📚

Apni Bhasha Chunein

Which language stories do you prefer?

🇮🇳
हिंदी
Hindi
🇬🇧
English
English
🇮🇳
मराठी
Marathi
🇮🇳
தமிழ்
Tamil
🇮🇳
తెలుగు
Telugu
🇮🇳
বাংলা
Bengali
🌐 Sab Bhashaon ki Kahaniyaan Dikhao
FuntelStories
Back
जो हमने कभी नहीं कहा
साहित्यिक कथा

जो हमने कभी नहीं कहा

Funtel
1 followers
★ 0.0
0 ratings
38
Reads
24
Episodes
24
Free

बरेठी एक छोटा क़स्बा है — एक रेलवे फाटक, एक बंद पड़ी चीनी मिल, और एक डिग्री कॉलेज। कमला मिश्रा वहाँ अड़तीस साल हिंदी पढ़ाती रहीं — तीखी ज़बान वाली, डरी जाने वाली, और उससे कहीं ज़्यादा नरम जितना कोई देख पाता है। उनके पति हरिनाथ रेलवे से रिटायर हैं और रोज़ सुबह उस फाटक तक जाते हैं जहाँ अब उनका कोई काम नहीं। बेटा आलोक बेंगलुरु में है और महीने में चार मिनट फ़ोन करता है। बेटी सुधा दो गली छोड़कर रहती है और सब कुछ संभालती है, चुपचाप। और इन सबके बीच छह साल पुराना एक वाक्य है, जो एक शादी में तीन सौ लोगों के सामने कहा गया था — और कभी वापस नहीं लिया गया। चौबीस अध्यायों का उपन्यास, जिसमें हर अध्याय क़स्बे के एक अलग इंसान पर ठहरता है और कमला उन सबसे होकर गुज़रती हैं — कभी केंद्र में, कभी किसी और की ज़िंदगी के किनारे से। उन बातों के बारे में जो कही नहीं जातीं, और उस क़ीमत के बारे में जो चुकानी पड़ती है।

#उपन्यास #साहित्यिक कथा #क़स्बा #परिवार #रिश्ते #माँ-बेटा #सास-बहू #अकेलापन #हिंदी उपन्यास #बुढ़ापा #literary fiction #hindi novel #family #small town #relationships
1 FREE
भाग 1 · अध्याय 1 : फाटक
1,324 words 18 reads
2 FREE
भाग 1 · अध्याय 2 : कमला मिश्रा
1,164 words 19 reads
3 FREE
भाग 1 · अध्याय 3 : तीसरी खिड़की
1,171 words 20 reads
4 🔐 Login
भाग 1 · अध्याय 4 : मास्टर रफ़ीक़
1,123 words 0 reads
5 🔐 Login
भाग 1 · अध्याय 5 : चीनी मिल
926 words 0 reads
6 🔐 Login
भाग 1 · अध्याय 6 : दो गली छोड़कर
1,042 words 0 reads
7 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 7 : पहला इतवार
965 words 0 reads
8 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 8 : तारीख़
893 words 0 reads
9 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 9 : दस दिन
912 words 0 reads
10 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 10 : जो कहा गया
1,113 words 0 reads
11 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 11 : साड़ी
1,048 words 0 reads
12 🔐 Login
भाग 2 · अध्याय 12 : स्टेशन पर
794 words 0 reads
13 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 13 : सुबह का एक घंटा
1,019 words 0 reads
14 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 14 : डॉक्टर वर्मा
923 words 0 reads
15 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 15 : इंदौर
833 words 0 reads
16 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 16 : घर
848 words 0 reads
17 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 17 : रात का पहरा
892 words 0 reads
18 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 18 : जो हरि ने कहा
793 words 0 reads
19 🔐 Login
भाग 3 · अध्याय 19 : तेरह दिन
896 words 0 reads
20 🔐 Login
भाग 4 · अध्याय 20 : लिफ़ाफ़ा
864 words 0 reads
21 🔐 Login
भाग 4 · अध्याय 21 : इतवार की चाय
743 words 0 reads
22 🔐 Login
भाग 4 · अध्याय 22 : प्याज़
842 words 0 reads
23 🔐 Login
भाग 4 · अध्याय 23 : फ़ोन
782 words 0 reads
24 🔐 Login
भाग 4 · अध्याय 24 : कोहरा
875 words 0 reads

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

Login
पहली टिप्पणी करें! 🎉