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समंदर के नीचे की राजकुमारी

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समंदर के सबसे गहरे हिस्से में एक चमकता राजमहल, और एक नन्ही राजकुमारी — जिसका दिल हमेशा ऊपर की दुनिया की तरफ़ खिंचता था।

एक नीली दुनिया

बहुत पुरानी बात है। एक बहुत बड़े समंदर के नीचे — जहाँ इंसानों की कल्पना भी नहीं पहुँच सकती — एक छुपा हुआ राज्य था।

उस राज्य की राजधानी एक चमकता हुआ राजमहल था। मूँगों से बना। दीवारें मोतियों की। छतें सीप की। हर कोने में रंग-बिरंगी मछलियाँ तैरती थीं। पानी इतना साफ़ कि हर चीज़ साफ़ दिखाई देती।

उस राज्य के राजा थे — महाराज सागर। उनके सात बेटियाँ थीं। हर बेटी एक मरमेड — आधा शरीर इंसान का, आधा मछली का। हर एक की पूँछ अलग रंग की।

सबसे बड़ी की पूँछ नीली। दूसरी की हरी। तीसरी की पीली। चौथी की गुलाबी। पाँचवीं की जामुनी। छठी की सुनहरी।

और सातवीं — सबसे छोटी, सबसे प्यारी राजकुमारी — उसकी पूँछ चमकती हुई चांदी की।

उसका नाम था — लहर।

लहर की जिज्ञासा

लहर अपनी सब बहनों से अलग थी। बहनों को समंदर के अंदर की दुनिया पसंद थी। मूँगों के बाग़, सीपों के मेले, मछलियों की दौड़।

पर लहर का मन हमेशा ऊपर की तरफ़ था। समंदर की सतह।

उसे कहानियाँ सुनना पसंद था — ख़ासकर ऊपर की दुनिया की। हर शाम वो अपनी दादीमाँ के पास जाती।

"दादीमाँ, ऊपर के बारे में बताओ।"

दादीमाँ हँसतीं।

"बेटी, ऊपर बहुत अजीब दुनिया है। वहाँ इंसान रहते हैं। उनके पैर होते हैं — पूँछ नहीं। उनके पास बड़े-बड़े जहाज़ होते हैं — जो पानी पर तैरते हैं।"

"पैर?" लहर के मन में हैरानी।

"हाँ बेटी। दो लंबी, सीधी चीज़ें। वो उनसे चलते हैं। समंदर में नहीं — ज़मीन पर।"

"और जहाज़?"

"बहुत बड़ी लकड़ी की नावें। उन पर बहुत-से इंसान बैठते हैं। हवा से उनके ऊपर लगे कपड़े फूलते हैं। वो दूर देशों तक जाते हैं।"

लहर की आँखें चमकतीं।

"दादीमाँ, मैं ऊपर कब जा सकती हूँ?"

"बेटी, हमारे राज्य का नियम है — हर मरमेड पंद्रह साल की होने पर ही ऊपर जा सकती है। एक बार। बस देखने के लिए।"

"पंद्रह?"

"हाँ। तब तक धीरज रख।"

बहनें ऊपर जाती हैं

एक के बाद एक — लहर की छह बहनें पंद्रह साल की हुईं। हर एक ऊपर गई। हर एक लौटकर अपनी बातें सुनाई।

सबसे बड़ी ने कहा — "मैंने बहुत बड़े बादल देखे। आसमान नीला था। पंछी उड़ रहे थे।"

दूसरी ने कहा — "मैंने एक शहर देखा। बड़ी-बड़ी इमारतें। रंगीन दीप।"

तीसरी ने कहा — "मैंने एक मेला देखा। ढोल बज रहे थे। बच्चे नाच रहे थे।"

हर बहन की एक नई कहानी।

लहर सुनती रहती। उसका दिल और भी बेचैन होता।

"मेरी बारी कब?"

लहर की पंद्रहवीं सालगिरह

आख़िर — लहर की भी पंद्रहवीं सालगिरह आ गई।

उस दिन पूरे राजमहल में जश्न था। दादीमाँ ने उसके बालों में मोतियों की माला लगाई। पिता राजा सागर ने उसके माथे पर एक छोटा-सा मूँगे का ताज रखा।

"बेटी, आज तू भी ऊपर जा सकती है। पर एक बात याद रखना। सिर्फ़ देखना है। इंसानों से बातें मत करना। उनकी दुनिया में जाना मत। वो दुनिया हमारे लिए नहीं।"

"वादा, पिताजी।"

लहर ने अपनी पूँछ हिलाई। एक झटके में — पानी की सतह की तरफ़ ऊपर तैरने लगी।

एक मिनट, दो मिनट, पाँच मिनट। पानी की मोटी परतें पीछे छूटीं।

आख़िर में — उसका सिर पानी से बाहर निकला।

उसने पहली बार खुली हवा महसूस की।

ऊपर की पहली नज़र

लहर हैरान। उसे यक़ीन नहीं हुआ।

आसमान में एक बड़ा-सा सूरज। उसने पानी पर हज़ारों चमक डाली। बादल हल्के, सफ़ेद। हवा नर्म।

दूर एक बड़ा-सा जहाज़ खड़ा था। जैसा दादीमाँ ने बताया था। लकड़ी का। ऊपर बड़े-बड़े सफ़ेद कपड़े।

लहर ने अपनी पूँछ धीरे-धीरे हिलाते हुए जहाज़ की तरफ़ तैरना शुरू किया।

जब पास पहुँची — तो उसने जहाज़ के डेक पर बहुत-से इंसान देखे। पुरुष, औरतें, बच्चे। हँस रहे थे। नाच रहे थे। कोई एक बड़ा त्योहार मना रहे थे।

लहर पानी में डूबी हुई — बस सिर ऊपर — देखती रही।

राजकुमार आर्यन

तभी — डेक पर एक नौजवान आया। उसके बाल काले, घुँघराले। आँखें बादामी। उसने सुनहरी पोशाक पहनी थी।

उसके आते ही — सब लोग उसके पास इकट्ठा हुए। उसके माथे पर एक छोटा-सा हीरों का ताज लगाया।

"राजकुमार आर्यन, सालगिरह मुबारक!"

"धन्यवाद, सबको।"

लहर ने सुना। राजकुमार आर्यन। और आज उसकी सालगिरह।

उसका दिल अजीब-सा हुआ। पहली बार किसी इंसान को देखा था — और इतना सुंदर, इतना ख़ुश इंसान।

उसने पूरी शाम जहाज़ के पीछे रहकर देखा। राजकुमार के साथ नाच, गाना, खाना। हर पल लहर का मन और भारी होता।

तभी — आसमान में बादल आने लगे। हवा बदलने लगी। बादल तेज़ी से काले होने लगे।

दूर बिजली चमकी।

तूफ़ान आ रहा था।

लहर ने ध्यान दिया — जहाज़ पर लोग चिल्लाने लगे। नाविक रस्सियाँ खींचने लगे।

"लंगर डालो! कपड़े उतारो!"

तूफ़ान बहुत तेज़ था। एक के बाद एक लहर जहाज़ से टकराई। बिजली कड़की। बारिश की बूंदें इतनी बड़ीं कि जहाज़ का डेक पानी से ढक गया।

आख़िर में — एक भयानक लहर आई। पूरा जहाज़ डगमगाया। फिर एक तरफ़ झुका। और बिखर गया।

लोग पानी में गिरने लगे।

लहर की आँखें फटी रहीं। उसने राजकुमार आर्यन को देखा — एक टूटी हुई लकड़ी पकड़े पानी में डूब रहा था।

उसका सिर पानी के नीचे जा रहा था।

लहर ने एक भी पल नहीं सोचा। उसने अपनी पूँछ ज़ोर से हिलाई — और सीधे राजकुमार की तरफ़ तैरी।

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