आपके अंदर जो अटका हुआ है, वो क़ाबिलियत की कमी नहीं है। ज़्यादातर लोगों की क़ाबिलियत तीन-चार जगहों पर फँसी होती है — और वो जगहें हर किसी में एक जैसी होती हैं।
एक बात साफ़ कर लेते हैं।
अगर आप ये सोचते हैं कि "मुझमें वो बात ही नहीं है" — तो ये ज़्यादातर मामलों में झूठ होता है।
असली वजह ये नहीं होती कि आपमें कुछ कम है। असली वजह ये होती है कि जो है, वो बाहर नहीं आ पा रहा — क्योंकि रास्ते में कुछ अटका हुआ है।
तो चलिए, वो रुकावटें देखते हैं। ईमानदारी से पढ़िएगा — इनमें से कोई एक आपकी होगी।
पहली रुकावट : आपको पता ही नहीं कि आप कहाँ जा रहे हैं
ये सबसे आम है और सबसे कम मानी जाती है।
अगर मैं आपसे पूछूँ — "आप अगले तीन साल में क्या बनना चाहते हैं?" — और जवाब में "अच्छा जीवन", "थोड़ा और पैसा", "कुछ अपना काम" जैसी बातें आएँ, तो ये लक्ष्य नहीं हैं। ये इच्छाएँ हैं।
बिना दिशा के मेहनत करने वाला आदमी बहुत थकता है और कहीं नहीं पहुँचता। वो पूरी ज़िंदगी दौड़ता है, और साल के अंत में उसी जगह होता है।
और सबसे बुरी बात — दिशा न होने की वजह से वो अपनी मेहनत को कमज़ोरी समझ बैठता है। जबकि मेहनत में कोई कमी नहीं थी। नक़्शा नहीं था।
दूसरी रुकावट : आप बहुत सी चीज़ें एक साथ कर रहे हैं
ये ख़ासकर क़ाबिल लोगों के साथ होता है।
आपने यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, दो कोर्स भी ख़रीदे, एक बिज़नेस का प्लान भी बनाया, और जिम भी जॉइन किया।
दो साल बाद — चैनल पर सात वीडियो, कोर्स आधे, प्लान फ़ाइल में, जिम बंद।
बात क़ाबिलियत की नहीं थी। बात ये थी कि दस जगह थोड़ा-थोड़ा खोदने से कहीं पानी नहीं निकलता। एक जगह गहरा खोदने से निकलता है।
जो लोग बहुत आगे जाते हैं, वो ज़्यादा चीज़ें नहीं करते। वो कम चीज़ें बहुत ज़्यादा करते हैं।
तीसरी रुकावट : आप तैयारी में अटके हैं
कुछ लोग सालों से "तैयारी" कर रहे हैं।
एक और कोर्स। एक और किताब। एक और वीडियो। "थोड़ा और सीख लूँ, फिर शुरू करूँगा।"
पर सच ये है — कुछ चीज़ें सीखकर शुरू नहीं होतीं, शुरू करके सीखी जाती हैं।
आप तैरना किताब पढ़कर नहीं सीख सकते। पानी में उतरना पड़ता है।
और अक्सर ये तैयारी असल में डर का शरीफ़ नाम होती है। जब तक आप तैयारी कर रहे हैं, तब तक आप नाकाम नहीं हो सकते। ये सुरक्षित है — और यही इसका पूरा मक़सद है।
चौथी रुकावट : आपने कभी अपनी हद देखी ही नहीं
बहुत से लोगों ने अपनी ज़िंदगी में कभी सच में पूरी ताक़त नहीं लगाई।
वो हमेशा सत्तर फ़ीसदी पर चलते रहे। स्कूल में, नौकरी में, हर जगह।
और इसकी वजह चालाक है — अगर आपने पूरी ताक़त नहीं लगाई, तो नाकाम होने पर आपके पास बहाना रहता है। "मैंने ठीक से कोशिश ही कहाँ की थी।"
ये बहाना बहुत आराम देता है। और यही आपको कभी ये जानने नहीं देता कि आपकी असली हद कहाँ है।
पूरी ताक़त लगाकर नाकाम होना डरावना है। पर उसमें एक चीज़ मिलती है जो और कहीं नहीं मिलती — सच्चाई।
पाँचवीं रुकावट : आप किसी और की रेस दौड़ रहे हैं
ये सबसे गहरी वाली है, और इस पर एक पूरा अध्याय आगे आएगा।
बहुत से लोग बहुत मेहनत कर रहे हैं — किसी ऐसी चीज़ के लिए जो उन्होंने कभी ख़ुद नहीं चुनी।
पिता चाहते थे। समाज में इज़्ज़त थी। सब यही कर रहे थे।
ऐसे लोग मंज़िल पर पहुँच भी जाएँ, तो ख़ाली महसूस करते हैं। क्योंकि वो सीढ़ी सही चढ़े थे, बस वो सीढ़ी ग़लत दीवार पर लगी थी।
अब अपनी रुकावट पहचानिए
ऊपर पाँच रुकावटें हैं। ईमानदारी से देखिए कि आपकी कौन-सी है।
ज़्यादातर लोगों की एक मुख्य होती है और एक-दो हल्की।
दिशा नहीं है? तो अगले हिस्से के अध्याय आपके हैं।
बहुत सी चीज़ें एक साथ? तो आपको काटना सीखना है, जोड़ना नहीं।
तैयारी में अटके हैं? तो आपका काम आज कुछ शुरू करना है, चाहे अधूरा हो।
कभी पूरी ताक़त नहीं लगाई? तो एक चीज़ चुनिए और नब्बे दिन पूरी ताक़त लगाइए।
किसी और की रेस? तो सबसे पहले रुकिए — और ये पूछिए कि आप दौड़ क्यों रहे हैं।
ये किताब आपको क़ाबिलियत नहीं देगी। वो आपके पास पहले से है।
ये सिर्फ़ रुकावट हटाने में मदद करेगी।
एक लाइन में
आपमें कमी नहीं है — रास्ते में रुकावट है, और वो रुकावट लगभग हमेशा इन्हीं पाँच में से एक होती है।
आज ये करो
पाँचों रुकावटें दोबारा पढ़िए और अपनी मुख्य वाली पर गोला लगाइए। एक लाइन में लिखिए कि वो आपकी ज़िंदगी में कैसे दिखती है — कोई असली उदाहरण देकर।
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