(प्रीतम बाबू, अखिल बाबू को उनका कमरा दिखाकर उन्हें फ्रेश होने के लिए कहते हैं।)
अखिल बाबू: चलो, सुमित्रा।
अबीर: क्या सोच रहे हो, भाई?
निलय (हल्का सा खोया हुआ): पता नहीं… ये हवेली मुझे बहुत जानी-पहचानी लग रही है… जैसे मैंने इसे पहले कहीं देखा हो…
अबीर (हँसते हुए): शायद किसी फिल्म में देखी होगी।
निलय: हो सकता है… लेकिन फिर भी कुछ अजीब सा लग रहा है…
ऊषा (मन ही मन): इन दोनों में से मेरा जीजू कौन होगा? दोनों ही इतने हैंडसम हैं… 😏
अबीर: Excuse me… हमारा कमरा किधर है?
ऊषा: हाँ, आइए… मैं दिखाती हूँ।
(ऊषा उन्हें कमरे तक ले जाती है)
ऊषा (सोचते हुए): लगता है यही मेरा जीजू है… लेकिन कन्फर्म तो करना पड़ेगा…
अबीर: क्या सोच रही हो?
ऊषा (सीधे): जीजू, आप मुझे “मैडम” क्यों बुला रहे हो? मैं ऊषा हूँ… आपकी होने वाली पत्नी की छोटी बहन।
अबीर (चौंककर): What? नहीं, नहीं… मैं तुम्हारा जीजू नहीं हूँ!
ऊषा (मुस्कुराकर): अभी नहीं हो… लेकिन बन जाओगे 😄
अबीर: पहले मेरी बात सुनो…
ऊषा: बोलो, जीजू 😏
अबीर (धीरे): मैं तुम्हारा जीजू नहीं… तुम्हारे जीजू का छोटा भाई हूँ।
ऊषा: ओह! 😳
अबीर: और सुनो… मेरे भाई को नहीं पता कि हम उसके लिए लड़की देखने आए हैं। अगर उसे पता चलता, तो वो यहाँ आता ही नहीं।
ऊषा (हँसते हुए): अरे, यही हालत हमारी भी है! दीदी को भी कुछ नहीं बताया हमने।
अबीर: Seriously?
ऊषा: हाँ! वो भी अभी शादी नहीं करना चाहती।
अबीर (मुस्कुराकर): तो फिर… हमें मिलकर प्लान बनाना पड़ेगा।
ऊषा: बिल्कुल!
वैसे तुम्हारा नाम?
अबीर: अबीर। और तुम्हारा?
ऊषा: ऊषा।
तो… दोस्त?
अबीर: Done 🤝
(दोनों मुस्कुराते हैं और अपने-अपने कमरे में चले जाते हैं)
रात्री अपने कमरे में बैठी थी…
लेकिन उसका मन कहीं और था।
रात्री (मन ही मन):
“अगर वो कमरा बंद है… तो अंदर से दरवाज़ा कौन पीट रहा था?”
“और वो लड़का…
जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा…
वो बार-बार मेरे सामने क्यों आ रहा है?”
“क्या ये सिर्फ मेरा वहम है… या इसके पीछे कोई सच छिपा है…?”
उसने धीरे से आँखें बंद कर लीं।
“और वो कमरा…
क्यों ऐसा लग रहा है जैसे वो मुझे बुला रहा है…?”
“रामू दादू ने कहा था… वो अभिशप्त है…”
ऊषा: दीदी! यहाँ अकेले क्या कर रही हो? चलो ना, पापा के दोस्त आए हैं।
रात्री (थोड़ा उदास): मुझे अच्छा नहीं लग रहा… मेरा मन नहीं है।
ऊषा: अरे… ये क्या हाल बना रखा है बालों का? आओ, मैं ठीक कर देती हूँ।
रात्री: अभी नहीं, ऊषा…
ऊषा (नखरे से): अगर मेरी बात नहीं मानी… तो मैं तुमसे बात नहीं करूंगी!
रात्री (हल्का मुस्कुराकर): तुम ना… बिल्कुल नहीं बदली। ठीक है, आओ।
(ऊषा प्यार से रात्री के बाल संवारती है, हल्का मेकअप करती है)
ऊषा: बस… अब परफेक्ट! 😘
रात्री: अब खुश?
ऊषा: बहुत! चलो, नीचे चलते हैं।
🍽️ डिनर सीन
दोनों नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँचती हैं।
प्रीतम बाबू: ऊषा, जाओ अबीर और निलय को बुला लाओ।
ऊषा: जी, पापा।
ऊषा: अबीर… चलो डिनर करते हैं।
अबीर: प्लीज़… मुझे “भैया” मत बुलाना। हम दोस्त हैं, ठीक? 😅
ऊषा (हँसते हुए): ओके, अबीर।
अबीर: तुम चलो, मैं भाई को बुलाकर लाता हूँ।
(सभी डाइनिंग टेबल पर बैठ चुके हैं, निलय अभी नहीं आया)
प्रीतम बाबू: अखिल, ये है मेरी बड़ी बेटी… रात्री।
रात्री: नमस्कार अंकल… नमस्कार आंटी।
सुमित्रा: खुश रहो, बेटा।
अखिल बाबू (प्यार से): कैसी हो?
रात्री: जी, ठीक हूँ।
सुमित्रा: पढ़ाई कर रही हो?
रात्री: जी, मेरा फाइनल ईयर है।
सुमित्रा: बहुत अच्छा 😊
अबीर (धीरे से): डैड… मम्मी को तो बौदी पसंद आ गई 😄
अखिल बाबू (मुस्कुराकर): बस, यही तो चाहिए था।
💫 पहली नज़र
कुछ देर बाद… निलय आता है।
शांत… गंभीर… लेकिन बेहद आकर्षक।
वो बैठकर चुपचाप खाना खाने लगता है।
अभी तक उसकी नज़र रात्री पर नहीं पड़ी।
अखिल बाबू: निलय… ये है रात्री।
निलय ने पहली बार उसकी ओर देखा—
“Hello…”
बस एक शब्द।
लेकिन उसकी नज़र… हट नहीं पाई।
रात्री (मन ही मन):
“ये… वही लड़का है…
जिसे मैं बार-बार देख रही थी…”
“लेकिन… ये कैसे संभव है…?”
दोनों एक-दूसरे को देखते रह जाते हैं।
पास में खड़े ऊषा और अबीर धीरे से मुस्कुरा देते हैं 😏
रात काफी हो चुकी थी।
लेकिन निलय को नींद नहीं आ रही थी।
निलय: नींद तो आ नहीं रही… थोड़ा बाहर ही घूम आता हूँ…
वो हवेली के बाहर बगीचे में आकर खड़ा हो गया।
चारों ओर गहरा सन्नाटा।
निलय: कितनी अजीब शांति है…
जैसे इस जगह पर कोई ज़िंदा ही नहीं है…
दूसरी ओर—
रात्री भी जाग रही थी।
वह बालकनी में खड़ी… आसमान को देख रही थी।
तभी—
एक मधुर… लेकिन रहस्यमयी धुन उसके कानों में पड़ी…
वह चौंक गई।
🔥 To Be Continued… 😈
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