा। तुझ जैसी मैली आत्माएं मुक्ति के मार्ग को ठुकरा देती हैं, लेकिन ईश्वर के आगे तो तुझे झुकना ही पड़ेगा।
मेघना (भयानक आवाज़ गुस्से में) : जब तक मेरा बदला पूरा नहीं होगा, मैं मुक्ति को स्वीकार नहीं करूंगी। पुजारी, गलत इंसान का साथ मत दे वरना खुद भी पाप का भागी बनेगा।
नैरेटर : पुजारी बड़े ही ध्यान से उसकी बातें सुन रहा था। उसने वहां पर यज्ञ कुंड जलाया। यज्ञ कुंड में अग्नि प्रज्वलित होते ही मेघना का शरीर बुरी तरह तड़पने लगा। वो जोर-जोर से चीखने लगी। एक बार को वह आत्मा उसके शरीर से बाहर निकलती मगर फिर वापस उसके शरीर में प्रवेश कर जाती। लगभग दो घंटे लगातार वहां पर पुजारी जी ने यज्ञ किया, मगर यज्ञ पूर्ण होने के बाद भी वह उस आत्मा को मेघना के शरीर से नहीं निकाल पाए। मेघना का शरीर कमजोर पड़ गया इसलिए वह बेहोश होकर वहीं गिर पड़ी।
पुजारी (टेंशन) : ऐसा नहीं हो सकता, यह संभव नहीं है कि यज्ञ के पूर्ण होने के बाद भी कोई आत्मा किसी के शरीर को ना छोड़े। ये आत्मा बिल्कुल पक्का इरादा करके आई है। ठीक कहा था इसने कि यह मुक्त नहीं होने वाली। यह जब तक अपना बदला पूरा नहीं कर लेगी तब तक मुक्ति के मार्ग पर आगे नहीं बढ़ेगी।
गोमती (रोती हुई) : लेकिन आखिर किस बात का बदला चाहिए इसे। मेरी बेटी ने क्या बिगाड़ा है इसका। मेरी बेटी तो कभी एक मच्छर भी नहीं मार सकती तो किसी इंसान का क्या बिगाड़ेगी।
पुजारी : लगता है तुमने उसकी बातें ध्यान से सुनी नहीं गोमती। तुम्हारी बेटी अपने किए का फल नहीं भोग रही। जरूर इसके पीछे तुम्हारा या तुम्हारे पूर्वजों का कोई श्राप है जो वह शक्ति अब तुम्हारी बेटी पर हावी हो रही है। याद करो, शायद तुम्हें कुछ याद आ जाए क्योंकि जब तक हमें पता नहीं चलता कि यह आत्मा किसकी है, तब तक अब हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। मैं बस इतना कर सकता हूं कि तुम्हारी बेटी को एक रक्षा सूत्र दे सकता हूं मगर वह जैसे ही उसके शरीर से अलग होगा, वह आत्मा फिर उसके ऊपर हावी हो जाएगी।
नैरेटर : पुजारी जी ने मेघना की कलाई पर एक रक्षा सूत्र बांध दिया और वहां से चले गए। माया ने मेघना को उसके बिस्तर पर लेटा दिया था। देर रात का वक्त था, गोमती अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, मगर मेघना के बारे में सोच सोच कर उसे नींद नहीं आ रही थी तभी उसका ध्यान सामने की दीवार पर पड़ा। दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान से सामने की दीवार पर हल्की रोशनी पड़ रही थी, उसी हल्की रोशनी में एक परछाई उभरी। एक नर्तकी की परछाई, जो रात के पहर नृत्य कर रही थी। उसके पैर में बंधे घुंघरुओं और गाने की आवाज़ जैसे ही गोमती के कानों में पड़ी तो डर के मारे उसकी आंखें खुली की खुली रह गई।
गोमती (डरी हुई) : त त तुम।
नैरेटर : डर के मारे गोमती का हलक सूख गया। नर्तकी के कपड़े पहने एक औरत उसके सामने खड़ी थी, जिसके चेहरे का मांस बुरी तरह फटा हुआ था और उसके भीतर कीड़े रेंग रहे थे, आंखों की पुतलियां सफेद होकर बाहर को आ चुकी थी। उसने एक टक मेघना की ओर देखा और मेघना के हाथ में बंधा वह रक्षा सूत्र वहीं खुलकर गिर गया। उसी समय वह आत्मा फिर से मेघना के शरीर के भीतर प्रवेश कर गई और मेघना ने अपनी गर्दन पीछे की तरफ मरोड़ कर भयानक तरीके से मुस्कुराते हुए अपनी मां को देखा।
मेघना (भयानक आवाज हंसती हुई) : कहा था ना मैंने, अपना बदला तो मैं लेकर ही जाऊंगी गोमती। पहचान तो गई हो ना मुझे।
(लास्ट सीन : मेघना के चेहरे पर क्रीपी स्माइल)
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