एक माँ की एक छोटी-सी कामना, एक नन्ही बच्ची, और एक नई रानी — जिसका सबसे बड़ा खज़ाना एक जादुई आईना था।
बहुत पुरानी बात है। एक हरे-भरे राज्य में एक भली रानी थी। उसका दिल साफ़, उसका मन प्यारा। उसका एक ही सपना था — कि उसे एक नन्ही बच्ची हो। एक ऐसी बच्ची, जिसकी ख़ूबसूरती पूरे राज्य में बात बने।
एक सर्दी की भोर में, रानी अपनी खिड़की पर बैठी सिलाई कर रही थी। खिड़की के पार पूरा राज्य बर्फ़ से ढका हुआ था। पेड़ों पर बर्फ़, छतों पर बर्फ़, ज़मीन पर बर्फ़।
रानी सिलाई कर रही थी एक काले रेशमी कपड़े पर। तभी अनजाने में सुई उसकी उंगली में चुभ गई। तीन बूँद ख़ून — काले कपड़े पर — सफ़ेद बर्फ़ पर — गिरे।
रानी ने वो दृश्य देखा। और मन में एक कामना उठ आई।
"काश! मेरी एक बच्ची हो — जिसकी त्वचा इस बर्फ़ जैसी सफ़ेद हो, होंठ इन ख़ून की बूँदों जैसे लाल, और बाल इस काले कपड़े जैसे काले।"
उसने ये कामना की — और भगवान ने सुनी।
कुछ महीने बाद रानी ने एक बहुत प्यारी बच्ची को जन्म दिया। बच्ची की त्वचा सच में बर्फ़ जैसी सफ़ेद। होंठ गुलाब जैसे लाल। बाल कोयले जैसे काले।
राजमहल में हर तरफ़ ख़ुशी थी। राजा ने ख़ुद बच्ची को गोद में लिया।
"इसका नाम क्या रखें, रानी?"
"स्नो व्हाइट। बर्फ़ जैसी सफ़ेद।"
राजा ने सिर हिलाया। नाम सब को पसंद आया।
पर ख़ुशी थोड़े दिन की थी। बच्ची को जन्म देने में रानी कमज़ोर पड़ गई। एक हफ़्ते बाद उन्होंने अपनी बच्ची को आख़िरी बार चूमा। राजा का हाथ पकड़ा।
"मेरी बच्ची को अच्छी देखभाल देना। वो मेरी कामना का फल है।"
"वादा।"
उसी रात रानी हमेशा के लिए सो गईं।
राजा बहुत दुखी हुए। पर उन्हें राज्य चलाना था। और एक नन्ही बच्ची को पालना भी।
कुछ साल बीते। राजा ने सलाहकारों के दबाव में दूसरी शादी की। नई रानी आईं — रानी कैरीना। वो बहुत सुंदर थीं। उनकी त्वचा गोरी, उनके बाल लाल-सुनहरे, उनकी आँखें हरी।
पर उनकी सुंदरता उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी थी। वो ख़ुद को दुनिया की सबसे सुंदर समझती थीं। और उन्हें बस इसी बात पर गर्व था।
स्नो व्हाइट उस वक़्त बस सात साल की थी। नई माँ को देखकर उसने हाथ जोड़े।
"नमस्ते माँजी।"
रानी कैरीना ने हल्की मुस्कान दी। पर मन में सोचा — "ये बच्ची कुछ ज़्यादा प्यारी लगती है।"
रानी कैरीना के पास एक बहुत ही ख़ास चीज़ थी। एक जादुई आईना। ये आईना उन्हें उनकी माँ से मिला था। माँ अपने दादी से, दादी अपनी परदादी से। बहुत पुरानी जादुई चीज़।
आईने की ख़ासियत — वो हर सवाल का जवाब देता था। बस सच में ही।
हर सुबह रानी उसके सामने खड़ी होतीं।
"आईना, आईना, मेरी मुठ्ठी में आईना — बता मुझे, इस सारी ज़मीन पर सबसे सुंदर कौन है?"
आईना हमेशा एक ही जवाब देता —
"रानीजी, सारी ज़मीन पर सबसे सुंदर आप ही हैं।"
रानी ख़ुश हो जातीं। पूरा दिन ख़ुश रहतीं।
ये एक रोज़ की रसम थी। हर सुबह, हर रात।
स्नो व्हाइट दिन-ब-दिन बड़ी होती गई। उसकी त्वचा वैसी ही सफ़ेद, उसके होंठ वैसे ही लाल, उसके बाल वैसे ही काले। उम्र बढ़ने के साथ उसकी सुंदरता भी बढ़ती गई।
दस साल की उम्र में वो प्यारी थी। बारह साल की उम्र में वो सुंदर थी। पंद्रह साल की उम्र में वो ऐसी हो गई कि कोई भी देखकर रुक जाए।
पर सबसे बड़ी बात ये थी कि स्नो व्हाइट का दिल भी उसकी सूरत जैसा साफ़ था। वो दया करती थी, हँसती थी, हर एक से मीठा बोलती थी। राजमहल के सब नौकर उसे प्यार करते थे।
राजा ने भी स्नो व्हाइट को बहुत प्यार दिया। पर उनका स्वास्थ्य ख़राब हो गया। एक दिन वो भी इस दुनिया से चल बसे।
अब राज्य पर रानी कैरीना का राज था। और उनके सिर पर बस एक ही ख़तरा — स्नो व्हाइट।
एक सुबह — स्नो व्हाइट की पंद्रहवीं सालगिरह के अगले दिन — रानी कैरीना अपने जादुई आईने के सामने खड़ी थीं।
"आईना, आईना, मेरी मुठ्ठी में आईना — बता मुझे, इस सारी ज़मीन पर सबसे सुंदर कौन है?"
आईने में हल्की कंपन हुई। पहली बार आईने का जवाब अलग था —
"रानीजी, इस राजमहल में आप सबसे सुंदर हैं। पर पूरी ज़मीन पर सबसे सुंदर — स्नो व्हाइट है। उसकी त्वचा बर्फ़ जैसी, होंठ ख़ून जैसे, बाल रात जैसे। आप उसके सामने नहीं आ सकतीं।"
रानी का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने अपनी मुट्ठी आईने पर मारी।
"क्या? क्या तू कह रहा है?"
"रानीजी, आईना झूठ नहीं बोलता।"
रानी कैरीना ज़मीन पर बैठ गईं। उनकी आँखों में आँसू नहीं — गुस्सा था। एक भयानक, जलता हुआ गुस्सा।
"वो लड़की? वो बच्ची? वो मुझसे ज़्यादा सुंदर?"
उनके मन में एक ख़तरनाक विचार उठा।
"नहीं! ये नहीं हो सकता। मैं ही सबसे सुंदर रहूँगी। चाहे जो भी करना पड़े।"
उन्होंने अपने सबसे विश्वसनीय शिकारी को बुलाया।
शिकारी एक भला, ईमानदार आदमी था। उसका नाम था बलराम।
"बलराम, मेरा एक काम है। और तू मेरी बात मानेगा। नहीं तो तेरी जान चली जाएगी।"
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