"मम्मी ये अंकल आये है, इनका कोई सामान रह गया था कल दुकान पर। वो पूछ रहे है।" दुकान पर बैठी अविका चिल्लाई।
"आ रही हूँ।" ये कह कर अविका की माँ रेखा हाथो से पानी झटकती हुई दौड़ कर आई।
"मम्मी कोई समान रह गया था इनका?"
"हां...वो लॉकर के ऊपर एक पैकेट रखां होगा वो उतार दे जरा।"
अविका ने चेयर पर चढ़ कर वो पैकेट उतार दिया।
"ये लीजिये भाईसाब। आपके दाल चावल का पैकेट।" रेखा ने दुकान के बाहर खड़े ग्राहक को पैकेट पकड़ाया।
"अरे रेखा जी मैं कल बड़ा परेशान हुआ घर पहुँच कर। फिर याद आया कि यही भूल गया था। चलो अपने घर की दुकान है कहाँ जाएगा सामान ये सोच कर फिर मैं नहीं आया।" वो ग्राहक बड़े खींसे निपोर कर बोला।
"अंकल वो ऑन्टी आपके बारे में पूछ रही थी।" अविका सेब खाते हुए बोली।
"कौन आंटी?"
"अरे वो आपके बगल में घर है जिनका। क्या नाम है उनका? हां डोलमा आंटी।"
"अच्छा डोलमा मेरे बारे में पूछ रही थी? क्या पूछ रही थी?"
"वो कह रहीं थी कि जॉन अंकल दिखे तो उन्हें भेजना।"
"अरे तो पहले क्यो नहीं बताया?" ये कह कर जॉन अंकल पैकेट लेकर जल्दी जल्दी भाग गए।
"ये जॉन हर बार जान बुझ कर सामान छोड़ जाता है। और फिर आ जाता है दिमाग खाने सुबह सुबह।" रेखा के कहने से पता चल रहा था कि वो जॉन की आदत से परेशान है।
अविका अचानक टाइम देख चिल्लाई - "ओह गॉड मम्मी दस बज गए। मुझे निकलना है बाई।"
रेखा- "अरे नाश्ता तो कर ले।"
अविका- "नहीं मम्मी टूरिस्ट ठीक ग्यारह बजे होटल से निकलेगा। अगर मैं टाइम पर नहीं पहुँची तो कही कोई और गाइड ना हायर करले।" ये कह अविका भागती हुई जाकर गाड़ी में बैठी और चली गयी।
अविका नेगी कसोल में अपनी माँ और छोटे भाई के साथ रहती है। यहां उनका छोटा सा खूबसूरत घर बना है। घर से जुड़ी थोड़ी सी जमीन है जिस पर सब्जियां उगी रहती है। अविका की मां घर में ही ग्रोसरी स्टोर चलाती है। अविका के पापा जब अविका तेरह साल की थी तभी गुजर गए थे। वो अपने पीछे काफी कर्जा छोड़ गए थे, जिसकी भरपाई के लिए अविका और उसकी मां दिन रात मेहनत करती थी। अविका का भाई अनुज अभी सिर्फ दस साल का था।
अविका तेईस साल की मेहनती लड़की है। हालांकि उसकी शक्ल अच्छी है पर उसे इतना टाइम नहीं होता कि वो बैठ के सज संवर सके। सुबह उठ कर वो सबसे पहले उन लोगो का समान पहुचाने जाती है जो कॉल पर आर्डर कर समान मंगाते है। इससे उसे कुछ एक्स्ट्रा पैसे मिल जाते है। उसके बाद वो कसोल आने वाले टूरिस्ट के लिये गाइड का काम करती है। उसने टूरिस्ट एजेंसी से एक कार भी किराए पर ले रखी है जिसमें वो टूरिस्ट को कसौली और आस पास की जगहें घुमाती हैं। वो लडक़ी होकर भी लड़को से ज्यादा मेहनत करती है।
कसोल विदेशी टूरिस्ट के बीच ज्यादा लोकप्रिय है। खासकर इजरायली टूरिस्ट के बीच में। इजरायल के टूरिस्ट यहां आते है और महीनों रहते है, उनकी वजह से इसे मिनी इजरायल भी कहा जाने लगा है।
अविका स्पीड से गाड़ी चलाती हुई होटल के बाहर पहुँच गयी। जिस रशियन टूरिस्ट अलेक्जेंडर ने उसे हायर किया था वो उसका वैट ही कर रहा था। अविका का पाला कई देशों के लोगो से पड़ता था। इसलिए उसे भी टूटी फूटी विदेशी लैंग्वेजेज आने लगी थी।
अलेक्जेंडर- "तुम लेट क्यो आई हो?"
अविका- "सॉरी सर गाड़ी पंचर हो गयी थी रास्ते में।" अविका ने साफ झूठ बोला।
अलेक्जेंडर ने ऊपर से नीचे तक अविका को ध्यान से देखा। डेनिम की ढीली सी जोगर, व्हाट टीशर्ट, टीशर्ट के ऊपर डेनिम की ही जैकेट ओर उस जैकेट के ऊपर एक और गर्म जैकेट। बिना लिपस्टिक के मुस्कुराते होंठ, चमकती सी आंखे, रूखे बालो की ऊंची सी पोनी। पैरों में पहने हुए सफेद स्नीकर।
अलेक्जेंडर चुपचाप गाड़ी में बैठ गया।
अविका ने गाड़ी में बैठ कर पूछा- "पहले आप कौन सी जगह देखना चाहेंगे?"
अलेक्जेंडर- "कोई भी अच्छी सी जगह ले चलो।"
अलेक्जेंडर रशियन था, अविका जानती थी कि रशियन को क्या पसन्द आएगा। वो अलेक्जेंडर को तोश ले गयी। तोश कसोल से बीस मिनट की दूरी पर बसा एक छोटा पर बेहद सुंदर गाँव है। यहां के घर में टूरिस्ट्स के लिए होम स्टे की फैसिलिटी होती है। ये गाँव हिप्पिज़ के लिए स्वर्ग की तरह है। आसमान में छाये धुँआरे बादल, बलखाती सड़क, पहाड़ों पर सिर उठाये खड़े ओक और कोनिफर के बड़े बड़े पेड़, बदन को कपांती ठंडी हवा।
अविका ने गाड़ी एक क्लबनुमा घर के सामने रोकी।
अविका- "ये यहां की फेमस जगह है। आई एम स्योर आपको पसन्द आएगी। यहां पर कसोल की फेमस मलाना क्रीम मिलती है। "
मलाना क्रीम सुन कर अलेक्जेंडर की आंखों में चमक आ गयी। उसने गाड़ी से उतरने से पहले अविका को पूरे दिन का पेमेंट दिया और बोला- "तुम शाम को मुझे यहां से ले जाना। तब तक के लिए तुम फ्री हो।"
अविका भी खुश हो गयी, अब पूरा दिन नहीं जाएगा। तब तक कोई और काम कर लेगी।
अविका गाड़ी को टर्न कर रही थी तभी उसकी नजर सामने के रेस्टॉरेंट पर पड़ी। रेस्टोरेंट का मैनेजर एक इंडियन टूरिस्ट को धक्के मार कर निकाल रहा था।
मैनेजर- "कितनी बार मना किया है यहां इंडियन्स अलौ नहीं है। फिर क्यो बार बार आ जाता है? समझ नहीं आता ये इंडियन लोग कसोल आता ही क्यो है?"
उस टूरिस्ट को अपने ही देश की एक जगह में इस तरह बाहरी के जैसा बर्ताव होना बुरा लगा। वो भी बोला- "क्यो नहीं आएंगे? क्या कसोल इंडिया से बाहर है? नहीं है ना। तो बिल्कुल आएंगे रोके कौन रोकता है। ये इंडिया है इजरायल नहीं जहां सिर्फ इजरायलियों की चलेगी।"
कुछ इजरायली भी आकर उस टूरिस्ट से भिड़ गए। वो अकेला था और वो कई , आखिर में उसे ही जाना पड़ा। ये यहां रोज का है। ये जगह एक तरह से इंडियन्स के लिए बैन हो चुकी है।
अविका को ये देख कर बुरा लगता था। आखिर अपने ही देश में अपने ही देश के लोगो के साथ ऐसा बर्ताव क्यो? और इजरायली यहां ऐसे रहते है जैसे ये उन्ही का हो।
अविका यहां से सीधा घर चली गयी। उसे देख उसकी मां रेखा बोली- "क्या हुआ अवि आज तू जल्दी आ गयी?"
अविका-" हां वो टूरिस्ट तो अब दिन भर सुट्टा मार के पड़ा रहेगा। शाम को जाना है उसे लेने। तब तक फ्री हूँ, तो सोच रही हूँ अगर डिलीवरी हो और तो कर आउं।"
रेखा- "नहीं मौसम ठंडा हो रहा है। वैसे भी तुझे रोज तो टाइम मिलता नहीं है, आज मिला है तो जाके आराम कर।"
अविका- "अरे मम्मी मुझे दिन में सोना पसन्द नहीं है।"
अनुज जो ग्रोसरी स्टोर में ही बैठा होमवर्क कर रहा था। वो बोला- "मान लो दीदी और सो जाओ। वैसे भी ये खुशी सबको नसीब नहीं होती।"
रेखा- " तू चुपचाप होमवर्क कर अपना। और तुम खाना खाकर थोड़ी नींद लेलो। फिर कर लेना कोई और काम।"
अविका ने खाना खाया और मां की जिद पर लेट गयी। वो थकी तो रहती ही थी, वो सोई तो ऐसी सोई की सीधी छह बजे आंख खुली। हड़बड़ा कर उठ बैठी बाहर अंधेरा देख कर उसने अपने सिर पर हाथ मारा- "अरे बाप रे। वो रशियन टुन्न होकर पड़ा होगा, उसे लेने जाना है। मम्मी मैं जा रही तोश।"
रेखा किचन से चिल्लाई- "आराम से जाना, और हां ज्यादा देर मत लगाना जल्दी आ जाना।"
कसोल का इलाका औरतों के लिए सुरक्षित माना जाता है। यहां देश के अन्य हिस्सों की तरह औरतें असुरक्षित नहीं है। यहां लडकिया औरतें कितने भी समय अकेली निकल जाती है। अविका भी इसी वजह से यहां बेफिक्र होकर कही भी चली जाती थी कोई भी काम करती थी।
अविका जब तोश पहुँची तो अलेक्जेंडर नशे में धुत था। अविका ने अलेक्जेंडर को उसके होटल छोड़ा और वापिस अपने घर के लिए निकल गयी। रात के आठ बज चुके थे। हल्की बूंदाबांदी हो रही थी जिसकी वजह से रास्ता फिसलन भरा हो गया था। अविका बहुत सम्हाल सम्हाल कर गाड़ी चला रही थी।
रास्ते में एक टोल पड़ता था। उसपे बैठने वाला गार्ड भी अविका को जानता था। छोटी जगह पर अक्सर सभी एक दूसरे को जानते है, फिर अविका को तो बराबर बाहर ही काम करना होता था।
गार्ड-" अविका इतना लेट कहाँ से आ रही हो? देखो मौसम भी अच्छा नहीं है।"
अविका- "अरे अंकल एक टूरिस्ट था उसी को छोड़ कर आ रही हूँ।"
गार्ड-" चलो जल्दी जाओ घर। देखो रास्ते पर एक भी गाड़ी नहीं है। ना अब कोई आने वाली है। चलो तुम्हारे पीछे मैं भी आता हूँ।"
अविका टोल से आगे बढ़ गयी। एक जगह पर पहाड़ी ढलान थी जहां पर रास्ता एकदम घुमा हुआ था। नीचे कई फीट गहरी खाई थी। अविका उस रास्ते पर गाड़ी को मोड़ रही थी कि सामने एक साया आ गया। उसे देख अविका की चीख निकल गई। उसने पूरी ताकत से पैर ब्रेक पर दबाए, गाड़ी के टायर चीखते हुए रुक गए। पर रास्ता फिसलन भरा था , रुकते रुकते भी गाड़ी आगे खिसक गई। अविका तुरन्त गाड़ी से निकल कर बाहर आई। उसने हेड लाइट की रोशनी में देखा कि उसकी गाड़ी के सामने आदमी पड़ा है।
उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। उसने पहले सोचा कि छोड़ कर जाए फिर दिमाग में आया कि जिंदा हुआ तो। अविका जे डरते डरते उसकी गर्दन पर हाथ रखा तो नब्ज चल रही थी। अब अविका को ये तो राहत मिली कि ये जिंदा है , पर अब वो करे क्या? अविका ने सोचा कि किसी ने नहीं देखा छोड़ कर जाती हूँ। पर तभी दूर से आती हॉर्न की आवाज सुनाई दी, और उसे याद आया कि गार्ड अंकल तो उसके पीछे ही आ रहे है। यहां शाम से ही कोई गाड़ी नहीं निकली तो सीधा शक उसी पर जाएगा। कही उसे जेल ना जाना पड़े। ये सोचते ही अविका डर गई। उसने जैसे तैसे कर जल्दी जल्दी उस आदमी को गाड़ी की बैकसीट पर डाला। उसका ब्लैक सूट मिट्टी में सना हुआ था , सिर से खून रिस रहा था। उसे गाड़ी में डालने में अविका हांफ गयी। उसको गाड़ी में डालकर अविका ड्राइविंग सीट पर बैठी ही थी कि पीछे से गार्ड अंकल की कार आती दिखी। अविका ने सोचा कि अगर वो आ गए तो फालतू का सवाल जवाब करेगे इसलिये वो जल्दी से कार स्टार्ट कर घर की ओर निकल गयी।
घर पर उसकी मां इंतजार में बैठी थी। उन्होंने अभी तक स्टोर बन्द नहीं किया था। अविका को देख कर दौड़ कर बाहर आई-" क्या हुआ इतनी देर कहा लगाई? पता है ना कि मौसम खराब हो रहा है। और ये कपड़े गीले कैसे कर लिए ?मिट्टी भी लगा रखी है।"
अविका डरी हुई सिर झुकाए खड़ी थी। "क्या हुआ? कुछ बोल क्यो नहीं रही?
"वो मम्मी....वो...।" अविका के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी।
"अरे क्या हुआ? कुछ बताओगी?"
"मम्मी वो मैं आ रही थी तो रास्ते मे मेरी गाड़ी से एक आदमी का एक्सीडेंट हो गया।" अविका एक सांस में बोल कर अपनी मां का रिएक्शन देखने लगी।
"हे भगवान ये क्या हो गया? लाश कहां पड़ी है? किसी ने देखा तो नहीं?"
अविका- "लाश कौन सी लाश?"
"वही आदमी जिसका एक्सीडेंट हुआ उसकी लाश।"
अविका-" वो जिंदा है। किसी ने नहीं देखा इसलिए मैं उसे उठा कर ले आई। वो बेहोश गाड़ी में। पड़ा है।"
रेखा ये सुन कर दौड़ कर आई और दरवाजा खोल कर देखा। पीछे की सीट पर एक पच्चीस की उम्र का खूबसूरत नौजवान पड़ा था।
रेखा-" हम्म.... यहां का तो नही जान पड़ता। शक्ल सूरत से अच्छे घर का मालूम होता है।"
अविका-" अब हम क्या करे? इसे होस्पिटल ले चले?"
रेखा- "पर होस्पिटल का खर्चा कौन देगा?
अनुज भी जाग रहा था , वो भी ये शोर सुन कर बाहर आ गया था। उसने मोबाइल की टॉर्च जला कर देखा और बोला-"इसके हॉस्पिटल का खर्चा इसी से निकल आएगा।"
रेखा-"हैँ.... वो कैसे?"
अनुज- "ये देखो राडो के लिमिटेड एडिशन की वॉच। ये एक वाच की कीमत ही लाखो में है।"
रेखा- "तब तो ये किसी बहुत पैसे वाले घर का मालूम पड़ता है।"
अविका-"चोर भी तो हो सकता है।"
रेखा-"अरे हां। चलो जो भी हो हम इसको हॉस्पिटल में छोड़ आते है कह देंगे कि रोड पर पड़ा मिला था।"
अविका-"पर अगर ये कहा तो पुलिस आएगी, फिर सारी बात पता कि जाएगी और मैं फंस जाऊंगी।"
रेखा- "अरे हा ये भी है।"
अनुज- "बोल देना की हमारा दूर का रिलेटिव है।"
रेखा-" पर ये तो बता देगा ना कि हम इसके रिलेटिव नहीं है।
अनुज- "वो कैसे बताएगा मम्मी? वो तो बेहोश है। वैसे भी उतने अंधेरे में उसने सामने से सिर्फ दीदी की गाड़ी की हेडलाइट्स देखी होगी। उसे क्या पता होगा कि किसने उसे ठोक दिया?"
अविका-" हाँ मम्मी ये सही कह रहा है। हम यही बोल कर इसका इलाज करवाते है। ""
रेखा- "हां चल कही बेचारा मर ना जाये।"
अविका रेखा को बिठा कर हॉस्पिटल के लिए चल दी। अनुज को घर मे ही छोड़ दिया था।
डॉक्टर को अविका ने बताया कि वो पहाड़ी से फिसल कर गिर गया था। डॉक्टर्स ने उसे तुरन्त आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। उसका चेकअप करने के बाद डॉंक्टर ने बताया - "ब्रेन में काफी गहरी चोट लगी है। ब्लड क्लोट्स बन रहे है। हमें इमिडेटली ऑपरेशन करना होगा। उसके बाद भी हम गारंटी नहीं ले सकते कि वो पूरी तरह ठीक हो जाएगा।"
अविका- "क्या प्रॉब्लम होगी आगे उसे?"
डॉक्टर - "ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी है। उसे बाद में डिमेंशिया भी हो सकता है। इसके लिए आगे कही और इलाज कराना होगा। हम फिलहाल उसकी जान बचा सकते है।"
अविका- "आप उसकी जान बचाइए वो ज्यादा जरूरी है।"
डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी करने चला गया। ।
रेखा- "क्या बताया डॉक्टर ने?"
अविका- "डॉक्टर ने कहा है कि उसकी याददाश्त जा सकती है।"
एक हफ्ते बाद
हॉस्पिटल से फ़ोन आया था कि पेशेंट को होश आया गया है। अविका अपनी मां के साथ हॉस्पिटल पहुँच गयी। आईसीयू वार्ड में पहुच कर देखा कि वो जाग कर बैठा था और डॉक्टर्स से बात कर रहा था।
अविका को देख कर डॉक्टर उससे बोला- "लो आपकी फैमिली भी आ गयी।
ये सुन वो पीछे पलटा। अविका ने अभी तक उसे ठीक से देखा नहीं था। रोज होस्पिटल रेखा ही आती थी। वो पच्चीस छब्बीस की उम्र का खूबसूरत लड़का था। उसकी आंखें भूरे रंग की थी, चेहरा पतला और थोड़ा सा लम्बा था, रंग चमकदार गोरा, घनी और थोड़ी चौड़ी भौंहे और चेहरे पर खड़ी बेतरतीब सी रेडिश ब्राउन दाढ़ी मूंछे। बाल भी चमकते हुए भूरे रंग के थे। वो शक्ल से आधा विदेशी और आधा इंडियन लगता था।
जब डॉक्टर ने कहा कि उसकी फैमिली आ गयी तो वो पलटा पर सामने अविका को देख कर लग रहा
था कि वो उसे नहीं पहचानता। वो अविका को थोड़ा ध्यान से देखता रहा मानो याद करने की कोशिश कर रहा हो फिर बोला- "आप कौन हो? और मैं यहां होस्पिटल में क्यो हूँ?"
क्रमशः।
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