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Episode 2 9 min read 10 0 FREE

Part - 2

P
Pratibha Singh
22 Mar 2026

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अविका की गाड़ी से एक लड़के का एक्सीडेंट होता है। अविका उसे होस्पिटप लाती है जहां बाद में पता चलता है कि उसकी याददाश्त जा चुकी है। अब आगे...

 

 

अविका को सामने देख कर उस लडके ने अपने दिमाग पर बहुत जोर डाला पर उसे कुछ याद नहीं आया। "मैं आपको नहीं जानता। आप कौन हो? आप मुझे जानती हो क्या?"

 

डॉक्टर- "तुम अभी इतना स्ट्रेस मत लो। ये सब तुम्हे चोट लगने की वजह से हो रहा है।"

 

अविका को उस लडके की शक्ल कही देखी हुई सी लग रही थी।  रेखा ने उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा और बड़े प्यार से बोली ताकि डॉक्टर को शक ना हो- "अरे बेटे अच्छा हुआ तुम्हे होश आया गया। मुझे बहुत ही चिंता हो रही थी।"

 

"मुझे हुआ क्या था?" वो हैरान था। उसका चेहरा देख लग रहा था कि उसे कुछ नहीं मालूम्। 

 

"बेटा तुम पहाड़ी से फिसल गए थे। नीचे गिर कर तुम्हारा सिर एक चट्टान से टकरा गया ,जिसकी वजह से तुम्हारी ये हालत हो गयी। वो तो अच्छा हुआ अविका ने उसी वक़्त देख लिया। अविका तुम कुछ बोलती क्यो नहीं?"

 

अविका खड़ी खड़ी याद करने की कोशिश कर रही थी कि इसे कहां देखा है। उसने जब अपनी मम्मी की बात सुनी तो एकदम चौंक कर बोली।  -" हां....तुम पहाड़ी से गिर गए थे। तुम पहली बार कसोल आये थे ना इसलिए तुम्हे यहां के रास्ते पता नहीं थे, इसलिए।" अविका हड़बड़ा कर बोली। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले। 

 

"तो आप लोग मेरे कौन है?"

 

रेखा-" बेटा मैं तुम्हारी दूर की रिश्ते की बुआ हूँ। ये अविका है। अरे इसे भी भूल गए तुम दोनों बचपन में साथ खेलते थे।" डॉक्टर उन्हें देख रहा था इसलिए वो और अपनापन दिखा कर बोली। 

 

"अविका...बचपन की दोस्त और आप दूर की बुआ।" वो हर शब्द पर ऐसे जोर देकर बोल रहा था मानो अच्छे से बोल कर खुद को याद दिला रहा हो। " अच्छा फिर मैं कौन हूँ..मेरा क्या नाम है?"

 

"अरे तुम इतना मत सोचो। चलो हमारे साथ घर चलो ....वहां धीरे धीरे तुम्हे सब याद आ जायेगा।" इस बात को तो अविका ने सोचा ही नहीं था। 

अविका उससे कुछ और बोलती तभी डॉक्टर उससे बोले।

 

डॉक्टर- "आप बाहर आइए कुछ बात करनी है आपसे।" 

 

डॉक्टर ने अविका को बाहर चलने को कहा। दोनों बाहर निकल आये। डॉक्टर थोड़ा रुक कर अविका से बोला-" देखिए उसकी मेमोरी इस तरह वापिस नहीं आएगी। उसके लिये उसका मेजर ऑपरेशन होगा जो कि यहां पॉसिबल नहीं है। आप प्लीज कोशिश करिएगा की वो पुरानी बातो को याद करने की कोशिश कम से कम करे। वरना उसे और प्रॉब्लम हो सकती है।"

 

अविका-" ओके डॉक्टर।" 

 

अविका डॉक्टर से बात कर अंदर आ गयी। -" मम्मी अब हम चले।"

 

"कहाँ?" वो अविका का मुंह देख बोला। 

 

"घर ......चलो मैं तुम्हारी मदद करती हूं।" अविका ने उसे बेड से उठने में मदद की। दोनों माँ बेटी उसे सहारा देती हुई गाड़ी तक ले आई। 

घर जाने के रास्ते मे वो बराबर सवाल कर रहा था। 

"अच्छा तो आप लोग मेरे दूर के रिलेटिव है। फिर मेरा परिवार कहां है?"

रेखा अब उसकी बातों से खीझ चुकी थी। वो थोड़ी सी चिढ़ कर बोली- "अगर तुम्हारा परिवार होता तो ये सब हमें क्यो कराना पड़ता। कितना खर्च किया है इलाज?"

 

अविका को पता था कि उसकी हालत कैसी है। वो अपनी मम्मी को समझा कर बोली- "मम्मी रिलैक्स। हम घर पहुँच के बात करते है ना।" फिर वो उस लड़के से बोली- "मम्मी सच कह रही है तुम्हारा परिवार नहीं था। इसीलिए तो तुम हमारे पास रहने आ रहे थे।"

 

"ओह्ह.....।" वो इस तरह बोला जैसे वो सब समझ गया हो। फिर वो रेखा की ओर मुंह कर बोला-" थैंक यू बुआजी। आपने मेरा इलाज कराया और मेरा ख्याल रखा।"  

 

रेखा हाथ पर सिर टिकाए बैठी रही। वो सोच रही थी कि अब इसका क्या करे? 

थोड़ी ही देर में ये लोग घर पहुँच गए। अविका का घर छोटा सा लकड़ी का बना हुआ था। जिसकी छत ढालू थी ताकि ना इकट्ठी हो सके। 

तीनो लोग घर के अंदर दाखिल हुए। वो लड़का अजनबी सा चारों तरफ देख रहा था। 

अब समस्या उसके रहने की थी। अविका का घर छोटा सा था। घर की सीढ़ियां चढ़ते ही लकड़ी का फर्श था। जिसमे सबसे पहले तो छोटा लिविंग रूम था फिर लिविंग रूम के दाहिने साइड में खुला किचन था। बाए तरफ एक कमरा था जो कि रेखा का था। रेखा के कमरे के बगल से ऊपर की ओर जाती लकड़ी की सीढ़ी थी। सीढ़ियों के बगल से फायर प्लेस था और फायर प्लेस के सामने एक सोफा पड़ा था जो कि काफी पुराना लग रहा था। सोफे के बगल से एक सेट टेबल कुर्सी का रखां जो शायद खाने के लिए था। किचन और फायर प्लेस के बीच में एक और कमरा था छोटा सा जो इनका स्टोर रूम था। घर का कबाड़ और अनाज वगेरा इसी में रहता था। ऊपर दो कमरे थे जिनमे एक अविका का और एक अनुज का था। अनुज रात में जाग कर पढ़ता था इसलिए वो अलग लेटता था। रेखा के कमरे के बगल से वाशरूम बना था जो कि शायद कॉमन था। 

अनुज इस लड़के को बड़े ध्यान से देख रहा था। अविका उसे ऐसे देखता देख बोली -" अनुज तुम अपने कमरे में जाओ।" उसे डर था कि अनुज कहीं कुछ बोल ना दे। 

अनुज जाने की बजाय वहीं खड़ा रहा और बोला-" दीदी मुझे लगता है कि मैंने इन्हें कहीं देखा है?" 

 

ये सुन अविका और रेखा दोनों सकपका गयी। अविका ने अनुज की तरफ आंखे निकाली और उसे लग्नहग घसीट कर ले गयी। और जाते जाते उस लड़के से बोली- "इसकी बातों पर ध्यान मत देना ये तुम्हे शुरू से ऐसे ही चिढ़ाता है।" अविका उसे घसीट कर उसके कमरे में ले गयी और डांट कर बोली-" तू पागल है। उसके सामने वो सब क्यो बोल रहा था? तुझे पता उसकी याददाश्त चली गयी। उसे कुछ भी याद नहीं है।" 

ये सुन कर अनुज बोला-" तो दीदी फिर तो उसे ये भी याद नहीं होगा कि उसका एक्सीडेंट आपने किया था।"

 

"चुप रह।" अविका ने आंखे निकाली-" दुबारा मत बोलना अब। उसे ये याद नहीं है तो क्या हुआ? अगर हमने उसे बता दिया कि हम उसे नहीं जानते तो वो खुद का पता करने पुलिस स्टेशन जाएगा। और फिर शायद हम भी फंस जाए।" 

 

अविका अनुज को कमरे में रहने की हिदायत देकर नीचे आ गयी। रेखा और वो लड़का दोनों सोफे पर बैठे थे। वो इधर उधर देख कर समझने की कोशिश कर रहा था। 

रेखा ने सवालिया निगाहों से अविका की तरफ देखा। अविका को रेखा से बात करनी थी इसलिए वो रेखा से बोली-" मम्मी जरा ऊपर आना...मुझे काम है।"

 

रेखा अविका के साथ ऊपर आ गयी। "मम्मी अब क्या करे इसका?"

 

"मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं तो परेशान हूँ सोच सोच के इसकी याददाश्त सच में गयी है या ड्रामे कर रहा है।" 

 

"अरे मम्मी डॉक्टर ने बोला ना...वो ड्रामे क्यो करेगा?" 

 

अनुज अविका के कमरे में आता हुआ बोला-" ऐसा भी हो सकता है दीदी। अगर वो भूलने का ड्रामा करेगा तो डॉक्टर तो यही कहेगा कि इंजुरी की वजह से हो गया है।"

 

"पर वो ऐसा क्यो करेगा?" अविका को बात समझ नहीं आ रही थी। 

 

"अरे दीदी हो सकता है उसे सब याद हो और वो ड्रामा इसलिए कर रहा हो ताकि हमें फंसा सके बाद में।"

 

"मम्मी अगर तुम दोनों ऐसे ही ड्रामे करते रहे ना तो मैं घर का केबल कनेक्शन कटवा दूँगी। मतलब कुछ भी फ़िल्मी कहानी बना रहे हो। और तू अनुज वेब सीरीज देखना बन्द कर दे। पागल हो गए हो एकदम। अगर उसे हमें फंसाना होता तो वो हॉस्पिटल से नहीं भाग जाता। वो कही गया नहीं इसका मतलब साफ है कि उसे सच में कुछ याद नहीं है। और डॉक्टर ने बोला था मुझसे की इसके नर्वस सिस्टम में कुछ ब्लॉकेज हो गए है उसकी वजह से है ये। इसके लिए उसका ऑपरेशन होगा।" 

 

रेखा आंखे तान कर सारी बात सुन रही थी। पूरी बात सुन कर वो बोली- "अगर ऐसा है तो हमने उसे क्यो रखां है फिर? निकाल कर बाहर करो। हम एक और आदमी का खर्चा कैसे उठाएंगे?" 

 

"पर मम्मी जरा सोचो , अगर हमने उसे नहीं रखां तो वो खुद का पता करने पुलिस स्टेशन जाएगा। फिर शायद पुलिस सब पता लगा ले और हो सकता है वो हम तक भी आ जाये। और हमें तो ये भी नहीं पता कि ये है कौन?" अविका ने एक एक शब्द पर जोर देकर कहा। 

 

"दीदी इसके पास फ़ोन या वॉलेट कुछ नहीं मिला था क्या?" 

 

"अरे हां ये तो मैंने सोचा ही नहीं। ना ही तो इसके पास से मुझे फ़ोन मिला और ना ही कोई वॉलेट। बात अजीब है कि आजकल किसी के पास फ़ोन ना हो।" 

 

"हो सकता है अंधेरे में कही गिर गया हो। क्योकि ये मुझे काफी पैसे वाले घर का लगता है। इसने जो वाच पहनी थी उसी से होस्पिटल का खर्चा निकला है। और जो सूट तुम वापिस लायी थी ना दीदी वो मैंने देखा वो सूट लुइस वितान का है। दुनिया का सबसे महंगे ब्रांड में से एक।" 

 

अनुज की बात सुन रेखा और अविका ने एक दूसरे को देखा फिर अविका बोली-" मुझे ये कोई चोर लगता है जिसने ये सब चीजें चुराई होगी। क्योकि अगर ये सब वाकई इसकी होती तो ये पैदल ना होकर गाड़ी से होता।" 

 

रेखा ने अविका की बात पर सिर हिलाया-" हां मुझे भी यही लगता है। 

 

"चलो मम्मी अब नीचे चलते है काफी देर हो गयी।" ये कह अविका ने अपने रूम के एटिक से एक रजाई निकाल ली और नीचे आ गयी। 

वो ठंड से सिकुड़ता हुआ बैठा था। सर्द हवा से उसके गोरे गाल गुलाबी हो रहे थे। 

अविका ने सोफे पर उसके बगल से रजाई रखी और बोली- "तुम रात में यही सोना। क्या है ना कि हमारे पास और कमरे है नहीं। तुम यही सोफे पर सोना और ये फायर प्लेस है पास में तो ठंडी नहीं लगेगी। उसने हां में सिर हिला दिया और बोला-" मेरा नाम क्या है?"

 

अविका-"टोटो।"

 

अनुज-"रेम्बो।"

 

रेखा -"रेहान।" 

 

तीनो ने एक साथ अलग अलग नाम ले दिए। वो हैरान सा देखने लगा। "मेरे तीन नाम थे क्या?"

 

अविका ने बात सम्हालते हुए कहा- "आ हां....वो क्या है ना तुम्हारा नाम वैसे रेहान पर घर में सब तुम्हे टोटो बुलाते है। और ये अनुज तुम्हे रेम्बो बुलाता है तुम्हारे डोलो शोलो की वजह से।"

 

"आ....अच्छा।"

 

"तो तुम्हे कौन सा नाम पसन्द है?" अनुज ने उससे पूछा। 

 

वो कुछ देर रुका फिर सोच कर बोला- "हम्म.....टोटो।" 

****

राजस्थान के उदयपुर का पैलेस 

 

उदयपुर की हर हाइनेस महारानी माधविका परेशान सी अपने कमरे में बैठी थी। उनका बटलर उनके लिए कॉफी लेकर आया। उन्होंने कॉफी का घूँट भरा और बोली -"महाराज आ गए क्या?" 

 

"जी महारानी सा।" 

 

माधविका ने कॉफी का मग टेबल पर रखां और उठ कर बाहर आ गयी। उस आलीशान महल के शानदार लिविंग रूम में महाराज उदयप्रताप बैठे डायमंड का नया कलेक्शन देख रहे थे। 

"हुकुम हमें आपसे कुछ बात करनी है।"

 

उदयप्रताप ने हीरो को देखते हुए ही जवाब दिया-" बोलिये आपको क्या कहना है?"

 

"विक्रम का कॉल आया था। वो कह रहा था कि शैकि बेल्जियम चला गया है वहां से।",

 

ये सुन कर उदयप्रताप ने माधविका को देखा और बोले-" बेल्जियम पर क्यो? हमारी नेक्स्ट वीक निर्माणा के साथ डील होने वाली है।"

 

माधविका परेशान होकर बोली-" वही तो हमें समझ नहीं आ रहा कि वो ऐसे टाइम पर कैसे जा सकता है?"

 

"आपने विक्रम से पूछा नही की वो क्यो गया है बेल्जियम?"

 

"उसने कहा कि वो किसी रिसर्च के लिए जा रहा है।"

 

"हम शैकि से ही बात करते है। वो इतना इरेस्पॉसबल कैसे हो सकता है?"

 

"कोई फायदा नहीं। हम आलरेडी ट्राय कर चुके है। उसका फ़ोन बन्द है। विक्रम ने कहा है कि वो किसी सीक्रेट रिसर्च की बात बोल कर गया है। और हां ये भी कहा है कि इस रिसर्च से हमारी कंपनी को काफी बेनिफिट होने वाला है।"

 

"हम्म...ऐसा पॉसिबल है। वो काफी पैशनेट है काम को लेकर। बट फिर भी बताना तो चाहिए था एक बार।" 

 

"वही तो हम परेशान है। हम कब से ट्राय कर रहे है बात करने का। माधविका परेशान सी बोली। 

 

"डोंट वरी हनी। वो कौन सा पहली बार गया है। वो तो अक्सर इस तरह जाता रहता है, आ जायेगा अपना काम करके। तब तक वो डील हम देख लेंगे।" 

 

माधविका को इस बात से थोड़ी तसल्ली मिली वो आगे बोली- "विक्रम ने एक और नुकसान कर दिया है। शैकि कि वेंटले का उसने एक्सीडेंट कर दिया। खुद तो किसी तरह बाहर निकल गया पर कार खाई में गिर गयी।"

 

उदयप्रताप ने हाथ में पकड़ा हीरा टेबल पर रखां और बोले- "ये विक्रम हर बार ऐसा कुछ करता है। वो लॉयल है बस इसी वजह से उसे हमने रखां हुआ है वरना फायर कर दिया होता " 

 

रात के आठ बज रहे थे। अविका रेखा और अनुज उसी लिविंग रूम में सोफे के बगल से रखी टेबल पर खाना खा रहे थे। टोटो के पास कपड़े नहीं थे इसलिए उसे पहनने के लिए अविका का पजामा और गर्म स्वेटर दिया। वो पजामा उसके मुश्किल से घुटनों के नीचे तक पहुँच रहा था। और उस स्वेटर की आस्तीन आधे हाथ तक थी। 

 

कसोल इजरायली रंग में रंगा हुआ है। यहां साल के बारह महीनों इजरायली टूरिस्ट रहते है। और भी अन्य देशों के लोग आते है पर इजरायली यहां परमानेंटली रहते है। उनकी वजह से इसे मिनी इजरायल भी कहा जाता है। इंडियन टूरिस्ट को यहां आना एक तरह से बैन कर रखा है। यहां के रहन सहन और खान पान में भी इस चीज का असर देखने को मिलता है। यहां का खाना पूरी तरह कॉन्टिननेटल होता है। लोगो का रहन सहन भी वैसा ही होता जा रहा है। 

 

खाने की टेबल पर स्टीम्ड मोमोज, चिकन नॉडल सूप और हेलो टू द् किंग था। सर्दी कड़ाके की थी इसलिए फायर प्लेस में आग जला रखी थी। 

टोटो को उसका खाना प्लेट में डाल कर दे दिया गया था। वो पैरों पर रजाई डाले सोफे पर बैठ कर खा रहा था। 

खाना खा कर वो उसी सोफे पर रजाई ओढ़ कर सिकुड़ कर लेट गया। उसकी लंबाई देखते हुए सोफे की लम्बाई कम थी इसलिए उसे पैर सिकोड़ने पड़ रहे थे। 

इन लोगो ने उसे सोते देखा और खाना खा कर अपने अपने कमरे में चले गए। 

 

रात को ग्यारह बजे पर अविका की आंख खुली उसका मन किया कि देखे वो कही कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा। वो दबे पांव सीढ़ियों पर आई और वहां से झांक कर नीचे देखा तो सोफा खाली था। उसके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। वो वापिस ऊपर गयी और एक वास हाथ में लेकर वापिस आयी। 

दबे पांव बिल्ली की तरह वो सीढियां उतरी। फायर प्लेस में आग जल रही थी जिसकी रोशनी हो रही थी। उस रोशनी में उसे टोटो किचन में दिखाई दिया। अविका के मन में ख्याल आया कही ये चाकू तो नहीं ढूंढ रहा मारने के लिए। ये ख्याल आते ही उसने वास को और मजबूती से पकड़ लिया और सीढ़ियों के पीछे छिप कर देखने लगी। 

टोटो ने इधर उधर देखा और उसे एक गिलास मिल गया वो गिलास लेकर उसने पानी निकाला और पानी पीकर वापिस आकर सोफे पर लेट गया। ये देख कर अविका की जान में जान आयी। वो उसी तरह दबे पांव वापिस जा रही थी कि टोटो की नजर उस पर पड़ गयी उसने उसे पीछे से आवाज दी-" तुम यहाँ क्या कर रही हो इतने टाइम?"

 

अविका को समझ नहीं आया कि क्या कहे। वो  बातें बनाती हुई बोली-" वो क्या है ना मैं तुम्हे देखने आई थी कोई दिक्कत तो नहीं है?"

 

"नहीं मैं ठीक हूँ।" अविका पास आई तो उसे उसके हाथ में वास दिखा-" ये वास क्यो लिए हो?"

 

"अरे ये यहां गिरा हुआ था इसलिए उठा लिया।"

 

"हम्म.....वैसे थैंक यू। तुम सब लोग मेरे लिए काफी कुछ कर 

रहे हो। तुम भी मेरा कितना ख्याल रख रही हो। अब मुझे तो कुछ याद नहीं पर बुआजी ने बताया कि हम बचपन के दोस्त है तो भले मेरी याददाश्त चली गयी है पर मैं तुम्हारे साथ दोस्त बनके ही रहूंगा।" उसके बोलने के लहजे में ईमानदारी थी। उसकी आँखों और चेहरे से बच्चे जैसा

भोलापन झलकता था। एक ऐसे बच्चे जैसा जो दुनियादारी के बारे में कुछ नहीं जानता। 

 

अविका ये सुन कर बस मुस्कुरा दी। उसके दिमाग में तो ये चल रहा था कि ये कोई चोर है। 

 

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