पिछले भाग में आपने देखा कि साक्षी के घर पार्टी में आए बच्चे जब उसकी गुड़िया का मजाक बनाते हैं तो ये बात उसे पसंद नहीं आती और वो गुस्सा हो जाती है। लेकिन तभी उन बच्चों को चोट लग जाती है जिसे देखकर साक्षी जोर जोर से हंसने लगती है।
पार्टी में आए बच्चों को चोट लगने के कारण साक्षी की मां साक्षी से कहती हैं कि वो अस्पताल में उसके दोस्तों से मिलने चले लेकिन साक्षी साफ इनकार कर देती है।
अब आगे…
साक्षी के अपने दोस्तों से मिलने से इनकार कर देने के बाद रेवती काफी हैरान हो गई थी। और फिर वो साक्षी के दोस्तों से मिलने के लिए अस्पताल आती है।हॉस्पिटल में…
रेवती:बेटा कैसे हो आप..?ऐसे कैसे इतना जोर से गिर पड़े..?
चिंटू:मैं गिरा नहीं आंटी मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने पहले मेरा हाथ मरोड़ा,और फिर जोर से मेरे बैक पर लात मारी जिससे मैं जाकर दीवार से टकरा गया।
हर्ष:ये सही बोल रहा है मुझे भी बिल्कुल ऐसा ही लगा,जैसे किसी ने मुझे बहुत जोर से पीछे से धक्का मारा।
आपको पता है आंटी जब हम दर्द से चिल्ला रहे थे तो साक्षी जोर जोर से हंस रही थी!
रेवती:क्या..?लेकिन वो ऐसा क्यों करेगी..?आप लोगों का कोई झगड़ा हुआ है क्या..?वो बोल रही थी आप लोगों से मिलना ही नहीं चाहती।
हर्ष:आंटी आप तो जानती हो ना, हम चारों बेस्ट फ्रेंड हैं फिर हमारे बीच झगड़ा कैसे हो सकता है।हमारा कोई झगड़ा नहीं हुआ,बस वो एक गंदी सी डॉल लेकर बैठी हुई थी।और अकेले में उससे बाते कर रही थी हमने कहा छोड़ो इस अजीब सी डॉल को।पार्टी में आई हो तो सब मिलकर मस्ती करते हैं,चलो कोई गेम खेलते हैं। लेकिन वो हमारी बात से नाराज हो गई।उसके बाद हम दोनों गिर गए और हमे चोट लग गई ।और सबसे अजीब बात की वो हमें गिरते देख जोर जोर से हंस रही थी ।
बच्चों की बात सुनकर रेवती को काफी शर्मिंदगी हो रही थी।इस समय उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। वो साक्षी से कई सारे सवाल पूछना चाहती थी इसलिए वो वापिस अपने घर लौट आती है।
रेवती घर पहुंची तब तक दिन ढल गया था।घर पहुंचकर…रेवती देखती है कि पूरे घर में अंधेरा है सिर्फ बाहर गार्डन से छिटक कर हल्की रोशनी घर के कांच से अंदर आ रही थी।रेवती घर में अंधेरा देख काफी हैरान हो गई थी।वो अंदर आकर हॉल की लाइट ऑन करती है।तभी उसे साक्षी के कमरे से हंसने खिलखिलाने कि आवाज सुनाई देती है।
रेवती:अच्छा..! लगता है दोनों दादी पोती को मस्ती सूझ रही है।
रेवती मुस्कुराते हुए साक्षी के कमरे की ओर जाती है।लेकिन अंदर का नजारा देख वह हैरान रह जाती है। कमरे में सिर्फ साक्षी थी और अकेले में ही वो जोर जोर से हंस कर बातें कर रही थी।तभी रेवती को महसूस हुआ कि कमरे में लगी आराम कुर्सी भी लगातार हिल रही है।रेवती को कुछ समझ नहीं आ रहा था ।
रेवती:मां जी..? वो कहां गई??
साक्षी के कमरे से निकल कर रेवती अपनी सास के कमरे में आती है,जहां वो घोड़े बेचकर सो रही थी।
रेवती:मां जी यहां सो रही हैं।अभी तो बस शाम के सात बजे है,इतनी जल्दी कैसे सो गई मां जी..?
रेवती:मा जी आप यहां क्या कर रही हैं,मैं आपके पास साक्षी को छोड़कर गई थी ।साक्षी आपके पास क्यों नहीं है..? आपकी तबीयत तो ठीक है ना..?इतनी जल्दी कैसे सो गई आप..?
सास:अरे बेटा मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा,कि मैं अपने कमरे में कब आई और कब बिस्तर पर आकर सो गई।मैं तो हॉल में साक्षी के साथ बैठी हुई टीवी देख रही थी, फिर साक्षी कमरे में अपनी डाल लेने के लिए गई उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं।क्या हुआ बहू साक्षी ठीक है ना कहां है वह…?
रेवती:आप चलिए मेरे साथ।
रेवती और उसकी सास दोनों साक्षी के कमरे में जाते हैं,तो देखते हैं कि साक्षी हाल में बैठकर आराम से टीवी देख रही है।
रेवती:तुम हाल में कब आई साक्षी,तुम तो अभी अपने कमरे में थी ना..?
साक्षी:नहीं मम्मा मैं तो कब से यहां पर बैठकर टीवी देख रही हूं,आप कब आए..?
रेवती:झूठ मत बोलो साक्षी,मैंने खुद तुम्हें तुम्हारे कमरे में जोर-जोर से हंसते हुए देखा था।मुझे देखकर यहां आकर टीवी चला कर बैठ गई,सच-सच बताओ इतना जोर जोर से क्यों हंस रही थी तुम..?
साक्षी:लेकिन मम्मा मैंने कहा ना,मैं अपने कमरे में नहीं थी।मैं तो शाम से यहीं पर बैठकर टीवी देख रही हूं, आपको यकीन ना हो तो आप दादी से पूछ लो।
रेवती को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, की आखिर साक्षी उससे झूठ क्यों बोल रही है,और अगर एक बार को साक्षी की बात को सच मान भी ले।तो फिर जिसे उसने अभी कमरे में अजीब ढंग से हंसते और बातें करते हुए देखा था वह कौन था।
रेवती:तुम यह बताओ तुम्हें कुछ खाया…?
साक्षी:नहीं मम्मा दादी अपने कमरे में जाकर सो गई थी,मैं तो कब से आपका ही वेट कर रही हूं।
रेवती:अच्छा ठीक है मैं खाना लगाती हूं,तुम हाथ मुंह धो लो।
कुछ देर में रेवती ने टेबल पर खाना लगा दिया था,साक्षी डाइनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठ गई थी।
रेवती:क्या बात है आज डाइनिंग टेबल पर पापा की याद नहीं आई,रोज तो जिद करती हो कि पापा जब तक नहीं आएंगे तब तक खाना नहीं खाओगी।
मां की बात को अनसुना करके साक्षी एक टक बस अपनी गुड़िया को देख-देख कर मुस्कुरा रही थी।
साक्षी अपनी गुड़िया से:तुम्हें भूख लगी थी ना,चलो खाना खाते हैं।
साक्षी अपनी मां से:मुझे यह सब नहीं खाना बहुत भूख लगी है,मेरे लिए चिकन लेकर आओ।
साक्षी की मां:क्या बात कर रही हो,तुम जानती हो ना हमारे घर में कोई भी मांस नहीं खाता।किससे सिख रही हो तुम यह सब बातें..?
साक्षी:मैंने कहा ना मेरे लिए मांस लेकर आओ वरना मैं खाना नहीं खाऊंगी..!
रेवती:देख रही है मां जी आप,कितनी जिद्दी होती जा रही है।कहती है चिकन खायेगी और अगर नहीं दिया तो खाना नहीं खायेगी।मैं भी देखती हूं कब तक खाना नहीं खायेजी,खबरदार जो आज के बाद मेरे सामने नॉनवेज खाने की बात भी की तो..!
रेवती को गुस्से में बोलते देख साक्षी डाइनिंग टेबल से उठकर अपने कमरे में चली जाती है।
सास:अरे छोड़ो भी रेवती बच्ची है,स्कूल में किसी बच्चे से सुन लिया होगा।हमारे घर में तो इसने कभी किसी को खाते हुए देखा नहीं,बच्चे बाहर से काफी चीज सीख कर आते हैं।इतना परेशान होने की कोई बात नहीं है ,प्यार से समझाओ मान जाएगी।
सास की बात सुनकर रेवती अपने आप को शांत करती है।और साक्षी के कमरे में जाती है ।
रेवती:साक्षी बेटा जिद नहीं करते ना,आप जानते हो ना हमारे घर में कोई नॉनवेज को छूता तक नहीं है।फिर ऐसी चीजों की डिमांड क्यों करती हो,जो मम्मा पूरी नहीं कर सकती।अच्छा ठीक है आज मम्मा आपके लिए स्पेशल पास्ता बनाएगी,चलो अब जल्दी से आ जाओ।
रेवती अभी साक्षी से बात कर ही रही थी, कि अचानक साक्षी के कमरे की लाइट बंद हो जाती है।और कमरे की खिड़की तेज आवाज के साथ खुल जाती है,जिससे रेवती चौंक जाती है देखते ही देखते कमरे में तेज हवा का झोंका आता है और रेवती को ऐसा महसूस होता है जैसे कोई तेजी से उसे छूकर गुजरा हो।
रेवती:मा जी लाइट को क्या हुआ साक्षी कहां हो तुम..?
रेवती का इतना कहना था कि अचानक साक्षी की गुड़िया उसके ऊपर छलांग लगा देती है,अचानक से गुड़िया के उसके ऊपर आ जाने से रेवती के मुंह से जोरदार चीख निकल जाती है।और वह जमीन पर गिर पड़ती है
तभी कमरे की लाइट ऑन हो जाती है,और रेवती देखती है कि उसके ऊपर साक्षी की गुड़िया पड़ी हुई है।और रेवती के चेहरे पर खून बह रहा है,ऐसा लग रहा था जैसे किसी बिल्ली ने उसके चेहरे पर पंजा मार दिया हो।
रेवती ने देखा कि साक्षी उसे जमीन में गिरे देखकर जोर-जोर से हंस रही है।
रेवती:यह क्या हो गया मेरे चेहरे पर साक्षी,यह गुड़िया अचानक से मेरे ऊपर कहां से आ गई ..?और तुम हंस क्यों रही हो इसमें हंसने जैसी क्या बात है..?
साक्षी(गंभीर होकर):आपने खाने के लिए मना किया ना,इसलिए आपके साथ यह सब हुआ है।उसे यह सब बिल्कुल पसंद नहीं है,आगे से उसे कभी किसी चीज के लिए टोकना मत ..!वह अभी भी गुस्से में है।
रेवती(गुस्से में):यह सब क्या बकवास कर रही हो तुम,कौन गुस्से में है तुम्हारा दिमाग ठिकाने पर नहीं है क्या..?आज के बाद अकेले में कमरे में बैठकर नहीं खेलोगी तुम,पूरा दिन इस कमरे में घुसी रहती हो दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा चलो जाकर दादी के साथ खेलो।
रेवती के डांटने पर साक्षी गुस्से में नजरे तिरछी करके अपनी मां को घूरने लगती है।
रेवती:सुना नहीं तुमने मैंने क्या कहा..?
सास:रेवती बेटा क्यों इतना गुस्सा कर रही हो तुम,शांत हो जाओ साक्षी को मैं अपने कमरे में ले जा रही हूं। तुम थोड़ी देर आराम करो,दवा लगा लो आराम मिलेगा।
रेवती की सास साक्षी को अपने कमरे में ले गई थी।और दूसरी ओर रेवती फर्स्ट एड के बाद अपने कमरे में जाकर लेट गई थी,लेकिन उसके अंदर डर का बीज जम गया था। साक्षी के कमरे में जाते ही अचानक से कमरे की लाइट कट जाना,और फिर उस गुड़िया का उसके ऊपर किसी जंगली जानवर की तरह झपटना और साक्षी का वो अजीबोगरीब व्यवहार रेवती समझ नहीं पा रही थी,कि आखिर उसके घर में हो रही इन सब अजीबोगरीब घटनाओं का मतलब आखिर है क्या..?वैसे भी कोई भी पढ़ा लिखा समझदार इंसान एक निर्जीव डॉल पर शक नहीं कर सकता,इसलिए रेवती के मन में साक्षी की डॉल को लेकर अभी तक कोई शक नहीं था।मिस्टर आडवाणी और उनका छोटा भाई बिराज आज बिजनेस ट्रिप पर थे,आज की रात रेवती उसकी सास सुनीता और साक्षी ही घर पर थे।खाना खाने के बाद रेवती को नींद आ गई थी। और वो अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी।
देर रात बिल्ली के रोने की आवाज सुनकर रेवती की नींद खुलती है।बिल्ली की भयानक आवाज सुनकर रेवती डर से कांप उठी थी ,तभी उसे बेटी साक्षी का ख्याल आता है। रेवती अपने कमरे से निकलकर साक्षी के कमरे में जाती है,तो देखती है वहां पर हर तरफ खून बिखरा हुआ है और पास ही में रेवती की पालतू बिल्ली के शरीर के टुकड़े बिखरे हुए हैं।और साक्षी के मुंह और कपड़ों पर भी खून के निशान दिखाई दे रहे थे,और वो रुमाल में हाथ पोंछकर अपने हाथों से खून साफ करने की कोशिश कर रही थी।
कमरे का वीभत्स नजारा देखकर रेवती का कलेजा मुंह को आ गया था।
रेवती(हकलाते हुए):ये सब क्या है..?किसने किया ये सब..?
मांस के टुकड़ों को देखकर रेवती किसी तरह अपनी उल्टी को रोकने की कोशिश कर रही थी,लेकिन अपनी बात पूरी करने से पहले ही वो कमरे से बाथरूम की ओर दौड़ लगा देती है। जहां उसे उल्टी हो जाती है
कुछ देर बाद…
रेवती:साक्षी ये खून ये मांस के टुकड़े… क्या हुआ है यहां..?
साक्षी(हंसते हुए):बहुत भूख लगी थी खा लिया उसे…अब अच्छा लग रहा है..!
साक्षी की आंखों में खून उतर आया था।चेहरे पर किसी राक्षस जैसे डरावने भाव थे और वो खून से सने मुंह से उस बिल्ली को देखकर मुस्कुरा रही थी।
रेवती(हकलाते हुए):क्या…. मतलब तुमने पॉली को खा लिया..?कैसे..? क्यों..?ये सब सच नही ही सकता मै जरूर कोई सपना देख रही हूं..!
रेवती को अपनी आंखों और कान पर भरोसा नहीं हो रहा था।उसकी छह साल की बच्ची कैसे एक बिल्ली को कच्चा चबाकर खा सकती है..?रेवती को तो मानो बेहोशी आ रही थी।रेवती एक बार फिर साक्षी की ओर देखती है,उस पल में उसे साक्षी उसकी बेटी नहीं कोई दानव नजर आ रही थी।किसी तरह गिरते पड़ते रेवती वहां से भागकर अपनी सास के कमरे पर पहुंचकर दरवाजा खट खटाने लगती है।
रेवती(रोते हुए):मां जी जल्दी दरवाजा खोलिए..!जल्दी करिए मां जी..!
बहु की आवाज सुनकर सास सुनीता दरवाजा खोल देती है।सामने सास को देख रेवती उनके गले लगकर रोने लगती है।
रेवती:मां जी हमारे घर में कुछ है.!कुछ ऐसा जो मुझे अपने आसपास महसूस हो रहा है।वो मेरी बच्ची पर हावी हो रहा है।साक्षी साक्षी नहीं है..!वो साक्षी हो ही नहीं सकती..;.. और कुछ देर पहले जो बिल्ली के रोने के डरावनी आवाज आ रही थी वह तो आपने भी सुनी होगी ना मांजी।
सुनीता: बिल्ली की आवाज..? क्या बात कर रही है। हुआ क्या है तू मुझे पूरी बात बता..? मैने तो कोई आवाज नहीं सुनी।
सास सुनीता कमरे में ले जाती है,और गिलास में पानी पीने के लिए देती है।।।
सुनीता:अब ठीक हो तुम..?बोलो बेटा क्या बात है..?
रेवती:मैं अपने कमरे में सोई हुई थी तभी मैने बिल्ली के रोने की डरावनी आवाज सुनी।मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ तो मुझे साक्षी की चिंता होने लगी। उसके कमरे में जाकर
मैने देखा साक्षी हमारी पॉली को मारकर खा रही थी।
इतना कहकर रेवती जोर जोर से रोने लगती है।
रेवती:मेरी बच्ची ने कभी अंडा तक नहीं खाया,आज वो एक जानवर को मारकर कच्चा खा गई..? ऐसा कैसे हो सकता है मांजी..!
सुनीता:अच्छा तू चल मेरे साथ…! साक्षी के कमरे में!
रेवती:मैं वहां नहीं जा सकती..!वो साक्षी नहीं हैं वो अभी कुछ भी कर सकती हैं।मां जी आप भी मत जाइए वहां ।
सुनीता: : बेटा तू चल मेरे साथ मुझे अपनी आंखों से देखने तो दे। घबरा क्यों रही है मैं हूं ना तेरे साथ..!
रेवती जाना तो नहीं चाहती थी लेकिन सास सुनीता के बार-बार कहने पर वह उनके साथ फिर से बेटी के कमरे में जाने के लिए तैयार हो जाती है।
सास सुनीता आगे आगे चल रही थी और रेवती घबराते हुए धीमे कदमों से उनके पीछे-पीछे आ रही थी।
साक्षी के कमरे के सामने पहुंचकर सुनीता भड़ाक से दरवाजा खोल देती है और फिर थोड़ा घबराते हुए अपना कदम कमरे के अंदर रखती है।
अंदर का नजारा देखकर सुनीता बिल्कुल हैरान रह गई थी उसकी चेहरे के भाव बदलने लगे थे और त्यौरियां चढ़ गई थी ।
आखिर ऐसा क्या देख लिया सुनीता ने कमरे के अंदर जो वह हक्की बक्की रह गई है।
क्या डॉल की सच्चाई सामने आ जाएगी ..? क्या वाकई रेवती को गलतफहमी हुई है जानने के लिए देखना न भूले कहानी का अगला भाग..!
और हां दोस्तों कहानी अगर पसंद आई हो तो हमारे चैनल वन्स अपॉन ए टाइम हिंदी को सब्सक्राइब जरूर करे और बेल आइकन को प्रेस करना न भूले।
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