By Sanjay Kamble
Boy: अच्छा हुआ सारे असुरों और राक्षसों को भगवान ने खत्म कर दिया, वरना आज ये सारे इन्सानो को मारकर खा जाते।
Lady : तुम्हें किसने कहा की सारे असुरों को धरती से खत्म कर दिया। और सिर्फ असुर ही इन्सानों को नहीं खाते या परेशान करते। और भी कई ताकतें हैं जो इन्सानी रक्त की प्यासी है।
Boy. राक्षसों जैसी और भी बुरी शक्तियां हैं ?
Lady : हां बेटा। भुत, प्रेत, पिसाच, गंधर्व, यक्ष यक्षीणी चुड़ैल, ब्रम्हराक्षस ऐसी कोई डरावनी शक्तियां हैं जो इन्सानों को सताती आयी है।
Boy : मतलब भुत प्रेत असल में होते हैं ?
Lady : हां, पर वो सिर्फ उनको ही परेशान करते हैं जिनके दिल में डर है। जो कमजोर दिल के है।
Boy : और असुर। अगर वो धरती छोड़कर नहीं गये तो फिर रहते कहा हैं ? और क्या अब भी वो इन्सानों को खाते हैं ? और हमें दिखाई क्यों नहीं देते ? बोलो ना मां। कहा रहते हैं ये असुर या राक्षस ....)
(Mother and son conversation stop.)
हाथ में जलती मशाल लिए गांव की उस कच्ची संकरी सड़क से कोई दौड़ता हुआ जा रहा था। गांव की सारी गलियां, सारे रास्ते सुनसान पड़े थे और वह उन्हीं सुनसान पड़े रस्तों पर अकेला दौड़ रहा था । उसके चेहरे पर डर और तनाव साफ-साफ नजर आ रहा था। दौड़ते दौड़ते वह जैसे ही गांव के आखिरी छोर तक पहुंच गया उस खौफनाक सन्नाटे को चीरती हुई कुछ औरतों के रोने की आवाज उसके कानों पर पड़ने लगी । पल भर रूककर उसने गहरी सांस ली और दोबारा दौड़ना शुरू किया।
रात के अंधेरे में भी उस छोटे से गांव के सभी लोग उस छोटी सी कुटिया के सामने खड़े थे। सभी के चेहरे पर तनाव और डर साफ-साफ नजर आ रहा था। घर के भीतर से आने वाली औरतों के रोने की आवाज बता रही थी कि कुछ बुरा हुआ था। तभी हाथ में जलती मशाल लिए दौड़ता वह आदमी उस घर के बाहर खडी भीड़ को चीरते हुए वो कुटिया के भीतर दाखिल हुआ। भीतर बैठा हर कोई उस शख्स को ही देख रहा था। पर उस शख्स की नजरें किसी और को तलाश रही थी। तभी उसकी नजरें वहीं सामने दीवार के पास अपना सर पकड़ कर बैठे आदमी पर गई।
दोनों एक दूसरे की तरफ ही देख रहे थे। जैसे ही मशाल हाथ में लिये उस शख्स ने भरी आंखों से गर्दन 'ना' में हिलाई वैसे दीवार के पास बैठा शख्स फुटफूटकर रोने लगा। हाथ में मशाल पकड़ा वो शख्स बाहर आ गया और दूर उस जंगल की तरफ देखने लगा। ऊंचे ऊंचे पहाड़, जंगल और गहरी खाईयां जो पुरी तरह से अंधेरे में डूब चुकी थी।
इस गहरे अंधेरे में उसकी नज़रें कहीं दूर जंगल के अंधेरे में टिकी हुई थी। अपने पीछे खड़े लोगों की बातें उसके कानों पर पडने लगी।
" क्या जरूरत थी शादी के लायक हुई अपनी लड़की को गाय भैंस चराने भेजने की ।"
" सही कहा। पूरा इलाका छान मारा पर वो लड़की कहीं नहीं मिली।"
तभी पीछे खड़े लोगों में से एक ने उसके पास आकर पुछा।
" पुजारी जी ने क्या कहां है, "
"वह 'घेराव' में फंस चुकी है,"
वो नाम सुनते ही वो डर के मारे दो कदम पीछे हट गया।
" घ.......घ........घेराव... यानी, मौत का शिकंजा ?"
" हां वही। रात खत्म होते ही वह भी खत्म हो जाएगी।"
डरी सहमी आवाज में उसने कहा
" यह रात का अंतिम प्रहार ही चल रहा है।
" मतलब , ।"
कहकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। और तभी दूर कहीं जंगल से एक लड़की की एक बेहद ही दर्दनाक और रूह कपा देने वाली चीख की हल्की सी आवाज सुनाई दी। उसी के साथ घर के भीतर बैठा हर कोई अपना सर जोर जोर से पीटते हुए रोने लगा।
रात के अंधेरे में डूबे उस गांव के हर घर में खौफ का मंजर था। एक कोने में जलते दिये की पिछली धुंधली रोशनी में महिलाएं अपने बच्चों को पल्लू के नीचे छुपाएं भगवान की तस्वीर के सामने रखे दिए की जलती लौ की तरफ खौफ भरी निगाहों से देख रही थी। किसी की आंखों में पानी था तो किसी की आंखों में खौफ। और उस गांव में एक ऐसा घर भी था जहां २० साले के एक लड़के के हाथ-पैर बांध कर मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। उसकी मां उसे रो रो कर समझा रही थी। और वो लड़का भी जमीन पर पड़ा फुटफूटकर रोए जा रहा था।
यह घटना आज से करीब ६० साल पहले की है। मेरे दादाजी, जीनका नाम 'लक्ष्मण' था। वे महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर से पश्चिम में करीब ७० किमी दूरदराज के ग्रामीण इलाके में रहते थे। उस वक्त आवाजाई की इतने संसाधन नहीं थे । इसलिए दूर या पास के गांव तक बैलगाड़ी, या जंगल से पैदल ही जाना होता था। भूत , पिशाच , जारण-मरण, तंत्र- मंत्र क्रिया इन सबका बहुत तगड़ा प्रभाव उस वक्त के गांवों पर था। घना जंगल, काफी दूर तक फैले उंचे पहाड़ जो जंगल से पूरी तरह घिरे हुए थे। एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए इसी पहाड़ों के बीच में से संकरे रास्ते बनाये थे, पर उस संकरे रास्ते से अगर नीचे नजर गई तो किसी भी हट्टे कट्टे इंसान को दिल का दौरा देने के लिए काफी गहरी होंगा ऐसी गहरी खाइयों की मालाये। दूर से देखने पर भले ही या कुदरत का खूबसूरत लुभावना रूप नजर आता हो पर असल जिंदगी में उन पहाड़ों के बीच जंगल से घीरी हुई एक ऐसी जगह भी थी जहां रात का तो दूर की बात है पर दिन के उजाले में भी 10 , 12 लोगों का झुंड जाने से कतराता था। पर इस समय एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरे दादाजी लक्ष्मण और उनके साथ जुड़े हर इंसान की जिंदगी बदल कर रख दी।
गांव के किसान फसल की कटाई वगैरा करके थोडे खाली हो चुके थे। और अब लोगों के पास कुछ खाली वक्त था । आज हफ्ते का वह दिन था जब लक्ष्मण शिकार के लिए जाते थे।
शिकार....। ना बंदूक से , ना राइफल से बल्कि पीठ पर लगे तीर और अपनी कमर पर लगाये कोयते से।
हर बार की तरह सब तैयारी हो चुकी थी। लक्ष्मण ने थोड़े गुस्से में आवाज लगाई।
लक्ष्मण: आज रोटी मिलेगी या वैसे ही जाना पड़ेगा ?"
चूल्हे पर रोटियां सेंकती उनकी पत्नी ने रोटियां बांधते हुए कहा।
पत्नी : आ रहीं हूं।"
तभी उनकी सबसे छोटी बच्ची विमला दौड़ती हुई उनके पास आई।
विमला : बाबा, मै भी आपके साथ शिकार करने चलूंगी "
उसे अपने पास लेकर उन्होंने कहा।
लक्ष्मण: " बिटिया, पहले तिर चलाना सिखना होगा। फिर निशाना साधना सिखाना होगा उसके बाद शिकार पर ले जाऊंगा। "
विमला: तो आज किस जानवर की शिकार करेंगे?"
लक्ष्मण: जिसकी भी शिकार करूंगा, सबसे पहले तुझे दिखाऊंगा।"
विमला : वादा ?"
हां मेरी बिटिया। तेरा बाबा तुझसे वादा करता है।"
" बाबा एक बात पुछूं "
" बोलो ना बिटिया ?"
" आप को भुतों से डर नहीं लगता ?"
" ये भुतों वाली बात किसने बताई ?"
" वो संगिता की मां है ना, उसने संगी को बताया जंगल में भुतों का इलाका है। जो रात होते ही जंगल से निकलने लगते हैं। और फिर जो भी नजर आता है उसे खा जाते हैं। "
" अरे बेटा, वो एक कहानी है, इलाका सिर्फ इन्सानों का होता है। भुत वुत कुछ नहीं होता। "
" होते हैं, इसलिए तो हम मंदिर जाते हैं, देवी मां से प्रार्थना करते हैं।"
" हम देवी मां से प्रार्थना इसलिए करते हैं ताकी वे सारे संकटों से हमारी रक्षा करे, हमें सुखी रखे, "
" हमारी देवी मां इतनी शक्तिशाली है ?"
" हां बेटा। विश्व में सबसे ताकतवर । ब्रह्म विष्णु और महेश भी उनके सामने शीश झुकाते हैं। "
" आपको ये सब किसने बताया ?"
" तुम्हारी स्वर्गवासी दादी , याने मेरी मां ने।"
" बाबा मुझे पुरी कहानी सुनाओ ना।"
लक्ष्मन ने अपनी बेटी को पास बिठाते हुए कहा।
"अभी नहीं। रात को सोने से पहले।"
" नहीं, मुझे अभी सुननी है "
तभी एक हाथ में कपड़े में बंधी हुई रोटी और दूसरे हाथ से अपने सिर के ऊपर पल्लू ठीक करते हुए उनकी पत्नी बाहर आई। पोटली लक्ष्मण के हाथ में रखते हुए बोली।
" ये लिजिए, और रात तक जंगल में मत रूकना। वो सासू मां बता रही थी की कोई खूंखार जंगली जानवर इन्सानी इलाके में घुसकर पड़ोस के गांव का एक किसान को मार कर जंगल में ले गया।"
मां की तरफ देखते हुए छोटी विमला ने कहा।
" मां तुम डरो मत, वक्त आने पर मेरे बाबा भुत हो या शेर.. उसके हाथ पैर बांधकर कंधों पर लादे हुए घर ले आयेंगे। "
" तु चुप कर... जा, जाकर बाहर खेल।"
मां की डांट सुनकर विमला दौड़कर बाहर चली गई। लक्ष्मन कोयते की धार को परखते हुए गंभीरता से बोले।
" सबसे खूंखार जानवर तो इंसान ही है। अगर हम उनके इलाके में जाकर उनकी शिकार कर सकते हैं, तो वह भी तो हमारे इलाके में आकर हम लोगों को अपना शिकार बना सकते हैं। सब अपना अपना पेट भरने की दौड़ में भाग रहे हैं "
इतना कहकर लक्ष्मण पीछे मुड़कर चलने लगे। और उनकी पत्नी परेशान होकर कुटिया के दरवाजे पर खड़ी उनको ही देखने लगी।
लक्ष्मण धीरे-धीरे जंगल के भीतर जाने लगे । जैसे-जैसे वह कदम आगे बढ़ते वैसे वैसे जंगल और ज्यादा खूंखार , खतरनाक और डरावना हो रह था। ऊंचे घने पेड़ों की वजह से सूरज की रोशनी काफी कम जमीन तक पहुंच रही थी। अब जैसे ही जंगल घना हो गया वैसे लक्ष्मण के पैरों की रफ्तार कम हो गई। इतनी देर से उनके पैरों में पहन कोल्हापुरी चप्पल की तेज आवाज अब बिल्कुल कम हो गई थी। अपने पीठ पर लगाया तीर और कमान धीरे से निकाला और जंगल का मुआइना करते हुए आगे बढ़ने लगे। दिल थाम कर वो आने वाली हर आहट को ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगे। तभी उन्हें सामने घनी झाड़ियां के पीछे कुछ हलचल सुनाई दी। उन्होंने तीर कमान पर लगाते हुए उसकी रस्सी पीछे खींच ली और उन झाड़ियां पर निशाना लगाया। उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था की झाड़ियां के पीछे क्या है फिर भी वह डटे रहे । उनकी सांसे बिल्कुल शांत थी, सिर से बहने वाला पसीना धीरे-धीरे कान से होते हुए गले तक आ गया था। लग रहा था झाड़ियां के पीछे जो कुछ भी है वह बड़ी तेजी से लक्ष्मण की और झपटेगा और उसी का फायदा उठाकर लक्ष्मण इसके सीने पर तीर चला कर उसे खत्म कर देंगे। पर तभी लक्ष्मण को अपनी दाईं तरफ की झाड़ियां में भी उसी तरह की हलचल होती नजर आई और फिर बाई तरफ । बीना आवाज किए उन्होंने तीर की रस्सी को ढीला किया और दोबारा अपने कंधे से लगाते हुए चुपके से अपनी कमर पर लगा कोयता निकल ही रहे थे के तभी कोई बिजली की रफ्तार से कोई उनके उपर झपटा। और......
झाड़ियों के पीछे कौन था?
क्या वह कोई जानवर था, कोई इंसान, या फिर कोई रहस्यमय .... शैतानी ताकत ?
जंगल में क्या छिपा हुआ है, जिससे गांव के लोग इतना खौफ खाते हैं?
विमला के बाबा क्या इस हमले से बच पाएंगे? या फिर इस बार उनका ही शिकार होगा ?
क्या है घेराव का रहस्य?
क्या जंगल से कोई और घटनाएं गांव में तबाही मचाने वाली हैं और इसका विमला और उसकी मां के जीवन पर क्या असर पड़ेगा?
To be continue...
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