पिछले भाग में आपने देखा कि साक्षी अपने परिवार के साथ एक नए घर में शिफ्ट हुई है जहां उसे एक अजीब गुड़िया मिलती है । साक्षी उसे अपना दोस्त बना लेती है। लेकिन अब उसकी मां नहीं चाहती कि साक्षी एक पुरानी और अजीब दिखने वाली गुड़िया के साथ खेले इसलिए वो उसे फेंकने को कहती है जिससे साक्षी नाराज हो जाती है। और सबसे बात करना बंद कर देती है।
अब आगे
साक्षी ने पिछले दो दिनों से पापा मम्मी से बात नहीं की थी। दादी सुनीता ने कई बार उसे बहलाने की कोशिश की लेकिन हर बार वो कमरे में जाकर अपना रूम लॉक कर लेती।
बार बार खाने के लिए बुलाने पर भी वो कमरे से बाहर नहीं आ रही थी।
सुनीता:: रामसिंह खाना खिलाकर आया है अभी साक्षी को। लेकिन पता नहीं क्या हो गया है लड़की को हम सब से तो बात ही नहीं कर रही हैं न हमारे कहने से खाना खा रही है । नौकरों के हाथ से खाना मंजूर है लेकिन हम लोगों से नहीं।
रेवती:: कुछ सुनाई दे रहा है मांजी..? साक्षी के कमरे से बातें करने और हंसने की आवाज सुनाई दे रही हैं। अपने डॉल से बात कर रही है लेकिन हमे देखकर ऐसे मुझ बनाती है जैसे शक्ल भी देखना न चाहती हो।
सुनीता: बेटा होता है बच्ची है ।उसे वो गुड़िया अच्छी लग रही है इसलिए उसे इतना लाड दिखा रही है। अभी उसे अच्छा बुरा नया पुराना कहां समझ आता है।
खत्म करो इस बात को और कह दो सॉरी।
इकलौती बेटी की हालत देखकर और सुनीता के कहने पर रेवती ओर राज साक्षी को सॉरी बोल देते हैं ।सॉरी सुनकर साक्षी अपने पिता से जाकर लिपट जाती है।
पापा: अच्छा आइसक्रीम खाने चले फिर तुम्हे नए टॉयज भी दिला देंगे तो तुम्हें इस पुरानी डॉल से नहीं खेलना पड़ेगा..;
साक्षी: नहीं चाहिए आपकी आइस स्क्रीम और नाही नई डॉल। मैं ऐसे ही ठीक हूं।
साक्षी अपनी डॉल को कसकर सीने से लगाती है और फिर से जाकर बेड पर उससे खेलने लगती है।
उसी रात…
राज: रेवती जाओ और जाकर साक्षी की वो डॉल उठाकर स्टोर रूम में रख दो। मैं नई डॉल लाया हूं वो उसके रूम में रख देना ।सुबह जब उस सुंदर सी डॉल पर उसकी नजर पड़ेगी तो अपनी उस गंदी सी डोल का ख्याल भी नहीं आएगा उसे।
रेवती देर रात गए साक्षी के कमरे में दाखिल होती है। साक्षी अभी गहरी नींद में सोई हुई थी। रेवती उसके हाथ से डॉल लेने की कोशिश करती है लेकिन जैसे ही वो गुड़िया को स्पर्श करती है उसे एक जोरदार झटका महसूस होता है
रेवती: ऐसा लगा जैसे करेंट लग गया हो..? क्या था ये..?
घबराते हुए रेवती एक बार फिर से डॉल को उठाती है और उसे ले जाकर स्टोर में पटक देती है और फिर राज की लाई नई गुड़िया वहां रखकर अपने कमरे में जाकर सो जाती है।
अगले दिन राज और रेवती बड़े खुश थे कि अब उन्हें उस मनहूस सी दिखाई देने वाली डॉल की शक्ल नहीं देखनी पड़ेगी। लेकिन सुबह आठ बजे जब साक्षी अपने कमरे से बाहर आती है तो साक्षी के हाथों में फिर से वो डॉल दिखाई देती है।
रेवती: साक्षी बेटा ये डॉल कहां से आई तुम्हारे पास.??
मां की बात सुनकर साक्षी खिलखिलाकर हंसते लगती है।
साक्षी: ये डॉल तो मेरी है न तो और कहां जाएगी..?
राज: लेकिन बेटा मैने देखा था सुबह ये घर में कहीं नहीं थी।
साक्षी: पापा वो एमिली मेरे साथ हाइड एंड सीक का खेल रही थी। वो छिपी हुई थी और मुझे ढूंढने के लिए कह रही थी।
रेवती: तुम्हे किसने कहा वो तुम्हारे साथ हाइड एंड सीक खेलने के लिए छिपी है.?
साक्षी: अरे मम्मा एमिली ने बताया और कौन बताएगा..! उसने मुझे आवाज लगाकर कहा मुझे उसे ढूंढना होगा।
सुबह पांच बजे…
बिस्तर पर सो रही साक्षी की नींद एक आवाज से टूट जाती है।
साक्षी को सुनाई देता है कि कोई उसे पुकार रहा है।
आवाज: साक्षी… उठो साक्षी..! वरना तुम हार जाओगी..! साक्षी..!
साक्षी: ये कौन है जो मुझे बुला रहा है..?
अरे एमिली कहां चली गई..? वो तो मुझे अकेला छोड़कर कहीं नहीं जाती
आवाज: मैं एमिली हु साक्षी आओ मुझे ढूंढो और बाहर निकालो।
साक्षी आवाज का पीछा करते हुए स्टोर रूम में पहुंच जाती है।
साक्षी: एमिली मैने पकड़ लिया तुम स्टोर रूम में हो न..?
एमिली ( डरावनी हंसी हंसते हुए): ठीक पहचाना। आओ मुझे बाहर निकालो।
साक्षी दरवाजा खोलकर स्टोर रूम में जाती है और एक बॉक्स के अंदर रखी हुई डॉल एमिली को बाहर निकाल लेती है।
साक्षी: आपको पता है जब मैने एमिली को आई स्पाय कहा तो एमिली जोर जोर से हंसने लगी और उसके बाद मैं उसे अपने रूम में ले आई।
इतना कहकर साक्षी हंसते हुए वापिस अपने कमरे में जाकर खेलने लगती है
साक्षी की बातें सुनकर रेवती और राज का सर चकरा गया था।
रेवती: ये क्या बातें कर रही हैं..?
राज: अरे वो सोई नहीं होगी बस तुम्हे देखकर सोने का नाटक कर रही होगी । उसने तुम्हे गुड़िया छिपाते देखा होगा तभी वो डॉल वहां से ले आई। और क्या..?
रेवती ( राज से): हद हो गई। अब तो बस एक बार मेरे हाथ लग जाए ये डॉल । पेट्रोल छिड़ककर सीधा आग लगाऊंगी इस डॉल में ।तभी इससे पीछा छूटेगा।
रेवती के इतना कहते ही साक्षी की चीखों की आवाज सुनाई देने लगती है।
सभी लोग दौड़कर साक्षी के कमरे में पहुंचते हैं तो सामने का नजारा देखकर उनकी सांसे थम सी जाती हैं।
साक्षी आग आग चिल्ला रही थी और उसके फ्रॉक के फ्रिल से आग की लपटे उठ रही थी।
रेवती: राज कुछ करो…; मेरी बच्ची..!
राज दौड़कर कंबल उठाता है और साक्षी के फ्रॉक को उसमें लपेट कर आग बुझा देता है।
साक्षी ( रोते हुए): आह बहुत जलन हो रही है मम्मा। बहुत दर्द हो रहा है।
राज: हल्का सा बर्न हुआ है। मम्मा दवा लगाएगी ठीक हो जायेगा। एक बात बताओ ये सब हुआ कैसे बेटा..? आग कैसे लगी..?
साक्षी: मुझे नहीं पता पापा..! अचानक आग जलने लगी।
रेवती: कमरे से पेट्रोल की महक भी आ रही है। यहां पेट्रोल कौन लेकर आया।समझ नहीं आ रहा क्या हुआ कैसे हुआ..!
नौकर: मैडम बेबी के कमरे में तो आज कोई गया ही नहीं है हमारा पूरा स्टाफ तो अभी अंदर आया है।
साक्षी के साथ हुए इस हादसे ने सभी को हिलाकर रख दिया था। कोई समझ नहीं पा रहा था अचानक आग कैसे लग जायेगी क्योंकि साक्ष्य को तो अभी माचिस तक जलाना नहीं आता था।।
आग वाली घटना को कुछ दिन बीत गए थे। साक्षी के जख्म भी ठीक हो गए थे लेकिन फिर भी साक्षी अब पहले की तरह पूरे दिन घर में धमाचौकड़ी नहीं मचाती थी। या तो वो अपनी बुक में स्कैच बनाती रहती या फिर डॉल से बातें करती। न पहले कि तरह टीवी देखने की जिद करती न खाने की।
चाचू: भाभी क्या हो गया है साक्षी को लगता है ये नया घर उसे पसंद नहीं आया। मुझे ऐसा लग रहा है वो अकेलापन फील कर रही है। यहां उसके कोई दोस्त भी नहीं है। और छुट्टियां चल रही हैं इसलिए स्कूल में भी किसी दोस्त से नहीं मिल पा रही है।
मैं कुछ करता हूं।
विराज कुछ कार्ड्स प्रिंट करवाता है और फिर उन्हें लेकर अपनी भतीजी के पास आता है।
चाचू: साक्षी आओ मेरे पास देखो मैं क्या लाया हूं..?
साक्षी: चाचू मुझे चॉकलेट नहीं खानी।
चाचू: अरे देखो तो चाचू क्या लेकर आए हैं..? तुम्हारे लिए एक सरप्राइस है।
चाचू जानते हैं कि तुम नए घर में शिफ्ट हुई हो और यहां पर तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है
अभी स्कूल के भी वेकेशंस चल रहे हैं इसलिए तुम लोनली फील कर रही हो ।
चाचू ने तुम्हारी उदासी का एक सॉल्यूशन निकाला है जानना चाहोगी..? इधर आओ ये देखो इस इनविटेशन कार्ड में क्या लिखा है..?
साक्षी चाचू के पास आती है और एक कार्ड लेकर पढ़ने लगती है।
साक्षी : गेट टूगेदर पार्टी एट साक्षी's न्यू विला..!
चाचू: रहने दो अगर तुम्हारा मन नहीं है तो कोई बात नहीं मैं सबको मना कर देता हूं। और वो केक पिज़्ज़ा वगैरह भी रिटर्न करवा देता हूं।
साक्षी:नहीं चाचू मुझे पार्टी करनी है। बहुत मजा आएगा। एमिली की भी ये फर्स्ट पार्टी होगी।
रेवती:बेटा पापा की आज बहुत इंपॉर्टेंट मीटिंग है और मुझे एक सोशल इवेंट में जाना है,आई एम सो सारी बेटा मैं तुम्हारे साथ रुक नहीं पाऊंगी। विराज किसी और दिन करते हैं न..!
मां की बात सुनकर साक्षी पहले से भी ज्यादा गुस्सा हो जाती है।
विराज चाचू:अरे भाभी क्यों आप मेरी गुड़िया रानी को ऐसे कहकर मायूस कर रही हो ?आप बिजी हो लेकिन चाचू तो आज फ्री है न। मैं आपको आज आपकी गेट टूगेदर पार्टी अरेंज करने में मदद करूंगा ओके।
चाचू की बात सुनकर साक्षी का चेहरा खिल गया था। शाम होने लगी थी आसमान में तारे चमकने लगे थे और इधर साक्षी एक सुंदर सी गुलाबी रंग की फ्रॉक पहने चाचू के साथ गाड़ी में बैठकर मॉल जा रही थी।
साक्षी: चाचू सब बच्चों के लिए रिटर्न गिफ्ट ले लेते हैं। बहुत मजा आएगा।
मॉल में जाकर…
साक्षी अपने सारे दोस्तों के लिए रिटर्न गिफ्ट्स खरीदती है और फिर वहां से लौटकर पार्टी के सारे अरेंजमेंट्स करने के बाद रेडी होकर अपने दोस्तों का वेट करने लगती है।
विराज(मन ही मन):अरे ये रिया का अचानक फोन आ गया नहीं उठाऊंगा तो मुंह फुला लेगी।वैसे ही बात बात पर शादी तोड़ने की धमकी देती है।
विराज:साक्षी बेटा आप अपने दोस्तों के साथ एंजॉय करो। एक इंपॉर्टेंट कॉल आ गया है।मैं अभी अटेंड करके आता हूं।
विराज कुछ देर तक अपनी मंगेतर से बाते करता है। जब तक वह फोन पर बातें कर रहा था साक्षी के दोस्त घर पर आ गए थे और पार्टी शुरू हो चुकी थी।
चिंटू:अरे साक्षी आओ ना हमारे साथ खेलो क्या वहां एक कोने में बैठी हुई हो..? पार्टी तो तुम ने ही दी है और तुम ही एक कोने में गुमसुम बैठी हुई हो
साक्षी:नहीं मै अपनी फ्रेंड को अकेला नहीं छोड़ सकती तुम लोग एंजॉय करो मैं यही ठीक हूं ..!
चिंटू:कौन सा फ्रेंड..?हमे तो कोई नजर नहीं आ रहा..?
साक्षी:ये है न मेरी न्यू फ्रेंड..! मेरी डॉल एमिली..!
चिंटू(हंसते हुए):अरे साक्षी डॉल को फ्रेंड कौन बनाता है।और कहां से ली तुमने ये अजीब सी डॉल..? कितनी गंदी लग रही है।
हर्ष: ये डॉल कुछ अजीब नहीं लगती..?इसके चेहरे पर ये रेड रेड क्या लगा है। कितनी अजीब सी है इसकी आँखें..!मैं होता तो इसे टच भी न करता। छी छी..!
साक्षी:तुम दोनों जाओ यहां से..! मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी।
साक्षी को चिंटू और हर्ष का डॉल का मजाक उड़ाना बहुत बुरा लग रहा था,इसलिए अब वो गुस्से में एक कोने में बैठी हुई थी।चिंटू और हर्ष साक्षी के पास से चले गए थे,लेकिन वो पार्टी में सभी बच्चों से साक्षी की डॉल की तरफ इशारा करके मजाक कर रहे थे।अचानक चिंटू और हर्ष जाकर दीवार से टकरा जाते हैं और जमीन पर गिर पड़ते हैं।एक तरफ वो दोनो दर्द से कराह रहे थे,और दूसरी तरफ साक्षी उन्हें देखकर ज़ोर जोर से हंस रही थी।
साक्षी का ये अजीब बिहेवियर पार्टी में किसी को भी समझ नहीं आ रहा था।चिंटू और हर्ष लगातार दर्द से कराह रहे थे,।
पार्टी में हो रही चीख पुकार को सुनकर विराज फोन रख कर दौड़ते हुए वहां पहुंचता है। तो देखता है साक्षी के दो दोस्त बुरी तरह से दर्द से कराह रहे हैं।
विराज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वो जल्दी से उन्हें अस्पताल ले जाता है जहां पता चलता है कि चिंटू के हाथ में और हर्ष के पांव में फ्रैक्चर आ गया है।पार्टी में हादसा होने के बाद सभी पेरेंट्स अपने बच्चों को लेकर वापिस अपने अपने घर चले जाते हैं।
अगले दिन…
रेवती:बेटा क्या हुआ था पार्टी में?? कैसे उन दोनों को इतनी चोट लगी झगड़ा किया क्या दोनों ने..?
साक्षी(हंसते हुए):जो हुआ अच्छा हुआ उनके साथ ऐसा ही होना चाहिए।
रेवती(गुस्से में):साक्षी ये क्या बोल रही हो तुम..? अपने दोस्तों के बारे में ऐसे कौन कहता है..? देख रही हूं आजकल बहुत अजीब बिहेव करने लगी हो..! पहले मॉल में तुमने इतना बड़ा तमाशा कर दिया और अब अपने दोस्तों के लिए ऐसे बोल रही हो..?
रेवती ने देखा जब वो अपनी बेटी को डांट रही थी, उस समय साक्षी अपने हाथ में पकड़ी डॉल को देखकर मुस्कुरा रही थी।
रेवती:ये क्या है साक्षी मै तुमसे बात कर रही हूं ना..? और तुम अपनी डॉल को देखकर मुस्कुराए जा रही हो..?
साक्षी:ये मेरी दोस्त हैं मम्मा। मैने बताया था ना मैने इसका नाम भी रखा है एमिली..! अच्छा है न..?
रेवती:ये दोस्त है..?ऐसे खिलौनों को दोस्त कौन बनाता है..?कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है इसे देखकर..!दिखाओ तो जरा..!
साक्षी(छीनते हुए):नहीं मम्मा… आप इसे नहीं ले सकते..!एमिली नाराज हो जाएगी।मैने एमिली को प्रॉमिस किया है कि मै इसे हमेशा अपने साथ ही रखूंगी किसी को नही दुंगी ।
साक्षी बोल रही थी तभी रेवती के पास एक फोन कॉल आता है।
रेवती:बेटा तुम्हारे फ्रेंड अनु की मम्मा का कॉल था।हम लोग अभी हर्ष और चिंटू से मिलने जाएंगे।उनकी तबीयत सही नहीं है न..! अनु और उसकी मम्मा भी आ रहे हैं। तुम भी रेडी हो जाओ।
साक्षी:मैने कहा ना मम्मा उनके साथ जो हुआ अच्छा हुआ।मैं उनसे मिलने नहीं जाऊंगी।
रेवती:बेटा वो आपके बेस्ट फ्रेंड हैं ऐसा क्यों बोल रही हो आप..?आपका झगड़ा हुआ क्या उनसे..?
साक्षी: बोला ना मुझे नहीं जाना..!
इतना कहकर साक्षी गुस्से में वहां से चली गई थी।
रेवती(अपनी सास से):कुछ समझ नहीं आ रहा ये ऐसे क्यों रिएक्ट कर रही है।आप प्लीज थोड़ा ख्याल रखेंगी इसका मै हॉस्पिटल होकर आती हूं।
आखिर क्या चल रहा है रेवती के घर में..? साक्षी के अजीब बर्ताव का कारण क्या समझ पाएगी रेवती..? क्या आने वाला समय कोई अनहोनी लेकर आएगा जानने के लिए देखना ना भूले कहानी का अगला भाग..!
और हां दोस्तों कहानी अगर पसंद आई हो तो हमारे चैनल वन्स अपॉन ए टाइम हिंदी को सब्सक्राइब जरूर करे और बेल आइकन को प्रेस करना न भूले।
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