SFX (Sound Effects): (क्लब के अंदर का भारी बास (Bass) वाला संगीत बाहर तक सुनाई दे रहा है - Thump... Thump... Thump...) (महंगी गाड़ियों के रुकने और दरवाज़े बंद होने की आवाज़ें।) (आर्यन और स्नेहा के कदमों की आवाज़।)
आर्यन: (हल्की घबराहट के साथ) स्नेहा, मैं कैसा लग रहा हूँ? ये शर्ट... थोड़ी पुरानी है, पर मैंने इसे अच्छे से आयरन किया है। रिया को बुरा तो नहीं लगेगा ना?
स्नेहा: (प्यार से) तुम बहुत अच्छे लग रहे हो आर्यन। सादगी से बड़ी कोई स्टाइल नहीं होती। और वैसे भी, तुम वहां रिया के लिए जा रहे हो, कपड़ों की प्रदर्शनी के लिए नहीं। चलो।
SFX: (कदमों की आवाज़ रुकती है।) (बाउंसर का भारी हाथ रोकने की आवाज़।)
बाउंसर: ऐ! रुक! किधर जा रहा है? ये डिलीवरी गेट नहीं है, पीछे से जा।
आर्यन: नहीं सर, मैं डिलीवरी बॉय नहीं हूँ। मैं गेस्ट हूँ। मुझे इनविटेशन मिला है।
बाउंसर: (हंसते हुए) इनविटेशन? तेरी शक्ल देखकर तो लगता है तू वेटर की नौकरी मांगने आया है। चल निकल यहाँ से, यहाँ सिर्फ वीआईपी लोग आते हैं।
आर्यन: लेकिन सर... रिया... मेरा मतलब, मिस रिया ने मुझे बुलाया है।
SFX: (क्लब का दरवाज़ा खुलने की आवाज़। संगीत तेज़ हो जाता है।)
विक्की: (दूर से, तेज़ आवाज़ में) अरे शेरा! आने दे उसे। आज की पार्टी का असली मनोरंजन तो यही है।
बाउंसर: सॉरी सर। जा बे, अंदर जा।
सूत्रधार (Narrator): अपमान की पहली ठोकर तो बस दरवाज़े पर थी। आर्यन को लगा विक्की ने उसे बचा लिया, पर वो नहीं जानता था कि विक्की ने उसे अंदर किसी सम्मान के लिए नहीं, बल्कि एक तमाशे के लिए बुलाया था।
SFX: (तेज़ पार्टी म्यूज़िक - EDM/Dance Music। लोगों के बात करने और ग्लास टकराने की आवाज़ें।) (जैसे ही आर्यन और स्नेहा अंदर आते हैं, म्यूज़िक थोड़ा धीमा हो जाता है, जैसे डीजे ने वॉल्यूम कम कर दिया हो।)
विक्की: (माइक पर अनाउंस करते हुए) लेडीज़ एंड जेंटलमेन! प्लीज वेलकम... हमारे कॉलेज का 'गरीब-ए-आज़म', आर्यन! और साथ में उसकी पर्सनल बॉडीगार्ड, स्नेहा!
SFX: (पूरी भीड़ के हंसने की आवाज़।)
आर्यन: (अनदेखा करते हुए) स्नेहा, तुम यहीं रुको। मैं रिया को ढूंढता हूँ।
(आर्यन भीड़ में आगे बढ़ता है।)
आर्यन: रिया! हैप्पी बर्थडे!
रिया: (रूखेपन से) ओह, तुम आ गए? मैंने सोचा था तुम बहाना बना लोगे।
आर्यन: मैं तुम्हारा बर्थडे कैसे मिस कर सकता हूँ? देखो, मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूँ।
SFX: (कागज़ की रैपिंग खुलने की आवाज़।) (बॉक्स खुलने की आवाज़ - Click!)
आर्यन: चांदी का पेंडेंट। मुझे पता है तुम्हें सिंपल चीज़ें पसंद हैं।
विक्की: (अचानक बीच में आकर) अरे वाह! दिखाओ तो ज़रा। (छीनने की आवाज़) ओह माय गॉड! चांदी? वो भी इतना पतला? इसे पेंडेंट कहते हैं या साइकिल की चेन का टुकड़ा?
SFX: (भीड़ फिर ज़ोर से हंसती है।)
विक्की: रिया बेबी, तुम ये पहनोगी?
MUSIC: (तनावपूर्ण संगीत शुरू होता है।)
सूत्रधार (Narrator): हज़ारों की भीड़ में आर्यन की नज़रें सिर्फ रिया पर थीं। उसे उम्मीद थी कि रिया विक्की को चुप कराएगी, उस तोहफे की कद्र करेगी जिसके लिए आर्यन ने पसीना बहाया था। लेकिन खामोशी कभी-कभी शब्दों से ज़्यादा चुभती है।
आर्यन: रिया... तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही? इसे वापस दे दो विक्की। ये रिया के लिए है।
रिया: (गुस्से में चिल्लाते हुए) बस करो आर्यन! तमाशा मत बनाओ।
आर्यन: (हैरान होकर) तमाशा मैं नहीं, ये विक्की बना रहा है रिया।
रिया: नहीं! तमाशा तुम हो! तुम्हारी ये गरीबी, तुम्हारे ये फटे हुए कपड़े... सब एक तमाशा है! विक्की सही कह रहा है। ये गिफ्ट... ये कूड़ा है मेरे लिए!
SFX: (धातु के ज़मीन पर गिरने की आवाज़ - Clink! (पेंडेंट फेंक दिया गया))
आर्यन: (टूटी हुई आवाज़ में) रिया? तुमने... तुमने इसे फेंक दिया? ये मेरी पूरे महीने की कमाई थी...
रिया: तो मैं क्या करूँ? तुम्हारी महीने भर की कमाई मेरे एक सैंडल की कीमत के बराबर भी नहीं है। मुझे शर्म आती है तुम्हें अपना बॉयफ्रेंड कहते हुए। हमारा कोई मेल नहीं है आर्यन। मैं थक चुकी हूँ इस "सच्चे प्यार" के नाटक से। मुझे स्टेटस चाहिए, जो तुम्हारे पास कभी नहीं होगा।
SFX: (सन्नाटा। सिर्फ बैकग्राउंड में धीमा म्यूज़िक।)
रिया: इट्स ओवर आर्यन। गेट आउट।
सूत्रधार (Narrator): दिल टूटने की आवाज़ नहीं होती, लेकिन उसका दर्द रूह तक को हिला देता है। आर्यन के सामने उसकी दुनिया बिखर चुकी थी। जिस प्यार के लिए उसने अपनी पहचान छुपाई, वो प्यार दौलत की चमक के आगे फीका पड़ गया।
विक्की: सुना तूने? मैडम ने कहा गेट आउट। लेकिन ऐसे सूखे गले से कैसे जाएगा?
SFX: (लिक्विड गिरने की आवाज़ - Splash!)
विक्की: उप्स! सॉरी, हाथ फिसल गया। अब तू पूरा 'पिज़्ज़ा बॉय' लग रहा है। ड्रिंक की खुशबू के साथ।
SFX: (भीड़ की हंसी और तालियां।) (तेज़ कदमों की आवाज़।)
स्नेहा: (चीखते हुए) विक्की! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?
(स्नेहा दौड़कर आर्यन के पास आती है और अपनी रुमाल से उसे पोंछने लगती है।)
स्नेहा: चलो आर्यन, यहाँ एक पल भी रुकना बेकार है। ये लोग इंसान नहीं हैं।
विक्की: अरे, ये देखो! 'मदर टेरेसा' फिर आ गईं। ओए, तू भी निकल यहाँ से!
SFX: (धक्का देने की आवाज़ - Thud!) (स्नेहा के गिरने की आवाज़ और हल्की चीख।)
आर्यन: (दहाड़ते हुए) स्नेहा! (धीमी, खतरनाक आवाज़ में) विक्की... तुमने रिया के मामले में जो किया, मैंने सहा। लेकिन अगर स्नेहा को हाथ लगाया...
विक्की: तो? तो क्या कर लेगा तू? निकल यहाँ से इससे पहले कि गार्ड्स को बुलाकर धक्के मरवाऊँ! कचरा कचरे के पास ही अच्छा लगता है!
MUSIC: (म्यूज़िक बहुत गहरा और इंटेंस (Intense/Dark) हो जाता है।)
आर्यन: (गहरी सांस लेते हुए, एकदम शांत आवाज़ में) चलो स्नेहा। (स्नेहा को उठाने की आवाज़) ये जगह हमारे लायक नहीं है।
SFX: (आर्यन और स्नेहा के धीमे कदमों की आवाज़ जाते हुए। पीछे से हंसी और म्यूज़िक फिर तेज़ हो जाता है।)
सूत्रधार (Narrator): उस रात आर्यन ने सिर्फ एक पार्टी नहीं छोड़ी, उसने अपने अंदर के उस आर्यन को भी वहीं दफ्न कर दिया जो भोला था, जो प्यार में विश्वास करता था। आंसुओं की जगह अब एक ऐसी आग ने ले ली थी जो सब कुछ जलाकर राख करने वाली थी।
SFX: (वापस बारिश की तेज़ आवाज़। बादलों की गड़गड़ाहट।) (सड़क पर सन्नाटा है।)
स्नेहा: (रोते हुए) मुझे माफ़ कर दो आर्यन। मैं तुम्हें वहां नहीं ले जाती तो ये सब नहीं होता। तुम... तुम ठीक हो ना?
आर्यन: (एकदम सपाट आवाज़) मैं ठीक हूँ स्नेहा। मैं ठीक हूँ। आज मुझे वो साफ़ दिखाई दे रहा है जो अब तक धुंधला था।
SFX: (एक भारी लग्ज़री कार (Rolls Royce) के धीमे से आकर रुकने की आवाज़।) (इलेक्ट्रॉनिक विंडो नीचे होने की आवाज़।) (कार का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ - Smooth mechanical whir and heavy click. )
वकील: (कांपती हुई, सम्मानजनक आवाज़) छोटे मालिक! अब बस कीजिये। दादाजी का आदेश आ गया है। वनवास पूरा हुआ।
(बारिश की आवाज़ थोड़ी कम हो जाती है।)
आर्यन: (स्नेहा की तरफ मुड़ते हुए) स्नेहा, गाड़ी में बैठो।
स्नेहा: क्या? आर्यन, ये... ये कौन हैं? और ये तुम्हें 'मालिक' क्यों कह रहे हैं?
आर्यन: सवाल बाद में। आज से तुम्हारी कोई भी आँख में आंसू नहीं लाएगा। बैठो।
SFX: (कार का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़।) (इंजन की पावरफुल आवाज़ और गाड़ी के तेज़ रफ़्तार से निकलने का शोर।)
MUSIC: (एक बहुत ही पावरफुल, रोंगटे खड़े कर देने वाला 'हीरोइक' थीम म्यूज़िक शुरू होता है और चरम (Crescendo) पर पहुँचता है।)
सूत्रधार (Narrator): खत्म हुआ एक डिलीवरी बॉय का संघर्ष, और शुरू हुआ 'आर्यन सिंघानिया' का राज। कॉलेज वालों ने जिसे कीचड़ समझा, वो असल में वो सैलाब था जिसमें अब सबका अहंकार डूबने वाला था।
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