1 प्रस्तावना — आज़ाद हिंद के नायक का परिचय FREE 2 कटक की वह सर्द सुबह — २३ जनवरी १८९७ FREE 3 एक विशाल परिवार — जानकीनाथ और प्रभावती के नौवें पुत्र FREE 4 कटक का बचपन — विवेकानंद का प्रभाव FREE 5 प्रेसिडेंसी कॉलेज और ओटन-कांड — १९१६ FREE 6 स्कॉटिश चर्च कॉलेज में पुनःशिक्षा FREE 7 कैंब्रिज की यात्रा — १९१९ FREE 8 ICS परीक्षा — चौथा स्थान FREE 9 राष्ट्र को कर्तव्य — ICS से इस्तीफा FREE 10 भारत वापसी — गांधी और देशबंधु से भेंट FREE 11 देशबंधु चित्तरंजन दास के शिष्य FREE 12 पहली जेल-यात्राएँ FREE 13 मांडले की लंबी कैद — १९२४-२७ FREE 14 कलकत्ता का मेयर FREE 15 एमिली शेंकल से विवाह — ऑस्ट्रिया का गुप्त सम्बंध FREE 16 हरीपुरा कांग्रेस — १९३८ अध्यक्षीय FREE 17 त्रिपुरी की चुनौती — १९३९ FREE 18 गांधीजी से मतभेद और इस्तीफा FREE 19 फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना FREE 20 नज़रबंदी — दिसंबर १९४० FREE 21 ज़ियाउद्दीन के वेश में पलायन — १६-१७ जनवरी १९४१ FREE 22 पेशावर से काबुल — पथरीली यात्रा FREE 23 रूस से बर्लिन — हिटलर से भेंट FREE 24 आज़ाद हिंद रेडियो और इंडियन लीजन FREE 25 पनडुब्बी से जापान — एक अद्भुत यात्रा FREE 26 टोक्यो आगमन और रासबिहारी बोस से भेंट FREE 27 आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना — २१ अक्टूबर १९४३ FREE 28 INA और रानी झांसी रेजीमेंट FREE 29 इम्फाल-कोहिमा — "तुम मुझे खून दो" FREE 30 रहस्यमय गुमशुदगी — १८ अगस्त १९४५ FREE
Font Size
17px
Font
Background
Line Spacing
Episode 3 5 min read 0 0 FREE

एक विशाल परिवार — जानकीनाथ और प्रभावती के नौवें पुत्र

F
Funtel
7 ghante pehle

आठ बड़े भाई, छह बहनें, और एक माता-पिता का अद्भुत प्रशासन — एक विशाल बंगाली परिवार के बीच एक तेज़ बुद्धि का बालक जो धीरे-धीरे अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा था.

जानकीनाथ बोस का परिवार उस ज़माने के मानक से भी असाधारण रूप से बड़ा था. कुल चौदह संतानें. आठ पुत्र — सत्यनाथ, सुरेश, सुरेन्द्रनाथ, सरत, सुधीन्द्र, सुभाष, शैलेश, और संतोष. छह पुत्रियाँ — प्रोमिला, सरला, रमादेवी, बिरादेवी, और दो अन्य. यह एक विशाल "संयुक्त परिवार" था — जो उस ज़माने के बंगाली समाज में सामान्य था, परंतु इस आकार में दुर्लभ. परिवार का संचालन एक "मिनी-राज्य" समान था — एक स्पष्ट पदानुक्रम, स्पष्ट कर्तव्य, और स्पष्ट नियम.

परिवार में एक "ज्येष्ठ-पुत्र-सम्मान" था. सबसे बड़े भाई सत्यनाथ बोस — जो "बड़ा-दादा" कहलाते थे — उनका सम्मान सर्वोपरि था. पिता जानकीनाथ बोस के बाद वे ही परिवार के "द्वितीय प्रमुख" थे. उन्होंने ही अपने छोटे भाई-बहनों की देख-रेख की. परंतु सुभाष का सबसे निकट सम्बंध था सरत बोस से — चौथे भाई. सरत और सुभाष में लगभग दस वर्ष का अंतर था. परंतु यह अंतर "दूरी" नहीं था — यह "गुरु-शिष्य" का सम्बंध बना. सरत बोस ने अपने छोटे भाई को बहुत स्नेह दिया, और जीवन-भर एक "द्वितीय पिता" की भूमिका निभाई.

परिवार की दिनचर्या अद्भुत व्यवस्थित थी. प्रातः चार बजे माता प्रभावती देवी उठतीं. वे पहले स्नान करतीं, फिर पूजा-कक्ष में जातीं. एक घंटा पूजा-पाठ. इसी समय पिता जानकीनाथ बोस भी उठते, और अपने ग्रंथ पढ़ते. पाँच बजे बच्चे जागते. प्रत्येक के पास निर्धारित कार्य था — कुछ पानी भरते, कुछ बगीचे की देख-रेख करते, कुछ छोटे भाई-बहनों को तैयार करते. छह बजे सब एक साथ बैठकर अल्पाहार करते. यह "सामूहिक भोजन" परिवार का एक प्रमुख संस्कार था — जिसमें सब बैठते, बात करते, और दिन भर की योजना बनाते.

सात बजे बच्चे स्कूल या पाठशाला जाते. बड़े बच्चे कटक के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे. छोटे बच्चे एक "उपगुरुकुल" में जाते थे — जो घर के पास था. सुभाष पहले इसी उपगुरुकुल गए, फिर "स्टीवर्ट स्कूल" में दाखिला लिया. यह एक एंग्लो-इंडियन स्कूल था, जहाँ अंग्रेज़ी माध्यम था. परंतु यह स्कूल भी बहुत कठोर अनुशासन वाला था — पादरी-शिक्षक, अंग्रेज़ी प्रार्थना, और अंग्रेज़ी राजसी संस्कार.

स्टीवर्ट स्कूल में सुभाष ने अपनी पहली कठिन-वाद्य-विद्या सीखी — अंग्रेज़ी भाषा. वे कुछ ही महीनों में इसमें प्रवीण हो गए. वे शास्त्रीय अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ते — शेक्सपीयर, टेनिसन, मिल्टन. परंतु यहाँ की एक बात उन्हें हमेशा खटकती — स्कूल में भारतीय बच्चों और अंग्रेज़ बच्चों के बीच अनकहा भेदभाव था. अंग्रेज़ बच्चे विशेष सम्मान पाते. भारतीय बच्चों को कभी-कभी "नेटिव" कहकर पुकारा जाता. यह छोटा-सा भेदभाव छोटे सुभाष के मन में बीज बो रहा था — एक "स्वाभिमान-संग्राम" का बीज.

दोपहर का भोजन अक्सर माँ के साथ होता था. प्रभावती देवी एक उत्कृष्ट रसोइया थीं. वे रोज़ कुछ नया बनातीं — बंगाली परंपरागत व्यंजन, साथ-ही-साथ कभी-कभी ओड़िया स्थानीय व्यंजन भी. विशेष रूप से रसगुल्ला उनकी विशेषता थी. परिवार में सबको माँ का बनाया रसगुल्ला बहुत प्रिय था. परंतु एक नियम था — कोई भी बच्चा "चुपके से" रसगुल्ला नहीं ले सकता था. सब को एक साथ बैठकर अनुशासित रूप से खाना होता था.

शाम का समय अद्भुत होता. परिवार एक साथ बैठता. कोई भजन गाता, कोई ग्रंथ पढ़ता, कोई कथा सुनाता. कभी-कभी पिता जानकीनाथ बोस अपनी अदालत-कथाएँ सुनाते — कौन-सा कठिन मामला उन्होंने सम्भाला, कैसे न्याय दिलाया, कौन-से न्यायाधीश के साथ क्या वार्ता हुई. ये कथाएँ केवल मनोरंजन नहीं थीं — ये बच्चों को "न्याय" का व्यावहारिक पाठ देती थीं. सुभाष ने इन्हीं कथाओं से सीखा कि "न्याय" क्या होता है, और एक "कानूनी मस्तिष्क" कैसे काम करता है.

परिवार में एक विशेष स्थान था पुस्तकालय का. जानकीनाथ बोस ने अपने पुस्तकालय में हज़ारों ग्रंथ इकट्ठे किए थे — संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेज़ी, हिंदी. यहाँ वेदों से लेकर शेक्सपीयर तक, उपनिषदों से लेकर मार्क्स तक — हर तरह की पुस्तकें थीं. सुभाष को यह पुस्तकालय बहुत प्रिय था. वे अक्सर वहाँ बैठकर पढ़ते. उनकी पठन-क्षमता असाधारण तीव्र थी — वे एक मोटी किताब कुछ दिनों में पूरी कर सकते थे.

एक प्रसिद्ध कथा है — जब सुभाष लगभग दस वर्ष के थे, तब उन्होंने स्वामी विवेकानंद की "Complete Works" का एक खंड पढ़ा. इसमें विवेकानंद ने अमेरिका और यूरोप की अपनी यात्राओं का विवरण दिया था. इसी से सुभाष को विदेशी देशों के प्रति एक विशेष आकर्षण जागा. उन्होंने अपने एक भाई से कहा था, "बड़े-दादा, मैं भी एक दिन विदेश जाऊँगा. मैं भी विवेकानंद-जी जैसा कुछ करूँगा." बड़े-दादा हँस पड़े. परंतु यह बात सच साबित हुई — कुछ ही वर्षों बाद सुभाष कैंब्रिज गए, और उसके बाद बर्लिन, जापान, और अनेक अन्य देशों में.

परिवार में एक और विशेष परंपरा थी — "धार्मिक त्योहारों का संगठन." दुर्गा पूजा, काली पूजा, सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा — सब त्योहारों पर परिवार में एक भव्य आयोजन होता. प्रभावती देवी इन सब का संचालन करतीं. परिवार के सब सदस्य अपनी-अपनी भूमिकाएँ निभाते. कुछ मूर्ति की सजावट करते, कुछ प्रसाद बनाते, कुछ भजन गाते, कुछ अतिथियों का स्वागत करते. ये त्योहार परिवार को एक साथ रखने का एक प्रमुख माध्यम थे.

दुर्गा पूजा सुभाष के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण थी. माँ दुर्गा का स्वरूप — एक स्त्री, जो असुरों का संहार करती हैं — उनके मन में एक विशेष प्रेरणा बनता. वे माँ दुर्गा को "राष्ट्र-माता" के रूप में देखते. आगे चलकर जब उन्होंने आज़ाद हिंद फौज में "रानी झांसी रेजीमेंट" — एक महिला-सेना — की स्थापना की, तब इसके पीछे यही प्रेरणा थी. उनके मन में स्त्री-शक्ति का एक उच्च आदर्श था — जो उन्हें बचपन के दुर्गा पूजा से ही मिला था.

तो यह था सुभाष चंद्र बोस का प्रारम्भिक पारिवारिक वातावरण. एक विशाल परिवार, एक धार्मिक माँ, एक प्रबुद्ध पिता, अनेक भाई-बहन, एक समृद्ध पुस्तकालय, और एक संगठित दिनचर्या. इस वातावरण में एक तेज़ बुद्धि का बालक धीरे-धीरे आकार ले रहा था — परंतु अभी इस बालक की "विद्रोही-भावना" प्रकट नहीं हुई थी. वह प्रकट होने वाली थी कुछ ही वर्षों में — जब सुभाष कटक का बचपन छोड़कर एक नये क्षितिज की ओर बढ़ेंगे.

Aage kya hoga? 👇
Agla Episode
Continue Reading
Pichla 📋 Sab Episodes Agla

💬 Comments (0)

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

लॉगिन करें
पहली टिप्पणी करें! 🎉

एक विशाल परिवार — जानकीनाथ और प्रभावती के नौवें पुत्र

How would you like to enjoy this episode?

📖 0 sec