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शिकारी की दया और जंगल का रास्ता

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एक भले शिकारी का कमज़ोर हाथ। और एक भोली राजकुमारी, जो जंगल के बीच अकेली छूट गई।

रानी का आदेश

रानी कैरीना ने शिकारी बलराम को कान में फुसफुसाते हुए कहा —

"बलराम, स्नो व्हाइट को आज जंगल में ले जा। वहाँ उसे मार। और मेरे पास उसका दिल लाकर देना। ताकि मुझे यक़ीन हो जाए कि तूने काम पूरा किया।"

बलराम के पाँव कांप उठे।

"रानीजी! वो छोटी-सी बच्ची! इतनी मासूम! मैं इसे कैसे मार सकता हूँ?"

"तू मेरा वफ़ादार है, या नहीं?"

"रानीजी..."

"बस। एक भी सवाल नहीं। शाम तक उसका दिल चाहिए। नहीं तो कल तेरा परिवार राजमहल से बाहर।"

बलराम का मन भारी हो गया। उसका अपना घर। अपनी पत्नी। अपने बच्चे। उसने सिर हिलाया।

"जैसा हुक्म, रानीजी।"

जंगल की सैर

बलराम स्नो व्हाइट के पास गया। उसका चेहरा झुका हुआ था।

"राजकुमारी, आज मौसम बहुत अच्छा है। रानीजी ने कहा है — मैं आपको जंगल की सैर पर ले जाऊँ। आपको फूल दिखाऊँ।"

स्नो व्हाइट ख़ुश हुई। वो बहुत समय से जंगल नहीं गई थी।

"बलराम, चलो! मैं तैयार हो जाती हूँ।"

दोनों राजमहल से निकले। घोड़े पर बैठकर पहले गाँव पार किया, फिर खेत, फिर पहाड़ की तलहटी।

आख़िर में जंगल आया। बहुत घना। पेड़ ऊँचे। हवा में पंछियों की आवाज़।

स्नो व्हाइट उतरी। फूलों के पास भागी। एक नीला फूल, एक पीला फूल, एक सफ़ेद फूल। हर फूल देखकर उसके चेहरे पर मासूम-सी ख़ुशी।

बलराम पीछे खड़ा था। उसके हाथ में चाक़ू था। पर उसका हाथ हिलने को तैयार नहीं था।

"भगवान! मैं ये कैसे करूँ?"

दया का फ़ैसला

स्नो व्हाइट ने पीछे मुड़कर देखा। बलराम को चाक़ू हाथ में पकड़े देखा। उसकी आँखें फट गईं।

"बलराम? तू क्या कर रहा है?"

बलराम के घुटने टूट गए। उसने चाक़ू ज़मीन पर फेंक दिया। ख़ुद ज़मीन पर बैठ गया।

"राजकुमारी, मुझे माफ़ कीजिए। रानीजी ने मुझे आपको मारने भेजा है। आपका दिल लेकर जाने को कहा है।"

स्नो व्हाइट के पाँव से ज़मीन खिसक गई।

"मेरी सौतेली माँ? पर क्यों?"

"उन्हें आईने ने बताया कि आप उनसे ज़्यादा सुंदर हैं। उनका गुस्सा आसमान को छू रहा है।"

स्नो व्हाइट कुछ देर चुप रही। फिर धीरे से बोली —

"बलराम, ये तेरा गुनाह नहीं। तू मेरी जान बख्श दे। मुझे यहीं छोड़ दे। मैं अकेले इस जंगल में चली जाऊँगी। तू कोई भी जानवर का दिल ले जा। रानी को नहीं पता चलेगा।"

बलराम की आँखों से आँसू बहने लगे।

"राजकुमारी, आप मेरी जान बचा रही हैं। पर ये जंगल बहुत ख़तरनाक है। यहाँ शेर हैं, भालू हैं। आप कैसे रहेंगी?"

"भगवान मेरी हिफ़ाज़त करेंगे। तू अपने परिवार के पास लौट जा।"

एक दिल का धोखा

बलराम ने पास के एक हिरण को मारा। उसका दिल निकाला। एक मखमली बक्से में रखा।

"राजकुमारी, मैं ये दिल लेकर जाऊँगा। पर आप यहाँ अकेले मत रहना। आगे की तरफ़ चलिए। पहाड़ी की दूसरी तरफ़ कुछ छोटे-से लोग रहते हैं। बौने हैं। पर बहुत भले हैं। उनके पास जाइए। मदद माँगिए।"

स्नो व्हाइट ने सिर हिलाया।

"धन्यवाद, बलराम। तेरी दया मुझे ज़िंदगी भर याद रहेगी।"

बलराम झुककर सलाम किया। फिर तेज़ी से वापस लौट गया।

राजमहल पहुँचकर उसने रानी कैरीना को वो हिरण का दिल दे दिया।

"रानीजी, आपका काम हो गया।"

रानी ने ख़ुश होकर बक्सा खोला। उन्हें पता नहीं था कि वो दिल किसी जानवर का है। उनके मन की भूख शांत हुई।

उस रात रानी फिर से आईने के सामने खड़ी हुईं।

"आईना, आईना, मेरी मुठ्ठी में आईना — बता मुझे, अब इस सारी ज़मीन पर सबसे सुंदर कौन है?"

आईने ने हिचकिचाते हुए जवाब दिया —

"रानीजी, अब भी स्नो व्हाइट सबसे सुंदर है। वो अब जंगल में रहती है। पहाड़ की दूसरी तरफ़, सात बौनों के घर के पास।"

रानी का चेहरा फिर लाल हो गया। उन्होंने हथेली से आईने को मारा।

"बलराम मुझे धोखा दिया!"

उन्होंने सोचा — अब मैं ख़ुद इस काम को पूरा करूँगी।

स्नो व्हाइट का अकेलापन

उधर जंगल में स्नो व्हाइट चलती जा रही थी। उसकी पोशाक काँटों से फट रही थी। उसके पैरों में ज़ख़्म आ रहे थे। पर वो चलती गई।

शाम होने लगी। आसमान लाल हो गया। फिर जामुनी। फिर काला।

स्नो व्हाइट डर गई। उसके चारों तरफ़ पंछियों की आवाज़ बंद हो गई। बस अजीब-सी घंटी जैसी आवाज़ें आ रही थीं — जंगल के जानवरों की।

उसने एक पेड़ के नीचे बैठकर रोना शुरू किया।

"माँ, अगर आप जिंदा होतीं, तो ये दिन देखती? मैं अकेली। न कोई दोस्त, न कोई घर, न कोई आसरा।"

तभी उसे बहुत दूर एक छोटी-सी रोशनी दिखी। एक झोपड़ी की खिड़की से।

"शायद वहीं वो बौनों का घर है।"

उसने हिम्मत करके उठी। रोशनी की दिशा में चलने लगी।

एक छोटी-सी झोपड़ी

आख़िर में वो एक छोटी-सी पुरानी झोपड़ी के सामने पहुँची। लकड़ी से बनी, छत पर पुआल। आँगन में छोटे-छोटे फूल। दरवाज़ा एक बच्चे जितना ऊँचा।

स्नो व्हाइट ने झुककर दरवाज़ा खटखटाया। पर अंदर से कोई जवाब नहीं आया।

"शायद कोई नहीं है।"

उसने धीरे से दरवाज़ा खोला। अंदर एक छोटा-सा कमरा था। सात छोटी-छोटी कुर्सियाँ, सात छोटी-छोटी थालियाँ, सात छोटे-छोटे बिस्तर।

हर थाली में थोड़ा-सा खाना। हर बिस्तर में चादर। पर कोई इंसान नहीं।

स्नो व्हाइट को बहुत भूख लगी थी। उसने हर थाली से थोड़ा-थोड़ा खाना खाया। ताकि किसी एक की कमी न हो। फिर बहुत थक गई। एक छोटे बिस्तर पर लेट गई। पाँव बाहर निकल आए। उसने दूसरा देखा। फिर तीसरा।

आख़िर में सात बिस्तर मिलकर एक सीधी कतार में लगे थे। वो सात पर लेट गई — और गहरी नींद में सो गई।

उसे पता नहीं था — कुछ देर बाद इस झोपड़ी में सात "मेहमान" लौटने वाले थे।

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