अविका सुबह सुबह काम में लगी हुई थी। जिन लोगो ने सामान का आर्डर किया था, उसे वो गाड़ी में रख रही थी। अनुज स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहा था। रेखा किचन में काम कर रही थी। टोटो वॉशरूम से निकल कर सोफे पर रजाई ओढ़े बैठा था। अविका समान गाड़ी में रख कर अंदर आयी।
"मम्मी मैं जा रही। डिलीवरी कर आउं।"
रेखा ने पीछे मुड़ कर टोटो को देखा और लगभग फुसफुसा कर बोली- "ये अब यही रहेगा और मुफ्त की खायेगा। ऐसे कब तक चलेगा?"
अविका भी धीरे से बोली-"मुझे भी कुछ समझ नहीं आता। पर फिलहाल इसे रखना ही ठीक है। अगर ये बाहर गया तो सबको पता चल जाएगा कि कुछ गड़बड़ है।"
"हम्म.....।" रेखा सिर हिला कर फिर काम में लग गयी।
अविका किचन से निकल कर बाहर जा रही थी तो टोटो बोला- "तुम कहाँ जाती हो डिलीवरी करने?"
"पूरे कसोल में। और कभी कभी बाहर भी।"
"में भी चलूं।" वो सोफे से उठ कर खड़ा हो गया। उसके खड़े होते ही उसके अजीब कपड़े दिखे। जिसे देख कर अविका हसने लगी और बोली-" ऐसे तो नहीं जा सकते हो। पहले तुम्हारे लिए कपड़े लाने होंगे। और फिर अभी तुम्हारी चोट भी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है तो तुम अभी यही रहो। चलो मैं चलती हूँ।" अविका काम करने चली गयी।
घर पर अब रेखा टोटो और अनुज रह गए थे। अनुज स्कूल जाने वाला था पर उसके स्कूल से फ़ोन आ गया कि सर्दी की वजह से एक हफ्ते की छुट्टी कर दी गयी है।
रेखा ने काम करने के बाद टोटो पर नजर डाली। वो उसी तरह सोफे पर बैठा था। रेखा चाय का कप हाथ में लेकर उसके बगल में बैठ कर बाते करने लगी- "तुम्हे पता है टोटो....कि हम लोगो पर पहले से ही कितना कर्ज है।"
टोटो ने बड़ी ही मासूमियत से ना में सिर हिलाया।
"अविका के पापा हम पर काफी कर्जा छोड़ कर गए थे। और अब तुम्हारे इलाज के लिए भी काफी कर्जा लेना पड़ा है हमें। कुल मिला कर अब हम सब लोगो का रोम रोम तक कर्जे में है।" रेखा बड़ी गहरी सांस लेकर बोली।
ये बातें सुन कर अनुज ने हैरान होकर रेखा को देखा और आंखे मटकाई। जिसका मतलब था कि इसके इलाज के लिए कब कर्जा लिया।
"ओह्ह बुआ जी आप लोगो ने इतना सब किया। अगर आप लोग ना होते तो मैं शायद जिंदा ना होता। आई एम रियली थैंकफुल टू आल ऑफ यु।"
रेखा ने सुड़क कर चाय का घूँट भरा और सिर हिलाते हुए बोली- "पर देखो टोटो हम लोगो पर पहले से ही बहुत कर्जा था, अब और हो गया। तो हम अकेले इतना नहीं चुका सकते।"
टोटो ने सुना और बात को समझकर बोला- "मैं क्या हेल्प कर सकता हूँ।"
रेखा ने टोटो को ध्यान से देखा मानो चेक कर रही हो कि ये किस काम आ सकता है- "तुम कोई नौकरी क्यो नहीं देख लेते? जो पैसा कमाओ उससे कर्जा चुका देना।"
"पर मुझे नौकरी मिलेगी कैसे मुझे तो कुछ भी याद नहीं है। ना ही ये मालूम कि मेरी क्या एजुकेशन है।"
रेखा ने व्यंग से मुस्कान देकर कहा-" एजुकेशन और तुम्हारी। अरे तुम्हारा घर फटेहाल था। शराबी था तुम्हारा बाप....।"
टोटो का ये सुन कर मुंह उतर गया। "क्या सच में मैं इतने खराब परिवार से हूँ?"
"हां।"
"पर आप टेंशन ना ले बुआजी। मैं अब पूरी कोशिश करूंगा खुद को बदलने की। मुझे नहीं याद की मेरी पिछली जिंदगी कैसी थी। पर अब ये जो जिंदगी है वो आप लोगो की दी हुई है। मैं कभी आप सबको परेशान नहीं होने दूँगा।"
"तो कोई काम धंधा देखो।"
टोटो सिर्फ हां में सिर हिला दिया। थोड़ी देर में अविका भी आ गयी। उसके आते ही रेखा ने उसे गर्मागर्म चाय और मैग्गी दी। जो कि अविका को बहुत पसंद था।
वो टोटो के बगल से चेयर पर बैठ कर खाने लगी। टोटो को भी भूख लग आयी थी। सुबह के दस बज गए थे अभी तक उसने नाश्ता नहीं किया था। उसके पेट से कुर्रकुर्र की आवाज आ रही थी। पास बैठी अविका को खाते देख उसके मुंह से पानी आ रहा था। अविका ने उसे इस तरह अपनी तरफ देखते हुए देखा तो बोली-" ऐसे क्या देख रहे हो?"
वो गटकते हुए बोला-" भूख लगी है।"
अविका ने अपनी मां को आवाज लगाई- "मम्मी टोटो को नाश्ता नहीं दिया?"
रेखा ने किचन से ही झल्ला कर कहा-" अभी मैंने भी नहीं खाया है। बनाउंगी तभी तो दूँगी। अभी सिर्फ तेरे लिए बनाया है।"
अविका आगे कुछ बोलती की उसका फ़ोन बज उठा। कॉल टूरिस्ट एजेंसी से था , जिसमे अविका गाइड के तौर पर काम करती थी। "क्या? ...हां....हां ओके आई एम कमिंग।" अविका ने मैग्गी का बाउल टेबल पर रखा और चिल्लाई-" मैं जा रही मम्मी।"
"अरे इतनी जल्दी। नाश्ता तो कर ले।"
"अरे बहुत इम्पोर्टेन्ट कस्टमर आया है।" ये कह अविका ने गाड़ी की चाबी उठाई और भाग गई।
टोटो ने सोफे से उठ कर मैग्गी का बाउल उठाया और खाने लगा। रेखा ने टोटो को देखा और अपने आप में बड़बड़ाई- "पेट है कि कुआं।"
अविका सीधा टूरिस्ट एजेंसी पहुँची। अविका सीधा आफिस में अंदर जाकर बॉस से बोली-" कहां है वो कस्टमर?"
एजेंसी के मालिकने अविका को देखा और बोला-" तू कभी आराम से कोई काम करती है या हमेशा ऐसे ही जल्दी।"
अविका-" बताओ ना कहाँ है वो? मैं टाइम पर ना पहुँची तो कही कोई और ना उड़ा ले जाये उसे। पता है ना वो पिछली बार भी घुमने पर कितना खर्च किया था।
अविका इस टूरिस्ट एजेंसी हिमालया टूरिज्म के साथ कमीशन पर काम करती थी। उसने गाड़ी भी इसी एजेंसी की ले रखी थी जिसका वो रोज एक निश्चित किराया देती थी। जब भी कोई कस्टमर इस एजेंसी के थ्रू कसोल घूमनेआता तो वो कस्टमर की गाइड ये अविका को रेकमेंड करते थे। अविका जो भी पैसा कमाती उसका एक हिस्सा कमीशन देती थी।
इस एजेंसी का मालिक विराजन कश्यप अच्छे नेचर का आदमी था। उसकी उम्र कोई पचास की होगी और वो बचपनसे अविका को जानता था। वो ये भी जानता था कि पूरे कसोल में अविका जितना कंजूस और पैसे निकालने में माहिर कोई नहीं है। इसलिए वो अविका को ही रेकमेंड करता था।
आज जो कस्टमर आ रहा था वो पहले भी एक बार आ चुका था। और उसने काफी पैसा खर्चा किया था जिससे अविका और एजेंसी दोनों को फायदा हुआ था। इसके अलावा अविका ने कुछ होटल और रेस्टोरेंट में भी जुगाड़ बैठा रखी थी। वो अपने कस्टमर को उन होटलों और रेस्टोरेंट में ले जाती और बदले में उनसे कमीशन लेती थी।
कसोल में सब अविका को मिस ट्वेंटी परसेंटकह कर बुलाते थे। क्योकि वो हर काम में ट्वेंटी परसेंट कमीशन मांगतीथी। वही दूसरे लोग दस या पंद्रह परसेंट लेते थे। जब कोई कहता कि वो ज्यादा क्यो लेती है तो वो कहती मेरे कस्टमर और मेरा काम एक नम्बर का होता है इसलिए।
कश्यप- "हां हां थोड़ा ठहर जा। वो आ रहा है इस बार वो अपनी गाड़ी से आया है...आता ही होगा।
अविका ने सुना तो ठुनककर बोली -"क्या वो अपनी गाड़ी से आया है। फिर मेरी से क्यो घूमेगा? मतलब गए पैसे पानी में, फिर क्यो बुलाया मुझे?"
कश्यप-" अरे वो गाड़ी ही तो ला रहा है गाइड तो उसे चाहिए होगा।"
अविका ने विराजन को देखा और मुह बना कर बोली -" वो सब। घुमा हुआ है। उसे क्यो चाहिएहोगा गाइड?"
कश्यप "अरे वो इस बार होटल में नहीं रुकेगा। उसे होम स्टे चाहिए। तो तेरी नजर में होकोई तो उसे बता देना। नहीं तो उसकी मदद कर देना ढूढने में।"
अविका ने सुन कर सोचा फिर सिर हिला कर बोली-"ह्म्म्म होम स्टे।"
थोड़ी देर मे वो कस्टमर भी आ गया। वो ब्लैक कलर की ऑडी से आया था। अविका ने कार देखी और बुदबुदाई -" चार चूड़ियों वाली गाड़ी। ये तो मेरी सोच से भी ज्यादा बड़ा आदमी है।"
एजेंसी के सामने गाड़ी रोक कर वो गाड़ी से निकला। डार्कब्लू कलर की जीन्स, ब्लैक कलर की विंडशीटर और ऊपर से लम्बा काला ही ओवर कोट। उसने काले ही कलर का शानदार चश्मा लगा रखा है। उसने चश्मा उतार कर अविका को देखा और मुस्कुराया। मुस्कुराते हुए उसके गालों में क्यूट से डिम्पल पड़ते थे। उसके बाल लाइट ब्राउन और रंग काफी गोरा था। पर अविका को इन चीजों से मतलब नहीं था उसे तो मतलब इससे था कि कौन कस्टमर कितना खर्चीला और घुमने वाला है। वैसे भी अविका को आज तक किसी लडके ने भाव नहीं दिया था। क्योकि वो लड़को की पसन्द के सांचे में फिट नहीं बैठती थी।
ना ही तो वो सज संवर कर रहती थी। ना ही उसे ढंग के कपड़े पहनने होते थे। वो बस जोगर पहनती क्योकि उसके नीचे विंटर वियर भी पहिन लेतीथी। ऊपर कोई विंड शीटर या गर्म कोट। बालो की पोनी बना कर हुदी लगा लेती या फिर ऊनीटोपी लगाए रहती थी। कभी किसी ने अविका को लड़कियों की तरह कपड़े पहने या संजे सांवरे नहीं देखा था।
उस कस्टमर के आते ही विराजन कशयप भी उठ कर बाहर निकल आये - "आओ आरोन आओ। अविका तुम्हे जैसा होम स्टे चाहिये वो दिला देगी। "
अविका-" आप गाड़ी क्यो लाये? यहां घूमनेके लिए तो मिल ही जाती।"
आरोन। "इस बार मैं खुद से घूमना इसलिए। चलो तुम मेरे ही साथ चल लो।"
अविका-"ठीक है कशयप अंकल मैं गाड़ी सुबह आके ले लुंगी।"
कशयप-" हाँ ठीक है। और हां अच्छा होम स्टे दिलाना।
अविका-" हाँ आप चिंता ना करो।"
रास्ते में अविका ने आरोन से पूछा "तो आपको कैसा होम स्टे चाहिए?"
आरोन- "जो एकदम ट्रेडिशनल हो। जिसमे रह कर एक नॉर्मल हिमाचली घर में रहने जैसा फील हो। एकदम होमली।"
अविका-" हम्म समझ गयी।." अविका ने फ़ोन निकाल कर अनुज को मैसेज किया कि एक बहुत ही पैसे वाला कस्टमर हमारे यहां होम स्टे के लिए आ रहा है। ममी को बोलो की घर को रेडी रखे और उसके लिए मेरा रूम खाली कर के अच्छे से सजा दे।"
अविका- "आप का होम स्टे का अरेंजमेंट होगया। वो भी एकदम ट्रेडिशनल घर मे। वहां रहने पर आपको ऐसा लगेगा कि आप किसी प्योर पहाड़ी कल्चर वाले घरमें रह रहे हो।"
आरोन-" ओह्ह रैली दैट्स ग्रेट।"
थोड़ी देर में अविका आरोन को घर लेकर पहुँच गयी। रेखा और अनुज तो उसकी गाड़ी देख कर हैरान थे।
रेखा ने जल्दी जल्दी सारे घर को साफ करके व्यवस्थित कर दिया था। सोफे से टोटो को हटा दिया था। टेबल पर खाना सजा रखां था।
रेखा आरोन से एक्सट्रा लाड़ दिखाते हुए बोली- "आइए आइए वेलकम।"
आरोन ने चारो तरफ देखा और अविका से बोला -"मुझे इक्जेक्टली ऐसा ही चाहिए था।"
अविका अपने मुंह पर हाथ रख कर बोली - "मतलब यू विल स्टे हियर?"
आरोन-" ऑफकोर्स ये काफी सही है मेरे लिए।"
जब आरोन आया तो टोटो ग्रोसरी स्टोर मे था। उसने आज ग्रोसरी का सामान बहुत अच्छे से अरेंजकिया था। रेखा भी ये देख खुश हो गयी थी। जब उसने बाहर गाड़ी खड़ी देखी तो अंदर आया। अंदर उसने आरोन को देख कर अविका से पुछा -" अविका ये कौन है?"
अविका ने उसे बिना देखे कहा -"अरे तुम जाओ अपना काम करो। दिखता नहीं मैं बिजी हूँ।"
आरोन ने इन दोनों की बात नहीं सुनीथी। वो पलट कर अविका से बोला -"ठीक है मैं यहां एक महीने के लिए रहूंगा।"
अविका और हैरान हुई। - "एक महीना।" ज्यादा टाइम मतलब ज्यादा पैसा।
टोटो को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो मुंह लटका कर फिर अविका से बोला " अविका मैंने ग्रोसरी अरेंज की है।"
अविका झल्ला कर बोली -"तुम थोड़ी देर चुप नहीं रह सकते। और नहीं रहा जाता चुप तो जाओ ग्रोसरी में काम करो जाके।"
टोटो मुंह लटका कर चला गया। आरोन बोला -"थैंक्स अविका इस होम के लिए।",
अविका -" थैंक्स किसलिए ये मेरा ही घर है।"
आरोन - "व्हाट ये तुम्हारा घर है?"
अविका-" हां और ये मेरी ममी और मेरा छोटा भाई।"
आरोन -"फिर वो कौन था?"
अविका - "आह वो...वो मेरा दूर का रिलेटिव है। उसका थोड़ा ऊपरी माला हिला हुआ है"
आरोन -" हम्म.......ठीक है फिर मुझे मेरा रूम दिखा दो। घूमने मैं शाम को जाऊंगा।"
अविका आरोन को उसका रूम दिखाने चली गयी। पीछे से रेखा ने खुश होकर ताली बजाई औ
र अनुज से बोली - "ये तो बहुत पैसे वाला है। एक महीने रुकेगा तो इसका मतलब बहुत सारा पैसा भी मिलेगा।"
क्रमशः
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