अब इससे पहले कोई आके दरवाज़ा खोले हम ज़रा बता दे के यह घर किसका हैं। यह घर हैं परितोष बनर्जी का हैं। १९४७ में जब पार्टीशन हुआ तो परितोष तब के ईस्ट पाकिस्तान और अभी के बांग्लादेश छोड़ के यहाँ आये थे। तब उनकी उमार थी सिर्फ १५ साल। अपना घर और उसके के साथ साथ आपने पिता और एक बहन को भी वह दंगे में खोये थे। लेकिन दिल में हौसला और ज़िद्द तब भी था उनमे। इसी लिए यहाँ आने के बाद उन्होंने न जाने कहा कहा काम किये और साथ ही साथ अपनी पढाई भी जारी राखी। आंत में उन्हें एक कोर्ट में काम मिला। वह उनके मेहनती स्वभाब देख वकीलों वह पसंद आ गए। उनहोनेही परितोष को हौसला दिया और सहारा भी ताकि परितोष वकालत की पढाई पूरी कार सके।
परितोष आपने म्हणत से एक अच्छे और ईमानदार वकील बने। और उन्होंने विजेंद्र शर्मा के घर के उस पार अपना घर ख़रीदा। विजेंद्र और परितोष कुछ दिनों में बहुत अच्छे दोस्त बन गाये। वैसे तो दोनो में काफी आंतर था, जैसे परितोष को किताबे पढ़ना पसंद करता था और विजेंद्र को हिंदी फिल्मो से मोहब्बत था। दूसरी और विजेंद्र किताब देखता तो उलटी दिशा में दौरता था और परितोष कुछ गिने-चुने बिदेशी फिल्म छोड़ के सिर्फ सत्यजीत रे, मृणाल सेन इन लोगो की ही फिल्मे देखता था। बॉलीवुड की फिल्मो सी १०० फ़ीट की दूरी रखता था। लेकिन इन साब के बावजूद दोनों की दोस्ती देखने लायक थी।
ना सिर्फ विजेंद्र और परितोष में बल्कि यह दोस्ती उनके बच्चो के बीच में भी था।परितोष घर और परिवार को सम्हालते सम्हालते कब्भी शादी नहीं कर पाए, लेकिन अपना छोटा भाई और छोटी बेहेन की शादी बड़ी धूम-धाम से दिया उन्होंने। अभी इस घर में उनके छोटे भाई का परिवार ही रहता हैं। उनका छोटा भाई आसुतोष और उनकी बीवी बिमला देवी के तीन बच्चे हैं।
बढ़ा बेटा इंद्रजीत और उसकी पत्नी नयनिका। वह दोनों ही डॉक्टर हैं। उनकी बेटी सोनाझुरी, एक Weekly Woman’s Magazine के असिस्टेंट एडिटर।
इंद्रजीत के बाद आता हैं उसकी बहन इन्द्राणी जो की बहुत ही काम उभार में बिधवा हो गयी थी। वह भी आपने बेटे शुभो को लेकर आपने भाइयो के साथ रहता हैं। इन्द्राणी एक स्कूल में पढ़ाती हैं और काफी कड़े मिज़्ज़ाज़ की एक औरत हैं। बच्चे इन्हे इनके पीछे हिटलर पीसी (बुआ) बुलाते हैं। शुभो, सोनाझुरी से ४ साल छोटा हैं और एक IT company में software engineer हैं। वह एक लड़की से बेहयाद प्यार करता हैं लेकिन जब तक उसकी दीदी की शादी नहीं हो जाती वह इस बारे में किसीको नहीं बात सकता।
और इंद्रजीत का सब से छोटा भाई हैं इन्द्रसहिश बनर्जी। उसने शादी नहीं की हैं और बच्चो के लिए रहस्य-रोमांच कहानिया लिखते हैं। वह कभी प्रशिद लेखक हैं और सारे बाचे, मतलबल, रोहन, सोनाझुरी, ऋषब, शुभो, यह साब इन्द्रसहिश, यानी इनके काकाबाबू को बहुत प्यार करता हैं। रोहन जब भी उदास होता हैं वह ककबाबू के कमरे में बैठ कर या तो किताबे पढ़ता हैं या फिर पियानो बजाता हैं।
ऋषब को पाता था की आज भी उसे रोहन वही मिलेगा। वह आकर घंटी बाजाते ही सोनाझुरी आके दरवाज़ा खोली। ऋषब पूछा, “रोहन कहा हैं?” सोनाझुरी थोड़ी शरारत करने का सोच के बोली, “माफ़ करना आप कौन? और यह रोहन कौन हैं?” ऋषब बोला, “अच्छा, तो यह बात हैं। ठीक हैं सोचा था तुझे और रोहन को आज रात को मिलवाऊंगा पर ठीक हैं रहने देते हैं!” यह कह कर ऋषब जाने वाला था, लेकिन सोनाझुरी उसकी हाथ पक्कड़ के बोली, “अरे गुस्सा क्यों होता हैं में तो बस मज़ाक कर रहा था!” ऋषब बोला, “अब आयी न गाड़ी पटरी पे!” इसी वक़्त सोनाझुरी की माँ अंदर से आवाज़ दी, “कौन हैं झीनूक?” झीनूक सोनाझुरी का घर का नाम हैं। वह बोली, “माँ ऋषब आया हैं!”
उसकी माँ बोलती हैं, “तो उसे दरवाज़े पे क्यों खड़ा किया हैं अंदर बुला!”
सोनाझुरी बोली, “अंदर आ। तेरा भाई अंदर ही हैं। एक रोत्लू सकल लेके आया सुबह सुबह और फिर मेरा पूरा का पूरा ब्रेकफास्ट ख़तम कर के काकाबाबू के कमरे में जाके पियानो बाजा रहा हैं। सुनाई दे रहा हैं ना तुझे!” ऋषब हंस के बोला, “तू बहुत गुस्से में है ना वह तेरा ब्रेकफास्ट खा ली?” शुभो बोला, “Don’t ask, ऋषब! दिदिया इतने गुस्से में हैं की अगर तू उस के सिर पर अभी एक आंडा फॉर दे तो वह omlette बन जाएगा।” शुभो की बात सुन के सोनाझुरी गुस्से में लाल होक बोली, “तुझे तो आज में छोडूंगी ही नहीं!” यह बोलके उसे मारने के लिए उसके पीछे दौरा।
इंद्रजीत बोला, “अरे ऋषब तू बैठ जा। तुझे तो पाता हैं ना यह दोनों कैसे हैं!” ऋषब हंस के इंद्रजीत के पास आके बैठा।नयनिका नौकर को बोलके उसका प्लेट भी लगा दिया और बोला, “तू खा ले।रोहन को मैंने खिला दिया हैं!” ऋषब हंस के बोला, “हां वह news मुझे मिल गाया,” यह सुन के इंद्रजीत और नयनिका हंस पढ़ी और फिर नयनिका बोली, “आज का फिर से रिस्ते के बात पार झगड़ा हुआ?” ऋषब थोड़ा सा खाना आपने मू में दाल के बोला, “और क्या?” इंद्रजीत newspaper फोल्ड करते हुए बोला, “पार रोहन की प्रॉब्लम क्या हैं? उसे शादी क्यों नहीं करनी?” नयनिका बोली, “सिर्फ रोहन को क्यों बोल रहे हो? तुम्हारी बेटी भी तो शादी का नाम सुनते ही घर में तमाशा खड़ी करती हैं! पता नहीं क्या प्रॉब्लम हैं इस generation को शादी से?”
ऋषब कुछ नहीं कहता हैं। सिर्फ उसे ही पाता हैं क्यों रोहन और सोनाझुरी शादी के लिए हां नहीं क्यों नहीं कर रहा हैं। अगर एक बार दो परिवार रोहन और सोनाझुरी के बारे में पता चल गाया तो यह जो ६० साल पुराणी दोस्ती एक झटके में ख़तम हो जाएगा। दोस्ती-यारी तक सब ठीक हैं लेकिन यह दो अलग कल्चर के परिवार आपने दोस्ती को रिश्तेदारी में नहीं बदलेंगे।
एक बार रोहन दो परिवारों से पूछा था, “आप में से कभी कोई सोचा दोनों परिवार के यह दोस्ती रिस्तेदारी में बदलने की?” सब यह सवाल सुन के चुप हो गाये और फिर इंद्रजीत ज़ोर से हांसे लागे, बाकि सब शामिल हुए। सोनाझुरी बोली, “एक मिनट, एक मिनट, हमे कुछ समझ नहीं आ रहा। आप लोग हंस क्यों रहे हो?”
इस बार सब चुप हो गाय। कुछ देर बाद आदर्श बोला, “देखो बेटा यह साब दोस्ती यारी तक सब ठीक हैं इसके आगे और कुछ मात सोचना वार्ना शायद यह दोस्ती यारी भी नहीं रहेगा।” आदर्श के आवाज़ में ऐसा कुछ था की सरे बच्चे डर गाये। उन लोगो का डर और बढ़ा के इंद्रजीत बोला, “सही बोला तुमने आदर्श। कभी यह दोस्ती-यारी का लकीर cross करने की सोचना भी मत तुममे से कोई। वैसे तुम में से कोई ऐसा कुछ सोच रहे हो क्या?”
“नहीं!” रोहन और सोनाझुरी एक साथ बोल उठी थी उस दिन। उन दोनों का वह हरकत देख कोई भी उन्हें सक कर सकता था इसीलिए ऋषब भी बोला, “नहीं, नहीं! हम में से कोई ऐसा क्यों सोचेगा? हम तो बस ऐसे ही पूछे?” उसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी। ऋषब भी एक चयन की आह भरा उस दिन।
रोहन और सोनाझुरी में वैसे तो बहुत फरक हैं, सोनाझुरी हैं बिंदास, मू-फाट, चुलबुली एक tomboy। दूसरी और रोहन हैं शांत, पढ़ाकू, बहुत ही काम बोलनेवाला एक लड़का। सोनाझुरी को पार्टी करना पसंद हैं तो रोहन एक soft music के साथ chill करना। सोनाझुरी को sports पसंद हैं, रोहन को किताबे, सोनाझुरी बॉलीवुड की दीवानी हैं तो रोहन बिदेशी फिल्म छोड़ कर सिर्फ गिने-चुने कुछ फिल्मे देखते हैं, जैसे सत्यजीत रे की फिल्मे। सोनाझुरी हवा का झोका हैं, और रोहन शांत-शीतल हवा। ऐसे में यह दोनों एक दुसरे को कैसे दिल दे बैठे यह ऋषब को आज तक पता नहीं चला।
पर क्या फयदा एक दुसरे को दिल देके इसके आगे तो बात बढ़ ही नहीं रहा हैं। उल्टा आये दिन दोनों की शादी की बात लेके एक नाया नाटक खड़ा होता हैं।
“ऐसा कब ताका चलेगा रोहन? रोज़ रोज़ क्या ऐसे नास्ता किये बिना तू घर छोड़कर तू काकाबाबू के पास चाला आएगा?” रात में रोहन के साथ बात करते करते ऋषब बोला। रोहन आपने हाथ का किताब बिस्तर पर रख के बोले, “मेरा मान करता हैं सोनाझुरी को लेके भाग जाऊ! एक बार शादी कर लिया तो मानना तो पढ़ेगा ही ना!”
“क्या पता अगर ज़्यादा गुस्सा हो गाये तो यह जो दो परिवारों की दोस्ती वह एक पल में टूट सकता हैं!”
“बस उसी वजह से तो कुछ कर नहीं पता। प्यार सुना हैं बहुत खूबसूरत चीज़ हैं लेकिन अगर वह दो परिवारी के बीच की जंग की वजह हो तो में आपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा। जंग से मुझे बहुत डर लगता हैं भाई। दुश्मनी, जंग, नफरत, यह सब पूरी दुनिया में दहशत मचा देता हैं। इन्ही चीज़ो की वजह से मैंने आपने mom-dad को खोया हैं, में नहीं चाहता मेरे प्यार के वजह से दोनों परिवारों के बीच यह सारी चीज़े आ जाए।” रोहन यह सब बोलते बोलते ऋषब के गोद में सिर रख के सोया। ऋषब उसका बाल सहलाते हुए बोला, “कुछ सोच रोहन! जल्दी कुछ सोच वार्ना बहुत देर हो जायेगा!”
“एक रास्ता हैं वैसे अगर तू गुस्सा नहीं किया तो बताऊंगा!” रोहन थोड़ा चुप रह कर बोले। ऋषब बोला, “कौनसा रास्ता?” रोहन उठ बैठता हैं और कहता हैं, “अगर तू भी किसी बंगाली से शादी कर ले तो घरवालों को तो हमारा रिस्ता मानना ही पड़ेगा ना? आखिर बड़े भाई ने किया, छोटा भाई भी कर सकता!”
ऋषब गुस्से में बोला, “क्या बकवास कर रहा हैं! तेरा दिमाग तो ठीक हैं ना?”
“भाई यह बेस्ट प्लान हैं!”
“यह वर्स्ट प्लान हैं एक तो में अभी शादी नहीं करने वाला, ऊपर से अगर में शादी की लिए मान भी जाऊ तो तुझे लड़की कहा से मिलेगी? और सब से बड़ी बात, अगर मेंने शादी कर भी ली तो घरवाले क्यों मानेगी, उल्टा गुस्सा होक तो तेरी शादी ज़बरदस्ती भी तो दे सकता हैं ना?”
“तू मुझे प्यार करता हैं ना, तू मेरी खातिर शादी नहीं कर सकता हैं? और रही बात घरवाले की गुस्सा की तो यह चांस एक बार लेके देख सकते हैं ना? अगर तेरी शादी के लिए उन्हें माना सकते हैं तो हमारे और सोनाझुरी के परिवार तो दोस्त हैं वाहा पे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं होगा!”
“अच्छा में सब मान लिया अब बता शादी के लिए तुझे दुल्हन कहा से मिलेगा?”
“अरे दुल्हन तो already हैं?”
“कौन?”
“मिताली !”
“कौन?”
“मिताली दी, तेरा दोस्त और business पार्टनर! मुझे लगता हैं अब तू उसे अपना लाइफ पार्टनर बना ही दे!”
ऋषब एक तकिया लेके रोहन की और ज़ोर से फेकके बोला, “तू पूरी तरह से पागल हो गाया हैं। मैंने सुना था प्यार में लोग आंधा हो जाता हैं पागल होते हुए पहली बार देख रहा हु। तू एक काम कर तू ना अपना दिमाग चलना बांध कर और मुझे कुछ सोचने दे,” यह कह कर ऋषब वाहा से जा ही रहा था जब रोहन पूछा, “भाई, कहा जा रहे हो अपना ही कमरा छोड़ के?”
ऋषब मूर के बोला, “क्या कारे साहब अभी दो मिनट में आपके प्रेमिका खिड़की से इस कमरे में आएगी हम रहेंगे तो आप तो हमे ही कबाब की हड्डी बोलेंगे ना?” ऋषब यह कह कर हंस दिए और रोहन शर्मा कार बोला, “भाई, कुछ भी हां!!”
“पागल कहिका!” यह कह कर ऋषब वह से निकाल तो जाता हैं लेकिन रोहन की एक बात उसके दिमाग में बाजने लगता हैं, “मिताली , तेरा दोस्त और business पार्टनर! मुझे लगता हैं अब तू उसे अपना लाइफ पार्टनर बना ही दे!” अचानक मिताली की ही नाम क्यों ली रोहन ने?
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