एक डूबता हुआ राजकुमार, एक मरमेड का सहारा, और एक गलत समझ — जिसने आगे की पूरी कहानी बदल दी।
लहर तेज़ी से तैरती हुई राजकुमार आर्यन के पास पहुँची। उसका शरीर बेहोश था। पानी उसके मुँह में जा रहा था।
लहर ने अपने मज़बूत बाँहों से उसे थामा। उसका सिर पानी के ऊपर रखा।
"तू मरेगा नहीं, राजकुमार। मैं तुझे बचाऊँगी।"
उसने अपनी पूँछ ज़ोर से हिलाई। तूफ़ान के बीच — लहरों के थपेड़े सहती हुई — एक बहुत दूर के किनारे की तरफ़ चलने लगी।
घंटे बीत गए। तूफ़ान धीरे-धीरे थम गया। आसमान साफ़ होने लगा।
आख़िर में — सूरज के निकलते ही — लहर ने एक रेतीले किनारे का तट देखा।
उसने राजकुमार को बहुत सावधानी से किनारे पर लिटाया। उसके बाल साफ़ किए। उसका चेहरा रेत से ढका नहीं।
राजकुमार सो रहा था। उसकी साँसें अब चल रही थीं।
लहर उसके पास बैठी। उसके चेहरे को बहुत देर तक देखा।
"तू बहुत प्यारा है, राजकुमार। क्या मैं तुझे फिर कभी देख पाऊँगी?"
उसने धीरे से उसका माथा छुआ।
तभी — दूर से कुछ आवाज़ें आईं। एक मठ था पास में। उस मठ से कुछ लड़कियाँ बाहर आईं।
एक नौजवान लड़की — उम्र में राजकुमार जैसी — आगे आई।
"देखो! कोई किनारे पर पड़ा है!"
लहर ने जल्दी से किनारे की एक चट्टान के पीछे छुपी। उसकी पूँछ इंसान देखें — तो हड़कंप मच जाए।
वो लड़की राजकुमार के पास घुटने टेककर बैठी। उसके माथे पर हाथ फेरा। उसका चेहरा साफ़ किया।
तभी राजकुमार ने आँखें खोलीं।
उसकी पहली नज़र उस लड़की पर पड़ी।
"तू... तू ने मुझे बचाया?"
लड़की मुस्कुराई। उसका नाम था — रागिनी।
"मैंने तुझे यहाँ देखा। शायद तूफ़ान में तेरा जहाज़ डूबा था।"
राजकुमार ने सिर हिलाया।
"त-तू मेरी जान बचाने वाली। तेरा बहुत-बहुत धन्यवाद।"
लहर ने चट्टान के पीछे से सब देखा। उसका दिल टूट गया।
"नहीं! मैंने तुझे बचाया! वो तो बस तुझे यहाँ पाई।"
पर वो आवाज़ नहीं उठा सकी। राजकुमार ने उसे देखा भी नहीं।
रागिनी और बाक़ी लड़कियों ने राजकुमार को सहारा देकर मठ में ले गईं।
लहर अकेली रह गई। पीछे चट्टान के पीछे।
लहर भारी मन से पानी के अंदर लौट आई। राजमहल पहुँची।
उसकी छह बहनें इंतज़ार में थीं।
"लहर! कैसा लगा ऊपर? बता! क्या देखा?"
लहर ने सिर्फ़ सिर हिलाया।
"बहन, मैं थक गई हूँ। बाद में बताऊँगी।"
वो अपने कमरे में चली गई।
दादीमाँ ने उसे ध्यान से देखा।
"बेटी, क्या हुआ? तू उदास क्यों है?"
"दादीमाँ, मैंने एक राजकुमार देखा। उसकी जान बचाई। पर वो किसी और लड़की को अपनी जान-बचाने वाली मान बैठा है।"
दादीमाँ की आँखें चौड़ी हो गईं।
"बेटी! तूने एक इंसान को छुआ?"
"दादीमाँ, मैंने उसकी जान बचाई। वो डूब रहा था।"
दादीमाँ ने उसका हाथ पकड़ा।
"बेटी, अब तेरा मन उस इंसान में है। पर ये बहुत बड़ी बात है। हम मरमेड हैं। वो इंसान। हमारी ज़िंदगी पानी में, उसकी ज़मीन पर। हम कभी एक नहीं हो सकते।"
"दादीमाँ, क्या कोई रास्ता नहीं?"
दादीमाँ ने एक भारी आहें भरीं।
"एक रास्ता है। पर बहुत ख़तरनाक।"
"क्या?"
"समंदर के सबसे काले हिस्से में एक डायन रहती है। उसका नाम है ज्वारा। वो जादू कर सकती है। पर उसका हर जादू एक भारी कीमत माँगता है।"
"दादीमाँ, मुझे उसका रास्ता बताओ।"
"नहीं बेटी! ये मत कर!"
पर लहर के मन में अब बस एक ही चीज़ थी।
उस रात लहर चुपके से राजमहल से निकली। उसने अपनी बहनों को बिना बताए — समंदर के काले हिस्से की तरफ़ तैरी।
जैसे-जैसे वो आगे बढ़ी, पानी ठंडा होता गया। मूँगे ग़ायब हो गए। मछलियाँ ग़ायब हो गईं। बस अंधेरा।
आख़िर में एक काली गुफा दिखी। उसके दरवाज़े पर बिच्छू-जैसे जीव। ऊपर अजीब-सी हड्डियाँ टंगी।
लहर ने हिम्मत की। अंदर गई।
अंदर — एक बहुत बड़ी, मोटी मरमेड बैठी थी। पर उसकी पूँछ साधारण मरमेड की नहीं। आधी मरमेड, आधी ऑक्टोपस। आठ काले लम्बे टैंटाकल। उसके बाल जामुनी। आँखें हरी।
"आओ बेटी। मैं तुझे जानती हूँ। तू महाराज सागर की सबसे छोटी बेटी। तू यहाँ क्यों आई — मुझे पता है।"
लहर ने सिर झुकाया।
"डायन माई, मुझे चाहिए — मैं इंसान बनूँ। मेरी पूँछ की जगह दो पैर हों। ताकि मैं उस राजकुमार के पास जा सकूँ।"
डायन हँसी। एक भयानक हँसी।
"बेटी, ये जादू मेरे पास है। पर मेरी एक भारी कीमत है।"
"क्या?"
"बेटी, तेरी आवाज़।"
लहर चौंक गई।
"मेरी आवाज़?"
"हाँ। तेरे पास सबसे प्यारी आवाज़ है। पूरे समंदर में। ये मुझे चाहिए। तू इंसान बन जाएगी, पर तू बोल नहीं पाएगी। न गा पाएगी।"
"और एक बात। तू तीन दिन के अंदर — तीन दिन के अंदर — उस राजकुमार से अपनी सच्ची दोस्ती की पुष्टि करवानी होगी। अगर वो उन तीन दिनों में तुझसे एक प्यारा वादा कर ले — कि वो तुझे हमेशा अपने पास रखेगा — तो तू हमेशा के लिए इंसान रहेगी।"
"और अगर नहीं?"
"तू वापस मरमेड बन जाएगी। पर एक बात — तू कभी अपनी आवाज़ नहीं वापस पाएगी। और तेरी पूँछ की चमक भी हमेशा के लिए चली जाएगी।"
लहर कुछ देर सोचती रही।
फिर उसने हाँ कही।
"मंज़ूर है। मेरी आवाज़ ले लो। पर मुझे पैर दो।"
डायन ने अपनी जादुई कड़ाही निकाली। उसमें कुछ अजीब-सी चीज़ें मिलाईं। एक हरी रोशनी निकली।
"बेटी, इस कड़ाही से थोड़ा-सा पी ले। फिर ज़मीन पर निकल जाना। पर एक बात — इंसान बनते ही तेरे पाँव में बहुत दर्द होगा। हर एक क़दम — जैसे काँटों पर। तू ये दर्द सह पाएगी?"
"हाँ। मैं सहूँगी।"
डायन ने कड़ाही उसे दी। लहर ने पी ली।
एक झटका। एक तेज़ रोशनी। उसकी आवाज़ निकली — पर उसके बजाय जादू में बंद हो गई। डायन की हाथ में एक छोटा-सा सीप — उसमें लहर की आवाज़।
लहर ने अपनी पूँछ देखी। वो धीरे-धीरे ग़ायब होती जा रही थी। उसकी जगह दो लंबे, सीधे पैर।
"जा बेटी। ज़मीन पर जा। तीन दिन।"
लहर ने डायन को देखा। बोलना चाहा — पर आवाज़ नहीं। बस सिर हिलाया।
उसने अपनी पूँछ — अब पैर — से धक्का मारा। पानी की सतह की तरफ़ तैरी।
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