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मिलो मितली से

S
Sanjana Guha
22 Mar 2026

ऋषब को रात भर एक ही बात सताता रहा। क्यों रोहन ने अचानक मिताली की बात कही? इस सवाल का जवाब तो ऋषब को नहीं मिला लेकिन वह न जाने क्यों मिताली की ख्यालो में खो गाया। ऋषब और मिताली कॉलेज में मिले थे। दोनों ही hotel management के student थे। पढ़ाई में दोनों ही अच्छे थे और दोनों बहुत अच्छे दोस्त भी थे। मिताली की पापा की बहुत काम उम्र में मौत हो गाया था वह उसके बड़े भाई और माँ के साथ रहती थी। मिताली का बड़ा भाई मनीष एक सरकारी ऑफिस में एक उच्चे rank का अफसर था। माँ भी किसी स्कूल में पढ़ती शायद। मिताली और रोहन बहुत अच्छा दोस्त था लेकिन हां सिर्फ दोस्त उससे ज़्यादा कुछ नहीं। कॉलेज के बाद ऋषब नौकरी लेकर चाला गाया मुंबई और मिताली पेरिस किसी बड़े शेफ के साथ एक crash course करने।उसके बाद दोनों में कुछ ज़्यादा बाते नहीं हुई। दोनों ही अपनी अपनी दुनिया में busy हो गाये। लेकिन कुछ दो साल पहले ऋषब ने सोचा अपना खुद का एक fusion restaurant खोलने का। 

 

घर वाले पहले इस बात पे राज़ी नहीं हुए। ऋषब के चाचा बोला था, “अरे तेरा तो बाप-दादा का business हैं। तू तो वही देख सकता हैं अलग से एक बिज़नेस क्यों?”

 

ऋषब बोले, “क्यों की में खुद कुछ करना चाहती हु!” उसके पापा बोला था, “तो खुद घर का business को आगे ले जाओ ना। हमने तो पहले ही माना किया था नौकरी करने के लिए। तुम तो घर का business ही सम्हाल सकते हो ना! या फिर शर्म आती ही हलवाई वाला बनने में।”

 

“मैंने ऐसा कुछ कहा हैं क्या पापा? में बस अपना एक छोटा सा कुछ करना चाहता हु। That’s it!” ऋषब चीड़ कर बोला था। आदर्श शर्मा बोले, “ठीक हैं करो लेकिन घर से तुम्हे फूटी कौरी भी नहीं मिलेगा आपने business के लिए।”

 

ऋषब लिया भी नहीं घरवालों से कुछ। रोहन सिर्फ रेस्टोरेंट का इंटीरियर करने में उसकी थोड़ी सी मदद कर दी बाकि ऋषब खुद किये। लेकिन समस्या खड़ी हुयी जब वह restaurant का मेनू तय करने लगा। ऋषब को बार बार लग रहा था मेनू ठीक नहीं, कुछ तो मिसिंग हैं इसीलिए उसने एक chef hire करने की सोचै और एक advertisement भी दिया। बहुत से नए और experienced chef ऋषब को contact किया उन्ही लोगो में से एक था मिताली ।

 

बहुत दिनों बाद मिताली से मिलके ऋषब को बहुत अच्छा लगा। वह मिताली को बोला था, “देख अगर तू चाहता हैं तो तू यहाँ नौकरी कर सकता हैं लेकिन में कुछ और सोच रहा था?” मिताली थोड़ी हैरान होक उसे पूछी थी, “क्या?” ऋषब बोले थे, “यही की अगर तू इस business में एक employee के हैसियत से नहीं बल्कि एक partner बांके join करे तो कैसा होगा?”

 

“तू पागल हो गाया हैं क्या?” मिताली आँखे गोल करके बोली थी, ऋषब बोला, “सुन मेहनत तेरी, पैसे मेरा! क्या कहता हैं?” मिताली यह सुन के हंस के बोली थी, “तू बिलकुल मेहनत नहीं करेगा ना?” ऋषब बोला, “देख खुद का business हैं बिलकुल मेहनत ना करना पॉसिबल ही नहीं हैं!” मिताली बोली, “मतलब तू २०%-३०% मेहनत तो करेगा ही ना?”

 

“हां उतना तो करूँगा। ज़्यादा भी कर सकता हु?” ऋषब बोला था।

“तो फिर ४०% investment मेरा?” मिताली ने जवाब दिया था।

 

“क्या! लेकिन क्यों?” हैरान परेशान ऋषब जब यह सवाल पूछा था तब मिताली बोली थी, “क्यों की यह business हम दोनों का होगा! तो equally सब कुछ बाटेंगे!”

 

“ठीक हैं लेकिन तू सिर्फ थोड़ा सा ही अभी इन्वेस्ट कर ज़रुरत पढ़ने पर में तुझ से पैसे मांग लूंगा। मुझे अभी सिर्फ और सिर्फ तेरी दिमाग और मेहनत की ज़रुरत हैं। सच में!” ऋषब बोला था और मिताली मान भी गयी थी। आज वह दोनों मिलके इस business को खड़ा करने में थोड़े बहुत सफल हो ही गाये। इस दौरान मिताली के साथ ऋषब के साथ उसकी दोस्ती भी गहरी हुई लेकिन बस उतना ही। इससे ज़्यादा और कुछ नहीं।

 

“यह रोहन भी ना, खुद तो पागल हैं ही मुझे भी पागल कर रहा हैं अपनी हरकतों से,” ऋषब सोचा और ज़बरदस्ती मिताली का ख्याल भूल के सोने की कोशिश की।

 

***

 

“Good morning, मिताली । Sorry, यार में थोड़ा लेट हो गाया हु!” ऋषब restaurant के अंदर आके मिताली की तरफ देख के बोला। वैसे आज तो restaurant बांध ही रहता हैं पर अचानक आज मिताली फ़ोन कर के उसे बुलाया हैं देख कर ऋषब थोड़ा सा परेशान हो गाय था। लेकिन यहाँ मिताली का हँसता-खिलता चेहरा देख के उसे तसल्ली हुयी। मिताली ऋषब को हांफते हुए आते देख समझ गाया था बेचारा अचानक उसका फ़ोन पाके घबड़ा गया हैं। वह बोली, “अरे सम्हाल के बैठ और पानी पी। में तुझे कोई बुरी खाबड़ सुनाने नहीं बुलाया हु!”

 

“अच्छा फिर क्यों बुलाया हैं?”

 

“वह में ने एक नाय डिश बनाया हैं आपने मेनू के लिए सोचा वह तुझे एक बार टास्ते करके तेरा feedback लेलु इस मामले में।”

 

“ओह तो यह बात हैं। ठीक फिर खिला!” 

 

“रुक दो मिनट में आयी में,” यह बोलके मिताली वहा से चला गाय और कुछ देर बाद एक सुन्दर सी प्लेट में एक चिकेन का कुछ डिश अच्छे से garnish करके वह ले आयी और फिर टेबल पे रख कर बोला, “चल अब तरय कर के बोल यह masterchef पास हुयी या नहीं।”

 

ऋषब चमच से थोड़ा सा gravy और चिकन आपने मू पे दाल के थोड़ी देर चुप बैठा रहा कुछ कहा नहीं। मिताली की चेहरे पैर परेशानी दिखाई दी। उसने बोला, “क्या हुआ अच्छा नहीं लगा?” ऋषब आपने आँखे खोलके बोला, “तूने ऐसा कैसे किआ?” मिताली और डार गयी और बोली, “क्या हुआ ऋषब बहुत ख़राब हैं क्या?” ऋषब बोला, “मुझे तुझसे यह उम्मीद नहीं था,” यह बोलकर ऋषब थोड़े रुके और फिर बोला, “लगीं लगता हैं आज से तुझसे ज़्यादा की उम्मीद करना पड़ेगा और उसी मेरी ाददत भी बनाना पड़ेगा!” मिताली के आँखों पैर पानी आगयी थी लेकिन ऋषब की यह आखरी लाइन सुन के वह आँखे गोल गोल करके उसे देखता रहा जब ऋषब आपने पेट में हाथ दिए ज़ोर ज़ोर से हांसे लगा। फिर थोड़ी देर रूक के बोला, “अपनी सकल तो देख। ऐसा लाग रहा हैं की तुझे एलियन दिख गयी हो!” मिताली आपने बाग़ पक्कड़ के उसे मरने गाया तो ऋषब आपने दोनों हाथ आगे कर के बोला, “Sorry, sorry! प्लीज यार छोड़ दे इस वक़्त। बहुत मान किया तेरा टांग खींचने का!”

 

“अच्छा अब सच सच बोल ना कैसा लगा?” मिताली बोली, ऋषब बोला, “यह बिलकुल out-of-the-world हैं!”

 

“मतलब एलियन के खाने लायक इंसान के नहीं!” मिताली भी ताब ऋषब की टाँग खींचने लगा। ऋषब शर्मा के बोले, “अरे मैंने ऐसा कब कहा? में तो यह कह रहा था की यह डिश इतना अच्छा हैं की अगर तू मेरी girlfriend होती तो में तेरा हाथ चुम लेता!”

 

“वैसे में एक गर्ल भी हु और तेरा फ्रेंड भी!” मिताली मज़ाक में कहा।

 

“तो permission दे रही हैं क्या?” ऋषब मिताली को आँख मार के बोली। मितलो शर्म से लाल होक टेबल से कुछ दूर जाके बात बदलने के लिए बोली, “वैसे मालिक होनेका बहुत नज़यस फ़ायदा उठता हैं तू!” 

 

“क्यों?”

 

“क्यों का क्या मतलब? पिछले हफ्ते दो दिन लेट आया और एक दिन तो आया ही नहीं। आज भी लेट हैं तू। ऐसा कैसे चलेगा? अभी अभी सुरु हुआ तेरे या बिज़नेस और तू हे की अभी छूट दे राखी हैं खुद को। अभी तो मेहनत करना पड़ेगा ना तुझको!”

 

“अरे मेरी ज़िन्दगी सियाप्पे से भरे हैं। एक ख़तम नहीं होता तो दूजा सुरु हो जाता हैं!”

 

“क्या मतलब!” मिताली थोड़ी परेशान होक पूछी। ऋषब बोला, “अरे क्या बताऊ, तुझे रोहन और सोनाझुरी के बारे में बताया था ना!”

 

“हां बताया क्या हुआ उन दोनों को? फिर से रिस्ते आ रहे क्या दोनों के?”

 

“रिस्ते आ रहे हैं, वह दोनों शादी न करने के बहाने बना रहे हैं, गुस्सा करके भूक हरताल पे जा रहे हैं, in short, एक के बाद एक सियाप्पे! और आज तो हद ही होगया हैं!”

 

“अब क्या हुआ?”

 

“पूछ मात में घर से निकल ने से पहले देखा माँ और चाची मिलके रोहन का प्रोफाइल अपलोड कर रहा हैं! बवाल किया, समझाया पर नहीं इन लोगो को मेरी बात नहीं समझनी हैं! यह लोग प्रोफाइल अपलोड कर ही दिए!”

 

“कहा पे!”

 

“Matrimonial साइट पे! अब अगर यह प्रोफाइल अपलोड हो गाया और इसके बारे में अगर रोहन को पता चाल गाया तो उसका मतलब तू समझती हैं ना?”

 

ऋषब की बात सुन के मिताली धीरे से सिर हिलके बोली, “अगर तेरे भाई को इस बारे में पता लग गाया तो मतलब full गोंडोगोल! हैं न?” ऋषब दुखी सा चेहरा बना के बोली, “मैना हिमालय जाके साधु बन जाऊंगा। वैसे भी यहाँ तो मुझे कोई ज़िंदा रहने नहीं देगा तो में एक काम ही करती हु में साधु ही बन जाती हु काम से इस खतरनाक परिवार से दूर में ज़िंदा तो रहूँगा!” ऋषब की बात सुन के मिताली ज़ोर से हंस ने लगी वह देख ऋषब बोला, “हंस ले हंस ले। जब में नहीं रहूँगा तू मुझे याद करेगी और सोचेगी बेचारा sandwich था लेकिन अच्छा था!”

 

मिताली और जोरोसे हंस ने लागि। ऋषब और कुछ बोलने वाला था जब ऋषब का फ़ोन बजने लगा। ऋषब फ़ोन बहार निकलते ही स्क्रीन के ऊपर मिताली को रोहन का नाम दिखा। ऋषब बोला, “मेरा हिमालय का टिकट कट ही ले तू!” यह कर ऋषब फ़ोन उठाया और दो मिनट तक चुप बैठा रहा। मिताली को समझ आ गाया रोहन गुस्से में ऋषब को बात करने का मौका भी नहीं दे रहा हैं! दो मिनट बाद ऋषब फ़ोन रख कर बोला, “एक और सियाप्पा!”

 

मिताली पूछा, “क्या हुआ? रोहन ने क्या बोला?”

 

ऋषब बोला, “काल का weather report दिया मुझे?”

 

“मतलब?”

 

“मतलब काल शर्मा निवास में cyclone आने वाला हैं!”

 

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